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आप कितने कीमती है?

सिर्फ वस्तुओं की नहीं बल्कि इंसान की भी एक कीमत (Worth,  Value) होती है और जो अपनी कीमत समझ जाता है उसके जीवन में आने वाली परेशानियां, मुश्किलें उसका रास्ता नहीं रोक पाती।

कभी आपने सोचा है कि आप की कीमत कितनी है आप इस संसार में कितने कीमती हैं? शायद नहीं क्योंकि यह बात अक्सर कोई नहीं समझता और ना ही सोचता है,कि उसकी कीमत इस संसार में कितनी है।

जो लोग अपनी कीमत समझते हैं वे अपनी कीमत का सही फायदा उठाते हैं।

अपनी कीमत पहचानने का सबसे आसान तरीका है किसी अवसर/ कार्य में आपकी अनुपस्थिति होना।

अर्थात आपके न होने से यदि किसी कार्य के होने में समस्या या बाधा उत्पन्न होती है तो आप भली-भांति अपनी कीमत समझ सकते हैं।

हालांकि बाजार में बिक रही वस्तुओं की भांति हमारे शरीर का मोल करना आसान नहीं है। क्योंकि ईश्वर ने हमें आंख, नाक,कान इत्यादि अनेक ऐसे अंग दिए जोकि मनुष्य के लिए सबसे अधिक कीमती होते हैं चाह कर भी मनुष्य इन्हें जीते जी बेच नहीं सकता।

यदि किसी मनुष्य से कह दिया जाए कि तुम मुझे अपनी दोनो आंखें दे दो, जिसके बदले में मैं तुम्हें अपार धन दूंगा तो शायद ही कोई इस बात के लिए राजी हो पाए?

अतः यह धारणा कि मेरे पास कुछ नहीं है कहने वाले लोगों के लिए यह एक करारा जवाब है कि आपके पास यह अनमोल शरीर है जिसे आप लाखों-करोड़ों में भी आप बेच नहीं सकते।

अतः किसी ने सच ही कहा है कि इस संसार में सबसे ज्यादा कीमती एक मनुष्य है। मनुष्य की कीमत कोई उम्र भर नहीं चुका सकता?

यहा सिर्फ वही व्यक्ति कीमती नही है जो शारीरिक कर्म या दिमाग का उपयोग करके कुछ पैसे कमाता है बल्कि हर कोई इंसान किसी न किसी के लिए कीमती है ।

जैसे एक परिवार के लिए उसके प्रत्येक सदस्यों की कीमत उन्हें अपने परिवार के सदस्यों की कीमत तब पता चलती है जब कोई सदस्य अपने परिवार में उपस्थित ना हो।

जब परिवार में हर कोई उपस्थित रहता है,तो उस वक्त उसे अपनी कीमत समझ नहीं आती परंतु वास्तव में उसकी कीमत भी अपने परिवार के लिए बहुत अधिक होती है।

अक्सर लोगों के बीच यही बातें होती हैं कि तुम्हारी क्या कीमत है? तुम्हारे पास कितना पैसा हैं? और तुम क्या कर सकते हो? अगर देखा जाए तो एक इंसान बहुत कुछ कर सकता है,उसकी कीमत भी अनंत है ।

परंतु हर कोई उसकी कीमत कुछ समझ नहीं पाता। उनकी कीमत सिर्फ तब समझ आती है जब वह किसी कार्य को करते हैं,उस कार्य में सफल हो जातें हैं तो लोग तब उस इंसान को समझ पाते हैं,उसकी कीमत का अंदाजा लगा पाते हैंl

हम आज आपको ऐसी दो कहानियों का उदाहरण देंगे जिन्हें पढ़ने के बाद आप खुद की कीमत समझ पाएंगे।

1. पहला उदाहरण- जब आप एक बच्चे थे तब आपकी कीमत क्या थी?

