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सर्वाधिक प्रखर कुटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की जीवनी

आचार्य चाणक्य जो कि विष्णुगुप्त और कौटिल्य के नाम से प्रसिद्ध हैं।

भारतीय संस्कृति में समय-समय पर कुछ ऐसे महापुरुषों का जन्म हुआ हैं, जिन्होंने लोगों की विचारधारा को बदलकर उन्हें जीवन जीने का नया दृष्टिकोण दिया। आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व आचार्य चाणक्य की कहीं गई बातों को यदि आधुनिक जीवन में भी अपना लिया जाए तो मनुष्य सफलता की सीढ़ियां चल सकता है।

अगर आपको भी आचार्य चाणक्य को जानने और उनके योगदान को समझने में जरा भी रुचि है तो आज हम आचार्य चाणक्य जिन्हें दुनिया कौटिल्य के नाम से जानती है उनकी जीवनी में उनके जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें साझा करेंगे। ताकि आप को धर्म, राजनीति और कूटनीति की शिक्षा देने वाले इस महापुरुष के बारे में जानने का मौका मिले।

आचार्य चाणक्य का व्यक्तिगत परिचय

नाम चाणक्य
जन्म 375 ईसा पूर्व (अनुमानित स्पष्ट नहीं है)
मौत 275 ईसा पूर्व, पाटलिपुत्र, (आधुनिक पटना में) भारत
शिक्षा समाजशास्त्र, राजनीति, अर्थशास्त्र, दर्शन, आदि का अध्ययन।
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पिता ऋषि कानाक या चैनिन
माता चनेश्वरी

आचार्य चाणक्य का प्रारंभिक जीवन

बता दें भारत के महान पंडित एवम शिक्षक आचार्य चाणक्य की जन्म तारीख के बारे में कोई भी सटीक जानकारी किसी भी व्यक्ति के पास नहीं है। हालांकि बौद्ध धर्म ग्रंथों के अनुसार एक ब्राह्मण वंश में 350 ईसा पूर्व तक्षशिला के कुटिल नाम की जगह पर आचार्य चाणक्य का जन्म हुआ था।

हांलांकि इनके जन्म के बारे में विभिन्न पंडितों, विद्वानों द्वारा अलग-अलग बात कही जाती है। कई लोग ऐसा कहते हैं कि, आचार्य चाणक्य का जन्म कुटिल वंश में हुआ था। इसीलिए आचार्य चाणक्य को कौटिल्य के नाम से जाना गया, वहीं कई लोगों का ऐसा मानना है कि आचार्य चाणक्य अपने तेज और रहस्यमई स्वभाव के कारण कौटिल्य के नाम से भारत भर में प्रसिद्ध हुए।

इंडिया का ‘मैक्यावली’ आचार्य चाणक्य को कहा जाता है।

कई विद्वानों का ऐसा भी मानना है कि आचार्य चाणक्य का जन्म भारत देश में नहीं, बल्कि भारत के पड़ोसी देश नेपाल की तराई में हुआ था। अगर जैन धर्म के अनुसार देखा जाए तो आचार्य चाणक्य का जन्म श्रवणबेलगोला में हुआ था, यह स्थान मैसूर में स्तिथ है।

जिस व्यक्ति ने मुद्राराक्षस की रचना की थी, उस व्यक्ति के अनुसार आचार्य चाणक्य के पिता को चमक कहा जाता था और इसी के आधार पर आचार्य चाणक्य के पिता ने अपने पुत्र को चाणक्य नाम दिया।

आचार्य चाणक्य का धर्म

आचार्य चाणक्य का जन्म हिंदू धर्म के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका जन्म जिस घर में हुआ था, वह बहुत ही गरीब था, इसीलिए आचार्य चाणक्य ने गरीबी के कारण काफी दुख और तकलीफे अपने बाल्यकाल में झेली। कभी-कभी तो ऐसा भी होता था कि आचार्य चाणक्य को खाना भी नहीं मिलता था और वह भूखे ही सो जाते थे।

