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ज्ञान से शब्द समझ आते हैं और अनुभव से अर्थ

इस एकमात्र जीवन में व्यक्ति वह सब कुछ हासिल करने का प्रयास करता है जो वह चाहता है। अतः अपनी इच्छाओं की पूर्ति खातिर इंसान के लिए आवश्यक होता है “ज्ञान” जिससे उसे सुमार्ग पर चलने और एक बेहतर जीवन जीने में मदद मिलती है।

और ज्ञान एकमात्र ऐसी चीज है, जिसे हजारों वर्षों से प्राणियों द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।

और इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए कई लोग किताबों का सहारा लेते हैं।

लेकिन किताबों में लिखा गया अनमोल ज्ञान, कई लोगों को फिर भी समझ नहीं आताl क्योंकि वे लोग सिर्फ किताब में लिखे हुए शब्दों को पढ़ते हैं, न कि किताब में लिखे हुए शब्दों का जीवन में आचरण कर अनुभव करते हैं।

किसी ने सच ही कहा है इंसान वही जो अच्छी बातों को व्यवहार में लाएं, वरना सुविचार तो दीवारों पर भी लिखे होते है।

ज्ञान (Knowledge)

ज्ञान एक ऐसी चीज है जिसे हासिल करने का मौका हर किसी के पास होता है परंतु यह हर किसी को नहीं मिल पाता। कई लोग अपनी नासमझी और पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण अपने ज्ञान प्राप्त करने के मौके को यूं ही गवा देते हैं।

ज्ञान कोई वस्तु नहीं होती, यह सिर्फ एक विचारों का संगठन होता है परंतु यह दिखता नहीं इसे सिर्फ मस्तिष्क द्वारा ग्रहण किया जा सकता है।

जब हमें कोई ज्ञान देता है तो वह उसे अपने शब्दों द्वारा हम तक पहुंचाता है, जिन्हें ज्ञान का महत्व पता होता है वह वह इसे आसानी से स्वीकार कर लेते हैं।

परंतु हटी, जिद्दी या मन एवम मस्तिष्क के गुलाम लोग जीवन में नए विचारों (Ideas) को अपनाने से कतराते हैं, और स्वयं को इस ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु मानकर ज्ञानी समझते हैं।

 

हालांकि मनुष्य के पास ज्ञान होना ही श्रेष्ठ नहीं होता, जब तक ज्ञान का उपयोग न किया जाए यह व्यर्थ ही होता है

वह बिना सोचे समझे महज दिल की संतुष्टि के लिए कार्य करते है, उन्हें कुछ भी फर्क नहीं पडता कि उसके कार्यों से किसी को नुकसान हो रहा है या लाभ हो रहा है।

लोग ज्ञान प्राप्त करने के कई तरीके अपनाते हैं अपने गुरु से शिक्षा लेते हैं नई नई किताबें पढ़ते हैं। क्योंकि ज्ञान प्राप्त करने की कोई सीमा नहीं होती। व्यक्ति प्रत्येक उम्र में ज्ञान अर्जित कर सकता है और उसे बांट सकता है।

परंतु अनुभव ऐसी चीजें होती हैं जो सिर्फ उम्र के साथ सीखने को मिलती है। ज्ञान एक छोटे से बच्चे के पास भी बेहद हो सकता है परंतु उसे अनुभव सिर्फ उम्र ही दे सकती है

अतः इंसान भले ही किताबें पढ़कर खूब ज्ञानी बन जाए परंतु जब तक वास्तव में परिस्थितियां (Situations) उसके सामने घटित नहीं होती उसे जीवन में अच्छा या बुरा अनुभव प्राप्त नहीं हो सकता।

बचपन में हम बहुत सारी किताबें पढ़कर ज्ञान तो बहुत प्राप्त कर लेते हैं। परंतु उस ज्ञान का अर्थ हमें समझ नहीं आता है, कि कौन सा ज्ञान कहां पर उपयोग किया जाना चहिये।

क्योंकि कई बार अपनी नियत साफ होने के बावजूद और ज्ञान होते हुए भी हम नासमझी की वजह से बचपन में गलती कर बैठते हैं।

इसलिए हमें ज्ञान (Knowledge) से शब्द तो सब समझ में आ जाते हैं परंतु हमें उनका सही अर्थ केवल उम्र के साथ ही अनुभव (Experience) सिखा पाता है।

