अगर आप अक्सर चिंता करते हैं, छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान रहते हैं या अपनी energy ऐसी चीजों पर खर्च कर देते हैं जिन पर आपका कोई control नहीं है, तो The Subtle Art of Not Giving a F*ck आपके लिए एक interesting किताब हो सकती है।
Mark Manson की यह किताब हमें यह समझाने की कोशिश करती है कि जिंदगी में हर चीज की परवाह करना जरूरी नहीं है।
हमारे पास समय, energy और attention सीमित हैं। इसलिए हमें यह तय करना चाहिए कि किन चीजों की परवाह करनी है और किन चीजों को जाने देना है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हमें किसी चीज की परवाह ही नहीं करनी चाहिए।
बल्कि इसका मतलब है कि हमें अपनी energy उन चीजों पर लगानी चाहिए जो हमारे लिए वास्तव में important हैं।
यही इस किताब का सबसे बड़ा विचार है।
इस The Subtle Art of Not Giving a F*ck Book Summary in Hindi में हम किताब की महत्वपूर्ण सीखों को आसान भाषा में समझेंगे।
The Subtle Art of Not Giving a F*ck का असली मतलब क्या है?
इस किताब के नाम को सुनकर कई लोगों को लगता है कि इसका मतलब है:
“मुझे किसी चीज से कोई फर्क नहीं पड़ता।”
लेकिन Mark Manson का point इससे बिल्कुल अलग है।
उनके अनुसार समस्या यह नहीं है कि हम बहुत ज्यादा चीजों की परवाह करते हैं।
समस्या यह है कि हम कई बार गलत चीजों की परवाह करते हैं।
हम सोचते रहते हैं:
- लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे?
- दूसरे मुझसे ज्यादा सफल क्यों हैं?
- मुझे हर समय खुश क्यों नहीं रहना चाहिए?
- अगर मैं fail हो गया तो क्या होगा?
- लोग मेरी तारीफ क्यों नहीं कर रहे?
- मेरी जिंदगी में problems क्यों हैं?
इन सवालों पर लगातार energy खर्च करने से हमारी attention उन चीजों से हट सकती है जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए Not Giving a F*ck का मतलब indifferent होना नहीं है।
इसका मतलब है कि आप consciously तय करें कि आपकी energy और attention किन चीजों के लिए है।
Mark Manson भी अपनी explanation में इसी बात पर जोर देते हैं कि strength और integrity का एक हिस्सा यह समझना है कि किन चीजों को importance देनी है।
Chapter 1. कोशिश मत कीजिए
इस chapter में Charles Bukowski की कहानी से एक महत्वपूर्ण lesson समझाया गया है।
Charles Bukowski एक writer थे। शुरुआत में उनके काम को publishers और newspapers से rejection मिला।
लंबे समय तक उन्हें सफलता नहीं मिली।
उनकी जिंदगी में शराब और जुए जैसी समस्याएं भी थीं।
फिर एक छोटे publishing house ने उनके writing work में interest दिखाया।
इसके बाद Bukowski को अपनी writing को आगे बढ़ाने का मौका मिला और उन्होंने किताबें लिखना जारी रखा।
उनकी कब्र पर लिखा “Don’t Try” वाक्य इस chapter की central idea से जुड़ा है।
यह सुनने में अजीब लगता है।
आखिर self-help की ज्यादातर किताबें हमें यही तो कहती हैं कि कोशिश करते रहो, हार मत मानो।
तो फिर “Don’t Try” क्यों?
