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Do the Work Book Summary in Hindi – Steven Pressfield

Do the Work Book Summary in Hindi by Steven Pressfield

क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है कि आपको अपनी जिंदगी में बहुत कुछ करना है, लेकिन आलस, डर या टालमटोल की वजह से आप अपने काम पूरे नहीं कर पा रहे हैं?

जब भी आप अपने काम को टालते हैं, आपके मन में एक आवाज आती है कि आपको यह काम करना चाहिए।

लेकिन फिर भी आप काम शुरू नहीं कर पाते।

यह स्थिति बहुत frustrating हो सकती है।

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो Steven Pressfield की किताब Do the Work आपको एक जरूरी बात समझाती है।

सोचना कम कीजिए और काम शुरू कीजिए।

कई बार हम किसी काम की बहुत सारी planning करते हैं। अगले दिन उसे शुरू करने का फैसला भी करते हैं। लेकिन फिर कुछ नया सोचकर या किसी दूसरे काम में उलझकर उसे टाल देते हैं।

Do the Work हमें इसी resistance से लड़ने और action लेने के लिए प्रेरित करती है।

इस किताब की सीख students, writers, entrepreneurs और उन सभी लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपने किसी important goal पर काम करना चाहते हैं।

अगर आप overthinking की वजह से काम शुरू नहीं कर पाते हैं, तो ज्यादा सोचने की आदत कैसे छोड़ें और action कैसे लें इस विषय पर हमारा दूसरा लेख भी पढ़ सकते हैं।

Do the Work किताब हमें क्या सिखाती है?

Steven Pressfield की Do the Work का मुख्य विचार बहुत simple है।

अपने काम को शुरू करें और resistance को रास्ते में न आने दें।

हम चाहे कोई भी काम करें, रास्ते में problems आ सकती हैं।

Rejection, failure, insult, distraction और self-doubt जैसे factors हमारे goals को प्रभावित कर सकते हैं।

लेकिन कई बार सबसे बड़ा obstacle बाहर नहीं होता।

वह हमारे अंदर होता है।

लेखक इसी internal obstacle को Resistance कहते हैं।

Resistance क्या है?

Resistance वह मानसिक रुकावट है जो हमें किसी meaningful काम को शुरू करने या पूरा करने से रोकती है।

यह डर के रूप में सामने आ सकती है।

कभी यह self-doubt बन जाती है।

कभी यह perfectionism बनकर कहती है कि अभी सही समय नहीं है।

कभी यह हमें छोटे-छोटे कामों में उलझा देती है ताकि हम अपने जरूरी काम से बच सकें।

उदाहरण के लिए आपके मन में कोई business idea है।

आप जानते हैं कि उस पर काम करना चाहिए।

लेकिन मन कहता है:

“पहले थोड़ा और research कर लेता हूं।”

“पहले सारी तैयारी कर लेता हूं।”

“अभी सही time नहीं है।”

“मेरे पास पर्याप्त skill नहीं है।”

यही resistance आपको action लेने से रोक सकती है।

अपने जीवन के उद्देश्य को समझना

किसी भी बड़े काम को शुरू करने से पहले यह समझना उपयोगी है कि आप उसे करना क्यों चाहते हैं।

आपके goals क्या हैं?

आप किस दिशा में जाना चाहते हैं?

आप अपने काम से क्या हासिल करना चाहते हैं?

जब goal clear होता है, तो action लेना आसान हो सकता है।

कई बार हम परिस्थितियों या problems की वजह से अपने goals से दूर हो जाते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें हमेशा के लिए give up कर देना चाहिए।

अगर आपको अपने life purpose और सही दिशा को समझने में रुचि है, तो Ikigai Book Summary in Hindi भी पढ़ सकते हैं। इसमें जीवन में purpose और meaningful work से जुड़े विचारों को समझाया गया है।

Start Before You’re Ready

क्या आपको लगता है कि किसी काम को शुरू करने से पहले आपके पास पूरी तैयारी, पूरी skill और सभी resources होने चाहिए?

