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धैर्य रखें, प्रयास करें, समय बदलता ही है

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समय में बदलाव प्रकृति की देन है इस बदलते हुए समय को कोई भी प्राणी नहीं रोक सकता हर 1 सेकंड के बाद दूसरा सेकंड आता है और इस प्रकार समय का पहिया चलता रहता है। परन्तु समय किसी भी अन्य चीज को बदलने के लिए जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि जो भी चीज बदलती है वह समय के हिसाब से ही बदलती है।

चाहे वह सजीव हो या फिर निर्जीव, समय की मात कोई भी सहन नहीं कर सकता। समय के पास इतनी शक्ति होती है कि उसके साथ दुनिया की हर एक चीज बदलने को मजबूर हो जाती है, चाहे वह मानव हो या फिर जानवर।

अक्सर कई बार हम जब भी कुछ बेहतर करना शुरू करते हैं तो हमारे हालात और समय बहुत ही बुरे होते हैं परंतु जब हम अपने कार्य में सफल हो जाते हैं तो समय और हालात दोनों ही बहुत अच्छे हो जाते हैं इसलिए हमें कोई भी नया कार्य शुरू करने के लिए अपने बुरे हालातों और समय की चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि काम संपन्न होने पर हालात और समय दोनों अपने आप ही बदल जाते हैं।

हम आज आपको इस कहानी में उस किसान के बारे में बताएंगे जो बहुत धैर्य के साथ अपना कार्य करता है और उसे विश्वास होता है कि एक न एक दिन उसका समय जरूर बदलेगा| जब तक उसका समय बदलता नहीं है तब तक वह अपना धैर्य भी नहीं खोता और एक दिन उसका परिश्रम, धैर्य और खुद पर आत्मविश्वास उसके जीवन में खुशियों की बहार लेकर आता है।

गांव में एक छोटे से घर में एक किसान रहता था| उस किसान के पास लगभग 3 एकड़ जमीन थी और वह सारी जमीन में अनाज बोता था| किसान की जमीन में ज्यादा अनाज होता था इसके लिए वह फसल के पकने पर उसे काटने के लिए कुछ मजदूरों को काम पर रखता था और फसल काटने के बदले में उन्हें कुछ अनाज दे देता था।

किसान थोड़ा-बहुत हिस्सा अनाज का अपने परिवार के लिए बचा देता था और बाकी बचा हुआ सारा अनाज बेच देता था जिससे उसके घर का साल भर खर्चा चल जाता था और बचे हुए पैसे से वह दूसरी बार के बीज के लिए अनाज खरीद लेता था।

किसान की जीवन शैली साधारण सी चल रही थी और वह अपने परिवार का पालन पोषण सही ढंग से कर रहा था वह बहुत मन लगाकर अपनी खेती का काम करता था और कुछ अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर देता था।

किसान अक्सर बहुत खुश रहा करता था क्योंकि उसके खेत में अनाज बहुत अच्छा होता था किसान को जब भी थोड़ा समय मिलता तो वह अपने खेतों की रखवाली करने चला जाता उसे अपने खेतों से कुछ ज्यादा ही लगाव था।

किसान के खेत ही उसके जीवन के मुख्य आधार थे| शायद ही किसान के खेतों के बिना उसके जीवन की कल्पना की जा सकती क्योंकि किसान खुद भी अपने खेतों को ही अपना मालिक समझता था।

एक बार कुछ ऐसा हुआ जिससे किसान भी बहुत परेशान हो गया किसान ने अपने सारे खेत में बहुत मेहनत से बीज बोया और उसमें खाद डाली। लेकिन किसान के बीज बोने के बाद आसमान से बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरी और किसान का सारे बीज और आशाएं ध्वस्त होने लगे।

किसान को फिर भी बहुत विश्वास था कि 1 दिन बारिश जरूर होगी और किसान के खेत फिर से हरे भरे हो जाएंगे ऐसे ही देखते देखते दो-तीन महीने बीत गऐ और आसमान बारिश का नाम तक नहीं ले रहा था किसान हर रोज आसमान में बादलों की तलाश करता उसे दो-तीन महीने तक एक बादल भी आसमान में मंडराते हुए नजर नहीं आया।

Keep Patience

किसान को खेत में बीज बोए हुए लगभग 4 महीने पूरे होने को जा रहे थे फिर भी बारिश नहीं हो रही थी। पर भी उसे इतना विश्वास था कि एक न एक दिन बारिश हो ही जाएगी और किसान के खेत पहले की तरह ही हरे-भरे लहराएगें।

किसान का यह सब सोचना भी नामुमकिन ही प्रतीत हो रहा था क्योंकि 4 महीने पहले बोये गये इन बीजों में अब अगर बारिश हो भी जाती तो फिर भी वह बीज नहीं उग पाते| लेकिन किसान को खुद में इतना विश्वास और धैर्य था कि वह सोच रहा था अगर अभी भी बारिश हो जाती है तो उसके खेत में उसके द्वारा बोले गए बीज फिर से उग आएंगे।

इस प्रकार किसान का एक साल ऐसे ही गुजर गया और साल के अंत में बारिश होनी प्रारंभ हुई अब किसान कुछ भी नहीं कर सकता क्योंकि उसके द्वारा खेतों में बोए गये बीज अच्छी तरीके से सूख गए थे। किसान को ये देखकर कष्ट हुआ क्योंकि 3 एकड़ जमीन में बोया गया सारा बीज बर्बाद चला गया।