यहां बात कोशिश बिल्कुल न करने की नहीं है।
यह उस obsession के बारे में है जिसमें हम खुद को लगातार prove करने की कोशिश करते रहते हैं।
कई बार हम अपनी जिंदगी को accept करने के बजाय उसे हर समय अपनी इच्छा के अनुसार बनाने की कोशिश करते रहते हैं।
जिंदगी हमेशा Perfect नहीं होगी
हम सभी चाहते हैं कि:
- हमारे साथ अच्छी चीजें हों
- हम हमेशा खुश रहें
- लोग हमें पसंद करें
- हमारा career अच्छा चले
- हमारे relationships अच्छे रहें
- हमारी problems जल्दी खत्म हो जाएं
लेकिन जिंदगी इस तरह नहीं चलती।
कभी success मिलेगी।
कभी failure मिलेगा।
कभी लोग हमारी तारीफ करेंगे।
कभी criticism मिलेगा।
कभी हम खुश होंगे।
कभी परेशान होंगे।
इसलिए negative experiences को जिंदगी से पूरी तरह हटाना संभव नहीं है।
Negative experiences को स्वीकार करना weakness नहीं है।
कई बार यही acceptance हमें situation को बेहतर तरीके से handle करने में मदद करती है।
Problems से बचने के बजाय बेहतर Problems चुनें
अगर आपकी जिंदगी में कोई problem नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी जिंदगी perfect है।
अक्सर एक problem खत्म होती है और दूसरी शुरू हो जाती है।
Student की problem exams हो सकती है।
Job करने वाले की problem deadlines हो सकती हैं।
Business owner की problem customers और cash flow हो सकती है।
Family life में भी अलग तरह की problems होती हैं।
इसलिए जिंदगी का उद्देश्य problems को पूरी तरह खत्म करना नहीं हो सकता।
Mark Manson के अनुसार बेहतर approach यह है कि हम बेहतर problems चुनना सीखें।
उनकी official book description भी इसी विचार को सामने रखती है कि life problems से छुटकारा पाने के बारे में नहीं, बल्कि बेहतर problems चुनने और failure को बेहतर तरीके से handle करने के बारे में है।
Pain हमेशा बुरा नहीं होता
उदाहरण के लिए जब आप gym में workout करते हैं, तो muscles में pain और fatigue हो सकती है।
लेकिन यही कठिन process धीरे-धीरे strength और fitness बनाने में मदद कर सकती है।
इसी तरह किसी skill को सीखने में frustration हो सकता है।
Exam की preparation मुश्किल हो सकती है।
Business शुरू करना stressful हो सकता है।
लेकिन हर discomfort को avoid करना भी सही solution नहीं है।
कई बार meaningful result पाने के लिए हमें किसी न किसी तरह की कठिनाई स्वीकार करनी पड़ती है।
हर परेशानी को Ignore करना सही नहीं है
Original article में यह idea आता है कि हमें अपनी problems की परवाह नहीं करनी चाहिए।
लेकिन यहां एक important distinction समझना जरूरी है।
Problem को ignore करना और problem को accept करके उसका solution ढूंढना दो अलग चीजें हैं।
अगर किसी को financial problem है, तो उसे ignore करने के बजाय financial situation को समझना चाहिए।
अगर relationship में problem है, तो उसे दबाने के बजाय बात करनी चाहिए।
अगर health या career से जुड़ी परेशानी है, तो appropriate action लेना चाहिए।
इसलिए सही lesson है:
हर problem पर emotional energy waste मत कीजिए, लेकिन जरूरी problems से भागिए भी मत।
Chapter 2. खुशियों के पीछे मत भागिए
दुनिया में ज्यादातर लोग खुश रहना चाहते हैं।
यह बिल्कुल natural है।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हम यह मान लेते हैं कि:
“जब मेरी जिंदगी में सब कुछ सही हो जाएगा, तब मैं खुश रहूंगा।”
फिर हम happiness को future में ढूंढने लगते हैं।
“जब मेरी salary बढ़ जाएगी तब मैं खुश रहूंगा।”
“जब मेरा अपना घर होगा तब मैं खुश रहूंगा।”
“जब मैं successful हो जाऊंगा तब मैं खुश रहूंगा।”
“जब मेरी सारी problems खत्म हो जाएंगी तब मैं खुश रहूंगा।”
लेकिन जिंदगी में problems पूरी तरह खत्म नहीं होतीं।
इसलिए अगर आपकी happiness केवल future conditions पर depend करती है, तो satisfaction लगातार दूर जा सकती है।
बुद्ध और सुख की कहानी
Original article में नेपाल के एक राजा और उनके बेटे की कहानी बताई गई है।
