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चाणक्य नीति Chapter 15 In Hindi | Chanakya Niti के महत्वपूर्ण विचार

चाणक्य नीति Chapter 15 In Hindi

चाणक्य नीति Chapter 15 में आचार्य चाणक्य ने दया, गुरु, धन, विनम्रता, ज्ञान, संगति, कर्म, आत्मचिंतन और जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इस अध्याय में व्यक्ति के चरित्र और उसके व्यवहार को विशेष महत्व दिया गया है।

चाणक्य भारत के महान विद्वानों में से एक माने जाते हैं। उन्हें मौर्य साम्राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुशल राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्र के विद्वान के रूप में जाना जाता है। चाणक्य ने जो नीतियां और सिद्धांत बताए हैं, उनमें जीवन के व्यवहारिक पक्ष के साथ धर्म, ज्ञान और आचरण से जुड़े विचार भी मिलते हैं।

इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 14 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति पंचदश अध्याय के महत्वपूर्ण विचारों को सरल भाषा में।

चाणक्य नीति Chapter 15

1. दया को सभी धर्मों से श्रेष्ठ क्यों बताया गया?

जिसका चित्त प्राणियों को संकट में देखकर दया से द्रवित हो जाता है, उसे जटाएं बढ़ाने, भस्म लगाने, ज्ञान प्राप्त करने तथा मोक्ष के लिए अलग से प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं, ऐसा मूल नीति में कहा गया है।

दया को सभी धर्मों से बढ़कर बताया गया है। दयालु व्यक्ति को सच्चे अर्थों में ज्ञानवान, भक्त और योगी कहा गया है।

For one whose heart melts with compassion for all creatures; what is the necessity of knowledge, liberation, matted hair on the head, and smearing the body with ashes?

सीख: केवल धार्मिक दिखावा करने से अधिक महत्वपूर्ण दूसरों के प्रति दया और करुणा रखना है।

2. गुरु के ऋण को चुकाना कठिन है

इस संसार में ऐसा कोई मूल्यवान पदार्थ नहीं है जिसे गुरु को अर्पण करके शिष्य गुरु के इस ऋण (एकाक्षर का ज्ञान अथार्त मिथ्या मायामोह से हटाकर ब्रह्म से साक्षात्कार कराना) से उऋण हो सके। यहां गुरु द्वारा दिए गए एकाक्षर के ज्ञान को भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

There is no treasure on earth the gift of which will cancel the debt a disciple owes his guru for having taught him even a single letter that leads to Krishna consciousness.

सीख: सच्चे शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान जीवनभर काम आ सकता है। इसलिए गुरु और शिक्षक के प्रति सम्मान रखना चाहिए।

3. कांटों और दुष्ट लोगों से कैसे बचें?

दुष्टों और कांटों से छुटकारा पाने के दो ही मार्ग बताए गए हैं। पहला, उनसे दूर रहना और दूसरा उन्हें अपने जीवन से अलग कर देना। मूल English quote में इसे कठोर और पुराने संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया गया है।

There are two ways to get rid of thorns and wicked persons; using footwear in the first place and in the second shaming them so that they cannot raise their faces again thus keeping them at a distance.

आज के संदर्भ में: किसी नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति से दूरी बनाना और स्पष्ट सीमाएं रखना अधिक सुरक्षित और व्यवहारिक तरीका है।

4. स्वच्छता और मधुर वाणी का महत्व

मैले-कुचैले वस्त्र पहनने वाला, गंदे दांतों वाला, अधिक खाने वाला और कानों पर हथौड़ा पड़ने जैसी कर्कश वाणी बोलने वाला व्यक्ति यदि सूर्यास्त और सूर्योदय के समय सोता रहता है, तो मूल नीति में कहा गया है कि लक्ष्मी भी उसे छोड़ देती हैं।

He who wears unclean garments, has dirty teeth, is a glutton, speaks unkindly and sleeps after sunrise although he may be the greatest personality, will lose the favor of Lakshmi.

