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चाणक्य नीति Chapter 2 In Hindi | Best Chanakya Quotes on Success

चाणक्य नीति Chapter 2 In Hindi

चाणक्य नीति Chapter 2 में आचार्य चाणक्य ने जीवन, परिवार, मित्रता, शिक्षा, धन, व्यवहार और सफलता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इन नीतियों में व्यक्ति को अपने जीवन में सही लोगों का चुनाव करने, अपनी योजनाओं को गुप्त रखने और लगातार सीखते रहने की प्रेरणा मिलती है।

“चाणक्य” भारत की प्राचीन राजनीतिक और आर्थिक परंपरा के प्रमुख नामों में से एक हैं। उन्हें चन्द्रगुप्त मौर्य का सलाहकार और महामंत्री माना जाता है। चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त नाम से भी जाना जाता है। उनके नाम से जुड़ी चाणक्य नीति में जीवन और व्यवहार से संबंधित अनेक बातें मिलती हैं।

चाणक्य से संबंधित अर्थशास्त्र में राजनीति, अर्थनीति, शासन और समाज से जुड़े विषयों का वर्णन मिलता है। वहीं चाणक्य नीति में सामान्य जीवन और व्यवहार को लेकर कई नीतियां बताई गई हैं।

इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 1 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति Chapter 2 के महत्वपूर्ण विचारों को सरल भाषा में।

चाणक्य नीति Chapter 2

1. स्त्रियों के स्वभाव को लेकर चाणक्य का कथन

चाणक्य नीति के इस अध्याय में स्त्रियों के स्वभाव को लेकर एक कठोर और सामान्यीकृत कथन दिया गया है। इसमें स्त्रियों के बारे में झूठ बोलने वाली, साहसी, छली-कपटी, धोखा देने वाली, मूर्खतापूर्ण बातें करने वाली, लोभी, अपवित्र और दया-माया से रहित जैसे गुण बताए गए हैं।

मूल विचार इस प्रकार है:

“स्त्रियां स्वभाव से ही झूठ बोलने वाली, अत्यंत साहसी, छली-कपटी, धोखा देने वाली, मूर्खतापूर्ण बातें करने वाली, अत्यन्त लोभी, अपवित्र और दया–माया से रहित होती हैं।”

Untruthfulness, rashness, guile, stupidity, avarice, uncleanliness and cruelty are a woman’s seven natural flaws.

ध्यान दें: यह प्राचीन ग्रंथ में दिया गया एक सामान्यीकृत कथन है। इसे आज के समय में सभी महिलाओं के बारे में प्रमाणित तथ्य या वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है।

2. भोजन, भोग और दान का अवसर मिलना

खाने-पीने के पदार्थों का आसानी से उपलब्ध होना और उन्हें ग्रहण करने की सामर्थ्य होना भी जीवन की एक सुविधा है। इसी प्रकार भोग-विलास की शक्ति के साथ अपनी पत्नी के साथ सुखी जीवन जीना और धन-संपत्ति होने पर उसका उपयोग करने के साथ दान करने की प्रवृत्ति होना भी सौभाग्य माना गया है।

चाणक्य नीति के अनुसार ऐसी परिस्थितियां पूर्वजन्म के संयोग और तप के फल से प्राप्त होती हैं।

To have ability for eating when dishes are ready at hand, to be robust and virile in the company of one’s religiously wedded wife, and to have a mind for making charity when one is prosperous are the fruits of no ordinary austerities.

3. आज्ञाकारी पुत्र, अनुकूल पत्नी और संतोष

जिस व्यक्ति का पुत्र आज्ञाकारी हो, जिसकी पत्नी पति के अनुकूल आचरण करने वाली और पतिव्रता हो तथा जो व्यक्ति अपनी प्राप्त धन-संपत्ति से संतुष्ट रहता हो, उसके लिए स्वर्ग इसी धरती पर माना गया है।

इस विचार में परिवार में आपसी सहयोग, संतोष और अच्छे व्यवहार को सुखी जीवन का आधार बताया गया है।

He whose son is obedient to him, whose wife’s conduct is in accordance with his wishes, and who is content with his riches, has his heaven here on earth.

