डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर, जिन्हें लोग प्यार से बाबासाहेब अंबेडकर कहते हैं, भारत के महान विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और राजनीतिक नेता थे। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक समानता, शिक्षा, मानव अधिकार और न्याय के लिए समर्पित किया।
उनके विचार आज भी युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के हर वर्ग को प्रेरित करते हैं। खास तौर पर शिक्षा, स्वतंत्रता, समानता और आत्मसम्मान पर उनके विचार बहुत महत्वपूर्ण हैं।
इस लेख में हम डॉ. बी. आर. अंबेडकर के 24 अनमोल विचार पढ़ेंगे। साथ ही, उनके जीवन और विचारों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य भी आसान भाषा में जानेंगे।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर का संक्षिप्त जीवन परिचय
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में हुआ था, जो उस समय मध्य भारत एजेंसी का हिस्सा था और आज मध्य प्रदेश में है। उनका निधन 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ।
बचपन में उन्हें जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण साधन बनाया। आगे चलकर उन्होंने भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने Columbia University और London School of Economics में अध्ययन किया। वे अर्थशास्त्र, कानून, राजनीति और सामाजिक विषयों के गंभीर विद्वान थे।
बाद में वे समाज सुधारक, लेखक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता और राजनीतिक नेता के रूप में सक्रिय रहे। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बने और संविधान निर्माण की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संविधान सभा ने उन्हें Drafting Committee का अध्यक्ष चुना था। इसलिए भारतीय संविधान के निर्माण में उनका योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अगर आप भारतीय संविधान के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी भारतीय संविधान की पूरी जानकारी भी पढ़ सकते हैं।
डॉ. अंबेडकर को बाबासाहेब क्यों कहा जाता है?
डॉ. अंबेडकर को सम्मानपूर्वक बाबासाहेब कहा जाता है। उन्होंने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और शिक्षा, समानता तथा मानव गरिमा को बहुत महत्व दिया।
उनका मानना था कि किसी व्यक्ति की प्रगति केवल आर्थिक स्थिति से नहीं होती। शिक्षा, आत्मसम्मान और सामाजिक स्वतंत्रता भी उतनी ही जरूरी हैं।
उनके विचारों का प्रभाव भारतीय सामाजिक और संवैधानिक जीवन पर आज भी दिखाई देता है।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर को भारत रत्न कब मिला?
डॉ. बी. आर. अंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
हमारी भारत रत्न प्राप्त व्यक्तित्वों की सूची में भी डॉ. अंबेडकर का नाम 1990 के सम्मानित व्यक्तित्वों में दिया गया है।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर के 24 अनमोल विचार
अब आइए डॉ. अंबेडकर से जुड़े उन 24 प्रसिद्ध विचारों को समझते हैं, जो आज भी जीवन, समाज और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण संदेश देते हैं।
नोट: इंटरनेट पर डॉ. अंबेडकर के नाम से कई quotes अलग-अलग हिंदी अनुवादों में मिलते हैं। इसलिए नीचे जहां जरूरी है, वहां विचार को भावार्थ के रूप में दिया गया है।
1. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का विचार
डॉ. अंबेडकर के विचारों में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का विशेष स्थान था। उनका मानना था कि राजनीतिक लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब समाज में भी समानता और भाईचारा हो।
यह विचार उनके सामाजिक और संवैधानिक चिंतन को समझने में बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है। सामाजिक स्वतंत्रता भी जरूरी है।
2. नैतिकता और अर्थशास्त्र पर विचार
अंबेडकर के एक प्रसिद्ध विचार का भावार्थ है कि जब नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, तो अक्सर आर्थिक हित प्रभावी हो जाते हैं।
यह विचार समाज में आर्थिक हितों और नैतिक मूल्यों के बीच होने वाले संघर्ष पर ध्यान दिलाता है।
3. उदासीनता समाज के लिए नुकसानदायक है
“Indifferentism is the worst kind of disease that can affect people.”