यह कहानी broadly Siddhartha Gautama से जुड़ी उस प्रसिद्ध narrative की ओर इशारा करती है जिसमें राजकुमार को दुख, बीमारी, बुढ़ापे और मृत्यु का अनुभव होता है और वह जीवन के अर्थ की खोज में निकलते हैं।
इस कहानी का lesson यह है कि इंसान को केवल comfort में रखने से जिंदगी की पूरी reality नहीं समझी जा सकती।
दुख भी जीवन का हिस्सा है।
Happiness का कोई Permanent Formula नहीं
अमीर व्यक्ति पैसे की चिंता कर सकता है।
गरीब व्यक्ति पैसों की कमी की चिंता कर सकता है।
एक successful व्यक्ति अपनी reputation खोने से डर सकता है।
दूसरा व्यक्ति success पाने के लिए परेशान हो सकता है।
इसलिए केवल external conditions को happiness का permanent solution मानना सही नहीं है।
Mark Manson की thinking में भी happiness को लगातार chase करने के बजाय problems और values को बेहतर तरीके से समझने पर जोर दिया गया है।
Struggle भी जिंदगी का हिस्सा है
हम अक्सर struggle से बचना चाहते हैं।
लेकिन हर meaningful achievement के पीछे किसी न किसी तरह का effort होता है।
अगर आप अच्छी body चाहते हैं, तो exercise करनी होगी।
अगर आप अच्छी किताब लिखना चाहते हैं, तो लिखना होगा।
अगर आप कोई नई skill सीखना चाहते हैं, तो practice करनी होगी।
अगर आप business बनाना चाहते हैं, तो uncertainty का सामना करना होगा।
इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए:
“मैं struggle से कैसे बचूं?”
बल्कि:
“मैं किस तरह का struggle चुनना चाहता हूं?”
यही सोच जिंदगी के प्रति हमारा नजरिया बदल सकती है।
Chapter 3. आप औरों से अलग नहीं हैं
इस chapter में Jim नाम के व्यक्ति का example दिया गया है।
Jim के दिमाग में हमेशा business ideas आते रहते थे।
वह अपने ideas को लेकर बहुत confident था।
हालांकि उसके कई ideas सफल नहीं हुए थे, फिर भी वह लोगों को अपने ideas के बारे में इस तरह बताता था कि लोग उससे प्रभावित हो जाते थे।
यह example हमें एक interesting बात समझाता है।
Self-confidence और actual ability हमेशा एक ही चीज नहीं होते।
कभी-कभी इंसान खुद को दूसरों से बहुत ज्यादा अलग या special समझने लगता है।
क्या हम सभी Special हैं?
हम सभी की personality अलग हो सकती है।
हमारे experiences अलग हो सकते हैं।
हमारी abilities अलग हो सकती हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमें खुद को दूसरों से ऊपर समझना चाहिए।
कई बार खुद को extraordinary मानने की जरूरत हमें improvement से दूर कर सकती है।
इसके विपरीत अगर हम यह स्वीकार करें कि:
“मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है।”
तो learning और improvement के लिए जगह बनती है।
Failure सबके जीवन का हिस्सा है
कोई भी व्यक्ति हर काम में सफल नहीं होता।
हर successful व्यक्ति ने भी failure का सामना किया है।
किसी business idea का fail होना।
किसी exam में कम marks आना।
Job interview में reject होना।
Relationship का खत्म होना।
इन सभी experiences से हमें कुछ सीखने का अवसर मिल सकता है।
इसलिए failure को अपनी पूरी identity मत बनाइए।
Failure एक event हो सकता है, आपकी पूरी पहचान नहीं।
Average होना कोई बुरी बात नहीं
Original article में एक interesting idea दिया गया है कि अगर हर कोई unique है, तो “unique” होने का मतलब भी कुछ हद तक सामान्य हो जाता है।
यह बात हमें humility सिखाती है।
हमें हर समय यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि हम दूसरों से बेहतर हैं।
कई बार अपने आपको सामान्य मानना भी freedom देता है।
फिर हम comparison के pressure से बाहर निकलकर अपनी actual growth पर ध्यान दे सकते हैं।
Chapter 4. दुख की कीमत
खुद को समझना आसान काम नहीं है।
कई बार हमें लगता है कि हम अपनी feelings को अच्छी तरह जानते हैं।
लेकिन जब हम किसी difficult situation में होते हैं, तब हमें अपने बारे में नई बातें पता चलती हैं।
Original article में इसे प्याज की layers के उदाहरण से समझाया गया है।
एक layer हटाने पर दूसरी layer सामने आती है।
इसी तरह:
“मैं दुखी हूं।”
केवल इतना समझ लेना पर्याप्त नहीं हो सकता।
आपको यह भी पूछना पड़ सकता है:
“मैं दुखी क्यों हूं?”