4. अच्छा पुत्र, पिता, मित्र और पत्नी कौन है?

यदि पुत्र अपने माता-पिता के प्रति भक्तिभाव रखता है और उनके दुखों को दूर करने में सहायता करता है, तो वही पुत्र कहलाने का अधिकारी है। इसी प्रकार जो व्यक्ति अपनी संतान का भरण-पोषण करता है और उनके सुख-दुःख का ध्यान रखता है, वही सच्चे अर्थों में पिता कहलाता है।

विश्वास करने योग्य व्यक्ति को ही अच्छा मित्र कहा गया है। इसी प्रकार जो स्त्री अपने पति के साथ सुख और शांति से जीवन बिताने में सहयोग करती है, उसे सच्चे अर्थों में पत्नी माना गया है।

They alone are sons who are devoted to their father. He is a father who supports his sons. He is a friend in whom we can confide, and she only is a wife in whose company the husband feels contented and peaceful.

5. सामने मीठा और पीछे नुकसान करने वाले व्यक्ति से बचें

पीठ पीछे किसी दूसरे व्यक्ति की बुराई करना, उसके कार्यों में नुकसान पहुंचाने का प्रयास करना और उसके सामने मीठी-मीठी बातें करना बहुत अनुचित व्यवहार है। ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाकर रखना चाहिए।

चाणक्य ऐसे व्यक्ति की तुलना ऐसे पात्र से करते हैं जिसके ऊपर दूध हो, लेकिन अंदर विष भरा हो। इसलिए केवल किसी व्यक्ति की मीठी बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उसके व्यवहार को भी समझना चाहिए।

Avoid him who talks sweetly before you but tries to ruin you behind your back, for he is like a pitcher of poison with milk on top.

6. मित्र पर कितना विश्वास करना चाहिए?

निकृष्ट मित्र पर विश्वास करने की बात तो दूर है। चाणक्य अच्छे मित्र के संबंध में भी पूरी तरह सावधान रहने की बात कहते हैं। उनका विचार है कि यदि कोई मित्र किसी बात पर क्रोधित हो जाए, तो वह आपके निजी रहस्य दूसरों के सामने बता सकता है।

इसलिए मित्रता में विश्वास जरूरी है, लेकिन अपनी सभी निजी बातें हर व्यक्ति के साथ साझा करने से पहले सावधानी भी रखनी चाहिए।

Do not put your trust in a bad companion, not even trust an ordinary friend, for if he should get angry with you, he may bring all your secrets to light.

7. अपनी योजना को काम पूरा होने तक गुप्त रखें

यदि आपने किसी काम के संबंध में कोई योजना बनाई है, तो उसे हर किसी के सामने नहीं बताना चाहिए। उसे काम के रूप में पूरा होने तक गुप्त रखना बेहतर है।

अर्थात केवल योजना बनाने से सफलता नहीं मिलती। योजना को सही तरीके से पूरा करना अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं को सोच-समझकर ही दूसरों के साथ साझा करना चाहिए।

Do not reveal what you have thought upon doing, but by wise counsel keep it secret, being determined to carry it into execution.

8. मूर्खता, यौवन और दूसरे के घर में रहना

चाणक्य के अनुसार मूर्खता अनेक अनर्थों की जड़ होने के कारण कष्ट देने वाली होती है। इसी प्रकार यौवन भी कई तरह की परेशानियां ला सकता है। लेकिन किसी विवशता के कारण दूसरे व्यक्ति के घर में रहना उससे भी अधिक कष्टदायक हो सकता है।

इस नीति का मूल भाव यह है कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। अपनी परिस्थितियों के कारण यदि उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़े, तो वह स्थिति उसके लिए कठिन हो सकती है।

Foolishness is indeed painful, and verily so is youth, but more painful by far than either is being obliged in another person’s house.

