चाणक्य नीति Chapter 4 में आचार्य चाणक्य ने जीवन, भाग्य, विद्या, परिवार, संतान, मित्रता, संगति और व्यवहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इस अध्याय में कुछ ऐसी नीतियां भी हैं जो व्यक्ति को अपने वर्तमान जीवन, भविष्य और आसपास की परिस्थितियों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।
महान मौर्य वंश की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चाणक्य का नाम राजनीति, राष्ट्र और जनकार्यों से जुड़े इतिहास में लंबे समय से लिया जाता है। लगभग 2400 वर्ष बीत जाने के बाद भी चाणक्य से जुड़ी नीतियों पर आज चर्चा होती है।
हालांकि, चाणक्य नीति के कुछ विचार प्राचीन भारतीय समाज और उस समय की सोच से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें पढ़ते समय उनके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना भी जरूरी है।
इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 3 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति Chapter 4 के महत्वपूर्ण विचारों को सरल भाषा में।
चाणक्य नीति Chapter 4
1. जीवन, कर्म, धन और विद्या के बारे में चाणक्य का विचार
मानव के जीवन में सभी बातें पूर्व-निर्धारित होती हैं, ऐसा चाणक्य नीति के इस अध्याय में कहा गया है। इसमें बताया गया है कि जब जीव मां के गर्भ में आता है, उसी समय उसके जीवन से जुड़ी कुछ बातें पहले से निर्धारित मानी जाती हैं।
इनमें कितने समय तक धरती पर जीना है, मृत्यु का समय और स्थान, कर्मों के अच्छे-बुरे फल यानी सुख-दुःख, हानि-लाभ और यश-अपयश, भाग्य का धन तथा प्राप्त होने वाली विद्या जैसी बातें शामिल हैं।
These five: the life span, the type of work, wealth, learning and the time of one’s death are determined while one is in the womb.
ध्यान दें: यह प्राचीन नीति-ग्रंथ में दिया गया दार्शनिक विचार है। इसे आज के वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं समझना चाहिए।
2. परिवार का कोई व्यक्ति वैराग्य अपनाए तो उससे सीख लें
जब परिवार का कोई व्यक्ति साधु बन जाता है और संसार के माया-मोह को छोड़कर वैराग्य अपना लेता है, तब उसके बन्धु-बान्धव, स्त्री-पुरुष और मित्र कुछ दूर तक उसके साथ जाकर उसे विदा करके वापस लौट आते हैं।
चाणक्य का विचार है कि परिवार के किसी प्रबुद्ध सदस्य को मोह-माया से विरक्त देखकर दूसरों को भी उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। लेकिन वे फिर अपने घर लौटकर उसी माया-मोह में फंस जाते हैं।
Offspring, friends and relatives flee from a devotee of the Lord: yet those who follow him bring merit to their families through their devotion.
3. सज्जनों की संगति का महत्व
जिस प्रकार मछली अपने अंडों के साथ रहकर उनकी देखभाल करती है, उसी प्रकार सज्जन की संगति में रहने वाले व्यक्ति पर भी अच्छे विचारों का प्रभाव पड़ सकता है। इस नीति में सज्जन व्यक्ति की संगति को आध्यात्मिक और मानसिक कल्याण से जोड़ा गया है।
Fish, tortoises, and birds bring up their young by means of sight, attention and touch; so do saintly men afford protection to their associates by the same means.
इसका सरल संदेश यह है कि व्यक्ति को अच्छी संगति और अच्छे लोगों के संपर्क से सीखने का प्रयास करना चाहिए।
4. स्वस्थ शरीर रहते अच्छे कर्म करने चाहिए
इस संसार में जब तक मनुष्य का शरीर निरोग और स्वस्थ रहता है और मृत्यु समीप नहीं आती, तब तक उसे आत्मकल्याण अथवा मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए।
चाणक्य नीति में दान, तीर्थसेवन, सत्संग, व्रत और पूजा जैसे शुभ कर्मों की बात कही गई है। कारण यह है कि जब तक जीवन और शरीर स्वस्थ है, तब तक मनुष्य अपनी इच्छा के अनुसार कार्य कर सकता है।
शरीर के रोगग्रस्त हो जाने या मृत्यु के निकट आने पर कई काम करना कठिन हो सकता है।
As long as your body is healthy and under control and death is distant, try to save your soul; when death is imminent what can you do?
