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तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक समीक्षा: मनोज कुमार की किताब कैसी है?

Tere Mere Ird Gird ~ Samsamyik Muddon Par Vicharon ki Shrinkhala

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक समीक्षा: मनोज कुमार की किताब कैसी है?

तेरे मेरे इर्द गिर्द मनोज कुमार द्वारा लिखी गई एक ऐसी पुस्तक है, जिसमें सामाजिक सरोकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेखक ने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। पुस्तक में आम आदमी के जीवन से जुड़े विषयों को अलग-अलग आलेखों के माध्यम से रोचक और सहज तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है।

इस पुस्तक के लेखों में शिक्षा, पढ़ने की आदत, Fake News, निजीकरण, आजादी और अधिकारों का दुरुपयोग, किसान और मजदूरों की समस्याएं, रोजगार, सरकारी नौकरियां, पत्रकारिता, तकनीकी शिक्षा और Social Media जैसे कई विषय शामिल हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक में क्या पढ़ने को मिलता है?

पुस्तक के अलग-अलग आलेख हमारे आसपास की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े हुए हैं। लेखक ने इन विषयों को केवल समस्या के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि पाठक को उन पर सोचने और उनके संभावित समाधान पर विचार करने के लिए भी प्रेरित किया है।

पढ़ने की आदत और किताबों का महत्व

पुस्तक के प्रथम आलेख में लेखक ने छात्रों में किताबें पढ़ने की कम होती आदत पर चिंता जताई है। लेखक के अनुसार धीरे-धीरे पढ़ने की आदत कम होती जा रही है और पुस्तकों की जगह Google और YouTube जैसे डिजिटल माध्यम लेते जा रहे हैं।

आज डिजिटल माध्यमों से जानकारी पाना आसान हो गया है। इसके बावजूद किताब पढ़ने का अनुभव अलग होता है। किताब हमें किसी विषय को गहराई से समझने का अवसर देती है। इसी विषय से जुड़े हमारे लेख पुस्तक पढ़ने के फायदे को भी पढ़ा जा सकता है।

जंगली जानवरों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता

पुस्तक के दूसरे आलेख में लेखक ने जंगली जानवरों के प्रति मनुष्य की बढ़ती क्रूरता और संवेदनहीनता को उजागर किया है। इसमें केरल की एक प्रमुख घटना का उल्लेख करते हुए लेखक ने यह बताने का प्रयास किया है कि मानव व्यवहार का असर पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर किस तरह पड़ रहा है।

यह आलेख पाठक को केवल एक घटना के बारे में जानकारी नहीं देता, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संबंध पर भी सोचने के लिए प्रेरित करता है।

Fake News और बदलती पत्रकारिता

आज के समय में Fake News एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है। पुस्तक में लेखक ने फेक न्यूज के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है और इस विषय से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों को सामने रखा है।

लेख में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ द्वारा Fake News के विषय पर दिए गए व्याख्यान का भी उल्लेख किया गया है। लेखक ने इस मुद्दे को विस्तार से समझाने का प्रयास किया है।

आज जब Social Media के माध्यम से किसी भी जानकारी को तेजी से फैलाया जा सकता है, ऐसे समय में सही और गलत जानकारी के बीच अंतर समझना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

निजीकरण और उसके सकारात्मक-नकारात्मक प्रभाव

बढ़ते निजीकरण (Privatization) और उसके सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों पर भी लेखक ने विस्तारपूर्वक विचार किया है।

लेखक यह सवाल उठाते हैं कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी संस्थानों और उनकी कार्यशैली को बेहतर बनाना उचित है या फिर उन्हें निजी क्षेत्र को सौंपना। इस विषय पर लेखक ने अपने विचारों के माध्यम से पाठक को सोचने का अवसर दिया है।

आजादी और अधिकारों का दुरुपयोग

आजादी क्या है? इस सवाल को भी पुस्तक में एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में उठाया गया है।

वर्तमान समय में स्वतंत्रता और अधिकारों के दुरुपयोग से जुड़े कुछ उदाहरणों के माध्यम से लेखक ने इस विषय को समझाने का प्रयास किया है। आलेख को पढ़ते हुए पाठक कई जगह अपने आसपास की परिस्थितियों से इसकी समानता महसूस कर सकता है।

किसान और मजदूरों का संघर्ष

पुस्तक में गरीबी में जीवन जी रहे किसानों और मजदूरों के संघर्ष को भी प्रमुखता से उठाया गया है।

एक किसान और मजदूर वर्तमान समय में किन परिस्थितियों और परेशानियों से गुजर रहे हैं, इसे लेखक ने काफी सहज तरीके से समझाने का प्रयास किया है।

किसान की समस्याओं पर चर्चा करते हुए लेखक ने टैक्स व्यवस्था, सरकारी नीतियों और कृषि क्षेत्र में निवेश जैसे मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। लेखक के अनुसार इन परिस्थितियों का असर किसान के आर्थिक विकास पर पड़ा है।

आज भी अनेक किसान अपने बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी या परिवार के इलाज जैसी जरूरतों के लिए कर्ज लेने को मजबूर होते हैं। छोटे किसान मेहनत-मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं, जबकि जिन किसानों के पास जमीन है, वे कई बार अपनी जमीन गिरवी रखकर बैंक से कर्ज लेते हैं।

