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जीवनी 9 Mins Read

देश का सबसे बड़े दलित नेता बाबू जगजीवन राम का जीवन परिचय

Mahesh YadavBy Mahesh YadavUpdated:Jan 6, 2023No Comments9 Mins Read
Babu Jagjivan Ram Biography
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भारत के महान राजनीतिज्ञ तथा भारत के प्रथम दलित उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम को प्यार से लोग बाबूजी के नाम से भी पुकारते थे।

इस लेख में
  • बाबू जगजीवन राम जीवनी
  • बाबू जगजीवन राम व्यक्तिगत परिचय
  • बाबू जगजीवन राम का प्रारंभिक जीवन
  • बाबू जगजीवन राम की शिक्षा
  • बाबू जगजीवन राम का विवाह
  • बाबू जगजीवन राम का राजनैतिक कैरियर
  • जब जगजीवन राम की वजह से चुनाव हारी इंदिरा गांधी
  • बाबू जगजीवन राम के रिकॉर्ड
  • बाबू जगजीवन राम की मृत्यु

भारत में संसदीय लोकतंत्र के विकास में जगजीवन राम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जगजीवन राम ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें अपने पक्ष में करने के लिए अंग्रेजों ने बहुत कोशिश की लेकिन वह हमेशा ही नाकामयाब रहे क्योंकि पैसे व गद्दी का लालच जगजीवन राम को कभी प्रभावित न कर सका।

जगजीवन राम ने गांधी जी के साथ मिलकर भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है यही कारण है कि उनका नाम आज भी अमर है। जगजीवन राम के विचारों तथा उनके कार्यों के विषय में जानने के लिए उनकी बायोग्राफी जरूर पढ़ें।

बाबू जगजीवन राम जीवनी

बाबू जगजीवन राम दलितों के बीच बहुत ही लोकप्रिय नेता थे क्योंकि यह खुद एक दलित समुदाय से आते थे। जिन्होंने अपने जीवन में दलितों और वंचितों की लड़ाई लड़ी।

खुद एक दलित होने के कारण उन्होने बचपन में काफी भेदभाव का सामना किया था। हालांकि किसे पता था कि 1 दिन संघर्षों में पलने वाला यह बच्चा आगे चलकर बाबू जगजीवन राम बनकर इतिहास के पन्नों में विशेष स्थान रखेगा।

बाबू जगजीवन राम व्यक्तिगत परिचय

पूरा नामबाबू जगजीवन राम
अन्य नामबाबूजी
जन्म5 अप्रैल, 1908 ई.
जन्मभूमि भोजपुर का ‘चंदवा गाँव’, बिहार
मृत्यु6 जुलाई, 1986 ई.
अभिभावकशोभा राम (पिता)
संतानपुत्री- मीरा कुमार
नागरिकताभारतीय
शिक्षास्नातक
विद्यालयकलकत्ता विश्वविद्यालय
भाषाहिन्दी, अंग्रेज़ी
प्रसिद्धिदलित वर्ग के मसीहा के रूप में याद किया जाता है।
पार्टीकांग्रेस और जनता दल
पदश्रम मंत्री, रेल मंत्री, कृषि मंत्री, रक्षा मंत्री और उप-प्रधानमंत्री आदि पदों पर रहे।

बाबू जगजीवन राम का प्रारंभिक जीवन

एक दलित परिवार में वर्ष 1908 को देश के बिहार राज्य के भोजपुर जिले में 5 अप्रैल को बाबू जगजीवन राम का जन्म हुआ था, जिस समय बाबू जगजीवन राम पैदा हुए थे, उस समय देश में जातिवाद अपनी चरम सीमा पर था।

ऐसे में बाबू जगजीवन राम को बचपन से ही जातिवाद का काफी भारी मात्रा में सामना करना पड़ा था, जिससे उन्हें काफी दुख होता था।

जैसा कि आप जानते हैं आजादी से पूर्व तथा उसके बाद तक हमारे देश में जातिवाद चरम पर था ऐसे में उस टाइम स्कूल में या फिर रेलवे स्टेशन अथवा दूसरे पब्लिक प्लेस पर पानी पीने के लिए दो घड़े रखे जाते थे, जिसमें से एक घड़े से हिंदू समुदाय के लोग पानी पीते थे और दूसरे घड़े से मुसलमान समुदाय के लोग पानी पीते थे।

