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रोचक तथ्य 12 Mins Read

अंक 9 का महत्व: भारतीय परंपरा, ज्योतिष और Numerology में नौ अंक

Mahesh YadavBy Mahesh YadavUpdated:Aug 21, 20262 Comments12 Mins Read
अंक 9 का महत्व भारतीय परंपरा ज्योतिष और Numerology में
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अंक हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हम इनका उपयोग गिनती, गणना और समय को समझने के लिए करते हैं। हालांकि, भारतीय परंपरा में कुछ अंकों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व दिया गया है। इनमें अंक 9 का स्थान खास माना जाता है।

इस लेख में
  • भारतीय परंपरा में अंक 9 का महत्व
  • Numerology में अंक 9 का क्या महत्व है?
  • मूलांक 9 वाले लोगों का स्वभाव कैसा माना जाता है?
    • अंक 9 से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व गुण
  • अंक 9 का स्वामी ग्रह कौन सा माना जाता है?
  • अंक 9 और भारतीय ज्योतिष के नवग्रह
  • जन्म कुंडली का नवम भाव
  • मानव जीवन में नौ का उल्लेख
  • नवमी तिथि और अंक 9
  • चार युगों और अंक 9 का संबंध
  • नवरात्र और अंक 9
  • नवरात्र में नौ कन्याओं की परंपरा
  • नवरस: साहित्य और कला में नौ रस
  • नवरत्न क्या होते हैं?
  • विक्रमादित्य के नवरत्न
  • नवधातु का क्या अर्थ है?
  • नौ प्रकार के विष की पारंपरिक अवधारणा
  • अंक 9 को पूर्णांक क्यों माना जाता है?
  • अंक 9 और नवधा भक्ति
  • 0 से 9 तक के अंकों में अंक 9 का स्थान
  • अंक 9 से जुड़े प्रमुख तथ्य एक नजर में
  • क्या Numerology में अंक 9 वास्तव में भाग्य बदल सकता है?
  • अंक 9 का महत्व: निष्कर्ष
  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
    • अंक 9 का क्या महत्व है?
    • अंक 9 का स्वामी ग्रह कौन सा है?
    • मूलांक 9 वाले लोगों का स्वभाव कैसा माना जाता है?
    • नवरात्र में नौ का क्या महत्व है?
    • नवरस कितने होते हैं?
    • क्या Numerology वैज्ञानिक है?
  • आपकी राय क्या है?

नौ का उल्लेख भारतीय धर्म, संस्कृति, साहित्य, ज्योतिष और लोक परंपराओं में कई जगह मिलता है। नवरात्र, नवग्रह, नवरस, नवरत्न और नवमी जैसे कई शब्द इसी संख्या से जुड़े हैं।

अंकशास्त्र यानी Numerology में भी अंक 9 को विशेष अंक माना जाता है। हालांकि, Numerology की धारणाएं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध personality test या भविष्यवाणी की पद्धति नहीं माना जाता।

आइए जानते हैं कि अंक 9 का महत्व भारतीय परंपरा, ज्योतिष और Numerology में क्यों माना जाता है। साथ ही, नौ अंक से जुड़े कुछ रोचक तथ्य भी समझेंगे।

भारतीय परंपरा में अंक 9 का महत्व

भारतीय संस्कृति में संख्या 9 का उल्लेख कई धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों में मिलता है। लोकभाषा में भी नौ से जुड़े कई मुहावरे और लोकोक्तियां प्रचलित हैं।

“नौ की लकड़ी नब्बे ढुलाई”, “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” और “नौ नकद न तेरह उधार” जैसे उदाहरण बताते हैं कि नौ अंक भारतीय भाषा और लोकजीवन में लंबे समय से मौजूद रहा है।

धार्मिक परंपराओं में नवमी, नवरात्र, नवदुर्गा और नवग्रह जैसे शब्द भी इसी संख्या से जुड़े हैं। इसलिए नौ को केवल गणितीय अंक के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में भी देखा गया है।

Numerology में अंक 9 का क्या महत्व है?