9. हर जगह अच्छे लोग और मूल्यवान चीजें नहीं मिलतीं

यह नहीं कहा जा सकता कि प्रत्येक पर्वत पर मणि-माणिक्य मिलेंगे। इसी प्रकार प्रत्येक हाथी के मस्तक से मुक्ता-मणि प्राप्त नहीं होती। संसार में मनुष्यों की कमी नहीं है, लेकिन अच्छे पुरुष हर जगह नहीं मिलते।

इसी प्रकार कुछ वन चंदन के हो सकते हैं, लेकिन सभी वनों में चंदन के वृक्ष उपलब्ध नहीं होते।

इस विचार की सीख यह है कि किसी अच्छी चीज या अच्छे व्यक्ति की उपलब्धता हर जगह नहीं होती। इसलिए उसकी पहचान और कद्र करना सीखना चाहिए।

There does not exist a pearl in every mountain, nor a pearl in the head of every elephant; neither are the sadhus to be found everywhere, nor sandal trees in every forest.

10. बच्चों में अच्छे संस्कार और चरित्र का निर्माण करें

बुद्धिमान व्यक्तियों को चाहिए कि वे अपने पुत्रों को चरित्र निर्माण करने वाले कार्यों में लगाएं। नीति को समझने वाले, श्रद्धालु और शील स्वभाव वाले व्यक्ति ही समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं।

इसलिए बच्चों की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके व्यवहार और चरित्र पर भी ध्यान देना चाहिए।

Wise men should always bring up their sons in various moral ways, for children who have knowledge of niti-sastra and are well behaved become a glory to their family.

11. बच्चों की शिक्षा को महत्व देना चाहिए

ऐसे माता-पिता को बेटे का शत्रु माना गया है जो उसे शिक्षित नहीं करते। अशिक्षित पुत्र बुद्धिमान लोगों की सभा में उसी प्रकार शोभित नहीं होता, जिस प्रकार हंसों के झुंड में बगुला अच्छा नहीं लगता।

जो माता-पिता अपनी संतान को सुशिक्षित नहीं करते, वे वास्तव में उसके शुभचिंतक नहीं कहे जा सकते। चाणक्य ने इस बात को बहुत कठोर शब्दों में समझाया है।

आज के संदर्भ में इसका मुख्य संदेश यह है कि माता-पिता को बच्चों की शिक्षा और सीखने के अवसरों को गंभीरता से लेना चाहिए।

Those parents who do not educate their sons are their enemies; for as is a crane among swans, so are ignorant sons in a public assembly.

12. पुत्र और शिष्य को अनुशासन की आवश्यकता

चाणक्य का कहना है कि अत्यधिक लाड़-प्यार से पुत्र और शिष्य में दोष उत्पन्न हो सकते हैं। वहीं अनुशासन से उनमें गुणों का विकास हो सकता है। इसलिए पुत्र और शिष्य को केवल लाड़-प्यार करने के बजाय उन्हें अनुशासन भी सिखाना चाहिए।

हालांकि आज के समय में अनुशासन का अर्थ शारीरिक दंड नहीं होना चाहिए। बच्चों और विद्यार्थियों को समझाकर, सही सीमाएं तय करके और सकारात्मक तरीके से अनुशासित करना बेहतर है।

Many a bad habit is developed through over indulgence, and many a good one by chastisement, therefore beat your son as well as your pupil; never indulge them.

13. हर दिन कुछ न कुछ सीखना चाहिए

व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ न कुछ स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए। आचार्य का कहना है कि मनुष्य को प्रतिदिन शास्त्र का कम से कम एक श्लोक पढ़ना और उसका अर्थ समझना चाहिए।

यदि समय कम हो तो पूरा श्लोक पढ़ने के बजाय आधा या आधे से भी कम भाग पढ़कर उसका अर्थ समझा जा सकता है। मुख्य बात यह है कि व्यक्ति का दिन सीखने के बिना नहीं गुजरना चाहिए।

चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति दिनभर में किसी शास्त्र या उत्तम पुस्तक का एक अक्षर भी नहीं पढ़ता, उसके जीवन का वह दिन निरर्थक माना जा सकता है। इसके अतिरिक्त आचार्य दिन को सार्थक बनाने के लिए दान को भी महत्वपूर्ण बताते हैं।

आज के समय में इस नीति को नियमित पढ़ने, सीखने और अच्छे कार्य करने की आदत से जोड़ा जा सकता है।

Let not a single day pass without your learning a verse, half a verse, or a fourth of it, or even one letter of it; nor without attending to charity, study and other pious activity.