सीख: स्वच्छता, संयमित भोजन, अच्छी भाषा और अनुशासित दिनचर्या व्यक्ति के व्यक्तित्व को बेहतर बनाते हैं।

5. धन के कारण बदलते रिश्तों पर चाणक्य का विचार

मनुष्य जब धनहीन हो जाता है, तो उसके मित्र, सेवक और संबंधी, यहां तक कि पत्नी आदि भी उसे छोड़ सकते हैं। और जब वह फिर से धनवान हो जाता है, तो ये सभी वापस लौट सकते हैं। इसलिए मूल नीति में धन को मनुष्य का सच्चा बंधु कहा गया है।

He who loses his money is forsaken by his friends, his wife, his servants and his relations; yet when he regains his riches those who have forsaken him come back to him. Hence wealth is certainly the best of relations.

इस विचार का अर्थ यह भी निकाला जा सकता है कि धन के कारण लोगों के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। इसलिए रिश्तों की सच्चाई को केवल आर्थिक स्थिति से नहीं परखना चाहिए।

6. अन्याय से कमाया धन स्थायी नहीं माना गया

अन्याय, धूर्तता अथवा बेईमानी से जोड़ा-कमाया धन अधिक से अधिक दस वर्षों तक रहता है। ग्यारहवें वर्ष में वह बढ़ा हुआ धन मूल के साथ ही नष्ट हो जाता है, ऐसा मूल चाणक्य नीति में कहा गया है।

Sinfully acquired wealth may remain for ten years; in the eleventh year it disappears with even the original stock.

ध्यान दें: यह एक नैतिक और पारंपरिक नीति-विचार है, कोई निश्चित आर्थिक नियम नहीं। इसकी मुख्य सीख ईमानदारी से धन कमाने से जुड़ी है।

7. सामर्थ्य के अनुसार काम का परिणाम बदल सकता है

समर्थ व्यक्ति को कोई दोष देना कठिन होता है, ऐसा चाणक्य नीति में कहा गया है। जो बात सामर्थ्यवान व्यक्ति के लिए सिद्धिदायक हो सकती है, वही सामान्य व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकती है।

इसके उदाहरण के रूप में अमृत और विष का उल्लेख किया गया है। अमृत पीना सामान्यतः अच्छा माना जाता है, लेकिन राहु की मृत्यु अमृत पीने से हुई। दूसरी ओर विष पीना नुकसानदायक है, लेकिन भगवान शिव ने जब प्राणघातक विष पिया तो वह उनके गले का आभूषण बन गया।

A bad action committed by a great man is not censured, and a good action performed by a low-class man comes to be condemned. Just see: the drinking of nectar is excellent, but it became the cause of Rahu’s demise; and the drinking of poison is harmful, but when Lord Shiva drank it, it became an ornament to his neck.

यह धार्मिक और रूपकात्मक उदाहरण है। इसका मुख्य संदेश परिस्थिति, क्षमता और परिणाम को समझने से जुड़ा है।

8. सच्ची सहानुभूति और सदाचार क्या है?

ब्राह्मणों को खिलाने के उपरांत अवशिष्ट भोजन ही सर्वोत्तम भोजन है, ऐसा मूल नीति में कहा गया है। दूसरों का हित करने वाली सहानुभूति को सच्ची सहृदयता बताया गया है। पाप से निवृत्त करने वाली बुद्धि को निर्मल प्रज्ञा कहा गया है। छल-कपट से रहित शुद्ध आचरण को सच्चा धर्म बताया गया है।

A true meal is that which consists of the remnants left after a Brahman’s meal. Love, which is shown to others, is true love, not that which is cherished for one’s own self. To abstain from sin is true wisdom. That is an act of charity which is performed without ostentation.

सीख: दूसरों के प्रति वास्तविक सहानुभूति और दिखावे से रहित अच्छे कर्म अधिक महत्वपूर्ण हैं।

9. सही व्यक्ति का सही स्थान पर होना जरूरी है

किसी योग्य व्यक्ति को निम्न स्थान पर और अयोग्य व्यक्ति को उच्च पद पर रख देने से उनके वास्तविक मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं होता। बल्कि गलत स्थान पर रखने वाले व्यक्ति की ही निंदा होती है।

भले ही मणि को ठोकर मारी जाए और कांच को सिर पर धारण किया जाए, लेकिन खरीद-फरोख्त के समय मणि का मूल्य अलग होगा और शीशे का अलग।

For want of discernment the most precious jewels lie in the dust at the feet of men while bits of glass are worn on their heads. But we should not imagine that the gems have sunk in value, and the bits of glass have risen in importance. When a person of critical judgment shall appear, each will be given its right position.