Do the Work का संदेश इससे अलग है।

आपको हमेशा ready महसूस होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

Leonardo da Vinci का उदाहरण

मूल लेख में Leonardo da Vinci की famous painting The Last Supper का उदाहरण दिया गया है।

लेख में बताया गया है कि किसी बड़े काम की शुरुआत अक्सर कुछ basic ideas से होती है।

जैसे-जैसे काम आगे बढ़ता है, details जुड़ती जाती हैं।

यही बात हमारे दूसरे कामों पर भी लागू हो सकती है।

अगर आप कोई book लिखना चाहते हैं, तो शुरुआत में पूरी book का perfect version आपके सामने होना जरूरी नहीं है।

एक page लिखिए।

फिर दूसरा page लिखिए।

धीरे-धीरे पूरा काम आकार लेने लगेगा।

इसीलिए लेखक का मूल संदेश है:

Stop thinking. Stop preparing. Just start doing.

शुरुआत न करना सबसे बड़ी समस्या हो सकती है

कई बार हम resource की कमी को अपनी समस्या मान लेते हैं।

हमें लगता है:

लेकिन कई बार असली समस्या यह होती है कि हमने शुरुआत ही नहीं की।

एक बार काम शुरू करने के बाद हमें रास्ता दिखाई देने लगता है।

नई ideas आती हैं।

नई problems सामने आती हैं।

और फिर उन problems के solutions भी खोजे जा सकते हैं।

इसीलिए अगर कोई काम आपके लिए महत्वपूर्ण है, तो perfect शुरुआत का इंतजार न करें।

छोटा पहला कदम उठाइए।

Comfort Zone से बाहर निकलना

हम सभी का एक comfort zone होता है।

यह हमें familiar और safe महसूस कराता है।

लेकिन यही comfort zone कई बार हमें नई चीजें try करने से भी रोकता है।

अगर आप हमेशा उसी काम को करते रहेंगे जिसमें आपको कोई difficulty नहीं है, तो growth के अवसर कम हो सकते हैं।

इसलिए किसी meaningful goal के लिए कभी-कभी comfort zone से बाहर निकलना जरूरी होता है।

यह कदम छोटा भी हो सकता है।

आज केवल 20 मिनट काम करना।

पहला page लिखना।

पहला customer contact करना।

पहला prototype बनाना।

या केवल अपने idea पर पहला practical step लेना।

अगर आपको habits के जरिए अपने behaviour में छोटे बदलाव लाने हैं, तो Atomic Habits Book Summary in Hindi भी उपयोगी हो सकती है।

काम शुरू करने के बाद रास्ता दिखाई देता है

जब हम किसी काम को शुरू करते हैं, तो शुरुआत में हमें यह पता नहीं होता कि पूरा काम कैसे होगा।

लेकिन action लेने के बाद clarity बढ़ सकती है।

उदाहरण के लिए कोई writer पहले ending के बारे में सोच सकता है।

फिर वह ending से पीछे की तरफ story develop कर सकता है।

इसी तरह आप भी अपने final goal को ध्यान में रखकर छोटे steps से शुरुआत कर सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि आप काम शुरू करें।

क्योंकि बिना शुरुआत के कोई भी project पूरा नहीं हो सकता।

The Universe Is Not Indifferent

Do the Work में resistance के साथ-साथ एक दूसरी force की भी चर्चा होती है।

जब आप किसी meaningful काम को शुरू करते हैं, तो कई बार नई possibilities दिखाई देने लगती हैं।

आपको नए ideas मिलते हैं।

आप ऐसे लोगों से मिलते हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं।

आपको नई information मिलती है।

इसे किताब में Assistance के concept से जोड़ा गया है।

Resistance के सामने Assistance

Resistance आपको काम शुरू करने से रोकती है।

इसके विपरीत action आपको आगे बढ़ने के अवसर देता है।

मान लीजिए आप कोई song लिखना चाहते हैं।

आप पहली कुछ lines लिखते हैं।

इसके बाद उसी से अगली lines का idea आ सकता है।

इसी तरह अगर आप book लिखना चाहते हैं, तो पहला paragraph लिखने के बाद अगला paragraph लिखना आसान हो सकता है।

कई बार creative process action के बाद खुलता है।

इसलिए inspiration का इंतजार करने के बजाय काम शुरू करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

Action से Creativity बढ़ सकती है

जब आप काम शुरू करते हैं, तो आपका दिमाग उस काम से जुड़ी चीजों पर ज्यादा ध्यान देने लगता है।

