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चाणक्य नीति Chapter 9 In Hindi | Chanakya Niti के महत्वपूर्ण विचार

चाणक्य नीति Chapter 9 In Hindi

चाणक्य नीति Chapter 9 में आचार्य चाणक्य ने त्याग, सहिष्णुता, सरलता, दया, पवित्रता, मित्रता, ज्ञान, धैर्य और जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इस अध्याय में मनुष्य को अपने दुर्गुणों का त्याग करके अच्छे गुणों को अपनाने की सीख दी गई है।

चाणक्य ने राजनीति को एक नई दिशा दी, कूटनीति का समावेश किया, दांव-पेंच के गुर सिखाए और समाज के लिए आचार-विचार के कई सूत्र बताए। इन्हीं विचारों को चाणक्य नीति के नाम से भी जाना जाता है। महान मौर्य वंश की स्थापना में चाणक्य की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उनका नाम राजनीति, राष्ट्र और जनकार्यों से जुड़े इतिहास में आज भी लिया जाता है।

इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 8 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति नवम अध्याय के महत्वपूर्ण विचारों को सरल भाषा में।

चाणक्य नीति Chapter 9

1. दुर्गुणों का त्याग और अच्छे गुणों को अपनाना

विषयों के त्याग और सहिष्णुता, सरलता, दयालुता तथा पवित्रता आदि गुणों को अपनाने से मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। इसलिए मानव को दुर्गुणों का परित्याग करके सहनशीलता, दया, क्षमा और शुद्धि जैसे गुणों को अपनाना चाहिए।

Any person aiming at deliverance must quit his bad habits and addiction as if they are poison. One must consider tolerance, forgiveness, patience, kindness and trust as nectar, i.e. include those qualities in life.

सीख: व्यक्ति को अपनी गलत आदतों को पहचानकर धीरे-धीरे उन्हें छोड़ने और अच्छे गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।

2. मित्र के रहस्य को गुप्त रखना चाहिए

यदि किसी को अपने मित्र के रहस्य यानी गुप्त कार्य मालूम हैं, तो उन्हें प्रकट नहीं करना चाहिए। इससे कोई लाभ नहीं होता। इसके बजाय शत्रुता पैदा हो सकती है और इससे दोनों को हानि हो सकती है।

A lowly person who reveals to others the secrets confided in him perishes like a snake does that lives in a moth-hill.

सीख: भरोसे से बताई गई निजी बातों को दूसरों के सामने साझा नहीं करना चाहिए। मित्रता में विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

3. हर अच्छी चीज में कुछ कमी हो सकती है

यह विधि की विडम्बना है कि स्वर्ण में गंध, गन्ने में फल और चंदन में फूल नहीं होते। इसी प्रकार विद्वान धनी नहीं होते और राजा दीर्घायु नहीं होते, ऐसा चाणक्य नीति में कहा गया है।

It is irony of creator that he did not fragrance to gold, fruit to sugarcane, flowers to sandalwood tree, riches to a scholar and a long life to king.

इसका मुख्य भाव यह है कि संसार की हर वस्तु में सभी गुण एक साथ मौजूद नहीं होते। इसलिए व्यक्ति को उपलब्ध गुणों की कद्र करनी चाहिए और हर चीज से पूर्णता की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

4. औषधि, भोजन, आंख और मस्तिष्क का महत्व

सभी औषधियों में अमृत को प्रधान बताया गया है, क्योंकि इसमें सभी रोगों को शांत करने की अद्भुत क्षमता मानी गई है। सभी प्रकार के सुखों में भोजन को प्रधान बताया गया है, क्योंकि भूख की निवृत्ति के बिना मनुष्य को शांति प्राप्त नहीं हो पाती।

सभी इन्द्रियों में नेत्र को प्रधान बताया गया है, क्योंकि दृष्टि के बिना सर्वत्र अंधकार ही अंधकार दिखाई देता है। शरीर के सभी अंगों में सिर यानी चिंतनशक्ति वाले अंग को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है।

Their nectar is the medicines, the best satisfaction giver is the food, the best among organs the eye and best part in a body is head.

यहां कुछ कथन प्राचीन दृष्टिकोण से जुड़े हैं। आज के समय में शरीर के सभी अंगों के अपने अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्य होते हैं।

5. ग्रहण के बारे में विद्वानों का ज्ञान

जिन दिव्य दृष्टि वाले व्यक्तियों ने सूर्य और चंद्रमा के राहु और केतु द्वारा ग्रहण की बात कही है, उन्हें विद्वान बताया गया है। क्योंकि, मूल कथन के अनुसार, इस बात का पता लगाने के लिए आकाश में न कोई दूत गया था और न इस संबंध में किसी से कोई बातचीत हुई थी।

No spy went into the sky, no one talked about it, no one made it, there is no precedent, yet about the heavenly bodies of Sun and the Moon, a Brahman knows when they will be eclipsed. Then why is not considered a scholar?