14. जीवन के कुछ कष्ट बहुत गहरे होते हैं

संसार में कुछ दुःख ऐसे हैं जिन्हें मनुष्य अपने जीवन में आसानी से भूल नहीं पाता और न ही उन्हें सहन कर सकता है। चाणक्य नीति में ऐसे दुःखों में पत्नी से अलग होना, अपने परिवार और संबंधियों से अपमानित होना, कर्ज न चुका पाना, दुष्ट स्वामी की नौकरी करना तथा दरिद्र होकर मूर्खों के समाज में रहना बताया गया है।

इन परिस्थितियों को चाणक्य ने मनुष्य को भीतर से जलाने वाले कष्टों के रूप में बताया है।

Separation from the wife, disgrace from one’s own people, and an enemy saved in battle, service to a wicked king, poverty, and a mismanaged assembly: these six kinds of evils, if afflicting a person, burn him even without fire.

15. तेज बहाव वाली नदी और असुरक्षित परिस्थितियां

तेज बहाव वाली नदी के किनारे के वृक्ष, दूसरे के घर में रहने वाली स्त्री तथा मंत्री से रहित राजा शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं।

इस नीति में ऐसी परिस्थितियों का उदाहरण दिया गया है जिनमें सुरक्षा और स्थिरता का अभाव होता है। नदी के तेज बहाव के पास स्थित पेड़ और बिना उचित सलाहकार के राजा, दोनों असुरक्षित स्थिति का उदाहरण हैं।

Trees on a riverbank, a woman in another man’s house, and kings without counselors go without doubt to swift destruction.

16. प्रत्येक व्यक्ति की अपनी शक्ति होती है

प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी शक्ति के कारण ही अपनी स्थिति बनाए रखता है। उसे जीवन में किसी न किसी प्रकार की शक्ति की आवश्यकता होती है।

चाणक्य नीति के इस कथन में ब्राह्मण की शक्ति उसकी विद्या, राजा की शक्ति उसकी सेना, वैश्य की शक्ति उसका धन और शूद्र की शक्ति उसके सेवाकार्य को बताया गया है।

मूल कथन प्राचीन सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में है। आज के समय में इसे व्यक्ति की अपनी क्षमता, कौशल, संसाधन और जिम्मेदारी के रूप में समझना अधिक उचित है।

A Brahmin’s strength is in his learning, a king’s strength is in his army, a vaishya is his wealth and a shudra is in his attitude of service.

17. परिस्थितियां बदलने पर संबंध भी बदल सकते हैं

जिस प्रकार वेश्या अपने प्रेमी के निर्धन हो जाने पर उसे त्याग देती है, उसी प्रकार पराजित और अपमानित राजा को प्रजा छोड़ देती है। इसी तरह सूखे हुए पेड़ को छोड़कर पक्षी उड़ जाते हैं।

चाणक्य इसी उदाहरण से कहते हैं कि अतिथि को भोजन करने के बाद गृहस्थी के घर को छोड़ देना चाहिए।

इस नीति का मुख्य संदेश यह है कि परिस्थितियों के बदलने पर लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है। इसलिए व्यक्ति को अपने संबंधों और परिस्थितियों को समझदारी से देखना चाहिए।

The prostitute has to forsake a man who has no money, the subject a king that cannot defend him, the birds a tree that bears no fruit and the guests a house after they have finished their meals.