सीख: किसी व्यक्ति की वास्तविक योग्यता केवल पद या तत्काल सम्मान से तय नहीं होती। सही मूल्यांकन के लिए विवेक जरूरी है।

10. सीमित समय में जरूरी ज्ञान प्राप्त करें

मानव-जीवन सीमित है और कार्यों तथा ज्ञान की सीमा अनंत है। इस स्थिति में मनुष्य को शास्त्रों का सार ही ग्रहण करना चाहिए। इसे हंस के उदाहरण से समझाया गया है, जो पानी छोड़कर उसमें मिला हुआ दूध पीने की पारंपरिक उपमा से जुड़ा है।

Sastric knowledge is unlimited, and the arts to be learned are many; the time we have is short, and our opportunities to learn are beset with obstacles. Therefore select for learning that which is most important, just as the swan drinks only the milk in water.

सीख: जीवन में सब कुछ सीखना संभव नहीं है। इसलिए जरूरी ज्ञान और उपयोगी कौशल को प्राथमिकता देना समझदारी है।

11. घर आए अतिथि का सत्कार

दूर से आए परिचित अथवा अपरिचित व्यक्ति को, रास्ता चलने से थके-मांदे और किसी आवश्यकता के कारण घर पर आए व्यक्ति को बिना खिलाए-पिलाए जो स्वयं खा-पी लेता है, उसे मूल नीति में कठोर शब्दों में दोषी बताया गया है।

He is a chandala who eats his dinner without entertaining the stranger who has come to his house quite accidentally, having travelled from a long distance and being wearied.

आज की सीख: घर आए अतिथि के प्रति सम्मान और अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करना भारतीय आतिथ्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

12. केवल शास्त्र पढ़ना ही पर्याप्त नहीं

एक मनुष्य को चारों वेद और सभी धर्मशास्त्रों का ज्ञान हो सकता है। लेकिन यदि उसे अपनी आत्मा की अनुभूति नहीं हुई, तो मूल नीति में उसकी तुलना ऐसे चम्मच से की गई है जो अनेक पकवानों को हिलाता है, लेकिन स्वयं किसी का स्वाद नहीं चखता।

One may know the four Vedas and the dharma-sastras, yet if he has no realisation of his own spiritual self, he can be said to be like the ladle which stirs all kinds of foods but knows not the taste of any.

सीख: केवल जानकारी जमा करना पर्याप्त नहीं है। ज्ञान को समझना और जीवन में उतारना भी जरूरी है।

13. गुरु की शरण को नाव के समान बताया गया है

जो लोग संसार रूपी समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण लेते हैं, उन्हें धन्य बताया गया है। उनकी शरणागति को नौका के समान बताया गया है। मूल उपमा में ऐसे लोगों की तुलना उन यात्रियों से की गई है जो साधारण जहाज पर सवार होते हैं और जिसके डूबने का खतरा रहता है।

Those blessed souls are certainly elevated who, while crossing the ocean of life, take shelter of a genuine Brahman, who is likened unto a boat. They are unlike passengers aboard an ordinary ship that runs the risk of sinking.

यह धार्मिक और आध्यात्मिक रूपक है, जिसमें गुरु या ज्ञानी व्यक्ति के मार्गदर्शन को महत्व दिया गया है।

14. दूसरे के घर पर निर्भर रहने के बारे में नीति

चंद्रमा, जिसे अमृत का भंडार और औषधियों का अधिपति माना गया है, सूर्य के मंडल में पहुंचते ही अपनी चमक खो देता है, ऐसा इस नीति में कहा गया है।

इसके आधार पर यह समझाया गया है कि दूसरे के घर में रहने से व्यक्ति का बड़प्पन बना नहीं रहता। इसलिए अपने उद्देश्य के लिए किसी दूसरे के घर जाने में भी संकोच और सावधानी से काम लेने की बात कही गई है।

The moon, who is the abode of nectar and the presiding deity of all medicines, although immortal like amrta and resplendent in form, loses the brilliance of his rays when he repairs to the abode of the sun. Therefore, will not an ordinary man be made to feel inferior by going to live at the house of another?

