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दो दोस्तों की कहानी एक सफल दूसरा विफल क्यों?

2 दोस्तों की कहानी – एक सफल दूसरा विफल पर क्यों ?

एक सच्चा मित्र वह नहीं, जो हमारे सुखों का हिस्सेदार होता है। बल्कि एक सच्चा मित्र वह है जो मुसीबतों के समय हमारे पास खड़ा हो।

हमारे चेहरे पर देखते ही उसे हमारे हालातों का पता चल जाए क्योंकि एक सच्चा मित्र ही अपने दूसरे मित्र के स्वभाव को भली-भांति जान सकता है।

हालांकि अच्छा मित्र न सिर्फ कोई बाहरी दोस्त बल्कि हमारे माता-पिता, भाई-बहन या फिर परिवार के अन्य सदस्य भी हो सकते हैं।

क्योंकि हमारे परिवार के सदस्य हर वक्त हमारे साथ रहते हैं इस कारण वे हमारे दुख दर्द को प्रत्येक समय भली-भांति समझते भी हैं, वक्त रहते ही हमें उसका हल भी बता पाते हैं।

जीवन में माता-पिता के बाद एक मित्र ही ऐसा होता है जो हमें हमारें दुखों के वक्त सुकून दिला पाता है। मित्र शब्द ही एक ऐसा है जिसे सुनने के बाद लोगों के दुख दर्द हल्के हो जाते हैं।

जब एक मित्र हमें कहता है कि “तु टेंशन ना ले मैं तुम्हारे साथ हूं” ऐसा बोलते ही मानो ऐसा लगता है जैसे सारे दुख अपने आप ही टल गए।

हमारा आने वाला भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे मित्र कैसे हैं, उनके साथ हमें क्या लाभ मिल पा रहे हैं। कहीं हम उनके साथ अपना भविष्य और भी खराब तो नहीं कर रहे हैं?

चूंकि हर किसी को दिए जाने वाले संस्कार अलग-अलग होते हैं अतः एक खराब मित्र की संगति से एक अच्छा व्यक्ति भी दुर्गति के पथ पर चल सकता है।

इसलिए हमें सोच समझकर ही लोगों के साथ दोस्ती करनी चाहिए अगर हम बिना सोचे समझे किसी से भी दोस्ती करते हैं तो कुछ समय पश्चात हम भी अपने दोस्तों के जैसे व्यवहार ही अपना लेते हैं l

कहा गया है “जैसा संग वैसा ही रंग” इसलिए हम अपने दोस्तों के साथ समय बिताने पर जिन बातों को सीखते हैं,उन बातों का उपयोग हम अपने घर में करने लगते हैं l

अगर वे बातें अच्छी होती हैं तो हमारा भविष्य भी अच्छा रहता है, यदि अच्छी नहीं होती फिर हमारा भविष्य भी मुश्किल में पड़ जाता है। इसलिए हमें अच्छे दोस्तों के साथ की जरूरत होती है।

हम आज आपको दो दोस्तों की कहानी का उदाहरण देंगे जिन्होंने अपना जीवन तो एक ही परिस्थिति से शुरू किया परंतु आप देखेंगे वे दोनों अपने दोस्तों तथा आदतों के बल पर किस प्रकार अपनी अलग-अलग मंजिलों में पहुंच पाते हैं।

दो दोस्त जिनका नाम रमेश और दिनेश था ये दोनों एक ही कस्बे में रहते थे। दोनों के परिवारों की प्रारंभिक स्थिति भी समान ही थी।

रमेश और दिनेश की उम्र में सिर्फ कुछ दिनों का ही फर्क था। जिस कारण इन्होंने अपना बचपन एक साथ ही व्यतीत किया । दोनों बचपन में साथ पढ़ते लिखते हैं अपने मंजिल की तरफ एक ही स्थिति से आगे बढ़ते हैं।

परंतु समय के साथ दोनों दोस्त अपनी विभिन्न आदतों, संस्कारो के कारण अपनी अलग-अलग मंजिल पर पहुंच पाते हैं।