फिर:
“इसका असली कारण क्या है?”
और उसके बाद:
“मैं इस situation में क्या control कर सकता हूं?”
अपनी Emotions को समझना
हमारी emotions हमारे decisions को प्रभावित करती हैं।
कई बार हम गुस्से में decision लेते हैं।
कभी डर के कारण कोई opportunity छोड़ देते हैं।
कभी comparison के कारण खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
इसलिए emotions को suppress करने की बजाय उन्हें समझना ज्यादा useful हो सकता है।
लेकिन emotions को समझने का मतलब यह भी नहीं है कि हर feeling के अनुसार action लेना जरूरी है।
Feeling एक signal हो सकती है, लेकिन हर signal पर तुरंत action लेना जरूरी नहीं।
Chapter 5. आप हमेशा खुद चुनते हैं
इस chapter में responsibility का concept बहुत important है।
Original article में William James की कहानी के जरिए यह idea समझाया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण distinction है:
किसी घटना के लिए responsible होना और उसके बाद अपनी response के लिए responsible होना एक ही बात नहीं है।
आपके साथ क्या हुआ, यह हमेशा आपके control में नहीं होता।
लेकिन उसके बाद आप क्या करते हैं, उस पर आपका कुछ control हो सकता है।
Mark Manson भी responsibility को इसी तरह explain करते हैं: कोई घटना आपके साथ होना आपकी गलती नहीं हो सकती, लेकिन उस situation पर आप कैसे respond करते हैं, उसकी responsibility आपकी हो सकती है।
Responsibility का मतलब खुद को दोष देना नहीं है
मान लीजिए किसी ने आपके साथ गलत किया।
इसका मतलब यह नहीं कि गलती आपकी थी।
लेकिन अगर आप उस घटना के बाद अपनी पूरी जिंदगी उसी व्यक्ति को blame करते रहते हैं, तो आपकी energy उसी situation में फंसी रह सकती है।
Responsibility लेने का मतलब है:
“अब मैं इस situation में क्या कर सकता हूं?”
यह सवाल हमें victim mindset से action की तरफ ले जा सकता है।
आप हर चीज Control नहीं कर सकते
हम अपनी जिंदगी में बहुत सारी चीजों को control नहीं कर सकते।
हम control नहीं कर सकते:
- दूसरे लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं
- दूसरा व्यक्ति क्या decision लेगा
- past में क्या हुआ
- हर external situation
- हर outcome
लेकिन हम अपनी तरफ से कुछ चीजों पर ध्यान दे सकते हैं:
- हमारा response
- हमारा effort
- हमारे decisions
- हमारी boundaries
- हमारी priorities
- हमारी values
यही distinction बहुत महत्वपूर्ण है।
किन चीजों की परवाह करनी चाहिए?
अब किताब के title का सबसे important सवाल सामने आता है:
अगर हमें हर चीज की परवाह नहीं करनी चाहिए, तो फिर किन चीजों की परवाह करनी चाहिए?
इसका जवाब आपकी values में छिपा है।
Mark Manson के अनुसार values यह तय करती हैं कि हम किस दिशा में अपना जीवन ले जाना चाहते हैं। उन्होंने अपनी writing में good values को evidence-based, constructive और controllable बताया है।
उदाहरण के लिए:
अगर आपके लिए family important है, तो family के लिए समय देना meaningful हो सकता है।
अगर आपके लिए health important है, तो exercise और healthy food पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है।
अगर learning आपकी value है, तो रोज कुछ नया सीखना important हो सकता है।
अगर honesty आपकी value है, तो difficult situation में भी ईमानदार रहना आपके लिए important हो सकता है।
इसलिए दूसरों की priorities देखकर अपनी life decide करने के बजाय अपनी values को समझना जरूरी है।
अपनी Energy सही जगह लगाइए
हमारे पास दिन में सीमित समय और attention है।
अगर आप अपना पूरा दिन:
- दूसरों की opinions
- social comparison
- छोटी criticisms
- past mistakes
- unnecessary arguments
में खर्च कर देंगे, तो important चीजों के लिए energy कम बच सकती है।
इसलिए खुद से पूछिए:
“क्या यह चीज वास्तव में मेरे लिए important है?”