आप नए connections देख सकते हैं।

नई ideas मिल सकती हैं।

आप problems को अलग तरीके से देख सकते हैं।

इसलिए motivation हमेशा काम शुरू होने से पहले नहीं आती।

कई बार काम शुरू करने के बाद motivation पैदा होती है।

यही वजह है कि Resistance को पहचानना जरूरी है।

Resistance को पहचानना सीखें

Resistance हमेशा साफ दिखाई नहीं देती।

कई बार हमें लगता है कि जो आवाज हमारे दिमाग में आ रही है, वह हमारी अपनी सही सोच है।

लेकिन वह हमें बार-बार काम से दूर भी कर सकती है।

उदाहरण के लिए:

“आज बहुत थक गया हूं।”

“कल से शुरू करूंगा।”

“पहले थोड़ा और सीख लेता हूं।”

“अभी मेरे पास सही resources नहीं हैं।”

“जब सही समय आएगा तब करूंगा।”

इनमें से कुछ बातें वास्तविक भी हो सकती हैं।

लेकिन अगर यही बातें बार-बार आपको action से रोक रही हैं, तो आपको अपनी सोच पर ध्यान देना चाहिए।

Resistance को एक दुश्मन की तरह समझें

मूल लेख में Resistance को एक बड़े dragon के रूप में समझाया गया है और हमें उससे लड़ने वाले soldier की तरह बताया गया है।

इसका practical मतलब है:

Resistance को पहचानिए और उसके बावजूद action लीजिए।

आपको resistance खत्म होने का इंतजार नहीं करना है।

आपको resistance के बावजूद काम करना है।

Killer Instinct

मान लीजिए आपने बचपन से एक novel लिखने का सपना देखा है।

कई वर्षों की मेहनत के बाद आपने अपना novel पूरा भी कर लिया।

अब अगला step है उसे publisher या agent को भेजना।

लेकिन यहीं डर शुरू हो जाता है।

“अगर उन्हें मेरी novel पसंद नहीं आई तो?”

“अगर उन्होंने reject कर दिया तो?”

“अगर मेरा काम अच्छा नहीं हुआ तो?”

यही डर आपको action लेने से रोक सकता है।

Success का डर भी Resistance हो सकता है

आमतौर पर हम failure के डर की बात करते हैं।

लेकिन कई बार success का डर भी resistance पैदा कर सकता है।

अगर आप सफल हो गए तो आपकी जिंदगी बदल सकती है।

आप पर नई responsibilities आ सकती हैं।

लोगों की expectations बढ़ सकती हैं।

इन सबका डर भी हमें action लेने से रोक सकता है।

इसलिए केवल failure से डरना ही समस्या नहीं है।

कभी-कभी success का डर भी हमें रोक सकता है।

डर के बावजूद action लेना

अगर आपका कोई meaningful goal है, तो डर का पूरी तरह खत्म होना जरूरी नहीं है।

आप डर के बावजूद काम कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए:

अगर आपको book लिखनी है, तो पहला page लिखिए।

अगर business शुरू करना है, तो पहला customer खोजिए।

अगर exam की तैयारी करनी है, तो पहला chapter पढ़िए।

अगर कोई skill सीखनी है, तो पहला lesson शुरू कीजिए।

Action छोटा हो सकता है।

लेकिन action होना जरूरी है।

अगर आपको अपने काम को टालने की आदत से छुटकारा पाने के practical तरीके जानने हैं, तो Eat That Frog Book Summary in Hindi भी जरूर पढ़ें। इसमें important काम को पहले करने और procrastination कम करने के तरीके बताए गए हैं।

Do the Work को अपनी जिंदगी में कैसे लागू करें?

किताब की सीख को practical बनाने के लिए आप कुछ simple steps अपना सकते हैं।

1. अपना सबसे जरूरी काम चुनें

हर दिन बहुत सारे काम हो सकते हैं।

लेकिन उनमें से सबसे important काम चुनिए।

उसे लिखिए।

फिर उस पर काम शुरू कीजिए।

2. तैयारी के नाम पर काम न टालें

Planning जरूरी है।

लेकिन ऐसी planning जो action को ही टालती रहे, वह useful नहीं है।

जितनी जरूरत हो उतनी planning करें और फिर action लें।

3. काम को छोटे हिस्सों में बांटें

बड़ा project देखकर डर लग सकता है।

इसलिए उसे छोटे tasks में divide करें।

आज क्या करना है?

अगले एक घंटे में क्या करना है?

अगला छोटा step क्या है?