इसका कारण सिर्फ उनके परिवार द्वारा उन्हें दिए गए संस्कार तथा उनके द्वारा अपनाए गए रास्ते होते है।

क्योंकि हर वक्त यह इंसान ही निर्धारित करता है कि वह किस प्रकार अपनी मंजिल पर पहुंच सकता है या फिर वह सिर्फ अपनी मंजिल के सपने देखता है।

मंजिल पर हमेशा वही लोग पहुंचते हैं जो सपनों के साथ साथ वहां तक पहुंचने के लिए कार्य करना प्रारंभ कर देते हैं। लेकिन कुछ लोग सपनों में ही सुकून पाते हैं और वे सपने देखते रह जाते हैं

वे लोग उस मंजिल को हासिल करने के लिए कभी कोई कार्य प्रारंभ करते ही नही, न ही करना चाहते हैं ।

कुछ लोग यूं ही किस्मत से मंजिल पा लेते हैं और कुछ लोग बहुत मेहनत करने के बाद वहां तक पहुंच पाते हैं ऐसा ही होता है इन दो दोस्तों के साथ

एक अपना संघर्ष वाला जीवन यापन करके अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है परंतु दूसरा सिर्फ अपनी मंजिल के सपने देख पाता है और वह सपनों में ही सुकून पाता है।

जिस कारण उसके मन में सफलता के प्रति नए कार्य प्रारंभ करने का विचार आता ही नहीं। रमेश और दिनेश जो एक समान परिवार से संबंध रखते थे। परंतु उनके विचार अलग-अलग होने के कारण दिनेश तो अपने परिवार द्वारा अच्छे संस्कार सीख लेता है।

वह अच्छे दोस्तों के साथ अपना कीमती वक्त गुजरता है, अपनी मंजिल के लिए लगातार संघर्ष करता है।

परंतु ठीक इसके विपरीत रमेश अपने परिवार से अच्छे संस्कार न पाने के कारण अच्छे मित्रों को भी नहीं अपना सकता था।

वह ऐसे लोगों के साथ अपना कीमती वक्त गुजरता है जो पहले ही अपना भविष्य खराब कर चुके हैं।

इससे रमेश के जीवन में भी बहुत प्रभाव पड़ता है, वह कभी भी अपनी मंजिल के रास्ते पर नहीं चढ़ पाता और न ही चढ़ने की सोचता है।

क्योंकि उसके दोस्त जिसके साथ वह अपना वक्त गुजरता था वे लोग हमेशा ही बेमतलब की बातों में अपना वक्त गुजार लिया करते। इसी कारण रमेश को भी उम्र बढ़ने के साथ-साथ ऐसी ही बातों की आदत हो गई जिस कारण उसका भविष्य भी अब धीरे-धीरे बर्बाद होता चला गया।

जब बहुत सालों के बाद रमेश और दिनेश दोनों एक दूसरे के साथ मिलते हैं तो दिनेश एक महाविद्यालय में प्रोफेसर की उपाधि प्राप्त कर चुका होता है जबकि रमेश आज भी अपने दोस्तों के साथ यूं ही टाइम गुजारा करता है।

इस प्रकार यह दोनों दोस्त अपने जीवन में अच्छे संस्कार और अच्छे संस्कार न मिल पाने के कारण अपने भविष्य निर्धारित करते हुए उस पथ पर चलते हैं।

जिसमें से दिनेश अच्छे संस्कारों के बलबूते एक सफल व्यक्ति बन पाता है जबकि रमेश अपनी बुरी संगत और आदतों के कारण अपना भविष्य बर्बाद कर चुका होता है।

इसलिए हमारे जीवन में हमारा भविष्य, हमें बचपन में दिए जाने वाले संस्कार ही तय करतें हैं कि हम आगे जाकर किस प्रकार के भविष्य को चुन सकेंगे

यहां हम आपके समक्ष उन मुख्य कारणों का वर्णन कर रहे हैं, जिनकी वजह से एक तरफ दिनेश सफल बन जाता है वही रमेश नाकामयाब बन कर रह जाता है।