एक बार जब बाबू जगजीवन राम अपनी दसवीं की पढ़ाई कर रहे थे, तो स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक घड़े से पानी पी लिया जो कि हिंदुओं का ही घड़ा था परंतु कुछ लोगों ने स्कूल के प्रिंसिपल से इस बात की शिकायत की कि एक दलित लड़के ने हिंदुओं के मटके से पानी पी लिया, जिसके बाद स्कूल के प्रिंसिपल ने अगले दिन स्कूल में दलितों के लिए भी पानी पीने के लिए एक तीसरा घड़ा रखवा दिया, जिसे देखकर जगजीवन राम को काफी ज्यादा गुस्सा आया और उन्होंने उस घड़े को तोड़ दिया।

इसके बाद स्कूल के प्रिंसिपल ने अगले दिन फिर से एक पानी का मटका दलितों के लिए रखवाया और उस मटके को भी बाबू जगजीवन राम ने तोड़ दिया। इसके बाद स्कूल प्रशासन द्वारा दलितों के लिए पानी पीने के लिए अलग से घड़े रखवाने बंद कर दिए।

बाबू जगजीवन राम की शिक्षा

बाबू जगजीवन राम ने अपनी हाई स्कूल की शिक्षा को प्राप्त करने के लिए साल 1920 में बिहार राज्य के आरा जिले में स्थित अग्रवाल विद्यालय में एडमिशन लिया। बाद में बाबू जगजीवन राम की विदेशी भाषा सीखने के प्रबल इच्छा हुई, जिसके कारण उन्होंने अंग्रेजी भाषा को सीखना स्टार्ट किया और जल्द ही वह अंग्रेजी भाषा के काफी अच्छे जानकार हो गए।

बाबू जगजीवन राम ने अंग्रेजी भाषा को सीखने के साथ ही साथ हिंदी भाषा, संस्कृत भाषा और बंगाली भाषा का भी अध्ययन किया। साल 1925 में एजुकेशन प्राप्त करने के लिए बाबू जगजीवन राम बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए गए हालांकि वहां पर काफी ज्यादा भेदभाव देखकर उन्होंने उसे छोड़ दिया।

फिर बाद में बाबू जगजीवन राम साल 1931 में कोलकाता चले गए और वहां पर उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और काफी अच्छे अंको से साइंस के सब्जेक्ट के साथ अपने ग्रेजुएशन की डिग्री को कंप्लीट किया। इस प्रकार बाबू जगजीवन राम ग्रेजुएट बने।

बाबू जगजीवन राम का विवाह

कानपुर के एक बहुत ही फेमस डॉक्टर बीरबल की कन्या इंद्राणी देवी के साथ साल 1935 में बाबू जगजीवन राम ने शादी कर ली। शादी होने के बाद बाबू जगजीवन राम की दो संतान पैदा हुई जिनमें उन्होंने अपने पुत्र का नाम सुरेश और अपनी बेटी का नाम मीरा रखा। आगे चलकर बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार लोकसभा की मेंबर भी बनी।

बाबू जगजीवन राम का राजनैतिक कैरियर

बाबू जगजीवन राम ने अपने पॉलीटिकल कैरियर की स्टार्टिंग बंगाल के कोलकाता शहर से एक बहुत बड़ी मजदूर रैली को स्टार्ट करके की। इस रैली को चालू करने के बाद भारत के अन्य नेताओं की नजर बाबू जगजीवन राम पर पड़ी।

साल 1934 में जब बिहार में भयंकर भूकंप आया था, तब बाबू जगजीवन राम ने बिहार के भूकंप पीड़ित लोगों की बेहद सहायता की और उन्हें राहत पहुंचाने का काम किया है। भूकंप पीड़ितों की सहायता करने के दौरान बाबू जगजीवन राम की मुलाकात महात्मा गांधी जी से हुई और महात्मा गांधी जी से मुलाकात होने के बाद बाबू जगजीवन राम महात्मा गांधी की विचारधारा से प्रेरित हुए और फिर वह इंडियन पॉलिटिक्स की मुख्यधारा से जुड़ गए।

25 साल की उम्र में वर्ष 1936 में बाबू जगजीवन राम को बिहार विधान परिषद के मेंबर के तौर पर Nominate किया गया। इसके बाद साल 1937 में डिप्रेस्ड क्लास लीग के कैंडिडेट के तौर पर बाबू जगजीवन राम ने इलेक्शन लड़ा और उस इलेक्शन में बिना किसी विरोध के वह विजेता घोषित हुए‌।

बाबू जगजीवन राम के बढ़ते हुए कद को देखकर उस टाइम अंग्रेजों ने उन्हें अपने पक्ष में करने का काफी प्रयास किया परंतु बाबू जगजीवन राम ने साफ तौर पर अंग्रेजों का साथ देने से इनकार कर दिया। अंग्रेजों का साथ देने से मना करने के थोड़े समय बाद ही कांग्रेसी गवर्नमेंट बिहार राज्य में बनी और उस गवर्नमेंट में वह मंत्री बने।

