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पढाई में मन लगाने के 9 अद्भुत मंत्र

Mantra for concentration and memory

शिक्षा इंसानी जीवन में बहुत महत्व रखती है। इसके बिना हम जीवन में सफलता के संयोग को खुद बखुद कम कर लेते हैं। शिक्षा वह हथियार है जिससे अज्ञानता के अंधेरे को छांटना आसान हो जाता है लेकिन शिक्षा इतनी आसानी से ग्रहण नहीं की जा सकती क्योंकि इसे हासिल करने के बाद ही कोई समाज में अपना एक अलग मर्तबा और मुकाम बना पाने में सक्षम हो पाता है।

वैसे तो दुनिया में हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि उसका बच्चा पढ़ लिखकर कोई बेहतरीन नौकरी या ऑफिसर बन कर राष्ट्र एवं समाज की सेवा करे और दुनिया भर में उनका नाम रौशन करे लेकिन बच्चों का मन पढ़ाई में न लगने के कारण उनका यह सपना धरा का धरा रह जाता है।

अपने बच्चों के बारे में सोचकर भी अकसर माता पिता बहुत चिंतित और बेचैन रहा करते हैं। क्योंकि बहुत से छात्र जब पढ़ाई का मन बनाते हैं तो उन पर आलस्य हावी हो जाता है और वह जी चुरा कर पढ़ाई से अपने कदम पीछे खींच लेते हैं।

आइए! जानते हैं कि बड़ों और छात्रों के लिए पढ़ाई में मन लगाने के उपाय क्या क्या है:

1. आलस्य है किसी कामयाबी का सबसे बड़ा दुश्मन

आलस्य किसी भी इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन सिर्फ इसलिए माना जाता है कि इससे किसी व्यक्ति की शिथिलता और गफलत बढ़ती है और वह कामयाबी से बहुत दूर रह जाता है। यहां तक कि आलस्य से बनी बनी बनाई कामयाबी भी पर भी पानी फिर सकता है।

सिर्फ अध्ययन या पढ़ाई नहीं बल्कि आप दुनिया के किसी भी क्षेत्र में हों, अगर आलस्य आपके मन पर हावी रहता है तो आप कुछ नहीं कर सकते। जब तक आपके भीतर चुस्ती और स्फूर्ति नहीं होगी, आप किसी भी कामयाबी की ओर आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ अपने कदम नहीं बढ़ा सकते।

अगर आप सफल हैं और फिर भी आपके मन पर आलस्य हावी रहता है तो इस बात के चांसेस बढ़ जाते हैं कि वह कामयाबी भी आपके हाथ से निकल जाए क्योंकि कामयाबी को बरकरार रखने के लिए निरंतर मेहनत और लगन की जरूरत पड़ती है। तो आप अगर छात्र या अध्ययन कार्यों में खुद को व्यस्त रखते हैं तो सबसे पहले आपको आलस्य से पीछा छुड़ाना होगा और एक समय निर्धारित कर अपने आपको अध्ययन कार्यों में लीन रखना होगा।

2. आत्मविश्वास और लगन हैं सबसे बड़े दोस्त

पढ़ाई लिखाई में आत्मविश्वास और लगन का होना बहुत जरूरी है। इसकी गैरमौजूदगी में आप ज्यादा मेहनत नहीं कर सकते और थोड़ा पढ़ लेने पर ही आपका मन बोरियत महसूस करने लगता है।

अगर आपके भीतर आत्मविश्वास और लगन मौजूद है तो आप इन शिकायतों से निजात पा सकते हैं।

3. लक्ष्य को पाने के बीच दबाव में न रहें

विद्यार्थी जीवन में ही एक लक्ष्य निर्धारित करें और उस लक्ष्य को पाने के लिए मजबूती और गहरी प्रतिबद्धता के साथ जुट जाएं। यह याद रखते हुए कि आप दुनिया का कोई भी कंपटीशन या परीक्षा पास करना चाहते हों, उसे अचानक नहीं उत्तीर्ण किया जा सकता।

किसी क्षेत्र में मैदान मारने के लिए हर रोज उतना ही पढ़ें जितना आपका मन करे और छोटे छोटे अंतराल पर ब्रेक लेने की कोशिश करते रहें। मन लग रहा हो तभी ज़्यादा देर तक किताबों की संगत में रहें। मन न लग रहा हो तो थोड़ा पढ़कर दोस्तों के साथ कहीं थोड़ी देर के लिए सैर या तफरीह (Entertainment) के लिए निकल जाएं।

