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Hindi Story बिना कोशिश किएं वह तीनो कार बेच सकता था

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कुछ लोग मानते हैं कि जंगल के जानवर और पक्षी बिना मेहनत के जीते हैं लेकिन समझदार लोग जानते हैं कि यह सच नहीं हैं, यह सच हैं कि प्रकर्ति ने हर जीवित प्राणी के लिए आहार का स्त्रोत तो दिया हैं, लेकिन उसे पाने के लिए हर प्राणी को “मेहनत” तो करनी ही होती हैं।

कोई भी बिना किसी कारण के कोई काम नहीं करता, अगर कोई कर्मचारी उतनी ही सेवा करता हैं, जितना की उसे वेतन मिलता हैं, तो स्पष्ट रूप से उसे उसका “पूरा मुआवजा” मिल रहा हैं कर्मचारी को इतना काम तो करना ही होगा, ताकि उसकी नौकरी बची रहे या आमदनी बनी रहे, भले ही उसे किसी भी तरह से कमाया जाएं,

लेकिन जब कर्मचारी तनख्वाह की तुलना में ज्यादा सेवा करता हैं तो इससे सद्भाव तो बढ़ता ही हैं, साथ ही उसके पास ज्यादा वेतन या बेहतर पद या दोनों की ही मांग करने का तार्किक कारण होता हैं।

बदले में कुछ दिए बिना कुछ पाने की कोशिश करने की आदत को प्रकर्ति हमेशा हतोत्साहित करती हैं, हांलाकि दुर्भागावश कुछ इंसानों ने यह आदत डाल ली हैं, आइये एक बहुत ही अच्छी कहानी की माध्यम से समझते हैं।

न्यूयोर्क स्थित एक कार के शोरूम में बारिश भरी दोपहर को कार बेचने वाला “सेल्समेन” अपनी डेस्क पर बैठा था तभी अचानक दरवाजा खुला और एक आदमी तेज़ी से छड़ी लहराता हुआ अन्दर आया।

सेल्समेन दोपहर का अखबार पढ़ रहा था। आने वाले पर एक उडती निगाह डालने से वह तत्काल इस नतीजे पर पंहुचा कि “ग्राहक की रूचि शायद विंडो शॉपिंग करने में हैं, इसलिए उस पर अपना कीमती समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं होगा“।

वह अखबार पढता रहा और उसने अपनी कुर्सी से उठने का भी कष्ट नहीं किया।

छड़ी वाला व्यक्ति शोरूम में कभी एक कार को, तो कभी दूसरी कार को देखता रहा आखिरकार वह सेल्समेन के पास आया और उसने अपनी छड़ी लहराते हुए वहां खड़ी तीनो कारों की कीमत पूछी। अपने अखबार से नज़र हटायें बिना सेल्समेन ने तीनो की कीमत बता दी और अखबार पढता रहा।

छड़ी वाला व्यक्ति एक बार फिर उन तीनो कारों के पास गया। उनके टायरो पर ठोकर मारकर उनकी जांच करने के बाद वह अखबार पढने में व्यस्त “सेल्समेन” के पास आया और उससे बोला, मुझे समझ नहीं आ रहा हैं कि यह लूँ या वह लूँ या सबसे दूर वाली लूँ या इन तीनो को ही खरीद लूँ

अखबार पढ़ रहे “सेल्समेन” ने समझदारी भरी व्यग्यात्मक मुस्कान डाली, जैसे कह रहा हो, “वही हुआ जो मैं सोच रहा था“।

फिर छड़ी वाला व्यक्ति बोला, अच्छा मुझे लगता हैं मैं एक कार ही खरीद लूँ, पीले पहियों वाली वह कार कल मेरे घर भिजवा देना और आपने मुझे इसकी क्या कीमत बताई थी?

उसने अपनी चेकबुक निकाल कर चेक काटा और “सेल्समेन” को चेक थमाकर कर बाहर चला गया। जब “सेल्समेन” ने चेक पर लिखा नाम पढ़ा तो उसके च्रेहरे का रंग उड़ गया और उसको दिल का दौरा पड़ते पड़ते बचा। जिस आदमी ने चेक काटा था, वे हेर्री पेन व्हिटनी थे।

और “सेल्समेन” जानता था कि अगर उसने अपनी कुर्सी से उठने की जहमत की होती तो वह बिना कोशिश कियें तीनो कार बेच सकता था।

अपनी क्षमता के मुताबिक सर्वक्षेष्ठ सेवा न करना बहुत महंगा साबित हो सकता हैं यह एक ऐसी सच्चाई हैं, जिसे कई लोग बहुत देर हो जाने के बाद समझ पाते हैं।

व्यक्तिगत पहल करने का अधिकार उस व्यक्ति के लिए ज्यादा मायने नहीं रखता, जो इसका इस्तेमाल करने के प्रति बहुत उदासीन या आलसी होता है।

भगवान हर किसी को तरक्की के अवसर देता हैं कोई उसे अपने प्रयास से प्राप्त कर लेता हैं तो कोई इसी इंतज़ार में रहता हैं कि अवसर आने पर उसे कार्य करने की आश्यकता नहीं होगी, प्रकर्ति हर व्यक्ति को बहुत सारे अवसर देती हैं लेकिन उन तक पहुचने के लिए प्रयास तो आपको ही करने होंगे


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