रमेश द्वारा अपने जीवन में असफल होने के कुछ मुख्य कारण

1. अच्छे संस्कार न मिल पाना

हमारे जीवन में भले ही हम सफल हो या ना हो परंतु अच्छे संस्कार प्राप्त होने के बाद हम अपना जीवन भली-भांति कम से कम समस्याओं के साथ यापन कर पाते हैं। क्योंकि संस्कार हमें बचपन में ही अच्छे और बुरे कार्यों के बीच अंतर समझा देते हैं

अच्छे-बुरें अंतरों को समझने के कारण हम अपने जीवन में सही निर्णय को चुनने में हमेशा सफल रहते हैं इसलिए सफलता का राज अच्छे संस्कार ही हैं।

यहां रमेश अच्छे संस्कार प्राप्त न कर पाने के कारण अपने जीवन में एक अच्छा लक्ष्य नहीं चुन पाता इसलिए यहां पर रमेश की विफलता के साथ-साथ उसके परिवार वाले भी उसकी असफलता के जिम्मेदारी हैं। क्योंकि सबसे पहला हक एक माता-पिता का ही होता है जो अपने बच्चों के भविष्य को निर्धारित करने में उनका सबसे अधिक सहयोग करते हैं।

2. अच्छे मित्रों का चयन न कर पाना

यहां पर कुछ ऐसी गलती रमेश अपने जीवन में खुद भी कर बैठता है, वह बुरी संगत के मित्रों के साथ मित्रता करता है और अपनी दिनचर्या में बुरी आदतों को अपनाने लगता है।

इसलिए हमें अपने जीवन में सफल होने के लिए अच्छे मित्रों का चयन करने के साथ-साथ अच्छी आदतों को भी अपनाना चाहिए।

3. जीवन में लक्ष्य न बना पाना

जो लोग अपने जीवन में किसी भी चीज का लक्ष्य नहीं बनाते, वो लक्ष्य हीन हो जाते हैं। उनके मन में अच्छे विचार आते ही नहीं इस कारण वे अपनी मनमर्जी के कार्य करते हैं। जिनमें उन्हें मात्र पल भर का आनंद मिलता है।

जो लोग अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित पहले से ही कर लेते हैं। उन्हें पल भर के आनंद से कोई मतलब नहीं रहता वे लोग हमेशा अपने लक्ष्य को नजर में रखते हुए प्रत्येक वक्त उसे हासिल करने के लिए आगे बढ़ते हैं।

परंतु रमेश अपने जीवन में लक्ष्य नहीं बनाता इसीलिए वह हर वक्त खुश नजर आता है परंतु उसकी यह खुशी उसके भविष्य में उसे बहुत दुख दर्द दे सकती है।

4. बुरी आदतों को अपनाना

हमारी आदतें ही हमारा भविष्य तय करती हैं इसलिए प्रश्न है जिन आदतों को आप अपना रहे हैं, उनका परिणाम कैसा होगा क्या कभी सोचा है?

बुरी आदतें व्यक्ति को कभी भी सफल नहीं बना सकती क्योंकि बुरी आदतों को अपनाने के बाद मन में हमेशा बुरे विचार आते हैं। बुरे विचार सफलता के सबसे बड़े दुश्मन हैं क्योंकि बुरे विचारों के आते ही व्यक्ति अपनी मंजिल को भूल जाता है ।

ऐसा ही रमेश के साथ भी हुआ उसने बुरी आदतों को तुरंत अपना लिया जिस कारण उसने अपने जीवन में सफलता का महत्व कभी समझा ही नहीं, न ही सफल होने के विचार उसके मन में आए ।

सीख-

हमें इस कहानी से सीख मिलती है कि सफलता केवल अच्छे संस्कार,अच्छे मित्र,अच्छे परिवार तथा अच्छे विचारों में होती है। इसलिए हमें सफलता के मार्ग पर चलने के लिए इन सभी चीजों को जीवन में अपनाना चाहिए।

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