खेलकूद के समय जबरदस्ती न पढ़ें क्योंकि इससे आपका आधा मन तो आपके दोस्तों के साथ ही कहीं घूमने फिरने निकल जाएगा और आधे मन से आप कोई किताब नहीं पढ़ सकते। पढ़ने के दौरान अपने शैक्षिक भविष्य (Educational Future) के बारे में न सोचें।

आपका पूरा फोकस भविष्य के गर्भ में मौजूद नतीजों पर नहीं बल्कि अपने वर्तमान पर रहना चाहिए। हर रोज थोड़ी और लगातार मेहनत मशक्कत दिन गुजरने के बाद इकठ्ठा होकर बड़ी और अनोखा रूप धारण कर लेती है। इसके अलावा, पढ़ाई के बीच आपको क्लास या आत्म अध्ययन (Self Study) के बीच अनुपस्थित भी नहीं रहना है।

थोड़ा ही सही लेकिन हर रोज अपनी पाठ्यक्रम की किताबों की संगत में रहकर कुछ न कुछ नया सीखने की कोशिश करते रहें। किताबें आपकी बेहतरीन दोस्त हैं जो आपके भविष्य के साथ आपके आचरण, व्यवहार, किरदार और व्यक्तित्व निर्माण (Personality Development) में भी आपका भरपूर साथ देती हैं। किताबें आपको ज्ञान और प्रतिभा से भर सकती हैं।

इसलिए इन्सानों के साथ किताबों से भी दोस्ती का हाथ बढ़ाएं और ज्यादा से ज़्यादा उनके करीब जाने की कोशिश करते रहें।

4. पढ़ाई का निर्धारित करें समय

किसी भी काम को अंजाम देने के लिए समय प्रबंधन का होना बेहद ज़रूरी है। पढ़ाई लिखाई में इसका महत्व और ज़्यादा बढ़ जाता है। अगर आपने एक टाइम टेबल बना लिया और उसी के अनुसार हर रोज़ अपनी पढ़ाई को चरणों में बांट कर पढ़ते रहे तो इसका आपको बहुत जल्द कोई प्रभावशाली और खुशनुमा नतीजा देखने को मिलेगा।

जब कोई छात्र हर रोज़ मेहनत, लगन और समय प्रबंधन के साथ अपनी पढ़ाई पूरी करता है तो इस तरह इसका पढ़ने लिखने वाला काम आसान हो जाता है। हर रोज़ पढ़ कर वो अपने क्लासमेट्स से कहीं आगे निकल जाता है और परीक्षा में बाज़ी मार कर अपने अध्यापकों को खुश और अपने मां बाप का सर फख्र से ऊंचा करता है।

इस तरह वो अपने करियर की ओर सकारत्मक दिशा में आगे बढ़ता है और अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर लेता है। इसके अलावा, जो आदमी हर रोज़ थोड़ा थोड़ा करके किताबों का अध्ययन करता है, उस पर शैक्षिक कार्यों का बोझ भी ज्यादा नहीं होता और न ही उसे अपने काम में किसी किस्म की कोई थकन का एहसास होता है।

निर्धारित समय सीमा में पढ़ने और बचे खुचे समय में खेल कूद या मनोरंजन करते रहने से छात्र जीवन को आसान बना कर बड़ी उपलब्धि हासिल किया जा सकता है। दरअसल, आपका दिमाग एक ही चीज पर लगातार फोकस करने से थक कर चूर हो जाता है।

जब आप उसे बांटते हैं और फिर अपने मिशन पर वापस आते हैं, वह नए ढंग से तेजी के साथ काम करना शुरू कर देता है। इसलिए जीवन में हर काम के लिए एक समय निर्धारित कीजिए और उस समय में सिर्फ़ और सिर्फ़ वही काम कीजिए जिसको करना आपने अपने टाइम टेबल में सेट किया है।

5. संभव हो तो दोस्तों के संग पढ़िए

किसी भी घर में पढ़ाई लिखाई और एजुकेशनल माहौल का होना बहुत जरूरी माना जाता है। आप जब अकेले पढ़ते हैं तो कुछ देर बाद तंग आकर यह महसूस करते होंगे कि आप का ध्यान इधर उधर होकर भंग होने लगा है लेकिन अगर आपको उसी समय एक माहौल या पढ़ने लिखने वाले दोस्तों या कजिंस का साथ मिल जाए तो आपका मन पढ़ाई में लगने लगता है।

यह इंसानी फितरत है। आदमी जब भी अपने आसपास कुछ अच्छा या बुरा घटते हुए देखता है तो उससे थोड़ा या बहुत प्रभावित जरूर होता है। इसलिए अगर अच्छी आदतों से आपको प्रेरणा लेनी हो तो घर या बाहर पढ़ाई लिखाई या अध्ययन का माहौल पैदा करना होगा। इस माहौल से प्रभावित होकर आप अध्ययन कार्यों की ओर खुद बखुद आकर्षित होने लगेंगे।