जब आप 1 बच्चे थे तब शायद आपने कभी भी अपनी कीमत जानने की कोशिश नहीं की होगी क्योंकि प्रत्येक बच्चा अपने बचपन में बेफिक्री से हमेशा खेलता हुआ नजर आता है।

जब भी वह थक जाता है तो बिस्तर में बड़े ही आराम से नींद निकालने लगता है। जब उसकी नींद को कोई खराब करता है तो वह बहुत जोर जोर से रोना लगता है। अर्थात उसे किसी भी चीज का भय नहीं रहता।

वह क्या कर रहा है? क्यों कर रहा है? और किसके लिए कर रहा है?अर्थात बच्चा बिना किसी समस्या के अपना जीवन यापन करता है।

परंतु बात आती है उसकी कीमत की, कि उसकी कीमत क्या है? और उसकी कीमत किसके लिए मायने रखती है ।

एक छोटा सा बच्चा उसकी कीमत अनंत होती है। एक छोटा सा बच्चा भले ही अच्छी तरीके से बोल भी ना सके परंतु उसकी कीमत लाखों लोगों की हंसी के बराबर होती है।

छोटा सा बच्चा अपने कार्यों से उन सभी लोगों को प्रसन्न करता है,जो भी उसे पकड़ता है,जो भी उसके आसपास रहता है,और जो भी उसे चाहता है।

आप लोगों ने हमेशा देखा भी होगा कि एक छोटा सा बच्चा जो उल्टी-सीधी हरकतें करता रहता है। उसे देख के आस पास के लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहट आ जाती है। भले ही लोग कितने ही गुस्से में क्यों ना हो परंतु एक छोटे से बच्चे की हरकतों को देखकर वे मुस्कुरा जाते हैं ।

यही कीमत है उस छोटे से बच्चे की अर्थात उस छोटे से बच्चे के बचपन की कीमत लाखों लोगों की हंसी के बराबर है ।

Your worth values keemat

अगर बात आती है हंसी की, तो एक इंसान की हंसी कितनी कीमत होती है इसे समझना और उसका अनुमान लगाना भी बहुत मुश्किल है।

जब एक इंसान की मुस्कुराहट की कीमत नहीं लगाई जा सकती तो उन लाखों लोगों की मुस्कुराहट की कीमत कितनी होगी? जिन्हें एक छोटा सा बच्चा मुस्कुराने के लिए मजबूर कर देता है।

कहे तो एक छोटे से बच्चे के बचपन की कीमत सोची भी नहीं जा सकती, अर्थात प्रत्येक बच्चे के बचपन की कीमत अनंत है। इसलिए हमें कभी भी अपने आप को किसी से कम नहीं समझना चाहिए ।

चाहे शिशु किसी भी परिवार से क्यों ना हो, भले ही अन्य लोग उससे खुश ना हो परंतु उसके परिवार वाले और उसके मां-बाप हमेशा उसकी हरकतों से खुश रहते हैं।

अगर आपको अपनी कीमत जाननी है तो आप अपने मां-बाप की एक खुशी की कीमत का अनुमान लगा सकते हैं कितनी महंगी होती है किसी के मां बाप की मुस्कुराहट।

अनुमान भले ही ना लगे परंतु आप अपने बचपन की कीमत अपने मां-बाप की मुस्कुराहट के साथ तुलना कर सकते हैं अर्थात आपकी कीमत का अनुमान कभी नही लगाया जा सकता है।

2. दूसरा उदाहरण- जब आप कुछ जिम्मेदारी लायक हो जाते हो अर्थात आप घर के कार्यों को करने लग जाते हो।

एक इंसान की कीमत भले ही उसे समझ ना आए परन्तु उसके घर वालों को तब समझ आती है,जब वह अपने घर के विभिन्न कार्यों को जिम्मेदारी समझकर करने लगता है।