बाद में महात्मा गांधी ने बाबू जगजीवन राम से देश भर में मौजूद सभी कांग्रेसी गवर्नमेंट से इस्तीफा देने के लिए कहा तो उन्होंने कांग्रेस गवर्नमेंट से रिजाइन कर दिया और इसके बाद महात्मा गांधी के द्वारा स्टार्ट किए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्होंने जोर शोर के साथ हिस्सा लिया और जेल गए।

जेल जाने के बाद जब साल 1942 में उनकी रिहाई हुई, तो उसके बाद वह फिर से भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हो गए और भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद फिर से उन्हें एक बार जेल में डाल दिया गया।

इसके बाद बाबू जगजीवन राम साल 1943 में जेल से बाहर आए और जेल से बाहर आने के बाद फिर से वो भारत देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराने के लिए विभिन्न प्रकार के आंदोलन में भाग लेने लगे। जब साल 1946 में अगस्त के महीने में लॉर्ड वावेल ने इंडिया में अंतरिम गवर्नमेंट के गठन के लिए 12 पॉलिटिकल नेताओं को बुलाया था तो उनमें बाबू जगजीवन राम का भी नाम शामिल था।

साल 1946 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 2 सितंबर को एक अंतरिम गवर्नमेंट बनाई गई, जिसमें बाबू जगजीवन राम को श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेहरू गवर्नमेंट के मंत्रिमंडल में बाबू जगजीवन राम सिर्फ एक ही दलित नेता थे।

यहां से ही बाबू जगजीवन राम के केंद्रीय मंत्री का सफर तय हुआ। इसके बाद तो बाबू जगजीवन राम ने अपने पोलिटिकल कैरियर में रक्षा मंत्री, परिवहन मंत्री दूरसंचार मंत्री, रेल मंत्री, कृषि एवं खाद्य मंत्री जैसे पदों पर रहे।

जब जगजीवन राम की वजह से चुनाव हारी इंदिरा गांधी

साल 1975 में 25 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह बात कही की इंदिरा गांधी का रायबरेली से चुनाव लड़ना सही नहीं है। ऐसे में बाबू जगजीवन राम को यह लगने लगा कि इंदिरा गांधी अब उन्हें ही प्रधानमंत्री के पद पर बैठाएंगी, परंतु उनकी उम्मीदों पर तब पानी फिर गया, जब इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद भारत देश में इमरजेंसी को लागू कर दिया, जिसके कारण बाबू जगजीवन राम प्रधानमंत्री नहीं बन सके।

इसके बाद जब साल 1977 में 23 जनवरी को फिर से इलेक्शन की घोषणा हुई तो अचानक से ही बाबू जगजीवन राम ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया और उन्होंने कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी नाम की पार्टी को बनाया और फिर उन्होंने जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

बाबू जगजीवन राम खुद एक दलित नेता थे। इसलिए भारत के दलितों का समर्थन उस टाइम उनके साथ था और इसी के कारण दलितों ने इंदिरा गांधी को चुनाव में वोट नहीं दिया, जिसके कारण इंदिरा गांधी वह चुनाव जीत नहीं पाई।

ऐसे में एक बार फिर से बाबू जगजीवन राम को यह लगने लगा कि अब तो वह प्रधानमंत्री बन ही जाएंगे परंतु इस बार भी उन्हें हताशा और निराशा का सामना करना पड़ा क्योंकि इस बार प्रधानमंत्री के पद के लिए मोरारजी देसाई को चुना गया।

हालांकि बाबू जगजीवन राम को मोरारजी देसाई की गवर्नमेंट में रक्षा मंत्री बनाया गया और चौधरी चरण सिंह को उप प्रधानमंत्री का पद दिया गया।

बाबू जगजीवन राम के रिकॉर्ड

बाबू जगजीवन राम ने संसद में सबसे ज्यादा बैठने वाले नेता का रिकॉर्ड भी बनाया था। इसके अलावा बाबू जगजीवन राम के नाम एक और भी रिकॉर्ड है जो यह है कि वह सबसे अधिक साल तक कैबिनेट मंत्री के पद पर रहे।

बाबू जगजीवन राम की मृत्यु

दलितों के लोकप्रिय नेता कहे जाने वाले बाबू जगजीवन राम का वर्ष 1986 में 6 जुलाई के दिन निधन हो गया।

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Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

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