इस सब के बाजवूद किसान ने हिम्मत नहीं हारी, और वह अगले साल बीज बोने का इंतजाम करने लगा| इतना साहस हर किसी के पास नहीं होता है कि वह 3 एकड़ जमीन में इतना सारा बीज बर्बाद करने के बाद फिर से दूसरी बार इतना बड़ा कदम उठाएं।

किसान धीरे-धीरे अपने साथ घटी हुई उस घटना को भूलने लगा लेकिन वह घटनाएं इतनी आसानी से भुला देने लायक भी नहीं थी।
पर एक बार फिर से किसान की खेतों में बीज बोने की तयारी पूरी थी| इस बार भी किसान को डर लग रहा था कि कहीं बारिश नहीं होगी तो अगली बार की तरह इस बार भी उसे निराशा ही हाथ लगेगी परंतु उसे अंदर से विश्वास भी था इस बार बारिश जरूर होगी और सूखे हुए यह खेत एक दिन जरुर लहलहाएंगे।

किसान चूँकि मेहनती होने के साथ साथ एक धैर्यवान व्यक्ति था, उसका मानना था कि यदि इंसान को अपनी मेहनत पर विश्वास और धैर्य हो तो ऊपर वाला समय आने पर उसे फल अवश्य देता है और ऐसा माना भी गया है की अगर व्यक्ति मेहनत के साथ धैर्य रखे तो निश्चित ही सफलता उसके कदम चूमती है और वह रास्ता सफलता की मंजिल तक जरूर पहुंचता है।

इस तरह किसान ने दूसरी बार भी फसल बो दी पर इस बार भी संकट के बादल मंडरा रहे थे क्योंकि एक महिना बीतने वाला था परन्तु बारिश का नामोनिशान नहीं दिख रहा था. अब फिर से किसान के चेहरे पर थोसी उदासी छा गई।

जब एक महीना बीता तो फिर एक दिन किसान ने आसमान में काले बादल मंडराते हुए देखें और किसान के चेहरे पर खुशी के कारण एक चमक सी दिखने लगी और कुछ ही घंटों बाद बारिश होनी प्रारंभ हो गयी ।

इस बार मात्र उतनी ही बारिश हुई जितनी बारिश की जरूरत किसान की फसल को थी और बारिश भी उसी समय हुई जब किसान की फसल को पानी की जरूरत पड़ी। पानी समय पर मिलने के कारण किसान के खेत में एक बहुत अच्छी फसल तैयार होने लगी इसे देखकर किसान की ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

इस बार किसान के सारे खेतो में इतनी फसल उग जाती है की उसे जो अगले साल बारिश न होने के कारण नुकसान होता है उस सबकी भी भरपाई हो जाती है। किसान की फसल पककर तैयार होने लगती है किसान अपने खेत की बड़ी जिम्मेदारी के साथ देखभाल करता है।

जब किसान की फसल पूरी पक जाती है तो वह उसे काटने के लिए बहुत सारे लोगों को बुलाता है और उन्हें भी फसल काटने के बदले में कुछ अनाज देता है इस बार किसान की फसल इतनी होती है कि वह बहुत ही आराम से 2 साल का गुजारा कर सकता था परंतु किसान को बैठकर जीने वाला जीवन अच्छा नहीं लगता था वह फिर भी नियमित तौर पर परिश्रम करता अतः अपने फल की चिंता उसे कभी भी नहीं सताती।

किसान हर साल बड़ी ही मेहनत और लगन से अपने खेतों में बीज बोता और उसकी सिंचाई करता जब भी उसके खेत में उगने वाले अनाज को पानी की जरूरत पड़ती है तब भगवान इंद्र ऊपर से पानी की बौछार कर देते।

किसान अब हमेशा ही खुश रहता था और अपना पहले जैसा ही खुशी के साथ साधारण जीवन जीता था उसे अपनी किसी भी चीज पर घमंड नहीं था| किसान अब अपने परिवार का पालन पोषण बहुत ही आराम से कर सकता था यहां तक कि वह कुछ अनाज गरीबों को भी दान में दिया करता था।

इस प्रकार अंत में किसान के मेहनत के प्रति विश्वास तथा धैर्य की जीत होती है और किसान फिर से अपनी प्रारंभिक स्थिति में पहुंच जाता है और खुशहाल जीवन जीता है।

भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इस किसान की भाँती अन्य किसानों के जीवन में घटने वाली इन कहानियों का वर्णन अक्सर हम देखते है, आत्मविश्वासी किसान की यह कहानी हमें सन्देश देती है की यदि ठान लिया जाए तो इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है, इसान मेहनती होने के साथ साथ यदि धैर्यवान भी है तो निश्चित ही एक दिन वह अपनी मंजिल को अवश्य पाता है।

साथ ही यह कहानी जीवन में सकरात्मक सोच के परिणाम को भी उजागर करती है, चूँकि आशा की किरणों से ही इंसान जीवन में कर्म करता है अतः इसान को जल्दबाजी करने के बजाय एक आशावादी नजरिया अपनाना चाहिए।

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