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नींद भी कीमती हैं तभी उसे सोना कहते हैं

top 10 sleeping pills in hindi

नींद इन्सानों के हक में कुदरत का वो अनमोल उपहार है जिसे पाकर इंसान शान्ति, सुकून और इत्मीनान की घाटियों में अपने सपनों के सहारे सफर पर निकल पड़ता है। नींद से दिल को राहत और शरीर को शान्ति मिलती है जिससे प्रतिरक्षी तंत्र भी मजबूत होता है और बहुत सी बीमारियों से हमें मुक्ति भी मिलती है।

जब इन्सान मानसिक या शारीरिक तौर पर बीमार होता है तो इसका असर सबसे पहले उसकी नींद पर पड़ता है। बीमारी के आलम में उसकी रातों की नींद उड़ जाती है, दिन का चैन लुट जाता है। नींद न आने की सूरत में हम घबराहट और बैचैनी का भी शिकार हो सकते हैं।

हमारे विचार में नींद दुनिया में शान्ति और सुकून पाने का सबसे जबरदस्त माध्यम है जिसके अभाव में लाखों की दौलत और अनेक संसाधन मौजूद होने के बाद भी इन्सान के जीवन के सारे स्वाद फीके पड़ जाते हैं।

आइए जानते हैं कि इस बहुमूल्य पूंजी के खो जाने के बाद किन उपायों के सहारे उसे दोबारा वापस पाया जा सकता है

1. सोने का नियमित समय निर्धारित करें

सोने का असर सीधे तौर पर सजीवों के प्रतिरक्षी तंत्र (Metobolism) पर पड़ता है जिससे उनके शरीर को संरचना, मांसपेशियों के निर्माण और शरीर के विकारों से मुक्ति में मदद मिलती है।

नींद से बाहरी व जहरीले तत्वों यानि बैक्टीरिया, वायरस और रोगजनक तत्त्वों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता भी मिलती है जिससे कमज़ोरी और सुस्ती से निजात मिलती है और शरीर को एक अनोखी ताकत एवं स्फूर्ति का एहसास होता है।

इसलिए हर व्यक्ति को निद्रा रुपी इस अनमोल रत्न को पाने का एक निर्धारित समय तय कर लेना चाहिए क्योंकि आपके शरीर में कृत्रिम (Artificial) घड़ियों की तरह एक जैविक घड़ी (Biological Clock) भी कार्य करती है जो शरीर के हरेक अंग (Organ) और ऊतक (tissue) में कार्यरत रह कर शारीरिक क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करती है।

यह इंसान की आदतों के आधार पर भी काम करती है। अगर आप समय बदल कर एक दो रोज पहले ही सो जाते हैं तो तीसरे दिन इसी जैविक घड़ी के चलते आपकी आंख रात में कुछ पहले ही लगने लगती है जिसके नतीजे में आप सुबह जल्दी उठ जाते हैं।

प्राकृतिक तौर पर रात्रि सोने के लिए ही खास बनाई गई है, इसलिए आप अगर रात को पहले पहल सोने का प्रयास करते हैं तो दूसरे लोगों के मुकाबले आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य काफी हद तक बेहतर होगा और आप स्वयं में चुस्ती, फुर्ती और सकारात्मकता का अनोखा एहसास करेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार रात के पहले पहल सोना इंसानी सेहत के ऐतबार से सबसे लाभदायक सिद्ध होता है जिससे मानव शरीर में बेहतर बदलाव होते हैं जिससे वह स्वयं के स्वास्थ्य में कुछ ऐसे आश्चर्यजनक और विचित्र बदलाव महसूस करता है जिसकी देर से जगने वाले लोगों को भनक तक नहीं लगती।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Spiritual Perspective) से देखा जाए तो सुबह देर से उठना राक्षसों की फितरत है और ऐसे लोग जो सूर्योदय के समय सूर्य का चेहरा तक कभी नहीं देखते, उनके सिर पर शैतान सवार रहता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अगर देखा जाए तो सुबह देर से उठना शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक (Emotional) बीमारियों को दावत देकर किसी शख्स को चिड़चिड़ा और गुस्सैल बना देता है। इसलिए अगर आपको अपनी मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की चिंता है तो हर हाल में सुबह का सूरज जल्दी देखने का प्रयास करें।