इससे शुरुआत आसान हो सकती है।

4. Resistance को पहचानें

जब आपका मन बार-बार किसी जरूरी काम से बचने का कारण बताए, तो उस pattern को notice करें।

पूछें:

“क्या मुझे वास्तव में यह काम नहीं करना चाहिए या मैं इससे बच रहा हूं?”

यह सवाल clarity दे सकता है।

5. शुरुआत को आसान बनाएं

अगर आपको रोज एक घंटा लिखना मुश्किल लगता है, तो पहले 15 मिनट लिखिए।

अगर exercise शुरू करनी है, तो पहले छोटा session रखिए।

Goal को इतना बड़ा न बनाएं कि शुरुआत ही मुश्किल हो जाए।

6. काम पूरा करने पर ध्यान दें

केवल शुरुआत करना पर्याप्त नहीं है।

काम को लगातार आगे बढ़ाते रहना भी जरूरी है।

छोटे steps लेते रहें।

और project को finish करने की दिशा में बढ़ते रहें।

Do the Work और Deep Work में क्या संबंध है?

Do the Work का focus action और resistance को overcome करने पर है।

वहीं Deep Work का focus बिना distraction के महत्वपूर्ण काम पर गहराई से ध्यान देने पर है।

अगर आप किसी जरूरी project पर काम कर रहे हैं, तो दोनों ideas को साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।

पहले Resistance को हराकर काम शुरू करें।

फिर distraction हटाकर उस काम पर deep focus करें।

इसके लिए आप Deep Work Book Summary in Hindi पढ़ सकते हैं। इसमें concentration और distraction-free work के बारे में विस्तार से बताया गया है।

Do the Work Book से मिलने वाली मुख्य सीख

इस किताब की learning को आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं:

  1. काम शुरू करने के लिए हमेशा perfect time का इंतजार न करें।
  2. Resistance को पहचानना सीखें।
  3. Fear आपको action से रोक सकता है।
  4. Self-doubt को अपने goals पर हावी न होने दें।
  5. ज्यादा planning के बजाय practical action लें।
  6. Comfort zone से बाहर निकलने की कोशिश करें।
  7. बड़े काम को छोटे steps में divide करें।
  8. Motivation का इंतजार करने के बजाय काम शुरू करें।
  9. Action के बाद नए ideas सामने आ सकते हैं।
  10. Failure के साथ-साथ success का fear भी हो सकता है।
  11. Resistance खत्म होने का इंतजार न करें।
  12. काम शुरू करने के बाद रास्ता ज्यादा clear हो सकता है।
  13. अपने goal को ध्यान में रखकर पहला कदम उठाएं।
  14. किसी meaningful काम को पूरा करने के लिए consistency जरूरी है।
  15. Do the Work — केवल सोचिए मत, काम शुरू कीजिए।

Do the Work Book Summary का निष्कर्ष

Steven Pressfield की Do the Work का सबसे बड़ा message बहुत simple है।

काम शुरू कीजिए।

हमारे रास्ते में problems आएंगी।

कभी डर आएगा।

कभी self-doubt होगा।

कभी लगेगा कि हमारे पास पर्याप्त skill नहीं है।

कभी लगेगा कि अभी सही समय नहीं है।

यही resistance हमें रोकने की कोशिश करेगी।

लेकिन किसी भी बड़े काम की शुरुआत action से होती है।

आपको पूरा रास्ता पहले से दिखाई देना जरूरी नहीं है।

आपको केवल अगला कदम दिखाई देना चाहिए।

फिर वह कदम उठाइए।

इसके बाद अगला कदम खुद दिखाई देने लग सकता है।

इसलिए अगर आपके दिमाग में कोई idea है, कोई goal है या कोई ऐसा काम है जिसे आप लंबे समय से टाल रहे हैं, तो आज उसका एक छोटा हिस्सा शुरू कीजिए।

Perfect बनने का इंतजार मत कीजिए।

Ready होने का इंतजार मत कीजिए।

बस काम शुरू कीजिए।

यही Do the Work की सबसे महत्वपूर्ण सीख है।

अगर आपको यह Do the Work Book Summary in Hindi पसंद आई हो, तो comment करके बताइए कि ऐसा कौन-सा काम है जिसे आप लंबे समय से टाल रहे हैं और अब शुरू करना चाहते हैं।

Book Information

Book: Do the Work
Author: Steven Pressfield
Theme: Resistance, action, creativity और अपने काम को पूरा करना

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