आचार्य चाणक्य के शौक

जैसा कि आप जानते हैं कि आचार्य चाणक्य काफी विद्वान थै। आचार्य चाणक्य को किताबें पढ़ना, आर्टिकल लिखना और भाषण देना पसंद था। इन्हें राजनीतिक चर्चा करना भी अच्छा लगता था।

आचार्य चाणक्य का बाल्यकाल

आचार्य चाणक्य अपने बाल्यकाल से बहुत ही जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव के थे। अपने इस उग्र स्वभाव के कारण ही उन्होंने नंद वंश का संपूर्ण नाश करने का डिसीजन लिया था।

आचार्य चाणक्य बहुत ही साधारण जीवन जीते थे, क्योंकि वह सादा जीवन उच्च विचार वाले आदर्शों का पालन करते थे। आचार्य चाणक्य के बारे में ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने कभी भी किसी चीज का मोह नहीं किया। आचार्य चाणक्य के पास महामंत्री का पद भी था और राजसी ठाट बाट भी था, परंतु कभी भी उन्होंने इसका फायदा नहीं उठाया।

आचार्य चाणक्य को ना तो धन का मोह था, ना ही उन्हें प्रसिद्धि का लालच था। आचार्य ने अपनी संपूर्ण जिंदगी में विभिन्न प्रकार के उतार-चढ़ाव देखे थे, जिसके कारण उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन स्मरण रखें इन संघर्षों के बल पर ही वह एक प्रकांड विद्वान बने थे।

आचार्य चाणक्य की शिक्षा

बिहार के नालंदा यूनिवर्सिटी से आचार्य चाणक्य ने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। वे बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे, इन्हें पढ़ाई करने में काफी ज्यादा रुचि थी।

कुछ ग्रंथों के अनुसार ऐसा भी कहा जाता है कि आचार्य चाणक्य ने अपनी एजुकेशन तक्षशिला में हासिल की थी।

आचार्य चाणक्य के कौशल

ब्राह्मण समुदाय में पैदा हुए आचार्य चाणक्य को पॉलिटिक्स, युद्ध की रणनीति, ज्योतिष, दवा और अर्थशास्त्र जैसे विषयों का अच्छा ज्ञान थी। आचार्य चाणक्य इन सभी विषयों में काफी पारंगत थे।

लोक मान्यताओं के अनुसार ऐसा भी कहा जाता है कि आचार्य चाणक्य को हिंदी और संस्कृत भाषा के अलावा फारसी और ग्रीक भाषा भी आती थी। इसके साथ ही उन्होंने वेद और साहित्य की भी स्टडी की थी, जिसके कारण साहित्य और वेद की अच्छी इंफॉर्मेशन आचार्य चाणक्य को थी।

आचार्य चाणक्य ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद तक्षशिला में राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के पद को संभाला। इसके बाद आचार्य चाणक्य सम्राट चंद्रगुप्त के भरोसेमंद साथी बने।

इस घटना ने बदला आचार्य चाणक्य का जीवन

आचार्य चाणक्य भारत के महान चरित्र वाले एक विद्वान ब्राह्मण थे। इसके साथ ही आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षक भी थे। अपने द्वारा दिए गए संदेश और महान विचारों के फलस्वरूप आचार्य चाणक्य अपनी मृत्यु के इतने सालों बाद भी भारतीय लोगों के दिलों में आज भी जिंदा है।

इसके अलावा विदेशों में भी कई लोग आचार्य चाणक्य की नीतियों को पढ़ते हैं और उन पर अमल करके अपनी जिंदगी को सक्सेसफुल बनाते हैं।

आचार्य चाणक्य के जीवित रहते हुए जब उनकी प्रसिद्धि काफी ज्यादा बढ़ गई थी, तभी उनकी जिंदगी में 2 ऐसी घटनाएं घटित हुई, जिसके कारण आचार्य चाणक्य की पूरी लाइफ चेंज हो गई।

पहली घटना

आचार्य चाणक्य की लाइफ जिस पहली घटना के कारण चेंज हुई, वह थी सिकंदर का भारत पर आक्रमण करना और भारत के कई राज्यों को जीत लेना।

दूसरी घटना

मगध के राजा के द्वारा कौटिल्य का अपमान करना जीवन का वह मोड था जिसने उनकी जिंदगी का लक्ष्य ही बदल डाला।