2. अपने बिस्तर को झाड़ कर सोएं

जब भी आप गहरी और शांतिपूर्ण नींद की आशा लिए बिस्तर पर जाएं तो सबसे पहले उसे अच्छी तरह किसी कपड़े से साफ कर लें। क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि आपकी अनुपस्थिति में बिस्तर पर कोई जहरीला कीड़ा बैठ गया हो।

इसके अलावा यह भी हो सकता है कि आपके बिस्तर पर गर्दो-गुबार(धूल और मिट्टी) बैठ गई हो जिससे आपकी नींद में व्यवधान पैदा हो सकता है और यह व्यवधान उस समय हो जब आप गहरी नींद या मीठे सपनों के संसार में कहीं गुम हों। बिस्तर साफ कर सोने का फायदा ये भी है कि सफाई की व्यवस्था हमेशा आपके दिल और दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और जब दिमाग सही ढंग से काम करता है तो इंसान को नींद भी गहरी आती है।

3. एलईडी बल्ब को बुझा दें

जब रात अपने शबाब (Peak) पर पहुंच जाती है तो हमारे मस्तिष्क से प्राकृतिक रूप से मेलोटोनिन नामक हार्मोन का स्त्राव होता है जिससे हम पर नींद का गलबा महसूस होता है। इस हार्मोन का स्त्राव सूर्य और कृत्रिम प्रकाश में कम हो जाता है जिससे हमें नींद की कमी की शिकायत हो सकती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि सोने से पहले अपने कमरे की रौशनी को कम या मद्धम कर लिया जाए।

4. ईश्वर के एहसान को याद करें

जब कभी हम ईश्वर को याद करते हैं तो हमारे हृदय और मस्तिष्क से चिंता और प्रतिकूल विचारों के बादल छंटने लगते हैं। उस समय हम अपने भीतर शान्ति, सुकून और शक्ति की अनुभूति करते हैं। दिन भर में जो छोटी या बड़ी उपलब्धि या कामयाबी आपने हासिल की हो, बिस्तर पर जाने के बाद उन्हें याद कर खुदा के प्रति अपनी कृतज्ञता और धन्यवाद को ज़ाहिर करना कभी ना भूलें।

क्योंकि ईश्वर का इंसानों से वादा यह भी है कि जो कोई उसके एहसान मानकर उसके प्रति समर्पित और आभारी (Grateful) रहेगा, वह उसके सांसारिक सुख, समृद्धि और दूसरे अति आवश्यक संसाधनों में वृद्धि करेगा।

सब जानते हैं कि नींद सुकून की अलामत (Sign) है और जहां नींद ना हो, वहां सुकून छिन जाता है।

5. नियमित रुप से व्यायाम करें

हर रोज़ व्यायाम की आदत से आपको कभी थकान या सुस्ती का एहसास नहीं होगा। व्यायाम से जल्दी जल्दी बीमार पड़ने वाले लोगों को भी राहत मिलती है। व्यायाम के सहारे दवाओं से मुक्ति मिलना सम्भव है।

इससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। व्यायाम तनाव को दूर रखने में सहायक सिद्ध होता है जिससे नींद भी गहरी होती है। हल्के व्यायामों में तैराकी, उछल कूद, पैदल चलना आदि शामिल हैं जिससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

6. चाय या कॉफी से दूरी बनाएं

आजकल के माहौल और परिवेश में जहां भी जाओ, आपके दोस्त या रिश्तेदार आपको किसी न किसी तरह चाय या कॉफी पीने पर बाध्य कर ही देते हैं।

आप संकोच महसूस कर उनकी दावत का इंकार नहीं कर पाते और परिणामस्वरूप दिनभर में भारी मात्रा में चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन नामक पदार्थ अपने शरीर में जमा कर लेते हैं।

हालांकि कम मात्रा में ली गई चाय या काफी आपके स्वास्थ्य के लिए उतनी हानिकारक नहीं होती लेकिन एक ऐसे परिवेश में जहां हर जगह चाय और कॉफी परोसने वाले दोस्त, रिश्तेदार और शुभचिंतक मौजूद हों तो इससे शरीर में केफीन की मात्रा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है जिसका सीधा असर विशेषज्ञों के अनुसार आपकी नींद पर पड़ता है।

कहा जाता है कि देर रात ली गई काफी या चाय की चुस्कियां आपकी की रातों की नींद हराम कर सकती हैं और पूरी रात आपको करवट बदल कर ही बितानी पड़ सकती है।

