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समस्या का नहीं, समाधान का हिस्सा बने

Problems & Solutions in Hindi

Problem solving attitude in Hindi, Problems vs Solutions

समस्याओं का आना तो इस जीवन में लगा रहता है परंतु उनका सामना करना हर किसी को नहीं आता।

जब भी हमारे सामने कोई परेशानी खड़ी होती है तो वह हमें बेहद कठिन प्रतीत होती है। परंतु वक्त गुजरने के बाद अहसास होता है कि वह समस्या हमारे जीवन में काफी छोटी थी।

लेकिन वर्तमान में जो समस्या खड़ी है वह काफी बड़ी है और इससे निकल पाना बेहद मुश्किल है।

आप बचपन का ही उदाहरण ले लीजिए बचपन में हम जिन बातों से, जिन परिस्थितियों से डर तथा सहम जाते थे।

आज उनके बारे में सोचकर हमें हंसी आती है, हमें लगता है आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं यह बचपन की तुलना में 100 गुना कठिन है।

और इसे आप विधि का ही विधान कहें कि जीवन में समस्याओं का आना-जाना अंतिम सांस तक बना रहता है।

अतः ऐसा कहा जाता हैं मानव जिंदगी की समस्याएं “मौत” के साथ ही ख़त्म होती हैं लेकिन इसका मतलब “आत्महत्या” बिल्कुल भी नहीं हैं, इस पर मैं एक और POST बहुत जल्द करूँगा, याद रहे “आत्महत्या” किसी भी समस्या का हल नहीं हैं बल्कि एक बहुत ही कायरता वाला कदम हैं जो कुछ लोग अपने आप को समस्या से, बीमारी से, अवसाद से दूर करने के लिए उठा लेते हैं, लेकिन इसका परिणाम बहुत ही बुरा होता हैं।

लेकिन यदि जीते जी समस्याओं से पार पाने का साहस इंसान में आ जाए, तो जीवन जीना उसके लिए बेहद आसान हो जाएगा।

आप किस तरह के व्यक्ति हैं?

दो तरह के व्यक्ति होते हैं, पहला जो समस्याओं को देखकर घबरा जाते हैं।
दूसरे वे जो मुश्किलों के सामने डटे रहकर उसकि आंखों में आंखें डालकर हर समस्या का हल निकलते हैं
अब सवाल है व्यक्ति किस प्रकार का होना चाहिए?
जवाब – दूसरे प्रकार का

जो इंसान पहली प्रवत्ति का होता है, उसके जीवन में यदि छोटी-छोटी समस्याएं आती हैं, तो व्यक्ति उन्हें काफी बड़ी समस्या समझ कर उनसे कतराता है।

लेकिन यह सत्य है कि यदि समय रहते किसी छोटी समस्या को न सुलझाया जाए तो वह समस्या वक्त के साथ बड़ी बन जाती है।

इसलिए इंसान को हमेशा परेशानी आने पर परेशान होने के बजाय उचित समाधान पर गौर करना चाहिए।

जब हम समस्या नहीं बल्कि समाधानों का हिस्सा बनते है, तो हमारा दिमाग हमारी परेशानियों पर नहीं बल्कि उसके समाधानों पर केंद्रित हो जाता है।

और यही छोटी सी आदत अगर मनुष्य अपना ले तो वह जीवन में आने वाली हर छोटी-बड़ी समस्याओं से निपटकर गहरा अनुभव प्राप्त कर सकता है।

क्योंकि छोटी सी जब मनुष्य इस काबिल बन जाता है तो उसे अपने जीवन में आगे आने वाली समस्याओं से ज्यादा दुख नहीं होता। क्योंकि वह जानता है कि इन समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है।