सीख: जहां संभव हो, व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने और दूसरों पर अनावश्यक निर्भरता से बचने का प्रयास करना चाहिए।

15. परदेश में परिस्थिति के अनुसार ढलना चाहिए

एक मधुमक्खी जो कमल की नाजुक पंखुड़ियों में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना जीवन चला रही है। क्योंकि वह ऐसे देश में आ गई है जहां कमल है ही नहीं, इसलिए उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते हैं।

इस उदाहरण से बताया गया है कि आदमी परदेश में जाकर धन कमाता है, लेकिन वहां उसे अनेक कष्ट भी उठाने पड़ सकते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपनी आय और जीवन-परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना चाहिए।

This humble bee, which always resides among the soft petals of the lotus and drinks abundantly its sweet nectar, is now feasting on the flower of the ordinary kutaja. Being in a strange country where the lotuses do not exist, he is considering the pollen of the kutaja to be nice.

सीख: परिस्थिति बदलने पर लचीला रहना और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार खुद को ढालना जीवन का महत्वपूर्ण कौशल है।

16. लक्ष्मी और ब्राह्मणों के बारे में पौराणिक कथा

एक पौराणिक संवाद के रूप में विष्णु लक्ष्मी से पूछते हैं कि वह ब्राह्मणों से असंतुष्ट क्यों रहती हैं। लक्ष्मी उत्तर देती हैं कि ब्राह्मण-कुल में उत्पन्न अगस्त्य ऋषि ने क्रोध में उनके पिता समुद्र को पी लिया। भृगु मुनि ने विष्णु की छाती पर लात मारी।

इसके अलावा, वे बचपन से ही सरस्वती की उपासना करते रहते हैं और शंकर की उपासना करने के लिए लक्ष्मी के निवास कमल को भी तोड़ते हैं। इसी कारण लक्ष्मी के ब्राह्मणों के साथ रहने को लेकर यह पौराणिक कथा कही गई है।

Lord Vishnu asked His spouse Lakshmi why She did not care to live in the house of a brahmana. She replied, “O Lord, a rishi named Agastya drank up My father, the ocean, in anger; Brighu Muni kicked You; brahmanas pride themselves on their learning having sought the favor of My competitor Sarasvati; and lastly they pluck each day the lotus which is My abode, and therewith worship Lord Shiva. Therefore, O Lord, I fear to dwell with a brahmana.”

नोट: यह पौराणिक कथा है। इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक साहित्य की कथा के रूप में पढ़ना चाहिए।

17. प्रेम को सबसे मजबूत बंधन बताया गया है

दुनिया में व्यक्ति को नियंत्रित करने या बांधने के कई तरीके हो सकते हैं। लेकिन सबसे मजबूत बंधन प्रेम का बताया गया है। इसका उदाहरण उस मधुमक्खी से दिया गया है जो लकड़ी को छेद सकती है, लेकिन फूल की पंखुड़ियों को छेदना पसंद नहीं करती, भले ही उसी कारण उसका जीवन समाप्त क्यों न हो जाए।

There are many ways of binding by which one can be dominated and controlled in this world, but the bond of affection is the strongest. For example, take the case of the humble bee, which, although expert at piercing hardened wood, becomes caught in the embrace of its beloved flowers as the petals close at dusk.

सीख: प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव का प्रभाव कई बार शक्ति और क्षमता से भी अधिक हो सकता है।

18. अच्छे गुण कठिन परिस्थितियों में भी बने रह सकते हैं

चंदन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ता। हाथी बूढ़ा होने पर भी अपनी विलासलीला नहीं छोड़ता। गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता। उसी प्रकार ऊंचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों, जैसे सुशीलता, उदारता और त्यागशीलता को नहीं छोड़ता, भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों न गुजरना पड़े।

Although sandalwood is cut, it does not forsake its natural quality of fragrance; so also the elephant does not give up sportiveness though he should grow old. The sugarcane does not cease to be sweet though squeezed in a mill; so the man of noble extraction does not lose his lofty qualities, no matter how pinched he is by poverty.