Numerology या अंकशास्त्र में जन्मतिथि और संख्याओं के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव तथा जीवन से जुड़े कुछ निष्कर्ष निकालने की परंपरा है। इसकी अलग-अलग प्रणालियों में नियम अलग हो सकते हैं।

भारतीय अंकशास्त्र की कुछ मान्यताओं में अंक 9 को मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है। मंगल को साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। इसी आधार पर मूलांक 9 वाले लोगों के बारे में कुछ पारंपरिक धारणाएं बताई जाती हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये बातें Numerology की मान्यताएं हैं। इनके आधार पर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व या भविष्य के बारे में निश्चित वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

मूलांक 9 वाले लोगों का स्वभाव कैसा माना जाता है?

अंकशास्त्र की मान्यता में जिन लोगों का मूलांक 9 होता है, उन्हें ऊर्जावान और साहसी माना जाता है। नेतृत्व करने की इच्छा भी उनके स्वभाव से जोड़ी जाती है।

ऐसे लोगों के बारे में यह धारणा भी मिलती है कि वे अपने निर्णयों पर दृढ़ रहते हैं। उन्हें चुनौतीपूर्ण काम पसंद आ सकते हैं। आत्मसम्मान उनके लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरी ओर, यही दृढ़ता कभी-कभी जिद या जल्दबाजी जैसी प्रवृत्ति के रूप में भी दिखाई दे सकती है। इसलिए Numerology में अंक 9 के सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दोनों पक्षों की चर्चा मिलती है।

अंक 9 से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व गुण

  • साहस और ऊर्जा
  • नेतृत्व की प्रवृत्ति
  • आत्मसम्मान
  • दृढ़ निर्णय लेने की प्रवृत्ति
  • रचनात्मकता
  • कल्पनाशक्ति
  • चुनौतियों का सामना करने की इच्छा

फिर भी, इन गुणों को हर व्यक्ति पर लागू करना सही नहीं होगा। किसी व्यक्ति का वास्तविक व्यक्तित्व उसके अनुभव, वातावरण, शिक्षा और परिस्थितियों से भी प्रभावित होता है।

अंक 9 का स्वामी ग्रह कौन सा माना जाता है?

भारतीय Numerology की मान्यताओं में अंक 9 का स्वामी ग्रह मंगल माना जाता है। मंगल को ऊर्जा, साहस, पराक्रम और संघर्ष की भावना से जोड़ा जाता है।

इसी कारण अंक 9 वाले व्यक्ति के लिए साहस, नेतृत्व और सक्रियता जैसी विशेषताओं का उल्लेख Numerology में किया जाता है।

अंक 9 और भारतीय ज्योतिष के नवग्रह

भारतीय ज्योतिष परंपरा में नवग्रह का उल्लेख मिलता है। इनके नाम हैं:

  1. सूर्य
  2. चंद्रमा
  3. मंगल
  4. बुध
  5. गुरु
  6. शुक्र
  7. शनि
  8. राहु
  9. केतु

यहां एक बात समझना जरूरी है। भारतीय ज्योतिष में “नवग्रह” एक पारंपरिक ज्योतिषीय अवधारणा है। इसे आधुनिक खगोल विज्ञान के नौ planets की सूची नहीं समझना चाहिए।

जन्म कुंडली का नवम भाव

भारतीय ज्योतिष में जन्म कुंडली के नवम भाव को धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा, गुरु और लंबी यात्राओं जैसे विषयों से जोड़ा जाता है। अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसकी व्याख्या में कुछ अंतर हो सकता है।

नौ अंक से जुड़ी इन अवधारणाओं के कारण भारतीय ज्योतिष में भी इस संख्या का सांस्कृतिक महत्व दिखाई देता है।

मानव जीवन में नौ का उल्लेख

भारतीय परंपरा में गर्भावस्था की अवधि को सामान्य बोलचाल में लगभग नौ महीने कहा जाता है। आधुनिक चिकित्सा में pregnancy की अवधि आम तौर पर लगभग 40 सप्ताह मानी जाती है।

इसी तरह, भारतीय परंपरा में शरीर के नवद्वार का भी उल्लेख मिलता है। पारंपरिक विवरण के अनुसार इनमें दो आंखें, दो कान, दो नासाछिद्र, एक मुख, एक गुदा और एक जननेंद्रिय शामिल हैं।

नवमी तिथि और अंक 9

हिंदू पंचांग में प्रत्येक पक्ष की नौवीं तिथि को नवमी कहा जाता है। इसलिए एक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में अलग-अलग नवमी तिथि आती है।