हिंदी भावार्थ: लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब स्थितियों में से एक उदासीनता है।
इस विचार का संबंध सामाजिक जिम्मेदारी से है। यदि लोग अन्याय और समस्याओं के प्रति उदासीन हो जाएं, तो सुधार की प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है। यह विचार अंबेडकर के लेखन में भी मिलता है।
4. महान व्यक्ति और समाज सेवा
“A great man is different from an eminent one in that he is ready to be the servant of the society.”
हिंदी भावार्थ: महान व्यक्ति केवल प्रसिद्ध या प्रतिष्ठित व्यक्ति नहीं होता। वह समाज की सेवा करने के लिए तैयार रहता है।
यह विचार नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण कसौटी बताता है। केवल प्रसिद्ध होना पर्याप्त नहीं है। समाज के प्रति जिम्मेदारी भी जरूरी है।
5. सफल सामाजिक परिवर्तन के लिए क्या जरूरी है?
सिर्फ असंतोष से कोई सफल परिवर्तन नहीं आता। इसके लिए न्याय और सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकारों के प्रति मजबूत विश्वास भी जरूरी है।
अर्थात बदलाव के लिए समस्या को पहचानना पहला कदम है। इसके बाद सही उद्देश्य और निरंतर प्रयास भी जरूरी होते हैं।
6. सुरक्षित सेना से जुड़ा विचार
“A secure army is better than a secure border.”
हिंदी भावार्थ: केवल सुरक्षित सीमा पर्याप्त नहीं है। देश की सुरक्षा के लिए मजबूत और सुरक्षित सेना भी आवश्यक है।
यह कथन ऑनलाइन स्रोतों में अंबेडकर के नाम से व्यापक रूप से प्रकाशित मिलता है। हालांकि ऐसे लोकप्रिय quotes को इस्तेमाल करते समय मूल प्रकाशन का संदर्भ देना अधिक उचित है।
7. कानून और व्यवस्था का महत्व
“Law and order are the medicine of the body politic.”
हिंदी भावार्थ: कानून और व्यवस्था शासन व्यवस्था के लिए उस दवा की तरह है, जो व्यवस्था में आई गंभीर समस्या को ठीक करने में मदद करती है।
इस विचार में कानून के शासन और सामाजिक व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया गया है।
8. सामाजिक स्वतंत्रता का महत्व
“So long as you do not achieve social liberty, whatever freedom is provided by the law is of no avail to you.”
हिंदी भावार्थ: जब तक समाज में वास्तविक स्वतंत्रता नहीं आती, तब तक कानून द्वारा दी गई स्वतंत्रता का पूरा लाभ नहीं मिल सकता।
यह अंबेडकर के सामाजिक न्याय संबंधी विचारों को समझने वाला महत्वपूर्ण कथन है। इसे कई प्रकाशित स्रोतों में उनके नाम से उद्धृत किया गया है।
9. विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत
“Men are mortal. So are ideas. An idea needs propagation as much as a plant needs watering.”
हिंदी भावार्थ: मनुष्य की तरह विचार भी स्थायी नहीं होते। किसी अच्छे विचार को जीवित रखने के लिए उसे लोगों तक पहुंचाना और आगे बढ़ाना जरूरी है।
यह विचार शिक्षा और ज्ञान को समाज तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर देता है।
10. एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन क्यों करे?
अंबेडकर के विचार का भावार्थ है कि जिस तरह एक देश को दूसरे देश पर शासन करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, उसी तरह एक सामाजिक वर्ग को दूसरे वर्ग पर प्रभुत्व नहीं जमाना चाहिए।
यह विचार सामाजिक समानता और भेदभाव के विरोध से जुड़ा है।
11. मन और ज्ञान का विकास
“Cultivation of mind should be the ultimate aim of human existence.”
हिंदी भावार्थ: मन और बुद्धि का विकास मानव जीवन के प्रमुख उद्देश्यों में से एक होना चाहिए।
अंबेडकर शिक्षा और बौद्धिक विकास को बहुत महत्व देते थे। इसलिए यह विचार विद्यार्थियों के लिए भी बेहद प्रेरक है।
12. पति-पत्नी के संबंध पर विचार
“The relationship between husband and wife should be one of closest friends.”