उसे ज्ञात होता है कि समस्या हर किसी के जीवन का एक अभिन्न अंग होती है बिना समस्या के व्यक्ति अपना जीवन भी नहीं जी सकता।हर समस्या हमारे जीवन में एक नया सबक लेकर आती है कई बार यह हमें इशारा देती है कि संभल जाओ वरना जिंदगी तुम्हें बुरी तरह गिरा देगी।

लेकिन समस्याओं से घबराने वाले लोग कई बार जीवन में बुरे फैसले लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र समय पर शिक्षा हासिल करने की बजाय अपना मूल्यवान समय अन्य क्रियाओं में व्यतीत करता है।

तो परीक्षा के निकट आने पर वह परीक्षा में पास होने को इस चुनौती को बड़ी समस्या मानता है।

और उस समस्या से घबराकर परीक्षाओं में नकल करने का निर्णय ले लेता है, जिससे अंततः उसे ज्ञान और सम्मान दोनों की हानि होती है।

नजरिया बदल कर जीवन में हल करें सारी समस्याएं

देखा जाए तो समस्या केवल तब बनती है जब हम उसके आगे घुटने टेक देते हैं और आगे कुछ करने की सोचते ही नहीं और अपने नजरिए से उसे समस्या के रूप में देखते हैं।

जैसे कि एक विद्यार्थी की मुख्य समस्या उसकी पढ़ाई होती है परंतु देखा जाए तो पढ़ाई कोई समस्या है ही नहीं।

हम जब अपनी पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो उससे हमें अपने जीवन और कैरियर में अनेक लाभ होते हैं अतः क्या पढ़ाई वाकई कोई समस्या है?

नहीं ना, पर विद्यार्थी उसे अपने नजरिए से समस्या का रूप देता है।

पर उसके भविष्य को संवारने वाली शिक्षा को ही यदि वह समस्या समझ कर जीवन में उससे बचने का प्रयास करता है, तो वह अपने भविष्य के लिए आज से ही समस्याएं खड़ी कर रहा है।

अतः इस स्थिति से गुजरने वाले लोगों को अंततः यह महसूस होता है कि यदि मै पढ़ाई को समस्या ना समझता तो आज मुझे जीवन में इतनी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।

हमें कभी भी किसी समस्या को समस्या के नजरिए से नहीं देखना चाहिए मात्र उसे अपने जीवन में छोटे सा कार्य समझकर उसका सामना करना चाहिए।

प्रत्येक समस्या को हल करने के बाद हमें हमेशा ही खुशी महसूस होती है और हमारा जीवन उस स्तिथि से एक कदम आगे बढ़ चुका होता है जिसका एहसास समस्या हल होने के बाद मिलता है।

हम आपको एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझाएंगे कि हमें किस प्रकार समस्या का नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा बनना चाहिए।

यह कहानी है एक सुंदर हिरन और उसके बच्चों की, एक बार एक बड़े से जंगल में एक हिरन अपने बच्चों के साथ पानी की तलाश में घूम रहा था हिरन और उसके बच्चे बहुत दिनों से प्यासे थे।

पानी की तलाश में वे जंगल के एक कोने से दूसरे कोने में घूम रहे थे। पर उन्हें पानी कहीं भी नजर नहीं आया अतः थक हारकर अंततः दोपहर के समय वे सभी एक पेड़ के नीचे छांव में बैठ जाते हैं।

कुछ समय पश्चात जब वे वहां पर एक दम शांत बैठ जाते हैं तो उन्हें आस-पास एक उफनती नदी की आवाज सुनाई देती है।

हिरण और उसके दो बच्चे एक दूसरे को देखते है, और पानी की उसी लहर को सुनकर उसी तरफ बढ़ते चले जाते हैं। उन्हें यकीन हो जाता है आसपास कहीं ना कहीं एक नदी जरूर है इसलिए वे मन ही मन बहुत खुश हो जाते हैं।

कुछ दूर जाने के बाद नदी को देखते ही सब दौड़कर पानी पीने के लिए उस नदी में पहुंच जाते हैं और पानी पीने के लिए अपना सिर नीचे करते हैं।