5. विद्या छिपा हुआ धन है
विद्या को मनचाहा फल देने वाली कामधेनु गाय के समान बताया गया है। जैसे वशिष्ठ जी की कामधेनु सभी इच्छाएं पूरी करने वाली मानी जाती थी, उसी प्रकार विद्या की साधना करने वाले व्यक्ति को ज्ञान का लाभ मिलता है।
यहां तक कि संकट की घड़ी में भी विद्या व्यक्ति के काम आती है। विद्या परदेश में मां के समान सहारा देने वाली बताई गई है।
Learning is like a cow of desire. It, like her, yields in all seasons. Like a mother, it feeds you on your journey. Therefore learning is a hidden treasure.
सीख: धन खो सकता है, लेकिन सीखी हुई विद्या और कौशल जीवनभर व्यक्ति के काम आ सकते हैं।
अगर आप शिक्षा और ज्ञान के महत्व पर और पढ़ना चाहते हैं, तो शिक्षा का हमारे जीवन में महत्व भी पढ़ सकते हैं।
6. एक गुणवान संतान का महत्व
केवल एक गुणवान और विद्वान बेटा सैकड़ों गुणहीन और निकम्मे बेटों से अच्छा होता है। जिस प्रकार एक ही चांद रात के अंधकार को दूर करता है और असंख्य तारे मिलकर भी वह काम नहीं कर सकते, उसी प्रकार एक गुणी पुत्र अपने कुल का नाम रोशन कर सकता है।
A single son endowed with good qualities is far better than a hundred devoid of them. For the moon, though one, dispels the darkness, which the stars, though numerous, cannot.
आज के संदर्भ में इस सीख को बेटे तक सीमित रखने के बजाय किसी भी गुणी और योग्य संतान पर लागू करके समझना अधिक उचित है।
7. मूर्ख संतान से जुड़ी कठोर नीति
चाणक्य नीति में अज्ञानी और मूढ़ पुत्र के संबंध में बहुत कठोर विचार दिया गया है। इसमें उसकी लंबी आयु की अपेक्षा जन्म लेते ही मर जाने को बेहतर बताया गया है, क्योंकि मूर्ख पुत्र जीवनभर परिवार को कष्ट देता है।
A stillborn son is superior to a foolish son endowed with a long life. The first causes grief for but a moment while the latter like a blazing fire consumes his parents in grief for life.
ध्यान दें: यह प्राचीन ग्रंथ का कठोर और ऐतिहासिक कथन है। आधुनिक जीवन में किसी बच्चे के जीवन का मूल्य उसके ज्ञान या सफलता से तय करना उचित नहीं है। आज इसे संतान की शिक्षा और चरित्र पर जोर देने वाली चेतावनी के रूप में समझना बेहतर है।
8. कौन-कौन सी परिस्थितियां मनुष्य को भीतर से दुखी करती हैं?
जहां आजीविका के उचित साधन न हों और लोगों में एक-दूसरे के सुख-दुःख में साथ देने की प्रवृत्ति न हो, ऐसे स्थान पर निवास करना कठिन हो सकता है।
चाणक्य नीति में किसी नीच व्यक्ति की नौकरी, गंदा या बासी भोजन, झगड़ालू पत्नी, मूर्ख पुत्र और विधवा कन्या जैसी छह परिस्थितियों को मनुष्य के शरीर और मन को बिना आग के जलाने वाली बताया गया है।
Residing in a small village devoid of proper living facilities, serving a person born of a low family, unwholesome food, a frowning wife, a foolish son, and a widowed daughter burn the body without fire.