हिंदी भावार्थ: पति और पत्नी का संबंध आपसी सम्मान, विश्वास और मित्रता पर आधारित होना चाहिए।
यह विचार परिवार में समानता और स्वस्थ संबंधों की आवश्यकता को सामने रखता है।
13. जीवन लंबा नहीं, महान होना चाहिए
“Life should be great rather than long.”
हिंदी भावार्थ: जीवन केवल लंबा होना जरूरी नहीं है। उसे उद्देश्यपूर्ण और सार्थक बनाना अधिक महत्वपूर्ण है।
इस विचार का संदेश बहुत सरल है। जीवन की गुणवत्ता और हमारे कार्य उसकी लंबाई से अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
14. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व वाला धर्म
“I like the religion that teaches liberty, equality and fraternity.”
हिंदी भावार्थ: ऐसा धर्म और विचारधारा बेहतर है, जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना सिखाए।
यह विचार अंबेडकर के सामाजिक दर्शन में स्वतंत्रता और समानता के महत्व को दर्शाता है।
15. महिलाओं की प्रगति से समाज की प्रगति
“I measure the progress of a community by the degree of progress which women have achieved.”
हिंदी भावार्थ: किसी समाज की प्रगति का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह है कि वहां महिलाओं ने कितनी प्रगति की है।
यह विचार डॉ. अंबेडकर के महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के प्रति दृष्टिकोण को दिखाता है। यह कथन 1942 में नागपुर में आयोजित All-India Depressed Classes Women’s Conference के संदर्भ में भी उद्धृत किया गया है।
16. संविधान के दुरुपयोग पर कड़ा विचार
“If I find the Constitution being misused, I shall be the first to burn it.”
हिंदी भावार्थ: यदि संविधान का दुरुपयोग किया जाए, तो उसके प्रति गंभीर असहमति व्यक्त की जानी चाहिए।
यह कथन अंबेडकर के नाम से लंबे समय से प्रकाशित होता रहा है और संसद के बाद के भाषणों में भी इसे उनके कथन के रूप में उद्धृत किया गया है। हालांकि इसे हमेशा उसके मूल संदर्भ के साथ समझना बेहतर है।
17. धार्मिक ग्रंथों और आधुनिक समाज पर विचार
अंबेडकर का विचार था कि यदि भारत को आधुनिक और एकीकृत समाज बनाना है, तो धार्मिक ग्रंथों की सामाजिक सत्ता और उनके आधार पर बनने वाली असमानताओं पर भी सवाल उठाना होगा।
यह विषय उनके सामाजिक और धार्मिक चिंतन से जुड़ा है। इसलिए इस कथन को किसी एक छोटे वाक्य के रूप में देखने के बजाय उनके व्यापक लेखन के संदर्भ में समझना बेहतर है।
18. राजनीतिक और सामाजिक अत्याचार
“Political tyranny is nothing compared to the social tyranny…”
हिंदी भावार्थ: सामाजिक अत्याचार भी उतना ही गंभीर हो सकता है। इसलिए समाज सुधारक को सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखना चाहिए।
अंबेडकर ने सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव को अपने सार्वजनिक जीवन के प्रमुख मुद्दों में रखा था।
19. धर्म और सामाजिक नैतिकता
अंबेडकर के विचार का भावार्थ है कि धर्म और धार्मिक व्यवस्था का मूल्यांकन सामाजिक नैतिकता तथा मानव कल्याण के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
यह उनके धर्म, नैतिकता और सामाजिक न्याय से जुड़े चिंतन का हिस्सा है।
20. समानता को सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना
“Equality may be a fiction but nonetheless one must accept it as a governing principle.”