खुद की और अपने बच्चों की सुरक्षा हेतु एक बार वह हिरण अपने चारों तरफ देखता है। पर बाईं तरफ हिरण पर नजरें गड़ाए जब वह एक शिकारी को देखता है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती हैं।

लेकिन अपने प्यार से बच्चों को पानी पीता देख हिरण उन्हें उस शिकारी के सामने होने के कोई संकेत नहीं देता है, और खूब घबराने के बावजूद भी वह स्वयं चुपचाप पानी पीने लग जाता है।

कुछ सेकंड पश्चात जब हिरन की नजर बाई तरफ पड़ती है तो उसे दूर पर ही खड़ा हुआ एक शेर नजर आता है। अब हिरन पहले से भी ज्यादा डर के मारे सहम जाता है, लेकिन धैर्य रखकर फिर भी अपने बच्चों को कुछ भी नहीं बताता।

अब बाहर से देखने में हिरण भले ही नदी में पानी पीता दिखाई दे रहा था परंतु मन ही मन वह अपनी दाएं एवम बाएं तरफ खड़ी हुई इस समस्या का समाधान करने की सोच रहा था।

हिरण सोचता है कि अब मुझे अपने बच्चों को पानी पिला कर पीछे की ओर भागना पड़ेगा लेकिन जब हिरन पीछे की ओर देखता है तो उसे जंगल में पीछे से नदी की ओर आ रही आग की लपटें दिखती हैं।

अब मानो हिरण के जीवित रहने की सारी उम्मीदें ही मर चुकी थी और सोचने लगता है।

कि अगर मैं आगे की ओर जाऊंगा तो सामने नदी है और मेरे छोटे से बच्चे उस नदी की धार में बह जाएंगे। अगर मैं पीछे की ओर भागता हूं तो, मैं और मेरे बच्चे आग की लपटों में जलकर राख हो जाएंगे।

अब हिरन के सामने बचने का कोई भी रास्ता नजर नहीं आता क्योंकि हिरन के बाई और शेर खड़ा था। अगर हिरन उस तरफ भागता तो शेर हिरण या हिरण के बच्चों को अवश्य मार डालता।

अगर हिरन अपनी दाएं और भागने की कोशिश करता है तो वहां खड़ा शिकारी हिरण को अपने तरकश में रखे बाण से मार डालता। अब हिरण के पास बचने का कोई भी उपाय नहीं रहा।

हिरन ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और यह सोचा की अगर मेरे सामने चारों तरफ से समस्याएं खड़ी हैं तो क्यों न मैं आखिरी सांस तक इसका सामना करू?

यह सोचकर हिरन अपना काम करने लग जाता है और जी भर कर पानी पीता है, जब हिरन पानी पी रहा होता है उसी समय शिकारी द्वारा छोड़ा गया बाण उसके निशाने से चूक कर बाईं दाईं तरफ मौजूद शेर को लग जाता है।

बाण लगते ही शेर गुस्से से दहाडने लगता है और उस शिकारी का पीछा करने लग जाता है।

मौका देखते ही हिरन खुशी के साथ अपने बच्चों को लेकर उस जंगल के उस तरफ भाग जाता है, जहां से वह आया था।

इस प्रकार अब हिरण अपनी उन सभी समस्याओं से छुटकारा पा चुका था जो उसके सामने खड़ी थी।

सीख-

हमें हिरण की यह छोटी सी कहानी संदेश देती है कि समस्या हर किसी के जीवन में आती है

अतः हमें समस्या आने पर घबराकर फैसले नहीं लेनी चाहिए। परेशानी को देखकर हमें जल्द हार नहीं माननी चाहिए।

क्योंकि प्रत्येक समस्या के जन्म के साथ ही उस समस्या का हल भी हमारे पास होता है। स्वयं भगवान कृष्ण कहते हैं ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका हल ना मिल सके।

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