क्योंकि जब एक इंसान अपने घर के कार्यों को नियमित रूप से करता है,परंतु एक दिन वह किसी अन्य कार्य के कारण अपने उस नियमित किए जाने वाले कार्य को नहीं कर पाता। तो उसके घर वालों को उसकी कीमत समझ आती है ।

जैसे अगर हमारा लड़का नहीं होता तो हमें यह फलाना कार्य भी रोज स्वयं करना पड़ता।

अर्थात प्रत्येक व्यक्ति की कीमत होती है। वह कीमत तब समझ आती है जब किसी अन्य को उसकी जरूरत पड़ती है ।

इसलिए हमें खुद की कीमत को समझते हुए प्रत्येक वही कार्य करने चाहिए जिसकी हमें तथा हमारे चाहने वालों को जरूरत हो। हमें कभी वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए ।

हमें अपने जीवन में निरंतर ऐसे कर्म करते रहने चाहिए जिससे हमारी खुद की कीमत और भी अधिक बढ़ सकें।

जब एक इंसान अपने घरवालों की प्रत्येक जरूरतों को पूरा करता है तो उसके घर वालों को उस इंसान की कीमत समझ नहीं आती। क्योंकि उनकी इच्छाएं, शौक पूरे हो जाते हैं अतः वे अपना खुशहाल जीवन जीते हैं ।

इसलिए वे उस इंसान की कीमत नहीं समझ पाते जो उनके सपनों को पूरा करता है।

परंतु कभी दुर्भाग्यपूर्ण उस इंसान का स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पाता, तब उसके घर वालों को उस इंसान की कीमत समझ आती है।

इसलिए अपने स्थान पर प्रत्येक व्यक्ति की कीमत अनंत है परंतु कीमत सिर्फ वही पर समझ आती है जहां पर उसकी जरूरत होती है। इसलिए हमें कभी भी बेवजह खुद की अन्य लोगों के साथ अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए।

हमारे जीवन में भी हमारी अनंत कीमत है और वह कीमत वहीं पर है जहां पर लोगों को हमारी जरूरत पड़ती है ।

जब एक किसान कहीं दूर शहर में घूमने जाता है तो उसकी कीमत वहां पर कोई नहीं पहचानता और ना ही कोई उसकी इज्जत करता है।

जब वही किसान अपने खेतों में कड़ी मेहनत करता है तो लोग उसे देखकर उसकी कीमत समझते हैं, कि किस प्रकार वह धूप में पसीने बहाकर अपने खेतों में फसल उगा रहा है ।

जिस फसल को खाकर उन लोगों का जीवन चल रहा है। जो लोग बाजार में उस किसान की इज्जत नहीं करते उन्हें केवल किसान के खेत में उसकी कीमत समझ आती है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का एक निश्चित स्थान होता है जहां पर उसकी कीमत हर किसी को समझ आती है।

इसलिए एक किसान को कभी भी अपनी तुलना एक बिजनेसमैन के साथ नहीं करनी चाहिए क्योंकि बिजनेसमैन की कीमत सिर्फ उसके बिजनेस के अंदर है और किसान की कीमत सिर्फ उसके खेती-बाड़ी के अंदर।

सीख-

हमें इन छोटे से उदाहरणों से यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी अपने जीवन से निराश नहीं होना चाहिए और ना ही अपने जीवन की तुलना अन्य लोगों के जीवन से करनी चाहिए क्योंकि हमारी कीमत हमारे स्थान पर ही उचित है न कि अन्य लोगों के स्थान पर।

इंसान को जब अपनी कीमत ज्ञात हो जाती है तो इससे न सिर्फ वह स्वयं का जीवन आसान कर लेता है, बल्कि उसका खुद पर आत्मविश्वास बढ़ता है।

जिससे वह दूसरों की भी कीमत समझते हुए दूसरों के हितों का ध्यान रखता है और कभी भी किसी को नीचे गिराने का प्रयास नहीं करता।

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