7. धूम्रपान से भी बचें

आजकल अधिकतर युवा सिगरेट और गुटखे के भयंकर परिणामों को जानबूझ कर भी फैशन और दिखावे के लिए इन चीजों का खुलेआम इस्तेमाल करते हैं जिसमें निकोटीन नामक एक ऐसा उत्तेजक पदार्थ मौजूद होता है जो स्वास्थ्य के ऐतबार से इंसानों का बड़ा दुश्मन स्वीकार किया जाता है।

ज्यादा मात्रा में यदि खून में निकोटीन शामिल हो जाए तो इससे नींद पर भी जबरदस्त बुरे प्रभाव पड़ते हैं जिससे नींद में बाधाएं उत्पन्न होती हैं और व्यक्ति रात में देर से नींद आने या बार बार नींद से जागने का शिकार हो जाता है।

8. सोने से पहले अध्ययन की आदत डालें

बहुत से लोग सुबह के अखबार पर एक नजर डालने के बाद अपने सभी कार्यों से फुरसत मिलने के बाद उसे रात में पढ़ते हैं। यह एक अच्छी आदत है क्योंकि रात्रि में कोई किताब या अखबार पढ़ने के दौरान शोरगुल न होने के कारण आपका ध्यान भंग नहीं होता और हर चीज आपके मस्तिष्क में अच्छी तरह बैठ जाती है।

कुछ देर तक अध्ययन के बाद अनर्गल विचार बंद हो जाते हैं और आपकी आंखें भी बंद होने लगती हैं।

9. रात में स्मार्टफोन से हो जाएं दूर

मस्तिष्क में मौजूद मेलोटॉनिन हार्मोन दिन और रात के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है और दिमाग को रौशनी के अभाव में यह बताता है कि वह अब शरीर के आराम करने और निद्रा की घाटियों में जाने का समय करीब आ चुका है।

चूंकि प्रकाश कम होने पर ही यह हार्मोन इंसानी दिमाग को नींद का ज्यादातर सिग्नल दिया करता है, इसलिए अधिकांश मामलों में हमें दिन में कम ही नींद लगा करती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप सोने से पूर्व अपने बिस्तर पर जाने के दौरान खुद को मोबाईल से अलग कर लें।

कुछ लोगों की आदत होती है कि वह जब सोने के लिए जाते हैं तो मोबाइल साथ ले जाकर उसे लेट कर चलाते हैं। सोकर मोबाइल चलाने से मस्तिष्क में मेलाटोनिन हार्मोन का स्त्राव सिर्फ इसलिए कम हो जाता है कि स्मार्टफोन की स्क्रीन से छिटक रहे प्रकाश से उसे दिन का एहसास होता है। मोबाइल स्क्रीन के प्रकाश की वजह से दिमाग समझता है कि अभी दिन बरकरार है।

परिणामस्वरूप, सोकर मोबाइल चलाने के दौरान कभी कभार आधी रात तो कभी उससे ज्यादा का समय गुजर जाता है। इस दौरान लोग करवट बदलते ही रह जाते हैं और उन्हें नींद का ऐहसास तक नहीं होता। इसलिए बेहतर होगा कि आज से आप दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ यह संकल्प लें कि रात में अपने स्मार्टफोन का साथ आपको हर हाल में छोड़ देना है क्योंकि इससे आपकी निद्रा पर बेहद बुरा असर पड़ता है जिसमें इंसानी सेहत का बहुतेरा राज़ छिपा हुआ है।

इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्टफोन से बहुत ज्यादा लगाव आपके स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे अगर काम भर इस्तमाल किया जाए तो हमारे लिए बेहतर रहेगा।

10. नींद की गोली कभी ना खाएं

चाहे जो स्थिति हो, इस बात का प्रण लें कि नींद के लिए आप कभी गोलियों (pills) का सहारा कभी नहीं लेंगे। क्योंकि यदि एक बार आपने इन गोलियों का सहारा लेकर आंख बंद करने का प्रयास किया तो इस बात की प्रबल संभावना है कि आपका दिमाग अगली रात फिर उन्हीं दवाओं की ज़ोरदार मांग कर बैठे और इस प्रकार आप बेचैन होकर इन गोलियों के आदी हो सकते हैं।

इसके अलावा विशेषज्ञों द्वारा इन गोलियों के बहुत से साइड इफेक्ट्स भी बताए जाते हैं जिससे बच कर रहने में ही हमारी भलाई है।

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