राम नवमी भी इसी नौवीं तिथि से जुड़ा प्रसिद्ध धार्मिक पर्व है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ माना जाता है।

चार युगों और अंक 9 का संबंध

भारतीय धार्मिक परंपरा में चार युगों का वर्णन मिलता है। इनकी पारंपरिक अवधि को लेकर अंकों का योग करने पर 9 प्राप्त होने की बात Numerology से जुड़े लेखों में बताई जाती है।

युगपारंपरिक अवधिअंकों का योग
सतयुग172,800 वर्ष1 + 7 + 2 + 8 = 18 → 1 + 8 = 9
त्रेतायुग1,296,000 वर्ष1 + 2 + 9 + 6 = 18 → 1 + 8 = 9
द्वापरयुग864,000 वर्ष8 + 6 + 4 = 18 → 1 + 8 = 9
कलियुग432,000 वर्ष4 + 3 + 2 = 9

यह गणना भारतीय धार्मिक परंपरा में बताए गए युगों की अवधियों पर आधारित अंक-व्याख्या है। इसे आधुनिक वैज्ञानिक chronology नहीं माना जाना चाहिए।

नवरात्र और अंक 9

नवरात्र शब्द में ही नौ रातों का अर्थ शामिल है। नवरात्र के दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की परंपरा प्रसिद्ध है। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

नवदुर्गा के नौ रूप इस प्रकार हैं:

  1. शैलपुत्री
  2. ब्रह्मचारिणी
  3. चंद्रघंटा
  4. कूष्मांडा
  5. स्कंदमाता
  6. कात्यायनी
  7. कालरात्रि
  8. महागौरी
  9. सिद्धिदात्री

नवरात्र के दौरान इन नौ रूपों की पूजा अलग-अलग दिनों में की जाती है। क्षेत्र और परंपरा के अनुसार पूजा की विधि में अंतर भी मिल सकता है।

नवरात्र में नौ कन्याओं की परंपरा

कुछ धार्मिक परंपराओं में नवरात्र के दौरान कन्या पूजन भी किया जाता है। नौ कन्याओं को देवी के विभिन्न रूपों का प्रतीक मानकर पूजा करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

पुराने ग्रंथों और अलग-अलग परंपराओं में इन नामों की सूचियों में अंतर मिल सकता है। इसलिए किसी एक सूची को सभी परंपराओं के लिए अनिवार्य मानना उचित नहीं है।

नवरस: साहित्य और कला में नौ रस

भारतीय काव्य और नाट्य परंपरा में नवरस की अवधारणा बहुत प्रसिद्ध है। नौ रसों को मानव भावनाओं और कलात्मक अनुभव से जोड़ा जाता है।

  1. श्रृंगार – प्रेम और सौंदर्य
  2. हास्य – हंसी और विनोद
  3. करुण – शोक और करुणा
  4. रौद्र – क्रोध
  5. वीर – उत्साह और वीरता
  6. भयानक – भय
  7. बीभत्स – घृणा
  8. अद्भुत – आश्चर्य
  9. शांत – शांति और वैराग्य

नवरस भारतीय साहित्य, नाटक, नृत्य और दूसरी कलाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण अवधारणा है।

नवरत्न क्या होते हैं?

भारतीय परंपरा में नौ प्रमुख रत्नों के समूह को नवरत्न कहा जाता है। अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इनके नामों या वर्गीकरण में कुछ अंतर मिल सकता है। सामान्य रूप से जिन रत्नों का उल्लेख किया जाता है, उनमें शामिल हैं:

  • माणिक्य
  • मोती
  • प्रवाल या मूंगा
  • पन्ना
  • पुखराज
  • हीरा
  • नीलम
  • गोमेद
  • लहसुनिया

इन रत्नों को भारतीय ज्योतिषीय और सांस्कृतिक परंपराओं में अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा जाता है। हालांकि, रत्नों के ग्रहों या स्वास्थ्य पर प्रभाव जैसी बातों को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

विक्रमादित्य के नवरत्न

भारतीय साहित्य और लोकप्रिय ऐतिहासिक परंपरा में राजा विक्रमादित्य की सभा में नवरत्न होने का उल्लेख मिलता है। इनसे जुड़े नामों में धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वेतालभट्ट, घटकर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि जैसे नाम बताए जाते हैं।

हालांकि, “विक्रमादित्य” नाम से जुड़े ऐतिहासिक विवरणों में मतभेद हैं। इसलिए नवरत्नों की यह सूची लोकप्रिय परंपरा के रूप में देखना अधिक उचित है, न कि एक निर्विवाद ऐतिहासिक तथ्य के रूप में।

नवधातु का क्या अर्थ है?