6. पढ़ने लिखने में तेज तर्रार बच्चों से करे कंपटीशन

अपने किसी तेजतर्रार और बुद्धिमान क्लासमेट को चुन लें और उससे खुद का मुकाबला करवाएं। आप भले ही इस कंपटीशन में पीछे रह जाएं लेकिन इस दौरान आपके शिक्षा का स्तर जरूर ऊंचा हो सकता है। आप इस दौड़ में आगे निकलने के लिए जी तोड़ मेहनत करेंगे और इस तरह पढ़ाई लिखाई का आपका स्तर बुलंदियों तक पहुंच सकता है।

अगर आप सब कॉलेज लाइफ से अलग हो चुके हैं तो भी आप किसी बुद्धिमान व्यक्ति से अपना कंपटीशन कर सकते हैं। लेकिन इस दौरान याद रहे कि आपके अंदर किसी तरह के द्वेष या नफरत की भावना नहीं होनी चाहिए वरना इस कंपटीशन का कोई फायदा नहीं होगा बल्कि आपके अंदर यह सोच होनी चाहिए कि मैं अपनी योग्यता और प्रतिभा में सुधार करने की नियत से यह कंपटीशन अंजाम दे रहा हूं।

7. पढ़ाई के समय दुनिया से कट जाएँ

आजकल सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, टि्वटर और इंस्टाग्राम आदि के अलावा मोबाइल गेम्स ने बच्चों के शैक्षिक भविष्य को अंधेरे की गर्त में धकेल दिया है। जब कभी वे पढ़ने बैठते हैं तो उनका ध्यान मोबाइल फोन की ओर खिंचा चला जाता है। इस तरह, वह किताब की कोई भी सामग्री या ज्ञान अपने जेहन में नहीं बिठा पाते।

इस दौरान आपको यह पुख्ता इरादा करना होगा कि आप जब भी पढ़ाई करने बैठेंगे तो आपका मोबाइल आप से कोसों दूर रहेगा और अगर मोबाइल और आपका साथ रहेगा भी तो आप उसका इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ शैक्षिक सामग्री (Educational Contents) सर्च करने भर रहेगा। इसी भावना के तहत आप पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन का सदुपयोग कर सकते हैं वरना अगर आप रस्ते से जरा भी भटके तो सोशल साइट पर या गेमिंग जोन में आपका घंटों समय बर्बाद हो जाएगा और आपको इसका अंदाजा भी नहीं लगेगा।

आप भी कभी यह महसूस करते होंगे कि मोबाइल फोन पर किस तेजी के साथ समय बीतता है। इसलिए पढ़ाई के दौरान मोबाइल हाथ में लेना बहुत बड़ा रिस्क साबित होता है होता है क्योंकि इससे आप गुमराह होकर अपने घंटों समय को बर्बाद कर सकते हैं।

8. पढ़ने के लिए तलाश कीजिए कोई शांतिपूर्ण जगह

हमेशा पढ़ने के लिए उसी जगह का चुनाव करना चाहिए जहां शांति और सुकून हमें मयस्सर हो सके। वहां बातचीत का या दुनियादारी का कोई माहौल और ख्याल ना रहे वरना किताबों से आपका मन उचट सकता है। बहुत ज्यादा शोर-शराबे या घर में कोई प्रोग्राम हो, वहां भी पढ़ने की कोशिश ना करें।

इससे आपको किताबों में ध्यान लगाने के दौरान बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। आप इधर उधर की बातों में लग जाएंगे और जो समय आपने पढ़ाई के लिए सुनिश्चित किया है, वह बेशकीमती समय आपके हाथों से निकल सकता है।

शोर-शराबे से भी आपका मन ध्यान भंग हो सकता है, इसलिए पढ़ने के लिए कोई एक खास कमरा चुन लें जहां इस तरह की परेशानियों का बिल्कुल सामना ना रहे। शांतिपूर्ण माहौल में किया गया अध्ययन वाकई आपके ज़ेहन से नहीं उतरेगा।

9. बोझल तबीयत लेकर पढ़ाई ना करें

जब भी आप किसी कठिनाई में हो और उस समय आपका मन बोझल हो तो उस समय खुद को पढ़ाई से दूर रखकर अपने आपको बहलाने का प्रयास करें वरना ऐसी हालत में पढ़ने का कोई फायदा नहीं मिलेगा बल्कि इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है।

ऐसे आलम में तबीयत और अधिक बोझल हो सकती है और इस दौरान जो कुछ आप पढ़ेंगे, वह आपके दिमाग से उतर सकता है।

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