चाणक्य और चन्द्रगुप्त

राजा चंद्रगुप्त के राज्य के महामंत्री के पद को आचार्य चाणक्य संभालते थे और आचार्य चाणक्य ने ही राजा चंद्रगुप्त को उनके राज्य को स्थापित करने में बेहद मदद की थी।

जब नंद साम्राज्य के शासक ने राजा चाणक्य का अपमान किया था, तो उसके बाद उन्होंने नंद साम्राज्य के संपूर्ण विनाश का डिसीजन लिया था, जिसके बाद उन्होंने अपना शिष्य चंद्रगुप्त को बनाया और आचार्य चाणक्य ने नंद साम्राज्य से प्रतिशोध लेने के लिए चंद्रगुप्त को चुना।

नंद साम्राज्य का पतन और मौर्य साम्राज्य की स्थापना

नंद वंश के राजा का नाम धनानंद था, जो कि अपनी शक्ति पर बहुत ही ज्यादा घमंड करता था और इसीलिए उसने आचार्य चाणक्य को एक टाइम बेइज्जत किया था, जिसके बाद चंद्रगुप्त के साथ मिलकर आचार्य चाणक्य ने एक सटीक रणनीति बनाई और अपनी रणनीति पर काम करते हुए उन्होंने नंद वंश का साम्राज्य संपूर्ण तौर पर खत्म कर दिया।

जब चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य की नीतियों ने नंद साम्राज्य के आखिरी राजा को हरा दिया, तो उसके बाद आचार्य चाणक्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त के साथ मिलकर की, जिसके बाद वह चंद्रगुप्त के शासन में चंद्रगुप्त के राजनीतिक कलाकार बने।

चाणक्य नीति

चाणक्य नीति को आचार्य चाणक्य ने हीं लिखा था। चाणक्य नीति ने व्यक्ति को जीवन को सार्थक तरीके से जीने की राह दिखाई है, क्योंकि चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने संबंधों, अर्थशास्त्र तथा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित ऐसी ऐसी बातें बताई है, जिन्हें पढ़ करके अगर कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी में उतार लेता है तो वह जिंदगी में आगे बढ़ सकता है क्योंकि आचार्य चाणक्य ने अपनी तमाम विधाएं और चालाकिया चाणक्य नीति में दर्शाई है।

इसीलिए चाणक्य नीति आज भी लोगों के बीच सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब है

चाणक्य नीति पढ़ कर के कोई बेवकूफ से व्यक्ति भी होशियार बन सकता है और वह यह जान सकता है कि उसका फायदा किसमें है और उसका नुकसान किस में है।

चाणक्य की मृत्यु

विद्वान ब्राह्मण,महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य की मृत्यु 275 ईसवी में हो गई। जिस प्रकार चाणक्य का जन्म रहस्यों से भरा हुआ है, उसी प्रकार इनकी मौत भी रहस्यों से भरी हुई है।

हालांकि यह बात तो साफ है कि आचार्य चाणक्य ने अपनी जिंदगी काफी लंबे समय तक जी थी, हालांकि उनकी मृत्यु कैसे हुई थी, इसके बारे में कोई भी सटीक इंफॉर्मेशन नहीं है।

कुछ लोगो की माने तो आचार्य चाणक्य ने जंगल में जाकर खाना पीना छोड़ दिया था और वहीं पर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे, जबकि कुछ लोगों का ऐसा कहना है कि आचार्य चाणक्य की मौत राजनीतिक साजिश के तहत हुई थी।

आचार्य चाणक्य को प्राप्त सम्मान

आचार्य चाणक्य को सम्मानित करने के लिए, उनकी याद में दिल्ली में राजनयिक एन्क्लेव का नाम चाणक्यपुरी रखा गया है। इसके अलावा भी हमारे भारत देश में ऐसे कई इंस्टिट्यूट हर जगह है, जिनका नाम चाणक्य के ऊपर रखा गया है।

आचार्य चाणक्य के ऊपर टीवी पर सीरियल भी निर्मित हो चुके हैं और इनके ऊपर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं।

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