भारतीय परंपरा में नवधातु शब्द का प्रयोग नौ धातुओं के समूह के लिए मिलता है। अलग-अलग परंपराओं में इसकी सूची अलग हो सकती है। कुछ सूचियों में सोना, चांदी, लोहा, तांबा, सीसा, टिन, कांसा और अन्य मिश्रधातुओं या धातुओं का उल्लेख मिलता है।

इसलिए नवधातु की एक ही सार्वभौमिक सूची बताना उचित नहीं है। मंदिर, मूर्ति निर्माण और पारंपरिक धातु शिल्प में क्षेत्रीय अंतर भी देखने को मिलता है।

नौ प्रकार के विष की पारंपरिक अवधारणा

कुछ प्राचीन ग्रंथों और पारंपरिक स्रोतों में विभिन्न प्रकार के विषों का वर्गीकरण मिलता है। इन्हें कभी-कभी नवविष के रूप में भी बताया जाता है।

ऐसे पारंपरिक विष-वर्गीकरण को आधुनिक toxicology की वैज्ञानिक classification नहीं समझना चाहिए। प्राचीन ग्रंथों में प्रयुक्त नामों और उनकी पहचान को आधुनिक chemical substances से सीधे जोड़ना हमेशा सही नहीं होता।

अंक 9 को पूर्णांक क्यों माना जाता है?

अंकशास्त्र में 9 को एक विशेष और शक्तिशाली अंक माना जाता है। इसका एक लोकप्रिय गणितीय उदाहरण यह है कि 9 के गुणकों के अंकों का योग बार-बार 9 तक पहुंचता है।

उदाहरण के लिए:

  • 9 × 2 = 18 → 1 + 8 = 9
  • 9 × 3 = 27 → 2 + 7 = 9
  • 9 × 4 = 36 → 3 + 6 = 9
  • 9 × 5 = 45 → 4 + 5 = 9
  • 9 × 6 = 54 → 5 + 4 = 9

यही गणितीय विशेषता भी 9 को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती है। हालांकि, इसे आध्यात्मिक या भविष्यवाणी संबंधी शक्ति का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अंक 9 और नवधा भक्ति

हिंदू भक्ति परंपरा में नवधा भक्ति यानी भक्ति के नौ रूपों का उल्लेख मिलता है। इन्हें सामान्य रूप से इस प्रकार बताया जाता है:

  1. श्रवण
  2. कीर्तन
  3. स्मरण
  4. पादसेवन
  5. अर्चन
  6. वंदन
  7. दास्य
  8. सख्य
  9. आत्मनिवेदन

इस तरह धार्मिक परंपरा में नौ का प्रयोग केवल एक संख्या के रूप में नहीं, बल्कि विभिन्न समूहों और अवधारणाओं को व्यवस्थित करने के लिए भी मिलता है।

0 से 9 तक के अंकों में अंक 9 का स्थान

अगर आपको सभी अंकों से जुड़े भारतीय दार्शनिक और सांस्कृतिक विचार पढ़ने में रुचि है, तो 0 से 9 में समाया है सब कुछ वाला लेख भी पढ़ सकते हैं।

उसमें 1 से 9 तक के अंकों से जुड़ी विभिन्न पारंपरिक व्याख्याओं को विस्तार से बताया गया है।

अंक 9 से जुड़े प्रमुख तथ्य एक नजर में

विषयअंक 9 से संबंध
Numerologyअंक 9 को विशेष अंक माना जाता है
ज्योतिषअंक 9 को मंगल से जोड़ा जाता है
नवग्रहभारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों की अवधारणा
नवरात्रनौ रातों की धार्मिक परंपरा
नवदुर्गादेवी के नौ रूप
नवरसकला और साहित्य के नौ रस
नवरत्ननौ प्रमुख रत्नों का पारंपरिक समूह
नवमीपक्ष की नौवीं तिथि
नवधा भक्तिभक्ति के नौ पारंपरिक रूप
नवद्वारशरीर के नौ द्वारों की पारंपरिक अवधारणा

क्या Numerology में अंक 9 वास्तव में भाग्य बदल सकता है?

यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है। Numerology में अंकों को व्यक्ति के स्वभाव और जीवन की घटनाओं से जोड़ने की मान्यता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का भाग्य केवल जन्मतिथि या किसी एक अंक से तय होता है, इसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए Numerology को रुचि और पारंपरिक विश्वास के रूप में समझना बेहतर है।

अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय केवल Numerology के आधार पर लेने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों, जानकारी और अपने विवेक को प्राथमिकता देना चाहिए।

अंक 9 का महत्व: निष्कर्ष

अंक 9 का महत्व भारतीय संस्कृति में कई अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है। नवग्रह, नवरात्र, नवदुर्गा, नवरस, नवरत्न, नवमी और नवधा भक्ति इसके कुछ प्रमुख उदाहरण हैं।

Numerology में भी नौ को विशेष अंक माना जाता है और इसे मंगल से जोड़ा जाता है। मूलांक 9 वाले लोगों में साहस, ऊर्जा, नेतृत्व और आत्मसम्मान जैसे गुण होने की पारंपरिक मान्यता है।

इन बातों को समझते समय एक अंतर याद रखना जरूरी है। धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विश्वास, ज्योतिष और Numerology अपने-अपने संदर्भों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

नौ अंक से जुड़े ये सभी उदाहरण यह जरूर बताते हैं कि भारतीय भाषा, साहित्य, धर्म और संस्कृति में संख्या 9 का स्थान कितना व्यापक है।

अगर आपको ऐसे ही रोचक तथ्य और सामान्य ज्ञान पढ़ना पसंद है, तो AchhiBaatein पर ऐसे कई अन्य विषय भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अंक 9 का क्या महत्व है?

भारतीय परंपरा में अंक 9 का संबंध नवग्रह, नवरात्र, नवदुर्गा, नवरस, नवरत्न, नवमी और नवधा भक्ति जैसी कई अवधारणाओं से मिलता है। Numerology में भी इसे विशेष अंक माना जाता है।

अंक 9 का स्वामी ग्रह कौन सा है?

भारतीय Numerology की मान्यता के अनुसार अंक 9 का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है।

मूलांक 9 वाले लोगों का स्वभाव कैसा माना जाता है?

Numerology की मान्यता में मूलांक 9 वाले लोगों को साहसी, ऊर्जावान, दृढ़ और नेतृत्व करने वाला माना जाता है। हालांकि, ये वैज्ञानिक रूप से सिद्ध personality traits नहीं हैं।

नवरात्र में नौ का क्या महत्व है?

नवरात्र नौ रातों की धार्मिक परंपरा है। इस दौरान नवदुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

नवरस कितने होते हैं?

भारतीय काव्य और नाट्य परंपरा में नौ रसों की प्रसिद्ध अवधारणा है। इनमें श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत शामिल हैं।

क्या Numerology वैज्ञानिक है?

Numerology पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व या भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी करने के लिए इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पद्धति नहीं माना जाता।

आपकी राय क्या है?

भारतीय संस्कृति में अंक 9 से जुड़ी इतनी सारी अवधारणाओं में से आपको कौन-सी सबसे रोचक लगी?

नवरात्र, नवग्रह, नवरस, नवरत्न या Numerology में अंक 9? अपनी राय Comment में जरूर बताएं।

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Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

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2 Comments

  1. JAMSHED AZMI on Nov 20, 2015 12:50 am

    भारतीय पंरपरा में 9 अंक का क्‍या महत्‍व है, आपकी पोस्‍ट में पढ़कर बहुत अच्‍छा लगा।

    Reply
  2. प्रकाश सिंह on Feb 3, 2017 10:41 pm

    एक और बात ” 9 के पहाड़े में सभी दोनों अंकों के जोड़ का योग भी 9 ही आता है जैसे 9*1=9
    9*2=18(8+1=9)
    9*3=27(2+7=9), 9*4=36(3+6=9),9*5=45(4+5=9)
    9*6=54(5+4=9)9*7=63(6+3=9) 9*8=72(7+2=9)
    9*9=81(8+1=9),9*10=90(9+0=9)

    Reply

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