18. काम पूरा होने के बाद आगे बढ़ना चाहिए

जिस प्रकार दक्षिणा प्राप्त करने के बाद पुरोहित यजमान के घर से चला जाता है, उसी प्रकार विद्या समाप्त करने के बाद शिष्य अपने गुरु से विदाई लेता है।

इसी प्रकार वन के जल जाने पर पक्षी और पशु उस जंगल को छोड़कर दूसरे जंगल की ओर चले जाते हैं।

इस विचार से यह सीख मिलती है कि किसी काम या उद्देश्य के पूरा होने के बाद व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।

Brahmins quit their patrons after receiving alms from them, scholars leave their teachers after receiving education from them, and animals desert a forest that has been burnt down.

19. दुष्ट व्यक्ति की संगति से बचना चाहिए

दुराचारी, दुष्ट स्वभाव वाला, बिना किसी कारण के दूसरों को हानि पहुंचाने वाला तथा दुष्ट व्यक्ति से मित्रता रखने वाला श्रेष्ठ पुरुष भी शीघ्र ही नष्ट हो सकता है।

अर्थात व्यक्ति चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, गलत संगति उसके जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। इसलिए मित्र और संगति का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।

He who befriends a man whose conduct is vicious, whose vision impure, and who is notoriously crooked, is rapidly ruined.

20. समान गुण और स्वभाव वाले लोगों से संबंध

समान गुण, कर्म, स्वभाव और आर्थिक स्थिति वाले व्यक्तियों के बीच संबंध बेहतर रहने की बात चाणक्य नीति में कही गई है। इसी प्रकार सेवा अथवा नौकरी करनी हो तो राजा के अधीन सेवा को सम्मानजनक बताया गया है।

लोक-व्यवहार में निपुण व्यक्ति समाज में सम्मान प्राप्त करता है। इसी प्रकार रूपवती स्त्री की शोभा अपने घर में होने की बात मूल नीति में कही गई है।

इस विचार को आज के समय में व्यक्ति के व्यवहार, समान रुचियों और आपसी समझ के संदर्भ में समझा जा सकता है। वहीं स्त्री के संबंध में दिया गया अंतिम कथन प्राचीन सामाजिक संदर्भ का हिस्सा है। इसे आधुनिक समय में महिलाओं की स्वतंत्रता या सुरक्षा के बारे में सामान्य नियम के रूप में नहीं लेना चाहिए।

Friendship between equals flourishes, service under a king is respectable, it is good to be business-minded in public dealings, and a handsome lady is safe in her own home.

चाणक्य नीति Chapter 2 से मिलने वाली प्रमुख सीख

चाणक्य नीति Chapter 2 में अलग-अलग परिस्थितियों और संबंधों के माध्यम से जीवन को समझने की कोशिश की गई है। इसके कई विचार आज भी व्यवहारिक जीवन में उपयोगी लग सकते हैं।

चाणक्य नीति Chapter 2 का निष्कर्ष

चाणक्य नीति Chapter 2 में परिवार, मित्रता, शिक्षा, धन, संगति और व्यवहार से जुड़े अनेक विचार दिए गए हैं। इनमें से कुछ बातें प्राचीन भारतीय समाज और उस समय की सामाजिक व्यवस्था को दर्शाती हैं। इसलिए हर कथन को उसी ऐतिहासिक संदर्भ में समझना जरूरी है।

वहीं योजना को गुप्त रखना, गलत संगति से बचना, बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना, प्रतिदिन कुछ सीखना और अच्छे लोगों की पहचान करना जैसे विचार आज भी व्यक्तिगत जीवन में विचार करने योग्य हैं।

चाणक्य नीति को पढ़ते समय सबसे अच्छी बात यह है कि हम प्रत्येक नीति के पीछे छिपे विचार को समझें और उसे अपने वर्तमान जीवन की परिस्थितियों के अनुसार देखें। किसी भी प्राचीन कथन को बिना संदर्भ के आधुनिक जीवन पर लागू करना उचित नहीं है।

चाणक्य नीति के अन्य अध्याय भी पढ़ें

अगर आपको चाणक्य नीति के ये विचार पसंद आए हैं, तो आप इसके दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:

सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में

अगर आप चाणक्य की सभी नीतियों को एक साथ पढ़ना चाहते हैं, तो सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।


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