अगर answer नहीं है, तो उसे जाने देना सीखना भी जरूरी है।
यही इस किताब के title का practical meaning है।
Happiness के बजाय Meaning पर ध्यान दें
हम अक्सर पूछते हैं:
“मैं खुश कैसे रहूं?”
लेकिन कई बार बेहतर सवाल हो सकता है:
“मेरी जिंदगी में क्या meaningful है?”
क्योंकि meaningful काम हमेशा comfortable नहीं होता।
एक parent अपने बच्चे के लिए बहुत मेहनत करता है।
एक student अपने goal के लिए लंबे समय तक पढ़ाई करता है।
एक entrepreneur business बनाने के लिए uncertainty का सामना करता है।
एक athlete training के दौरान कठिन exercise करता है।
इन सबमें struggle हो सकता है।
लेकिन वही struggle उनके लिए meaningful भी हो सकता है।
इसलिए हर uncomfortable experience को bad मानना जरूरी नहीं है।
दूसरों की राय को कितना महत्व दें?
हम अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे।
यह डर कई decisions को प्रभावित करता है।
कपड़े कैसे पहनें?
क्या career चुनें?
क्या business शुरू करें?
क्या social media पर post करें?
क्या लोग हमें successful मानेंगे?
लेकिन reality यह है कि ज्यादातर लोग अपनी जिंदगी में इतने busy होते हैं कि वे हमें उतना नहीं सोच रहे होते जितना हम मान लेते हैं।
इसलिए हर decision केवल दूसरों की approval पाने के लिए लेना सही नहीं है।
इसका मतलब यह भी नहीं कि feedback को पूरी तरह ignore कर दें।
Useful criticism से सीखिए।
लेकिन हर opinion को अपनी identity मत बनाइए।
Failure से डरना क्यों कम करना चाहिए?
अगर आप failure से बचने की कोशिश करेंगे, तो कई बार आप कोशिश ही नहीं करेंगे।
नई skill सीखना।
Business शुरू करना।
Public speaking करना।
नई job के लिए apply करना।
किसी competition में हिस्सा लेना।
इन सभी में failure की संभावना हो सकती है।
लेकिन failure से बचने की कोशिश में opportunity भी छूट सकती है।
Mark Manson की book philosophy में भी failure को life का unavoidable हिस्सा मानकर उससे बेहतर तरीके से deal करने पर जोर है।
इसलिए failure को:
“मैं खराब हूं”
का proof मानने के बजाय:
“इस attempt से मुझे क्या सीख मिली?”
के रूप में देखना ज्यादा useful हो सकता है।
Death को याद करना भी जरूरी क्यों है?
किताब का अंतिम हिस्सा mortality और death की awareness से जुड़ा है।
यह विषय uncomfortable लग सकता है।
लेकिन अपनी mortality को समझना हमें यह सोचने पर मजबूर कर सकता है कि:
“मैं अपना limited समय किन चीजों पर खर्च कर रहा हूं?”