आज के संदर्भ में: इस विचार का उपयोगी संदेश जन्म या कुल से अधिक अच्छे गुणों को बनाए रखने पर है। कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, उदारता और अच्छे व्यवहार को बचाए रखना व्यक्ति के चरित्र की पहचान हो सकता है।

19. यश और सम्मान के बारे में कृष्ण-गोपी संवाद

उलाहना देती हुई एक गोपी श्रीकृष्ण से कहती है कि तुमने एक बार गोवर्धन नामक पर्वत को उठा लिया, इसलिए इस लोक ही नहीं बल्कि स्वर्गलोक में भी गोवर्धनधारी के रूप में प्रसिद्ध हो गए।

लेकिन आश्चर्य है कि मैं तीनों लोकों को धारण करने वाले तुम्हें अपने हृदय में धारण करती हूं, फिर भी मुझे त्रिलोकधारी जैसी कोई पदवी नहीं देता। मूल विचार में कहा गया है कि यश और सम्मान पुण्य और भाग्य से प्राप्त होते हैं।

सीख: केवल अच्छे कार्य करना ही पर्याप्त नहीं होता। लोगों की दृष्टि, परिस्थितियां और समय भी किसी व्यक्ति की प्रसिद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।

चाणक्य नीति Chapter 15 की प्रमुख सीख

चाणक्य नीति Chapter 15 में कई महत्वपूर्ण जीवन-सीख मिलती हैं। हालांकि, इस अध्याय के कुछ विचार प्राचीन धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें आज के समय में उनके मूल संदर्भ के साथ समझना बेहतर है।

चाणक्य नीति Chapter 15 से आज क्या सीखें?

इस अध्याय की कई बातें आज के जीवन में भी उपयोगी रूप में समझी जा सकती हैं। दया, मधुर वाणी, स्वच्छता, विनम्रता, अच्छे आचरण और ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग व्यक्ति के व्यक्तित्व को मजबूत बना सकते हैं।

इसी तरह, सीमित समय में जरूरी ज्ञान सीखने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की सीख भी आधुनिक जीवन में काफी उपयोगी है।

इसके अलावा, अपने निजी मामलों को हर किसी के सामने साझा न करना, गलत लोगों से दूरी रखना और कठिन समय में अपने अच्छे गुणों को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

आत्मनिरीक्षण और अपने व्यवहार को बेहतर बनाने के लिए आप आत्मनिरीक्षण करो, अन्य को दोष मत दो भी पढ़ सकते हैं।

सफलता और जीवन के व्यवहारिक विचारों के लिए सफल लोग क्या अलग करते हैं? भी पढ़ सकते हैं।

चाणक्य नीति के अन्य अध्याय पढ़ें

अगर आपको चाणक्य नीति Chapter 15 के ये विचार पसंद आए हैं, तो आप इसके दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:

आप सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

चाणक्य नीति Chapter 15 में दया, गुरु, ज्ञान, धन, विनम्रता, संगति, आत्मसंयम और अच्छे आचरण से जुड़े अनेक विचार दिए गए हैं। इस अध्याय में व्यक्ति को केवल बाहरी उपलब्धियों के बजाय अपने गुणों और व्यवहार पर ध्यान देने की प्रेरणा मिलती है।

दया रखना, ज्ञान का सही उपयोग करना, परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालना और कठिन समय में अपने अच्छे गुणों को बनाए रखना इस अध्याय की महत्वपूर्ण सीखों में शामिल हैं।

साथ ही, कुछ कथन प्राचीन धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था को दर्शाते हैं। इसलिए उन्हें आज के समय में बिना संदर्भ के लागू करने के बजाय उनके मूल विचार को समझना अधिक उचित है।

अंततः चाणक्य नीति की उपयोगी सीख यही है कि व्यक्ति अपने व्यवहार, ज्ञान और कर्मों पर ध्यान दे। साथ ही, वर्तमान परिस्थितियों को समझकर विवेकपूर्ण निर्णय ले।

Note: सावधानी बरतने के बावजूद यदि ऊपर दिए गए किसी भी Quote (Hindi or English) में आपको कोई त्रुटि मिले तो कृपया comments के माध्यम से अवगत कराएं।

आपकी राय: आपको चाणक्य नीति पंचदश अध्याय में दी गई बातें कैसी लगीं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। यदि यह लेख आपको उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें।

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