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सर्वाकर्षक श्रीकृष्ण के सिद्दांत जो जीना और संघर्ष करना सिखाते हैं

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हमें श्रीमद्भागवद्गीता का ज्ञान देने वाले परम पुरषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं, श्रीमद्भागवद्गीता में तो भगवान ने सभी प्रकार का ज्ञान दिया हैं, परन्तु यदि हम केवल उनके जीवन को देखे तो हमें काफी कुछ सीखने को मिलेगा, हम उनके जैसा तो नहीं बन सकते परन्तु उनके दिखाए गए रास्ते पर चलने की कोशिश तो कर ही सकते हैं।

आखिर क्यों हैं श्रीकृष्ण सर्वाकर्षक

कोई भी व्यक्ति सर्वाकर्षक केवल तभी हो सकता हैं जब उसके पास निम्न छह ऐश्वर्य असीम मात्रा में हो

  1. सम्पति – श्रीकृष्ण जैसा और कोई नहीं हैं जो यह दावा कर दे कि वह सर्वाधिक सपन्न हैं, उसके पास जगत की सम्पूर्ण सम्पति हैं, भगवत गीता के 5th अध्याय में भगवान ने कहा हैं कि मैं समस्त प्रकार के यज्ञो तथा तपस्याओं का भोगता व् समस्त लोको का स्वामी हूँ।
  2. सौदर्य – हम श्रीकृष्ण की वृद्ध रूप में कोई चित्र नहीं पाते हैं क्योकि वो कभी वृद्ध नहीं होते हैं, कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब उनकी आयु 90 वर्ष थी तथा उसने अनेक प्रपोत्र भी थे, तब भी वो एक नवयुवक जैसे ही दिखाई देते थे।
  3. ज्ञान – भागवतगीता में आप समस्त प्रकार के ज्ञान-विज्ञान (भौतिक, आध्यत्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक, दार्शनिक आदि) प्राप्त कर सकते हैं और यह हमें दिखाता हैं कि श्रीकृष्ण का ज्ञान पूर्ण हैं।
  4. शक्ति – 3 माह की उम्र में पूतना का वध किया, सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को 7 दिनों तक एक ऊँगली पर उठाएं रखना, उनकी अपार शक्ति को दिखाता हैं।
  5. यश – संसार के इतिहास में 5000 वर्षो के बाद भी भागवतगीता के वक्ता के रूप में पुरें विश्व में प्रसिद हैं विश्व की हर भाषा के शब्दकोष में श्रीकृष्ण शब्द होता हैं।
  6. वैराग्य – हम स्वयं द्वारा निर्मित की गई वस्तु से आसक्त रहते हैं तथा उसका त्याग नहीं करना चाहते, जबकि सम्पूर्ण भौतिक संसार श्री कृष्ण द्वारा सृजित होते हुए भी यहाँ उनकी लेश मात्र भी रूचि नहीं हैं।

कृष्ण के सिद्दांत जो जीना सीखाते हैं

कृष्ण के सिद्दांत जो संघर्ष सिखाते हैं

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