अनुभव (Experience)

अनुभवों की एक सीमा होती है परंतु व्यक्ति के अनुभवों में उम्र और हालातों के अनुसार वृद्धि होती रहती है।

जिंदगी में अनुभव कर्मों से मिलता है जब तक एक इंसान जीवन में कुछ हासिल करने का प्रयत्न नहीं करता वह अनुभव हासिल ही नहीं कर सकता।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई डॉक्टर बनना चाहता है तो उसे डॉक्टर बनने का अनुभव तब तक हासिल नहीं होगा जब तक वह डॉक्टर बनने के किए पढ़ाई से डिग्री हासिल कर मरीजों की सेवा ना करे।

यह आवश्यक नहीं कि हमेशा अनुभव ज्ञान से ही प्राप्त होता है। बल्कि असल में अनुभव जीवन में कुछ नया करने और अपनी गलतियों से मिलता है।

कई बार इंसान जब गलतियां करता है तो उसे मालूम होता है कि क्या चीज सही है! और क्या नहीं? अतः जीवन में विशेष अनुभव पाना हो तो कुछ बेहतर करने के लिए होने वाली गलतियों से कतराना नहीं चाहिए

यहां यह समझना आवश्यक है कि जीवन छोटा है, अतः खुद गलतियां करने से बेहतर है कि हम दूसरों की गलतियों से सीख ले।

इसलिए हमें लोगों से ज्ञान प्राप्त कर उनका अनुभव सुनना चाहिए ताकि हम उन गलतियों से बच सके जो पहले ही की जा चुकी हैं। इसलिए जीवन में सफलता पाने के लिए ज्ञान एवं अनुभव दोनों का होना जरूरी है।

संसार में जिन लोगों की उम्र ज्यादा होती हैं उनके पास इतने ही ज्यादा अनुभव भी होते हैं। एक उम्रदार व्यक्ति के पास ज्यादा ज्ञान होने के साथ-साथ अनुभव भी होते हैं जिनके सहारे वह अपना जीवन आसानी से गुजार लेता है।

क्योंकि ज्ञान और अनुभव का मिश्रण हर इंसान को उसके जीवन की परिभाषा बताने के लिए काफी होता है।

इसलिए कई लोगों के पास अपने जीवन में ज्ञान बहुत होता है, परंतु अनुभवों की कमी के चलते वह जीवन में उस स्तर तक नहीं पहुंच पाते, जितना हमें उनके ज्ञान एवम विचारों से उनके बारे में पता चलता है।

Gyan aur Anubhav mein antar

क्योंकि जब तक हम अपने ज्ञान को अमल में नहीं लाएंगे। तब तक उस ज्ञान का हमारे लिए कोई महत्व नहीं है।

यदि कम उम्र में आपको अधिक अनुभवी बनना है, तो इसका एकमात्र सूत्र है कि आप अधिक प्रयास करें

जब आप प्रयास करेंगे तो गलतियां होंगी और उन गलतियों से आपको अनुभव मिलेगा। उदाहरण के तौर पर आप एक अच्छा स्पीकर बनना चाहते हैं तो पहली बार में ही आप एक अच्छा वक्ता नहीं बन सकते।

जब आप स्टेज पर जाएंगे तो आप घबराएंगे और हो सकता है पहली बार में आपके हाथों से लोगों को देखकर माइक छूट जाए या फिर आप अपने विचारों को लोगों तक ना पहुंचा पाए। लेकिन धीरे-धीरे नियमित प्रैक्टिस से आप एक दिन जरूर मोटिवेशनल स्पीकर बन जाएंगे।

और एक दिन अपने अनुभव को लाखों लोगों के साथ साझा करेंगे।

एक अनुभवी व्यक्ति अपने जीवन में आने वाले सभी सुखों दुखों का सामना आसानी से कर पाता है।

क्योंकि वह अपनी उस उम्र तक पहुंचने में इतने अनुभव हासिल कर चुका होता है कि उसे पहले ही उन दुखों से निपटने का सही सही ज्ञान मिल जाता है।

ज्ञान और अनुभव में अंतर

आइए अब हम आपको एक उदाहरण के साथ ज्ञान और अनुभव में अंतर बताएंगे।

एक गुरु और शिष्य दोनों आपस में बात करते हैं। गुरु जी अपने शिष्य से बोलते हैं कि मैं आज तुम्हारी परीक्षा लूंगा क्या तुम इस परीक्षा को देने के लिए तैयार हो?