हिंदी भावार्थ: मनुष्यों में हर स्तर पर पूर्ण समानता दिखाई न दे, फिर भी समाज के संचालन के लिए समानता को एक मूल सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना जरूरी है।
यह विचार अंबेडकर के लिखित कार्यों में मिलता है और सामाजिक समानता के उनके दृष्टिकोण को समझने में महत्वपूर्ण है।
21. व्यक्ति और समाज के बीच संबंध
अंबेडकर के इस प्रसिद्ध विचार का भावार्थ है कि व्यक्ति समाज में रहते हुए अपनी पहचान नहीं खोता। व्यक्ति का अपना विकास और स्वतंत्र अस्तित्व भी महत्वपूर्ण है।
यह विचार व्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को समझने में मदद करता है।
22. भारतीय पहचान सबसे पहले
“We are Indians, firstly and lastly.”
हिंदी भावार्थ: हमारी राष्ट्रीय पहचान को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
यह विचार राष्ट्रीय एकता और साझा भारतीय पहचान पर जोर देता है। अंबेडकर के अन्य भाषणों और उद्धरण संग्रहों में भी इसी भावना से जुड़े कथन मिलते हैं।
23. स्वतंत्रता का उद्देश्य
स्वतंत्रता का उपयोग केवल व्यक्तिगत अधिकारों के लिए नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग सामाजिक व्यवस्था में मौजूद असमानता और भेदभाव को सुधारने के लिए भी किया जाना चाहिए।
यह विचार अंबेडकर के लोकतंत्र और सामाजिक सुधार संबंधी चिंतन से जुड़ा है।
24. स्वतंत्र सोच और विवेक
अंबेडकर के धार्मिक और सामाजिक लेखन में विवेक, तर्क और स्वतंत्र विचार को महत्वपूर्ण स्थान मिलता है।
उनका मानना था कि व्यक्ति को किसी विचार या परंपरा को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करना चाहिए क्योंकि वह पुरानी है। तर्क और मानव कल्याण की कसौटी भी जरूरी है।
डॉ. अंबेडकर के विचारों से हमें क्या सीख मिलती है?
डॉ. अंबेडकर के विचार केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं। आज भी उनमें जीवन और समाज के लिए कई उपयोगी संदेश हैं।
1. शिक्षा को प्राथमिकता दें
अंबेडकर के जीवन से सबसे बड़ी सीख शिक्षा की है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसलिए विद्यार्थियों के लिए उनका जीवन स्वयं एक प्रेरणा है।
2. अपने अधिकारों को जानें
एक लोकतांत्रिक समाज में नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। साथ ही, उन्हें अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।
3. समानता का सम्मान करें
जाति, धर्म, लिंग या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव समाज को कमजोर करता है। इसलिए समानता और सम्मान की भावना जरूरी है।
4. स्वतंत्र सोच विकसित करें
किसी भी विचार को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरे लोग उसे मानते हैं। तथ्यों को समझना चाहिए। फिर अपने विवेक से निष्कर्ष निकालना चाहिए।
5. सामाजिक समस्याओं के प्रति उदासीन न रहें
समाज में कोई समस्या दिखाई दे, तो उसे अनदेखा करना समाधान नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार सकारात्मक योगदान देना जरूरी है।
डॉ. अंबेडकर और शिक्षा का महत्व
डॉ. अंबेडकर का जीवन शिक्षा की शक्ति का एक बड़ा उदाहरण है। सामाजिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और विदेशों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं माना। उनके लिए शिक्षा सामाजिक बदलाव का माध्यम भी थी।
इसलिए विद्यार्थियों के लिए अंबेडकर का जीवन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। परिस्थितियां कठिन हों, फिर भी सीखना और आगे बढ़ना बंद नहीं करना चाहिए।
डॉ. अंबेडकर और सामाजिक समानता
डॉ. अंबेडकर ने जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक सम्मान और समान अधिकारों की मांग को अपने सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
उनका सामाजिक चिंतन केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं था। वे ऐसे समाज की कल्पना करते थे जिसमें व्यक्ति की गरिमा और समानता को महत्व मिले।
यही कारण है कि उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय और समानता पर होने वाली चर्चाओं में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
डॉ. अंबेडकर और भारतीय संविधान
डॉ. अंबेडकर भारतीय संविधान की Drafting Committee के अध्यक्ष थे। संविधान निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। हालांकि संविधान केवल किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं था। इसे संविधान सभा के अनेक सदस्यों, समितियों और विशेषज्ञों के विचार-विमर्श से तैयार किया गया था।