नोट: यह प्राचीन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जुड़ा कथन है। आधुनिक खगोल विज्ञान सूर्य और चंद्र ग्रहण को वैज्ञानिक रूप से समझाता है। इसलिए इस हिस्से को ऐतिहासिक संदर्भ में पढ़ना उचित है।

6. सोते हुए किन सात लोगों को जगा देना चाहिए?

चाणक्य नीति में सात ऐसे लोगों का उल्लेख किया गया है जिन्हें सोते हुए देखना हो तो जगा देना चाहिए:

  1. विद्यार्थी
  2. सेवक
  3. पथिक
  4. भूखा आदमी
  5. डरा हुआ आदमी
  6. खजाने का रक्षक
  7. खजांची

If you find a student, a servant, a traveler, a hungry man, a frightened man, a storekeeper and a treasurer sleeping, wake him up.

इन उदाहरणों का संबंध जिम्मेदारी, आवश्यकता और परिस्थिति के अनुसार सतर्क रहने से है।

7. किन सात लोगों को सोते हुए नहीं जगाना चाहिए?

चाणक्य नीति में सात ऐसे लोगों या जीवों का भी उल्लेख है जिन्हें नींद से नहीं जगाना चाहिए:

  1. सांप
  2. राजा
  3. बाघ
  4. डंक करने वाला कीड़ा
  5. छोटा बच्चा
  6. दूसरों का कुत्ता
  7. मूर्ख

One must never disturb them while sleeping. They are tiger, king, child, other dog, serpent, and pig. Let them sleep.

मूल हिंदी सूची और English quote में अंतिम उदाहरण को लेकर अंतर दिखाई देता है। इसलिए इसे उसी प्राचीन कथन के रूप में पढ़ना बेहतर है, न कि आधुनिक व्यवहार का सार्वभौमिक नियम मानना।

8. ज्ञान का व्यापार नहीं करना चाहिए

ब्रह्मतेज की रक्षा के लिए ब्राह्मण को न तो अपना ज्ञान बेचना चाहिए और न ही नीच व्यक्ति का भोजन ग्रहण करना चाहिए। विद्या का दान करना चाहिए, न कि उसकी सौदेबाजी करनी चाहिए।

One who recites holy books for wages, a Brahmin who eats food given by lowly people and a snake that is not poisonous can achieve little.

यह कथन प्राचीन धार्मिक व्यवस्था और उस समय के ज्ञान-संबंधी विचारों से जुड़ा है। आज शिक्षा और ज्ञान के बदले उचित पारिश्रमिक लेना सामान्य और सम्मानजनक व्यवस्था का हिस्सा है।

9. ऐसे व्यक्ति का प्रभाव कम हो सकता है जिसकी बात का कोई असर नहीं

जो व्यक्ति उपेक्षित होता है, उससे नाराज अथवा प्रसन्न होने की चिंता कोई नहीं करता। चिंता उसी से रहती है जिससे हानि या लाभ हो सकता है।

One whose anger does not inspire anyone, pleasing whom does not deliver profit, and one without authority to punish or reward is nothing but insignificant.

इसका मुख्य संदेश यह है कि व्यक्ति के प्रभाव का संबंध उसके व्यवहार, जिम्मेदारी और कार्यों से भी होता है।

10. व्यक्ति को अपनी शक्ति का आभास होना चाहिए

सांप में विष हो अथवा न हो, उसकी फुंकार ही डराने के लिए काफी है। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो वह लोगों के कोप का पात्र बन सकता है। लोग उसे पत्थर मार सकते हैं और उसकी उपेक्षा कर सकते हैं।

इसी प्रकार मनुष्य को अपना प्रभाव स्थिर रखना चाहिए।

If a snake is non-poisonous, then too it must pretend like one with the ability to take life. You know your weakness, not your opponent. It might fetch you a victory.

सीख: इसका आधुनिक अर्थ यह लिया जा सकता है कि व्यक्ति को अपनी सीमाओं के साथ अपनी क्षमता और आत्मविश्वास का भी प्रदर्शन करना चाहिए। हर जगह अत्यधिक भोलापन या कमजोरी दिखाना उचित नहीं है।

11. महाभारत, रामायण और श्रीमद्भागवत के अध्ययन की बात

बुद्धिमान पुरुष अपने दिन का प्रातःकाल महाभारत के, मध्यान्ह काल रामायण के और रात्रि का समय श्रीमद्भागवत पुराण के अध्ययन-श्रवण से सार्थक करते हैं।

Wise men spend their time reading stories of gamblers in morning (Mahabharata), of women in day (Ramayana), and of thieves at night (Gita by Shri Krishna).