इतना कहते ही शिष्य घबरा जाता है और वह सोचने लगता है कि गुरु जी आज मेरी कौन सी परीक्षा लेने की सोच रहे हैं इतना सोचते ही शिष्य के मन में विचित्र सवाल उठते हैं?

काफी सोचते हुए वह गुरु जी से हां कहता है, गुरु जी अपने शिष्य को जंगल से आम की कुछ सूखी लकड़ियां लाने का आदेश देते हैं। जिसकी जरूरत गुरु जी को हवन करने के लिए पड़ती है।

सुनकर शिष्य मन ही मन खुश हो जाता है, और जंगल की तरफ जाने से पहले गुरु जी से पूछता है गुरुजी क्या यही है मेरी आज की परीक्षा? गुरु जी बोलते हैं तुम्हारी परीक्षा मै कल लूंगा क्योंकि आज मुझे हवन करना है I

इतना सुनते ही शिष्य जंगल की तरफ चला जाता है और वह सारे जंगल में सूखी हुई आम की लकड़ियों की तलाश करने लगता है।

परंतु उसे जंगल में एक भी सूखी हुई आम की लकड़ी नहीं मिल पाती इसलिए वह बहुत परेशान हो जाता है, और उसे कुछ समझ नहीं आता कि अगर मैं आम की लकड़ीया नहीं ले गया तो गुरुजी मुझे क्या दंड देंगे।

वह सोचता है कि गुरु जी वैसे भी कल मेरी परीक्षा लेने वाले हैं अगर मैं आम की लकड़ियां नहीं ले गया तो गुरु जी मुझसे गुस्सा होकर न जाने कौन सी परीक्षा ले लेंगे।

इतना सोचते ही शिष्य के मन में एक ख्याल आता है कि मैं आज किसी अन्य चीज की लकड़ी ले जाऊंगा और गुरु जी को संतुष्ट करने के लिए बोलूंगा कि गुरु जी ये आम की लकड़ियां ही हैं जो कुछ ज्यादा ही सुखी हुई हैं।

इसलिए इनका रंग थोड़ा अलग नजर आ रहा है, इतना सोच कर जंगल से वह पीपल की लकड़ी को उठाकर ले जाता है और गुरु जी के पास पहुंचते ही बोलता है।

गुरु जी इस बड़े से जंगल में बहुत ही मुश्किलों का सामना करने के बाद मुझे यह आम की लकड़ी मिली जो शायद बहुत पहले ही पेड़ से अलग हुई होंगी।

इस कारण यह कुछ अलग दिखाई दे रही है इतना सुनने के बाद गुरुजी उससे बोलते हैं यह लकड़ी यहां रख कर तुम भी यज्ञ के लिए तैयार हो जाओ।

शिष्य वहां से चला जाता है कुछ समय पश्चात जब शिष्य यज्ञ के लिए तैयार होकर आता है तब तक गुरुजी उस लकड़ी को काटकर यज्ञ के लिए छोटे-छोटे टुकड़े बनाते हैं।

तब गुरु जी को भी ध्यान में नहीं आता कि यह लकड़ी आम की नहीं है क्योंकि उन्हें अपने शिष्य पर विश्वास था कि वह आम की लकड़ी ही लाया होगा।

परंतु जब यज्ञ शुरू होता है गुरुजी आम की लकड़ी की महक का अनुभव नहीं ले पाते और अपने शिष्य से बोलते हैं कि तुम यह किस चीज की लकड़ी लाए हो।

इतना कहने पर शिष्य डर के मारे गुरु जी को सब कुछ साफ-साफ बता देता है। यह सुनकर गुरुजी क्रोधित हो जाते हैं और शिष्य को इस उद्दंडता के लिए कड़ा दंड देते है।

अर्थात – शिष्य के पास ज्ञान होने के कारण उसने अपने कार्य को बड़ी ही चतुरता के साथ करने की ठानी। परंतु अनुभव होने के कारण गुरु को उसकी चालाकी का आभास हो गया।

इसलिए कहा जाता है कि ज्ञान से सिर्फ शब्द समझ आते हैं जबकि अनुभव से उनका अर्थ भी समझ आ जाता है।

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