भारतीय संविधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों, शासन व्यवस्था, न्यायपालिका, संघ और राज्यों के संबंध तथा कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों की व्यवस्था करता है।
इस विषय पर हमारी भारतीय संविधान की पूरी जानकारी वाली पोस्ट भी उपयोगी रहेगी।
डॉ. अंबेडकर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था।
- उनका निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ।
- वे अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता, समाज सुधारक और राजनीतिक नेता थे।
- उन्होंने Columbia University और London School of Economics में अध्ययन किया।
- वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री थे।
- वे संविधान की Drafting Committee के अध्यक्ष थे।
- उन्होंने सामाजिक समानता और मानव अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण संघर्ष किया।
- उन्हें 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- 14 अप्रैल को भारत में उनकी जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आज शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र पर चर्चा करते समय डॉ. अंबेडकर के विचार बार-बार सामने आते हैं। इसका कारण यह है कि उनके विचार केवल अपने समय की समस्याओं तक सीमित नहीं थे।
उन्होंने व्यक्ति की गरिमा, शिक्षा, सामाजिक स्वतंत्रता और समानता जैसे विषयों पर जोर दिया। इसलिए उनके विचार आज के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी उपयोगी हैं।
इसके अलावा, उनका जीवन यह भी बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और आत्मविश्वास व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति दे सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डॉ. बी. आर. अंबेडकर का पूरा नाम क्या था?
उनका पूरा नाम भीमराव रामजी अंबेडकर था।
डॉ. अंबेडकर का जन्म कब हुआ था?
डॉ. बी. आर. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था।
डॉ. अंबेडकर का निधन कब हुआ?
डॉ. बी. आर. अंबेडकर का निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ था।
डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न कब मिला?
डॉ. अंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
डॉ. अंबेडकर संविधान की Drafting Committee के अध्यक्ष कब बने?
29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने Drafting Committee का गठन किया था और डॉ. बी. आर. अंबेडकर इसके अध्यक्ष थे।
डॉ. अंबेडकर के विचारों में सबसे महत्वपूर्ण विषय कौन से थे?
शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता, मानव गरिमा और बंधुत्व उनके विचारों के प्रमुख विषयों में शामिल थे।
डॉ. अंबेडकर का सबसे प्रसिद्ध विचार कौन सा है?
उनके कई विचार प्रसिद्ध हैं। इनमें शिक्षा और ज्ञान के विकास, सामाजिक स्वतंत्रता, समानता तथा महिलाओं की प्रगति से जुड़े विचार विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
डॉ. अंबेडकर को बाबासाहेब क्यों कहा जाता है?
“बाबासाहेब” उनके प्रति सम्मान और स्नेह से इस्तेमाल किया जाने वाला संबोधन है। यह नाम उनके सार्वजनिक जीवन में व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ।
निष्कर्ष
डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विचार हमें शिक्षा, समानता, स्वतंत्र सोच और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाते हैं। उनका जीवन बताता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ज्ञान और मेहनत के माध्यम से बड़ा बदलाव संभव है।
उनके विचारों को केवल quotes के रूप में पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। हमें उनके पीछे छिपे संदेश को भी समझना चाहिए। खास तौर पर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, आत्मसम्मान और निरंतर सीखने का संदेश बहुत महत्वपूर्ण है।
इसीलिए डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी प्रेरणा देते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
संदर्भ और आगे पढ़ें
डॉ. अंबेडकर के विचारों को समझते समय उनके मूल लेखन और भाषणों को प्राथमिकता देना बेहतर है। इंटरनेट पर लोकप्रिय quotes के कई अलग-अलग अनुवाद मिलते हैं। इसलिए exact quotation इस्तेमाल करते समय मूल स्रोत देखना चाहिए।
आपको डॉ. अंबेडकर का कौन सा विचार सबसे अधिक प्रेरित करता है? नीचे comment में जरूर बताएं।