मूल हिंदी और English quote के बीच यहां विषयों का स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। इसलिए इसे आधुनिक तथ्य के बजाय मूल पोस्ट में दिए गए पारंपरिक कथन के रूप में रखना उचित है।

धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों में आपकी रुचि है तो श्रीमद्भागवत गीता और जीवन के रहस्य से जुड़ी पोस्ट भी पढ़ सकते हैं।

12. पूजा को व्यक्तिगत श्रद्धा से जोड़ने वाला विचार

प्रभु की मूर्ति को अपने हाथ से गूंथी माला पहनाने, अपने हाथ से घिसा चंदन लगाने तथा अपने हाथ से लिखे स्तोत्र से स्तुति करने से मनुष्य इन्द्र की संपदा को भी अपने वश में करने में समर्थ हो जाता है, ऐसा चाणक्य नीति में कहा गया है।

When it comes about worship then one must offer garland made by him, sandalwood paste rubbed by his own hands, and singing a self created songs.

मूल English note में पूजा को व्यक्तिगत विषय बताते हुए पुरोहित की आवश्यकता पर भी टिप्पणी की गई है। यह लेखक की व्याख्या है। इसे किसी सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

13. कुछ चीजें उचित प्रक्रिया से और बेहतर होती हैं

गन्ना, तिल, क्षुद्र अर्थात मूर्ख व्यक्ति, स्त्री, सोना, धरती, चंदन, दही और पान को जितना अधिक मसला जाए, उतने ही उनके गुणों में वृद्धि होने की बात कही गई है।

Sugarcane, oilseeds, a person of low birth, woman, gold, earth, sandalwood, curd and betel, these get better when crushed, beaten or rubbed.

नोट: यह प्राचीन नीति का रूपकात्मक और सामान्यीकृत कथन है। इसे किसी व्यक्ति या सामाजिक समूह के बारे में आधुनिक वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

14. कठिन परिस्थितियों में कुछ गुण व्यक्ति को मजबूत बनाते हैं

धैर्य दरिद्रता का, शुद्धता वस्त्र की साधारणता का, उष्णता अन्न की क्षुद्रता का और सदाचार कुरूपता का आवरण है। निर्धन या दरिद्र होने पर धैर्य, सस्ता लेकिन साफ वस्त्र, ताजा-गरम भोजन और कुरूप होने पर सदाचारी होना श्रेष्ठ बताया गया है।

Patience for times of poverty, cleaning for dirty clothes, heat for food made of poor quality and good nature for a person of no beauty, are redeeming qualities.

सीख: परिस्थितियां जैसी भी हों, धैर्य, स्वच्छता, अच्छे व्यवहार और सदाचार व्यक्ति की स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

चाणक्य नीति Chapter 9 की प्रमुख सीख

चाणक्य नीति Chapter 9 के इन विचारों को पढ़ने पर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं। हालांकि कुछ नीतियां प्राचीन धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हैं, फिर भी कुछ सामान्य जीवन-सीख आज भी उपयोगी लगती हैं।

चाणक्य नीति Chapter 9 से आज क्या सीखें?

इस अध्याय में सबसे उपयोगी विचारों में से एक यह है कि व्यक्ति को अपनी कमजोरियों पर काम करना चाहिए। साथ ही, ज्ञान, दया, धैर्य और आत्मसंयम को जीवन में महत्व देना चाहिए।

मित्र के रहस्य को सुरक्षित रखना भी आज के समय में उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि कब विनम्र रहना है और कब अपनी क्षमता के प्रति आत्मविश्वास दिखाना है।

इसके अलावा, इस अध्याय के कई कथन प्राचीन सामाजिक और धार्मिक संदर्भ से जुड़े हुए हैं। इसलिए उन्हें आज के समाज में शब्दशः लागू करने के बजाय उनके मूल विचार को समझना बेहतर है।

आप आलोचना और नकारात्मक बातों को संभालने के तरीके पर आलोचना का प्रभावी प्रबंधन कैसे करें भी पढ़ सकते हैं।

चाणक्य नीति के अन्य अध्याय पढ़ें

अगर आपको चाणक्य नीति Chapter 9 के ये विचार पसंद आए हैं, तो आप इसके दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:

आप सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

चाणक्य नीति Chapter 9 में त्याग, सहिष्णुता, मित्रता, ज्ञान, धैर्य, आत्मसंयम और सदाचार से जुड़े कई विचार मिलते हैं। इस अध्याय में कुछ बातें प्राचीन धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई हैं, जबकि कुछ सीख आज भी व्यवहारिक जीवन में उपयोगी लगती हैं।

मित्र के रहस्य को सुरक्षित रखना, कठिन समय में धैर्य रखना, ज्ञान को व्यवहार में लाना और अपनी क्षमता को समझना आज भी महत्वपूर्ण है। इसी तरह दया, अच्छे व्यवहार और आत्मसंयम व्यक्ति के व्यक्तित्व को मजबूत बना सकते हैं।

इसलिए चाणक्य नीति को पढ़ते समय उसके हर कथन को वर्तमान जीवन का नियम मानने के बजाय उसके पीछे छिपे विचार को समझना चाहिए। जो सीख आज भी उचित और उपयोगी है, उसे अपने जीवन में अपनाया जा सकता है।

Note: सावधानी बरतने के बावजूद यदि ऊपर दिए गए किसी भी Quote (Hindi or English) में आपको कोई त्रुटि मिले तो कृपया comments के माध्यम से अवगत कराएं।

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