यह आलेख किसान की आर्थिक स्थिति और उसके संघर्ष को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण सवाल सामने रखता है।

रोजगार और सरकारी नौकरी

रोजगार जैसे गंभीर मुद्दे को भी इस पुस्तक में प्रमुख स्थान दिया गया है।

लेखक सवाल उठाते हैं कि क्या वर्तमान समय में रोजगार के मुद्दे को धीरे-धीरे हाशिये पर ले जाया जा रहा है। लेखक के अनुसार युवा देश की किस्मत और भविष्य हैं और उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ स्थायी रोजगार के अवसर भी मिलने चाहिए।

सरकारी नौकरी देश के अनेक युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेखक ने इसे एक कुएं के उदाहरण से समझाया है, जहां हर प्यासा अपनी प्यास बुझाने के लिए पहुंचना चाहता है।

लेकिन लेखक यह भी बताते हैं कि केवल सरकार की ओर से अवसर उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। युवाओं को भी रोजगार और सरकारी नौकरी के लिए सही दिशा में तैयारी और मेहनत करनी होगी।

यानी रोजगार के लिए सरकार और युवाओं दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

पत्रकारिता, शिक्षा और Social Media

पुस्तक के अन्य आलेखों में कमजोर पड़ती पत्रकारिता, निजीकरण और उसके परिणाम, मतदाता के रूप में भारतीय नागरिक, नैतिक मूल्यों का हनन, महंगी शिक्षा, मानवीय चेतना के विकास, तकनीकी शिक्षा और Social Media जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई है।

इन सभी विषयों की खास बात यह है कि ये हमारे दैनिक जीवन से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक की खास बातें

इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात यह लगी कि इसके आलेख बहुत ज्यादा लंबे नहीं हैं। इसलिए पढ़ते समय बोरियत महसूस नहीं होती।

आलेखों की भाषा और विषय-वस्तु ऐसी है कि पाठक कई जगह इन्हें अपने जीवन और आसपास की परिस्थितियों से जोड़कर देख सकता है।

पुस्तक केवल बड़ों के लिए ही नहीं है। छात्रों के लिए भी इसमें कई ऐसे विषय हैं जिन पर वे सोच सकते हैं और अपने आसपास की सामाजिक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक की कमी

सामाजिक सरोकार से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों की कमी पुस्तक में जरूर महसूस होती है।

उम्मीद की जा सकती है कि पुस्तक के अगले संस्करण में लेखक ऐसे कुछ और सामाजिक मुद्दों को शामिल करेंगे और उन पर अपने विचार पाठकों के सामने रखेंगे।

तेरे मेरे इर्द गिर्द किताब किसे पढ़नी चाहिए?

अगर आपको सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, रोजगार, किसान, पत्रकारिता, निजीकरण और वर्तमान समय की समस्याओं से जुड़े विषयों पर पढ़ना पसंद है, तो यह पुस्तक आपके लिए उपयोगी हो सकती है।

खासकर छात्रों और उन पाठकों के लिए यह पुस्तक रुचिकर हो सकती है जो अपने आसपास होने वाली सामाजिक घटनाओं और समस्याओं को अलग दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक पर मेरी राय

तेरे मेरे इर्द गिर्द की सबसे खास बात यह है कि पुस्तक में उठाए गए कई मुद्दे पाठक को अपने जीवन से जुड़े हुए महसूस होते हैं।

नाम की तरह ही ये मुद्दे हमारे इर्द-गिर्द मौजूद हैं। कई समस्याओं का समाधान कहीं न कहीं हम भी तलाश रहे हैं या तलाशना चाहते हैं।

एक स्वस्थ समाज और बेहतर जीवन के लिए ऐसे विषयों पर चिंतन और विचार करना जरूरी है। इन समस्याओं को समझने के साथ-साथ उनके उचित समाधान की दिशा में उपयोगी कदम उठाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मेरी नजर में पुस्तक के छोटे-छोटे और विषय-केंद्रित आलेख इसकी सबसे अच्छी विशेषताओं में से एक हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक की जानकारी

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक कहां से खरीदें?

तेरे मेरे इर्द गिर्द (Samsamyik Muddon Par Vicharon Ki Shrinkhala) पुस्तक को Amazon से खरीदा जा सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक के लेखक कौन हैं?

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक के लेखक मनोज कुमार हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक किस विषय पर है?

यह पुस्तक सामाजिक सरोकार और समसामयिक मुद्दों से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित आलेखों का संग्रह है। इसमें शिक्षा, रोजगार, किसान और मजदूर, निजीकरण, पत्रकारिता, Fake News, तकनीकी शिक्षा और Social Media जैसे विषय शामिल हैं।

तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक की कीमत कितनी है?

पुस्तक में दी गई जानकारी के अनुसार इसकी कीमत ₹250 है।

क्या तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक छात्रों के लिए उपयोगी है?

हां। पुस्तक में शिक्षा, रोजगार, Social Media और समाज से जुड़े कई ऐसे विषय हैं जिन पर छात्र भी विचार कर सकते हैं। छोटे और रोचक आलेख इसे छात्रों के लिए पढ़ने योग्य बनाते हैं।

क्या तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक पढ़ने लायक है?

अगर आप सामाजिक और समसामयिक मुद्दों पर आधारित हिंदी पुस्तकों में रुचि रखते हैं, तो इस पुस्तक का Review और पुस्तक दोनों आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।

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