अगर समय सीमित है, तो हर छोटी बात पर परेशान होने का कोई खास फायदा नहीं।
तब family, relationships, purpose, meaningful work और अपनी values जैसी चीजें ज्यादा important दिखाई दे सकती हैं।
इस perspective से life की priorities clearer हो सकती हैं।
The Subtle Art of Not Giving a F*ck से मिलने वाली मुख्य सीख
पूरी किताब की learning को आसान भाषा में समझें तो:
- हर चीज की परवाह करना जरूरी नहीं है।
- सही चीजों की परवाह करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- Not Giving a F*ck का मतलब indifferent होना नहीं है।
- आपकी time और energy सीमित है।
- हर problem को avoid नहीं किया जा सकता।
- बेहतर problems चुनना सीखिए।
- Happiness को लगातार chase करने के बजाय meaningful life पर ध्यान दें।
- Pain और struggle हमेशा बेकार नहीं होते।
- Failure life का हिस्सा है।
- Failure को अपनी identity मत बनाइए।
- दूसरों से लगातार comparison करना जरूरी नहीं है।
- Average होना कोई शर्म की बात नहीं है।
- अपनी emotions को समझना जरूरी है।
- हर emotion के अनुसार तुरंत action लेना जरूरी नहीं है।
- अपनी response की responsibility लेना सीखिए।
- आप हर situation को control नहीं कर सकते।
- अपनी values को समझिए।
- दूसरों की opinion को जरूरत से ज्यादा importance मत दीजिए।
- अपनी limited attention को meaningful चीजों पर लगाइए।
- जिंदगी की limitations को स्वीकार करना भी maturity का हिस्सा है।
इस किताब को अपनी जिंदगी में कैसे लागू करें?
इस किताब की learning को केवल पढ़ना काफी नहीं है।
इसे daily life में apply करने के लिए आप कुछ simple questions खुद से पूछ सकते हैं।
सवाल 1: क्या यह चीज वास्तव में important है?
जब कोई छोटी बात आपको परेशान करे, खुद से पूछिए:
“क्या मैं एक महीने बाद भी इस बात की चिंता करूंगा?”
अगर answer नहीं है, तो शायद उस पर इतनी energy खर्च करने की जरूरत नहीं है।
सवाल 2: क्या यह मेरे control में है?
अगर कोई चीज आपके control में नहीं है, तो उसके बारे में लगातार चिंता करना समस्या को solve नहीं करेगा।
इसके बजाय पूछिए:
“जो मेरे control में है, मैं उसके लिए क्या कर सकता हूं?”
सवाल 3: मेरी priorities क्या हैं?
अपनी top priorities लिखिए।
जैसे:
- Family
- Health
- Career
- Learning
- Financial Security
फिर देखिए कि आपका समय वास्तव में इन चीजों पर जा रहा है या नहीं।
सवाल 4: मैं किस तरह की problems चुनना चाहता हूं?
अगर आप fitness चाहते हैं, तो workout की कठिनाई स्वीकार करनी होगी।
अगर आप financial freedom चाहते हैं, तो saving और discipline की जरूरत होगी।
अगर आप successful career चाहते हैं, तो learning और competition का सामना करना होगा।
हर अच्छी चीज के साथ कुछ problems भी आती हैं।
इसलिए सही problems चुनना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
The Subtle Art of Not Giving a F*ck का सबसे बड़ा lesson यह नहीं है कि आपको किसी चीज की परवाह नहीं करनी चाहिए।
इसका असली lesson है:
अपनी energy और attention को उन चीजों के लिए बचाकर रखें जो वास्तव में आपके लिए important हैं।
आप हर चीज control नहीं कर सकते।
हर व्यक्ति को खुश नहीं कर सकते।
हर failure से बच नहीं सकते।
हर problem को खत्म नहीं कर सकते।
और जिंदगी को हमेशा perfect नहीं बना सकते।
लेकिन आप यह तय कर सकते हैं कि:
आप किस चीज की परवाह करेंगे।
आप किस problem का सामना करेंगे।
आप किस value के अनुसार decisions लेंगे।
और मुश्किल situation में किस तरह respond करेंगे।
यही सोच जिंदगी को ज्यादा practical तरीके से देखने में मदद कर सकती है।
इसलिए अगली बार जब कोई छोटी बात आपको बहुत परेशान करे, तो खुद से एक सवाल पूछिए:
“क्या यह चीज मेरे लिए इतनी important है कि मुझे अपनी time और energy इस पर खर्च करनी चाहिए?”
अगर जवाब नहीं है, तो उसे जाने देना सीखिए।
और अगर जवाब हां है, तो फिर पूरी जिम्मेदारी के साथ उस चीज पर काम कीजिए।
हर चीज की परवाह मत कीजिए। सही चीजों की परवाह कीजिए।
अगर आपको The Subtle Art of Not Giving a F*ck Book Summary in Hindi पसंद आई हो, तो नीचे comment करके बताइए कि इस किताब की कौन-सी सीख आपको सबसे ज्यादा useful लगी।
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