आज के संदर्भ में: इस नीति को समझते समय ध्यान रखें कि इसमें कुछ बातें उस समय की सामाजिक व्यवस्था को दर्शाती हैं। विधवा बेटी या किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को दोष के रूप में देखना आधुनिक दृष्टि से उचित नहीं है। मुख्य सीख कठिन जीवन-परिस्थितियों से सावधान रहने की है।
9. केवल जन्म नहीं, गुण और विद्या भी महत्वपूर्ण हैं
जिस प्रकार दूध न देने वाली गाय का कोई लाभ नहीं माना गया है, उसी प्रकार ऐसे पुत्र से भी कोई लाभ नहीं जो न तो विद्वान हो और न ही अपने माता-पिता और परिजनों में श्रद्धा-भक्ति रखता हो।
What good is a cow that neither gives milk nor conceives? Similarly, what is the value of the birth of a son if he becomes neither learned nor a pure devotee of the Lord?
इस विचार की मुख्य सीख यह है कि संतान के गुण, शिक्षा और व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।
10. दुख के समय तीन चीजें सहारा देती हैं
इस संसार के दुखों से संतप्त लोगों को तीन बातों से शांति मिलने की बात कही गई है। इनमें अच्छी संतान, पत्नी और सज्जन महात्माओं की संगति का उल्लेख है।
When one is consumed by the sorrows of life, three things give him relief: offspring, a wife, and the company of the Lord’s devotees.
आज के समय में इसे भावनात्मक सहारे, परिवार और अच्छी संगति के महत्व से जोड़कर समझा जा सकता है।
11. राजा, विद्वान और विवाह के विषय में चाणक्य का कथन
चाणक्य नीति में कहा गया है कि राजा अपनी आज्ञा बार-बार नहीं दोहराता। वह एक बार आज्ञा देता है और उस पर स्थिर रहता है। इसी प्रकार पंडित किसी कार्य की पूर्ति के लिए एक बार कहते हैं।
मूल नीति में माता-पिता द्वारा कन्या के विवाह संबंध को भी एक बार निश्चित करने और उसे वापस न लेने की बात कही गई है। इसमें राजा, विद्वान और विवाह-संबंध के वचन को अटल बताया गया है।
Kings speak for once, men of learning once, and the daughter is given in marriage once. All these things happen once and only once.
आधुनिक संदर्भ: विवाह जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है। आज इसमें दोनों व्यक्तियों की सहमति और स्वतंत्र इच्छा को महत्व देना जरूरी है।
12. अलग-अलग कार्यों के लिए अलग सहयोग की जरूरत
किसी साधना या तप का अभ्यास एकांत में किया जा सकता है। पढ़ाई दो लोगों के बीच करने की बात कही गई है। दो से अधिक लोग होंगे तो बातचीत बढ़ सकती है और पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
गाने के अभ्यास के लिए तीन, यात्रा के लिए चार, खेती के लिए पांच और युद्ध के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता बताई गई है।
Religious austerities should be practiced alone, study by two, and singing by three. A journey should be undertaken by four, agriculture by five, and war by many together.
इस नीति को आज के समय में इस रूप में समझा जा सकता है कि हर काम के लिए सही संख्या और सही टीम का चयन उसकी सफलता को प्रभावित कर सकता है।
13. आदर्श पत्नी के बारे में चाणक्य का विचार
चाणक्य नीति में आदर्श पत्नी के लिए मन, वचन और कर्म से पवित्र होने की बात कही गई है। उसके आचार-विचार अच्छे होने चाहिए। मूल पाठ में गृहकार्य, भोजन, पीसना, कातना, धोना, सीना-पिरोना और साज-सज्जा जैसे घरेलू कार्यों में निपुण होने का भी उल्लेख है।
साथ ही उसे पति के प्रति अनुरक्त और सत्य बोलने वाली बताया गया है।
She is a true wife who is clean, expert, chaste, pleasing to the husband, and truthful.
ध्यान दें: यह प्राचीन समय के पारिवारिक और सामाजिक आदर्शों को दर्शाने वाला विचार है। आधुनिक विवाह में दोनों जीवनसाथियों की समान भागीदारी, सम्मान और आपसी समझ महत्वपूर्ण हैं।
14. संतानहीनता, रिश्ते और गरीबी के बारे में पुराना दृष्टिकोण
जिस घर में बेटा नहीं है, उसे सुनसान स्थान के समान बताया गया है। पिता अपने आपको अकेला अनुभव करता है और वंश आगे नहीं चलता, ऐसा मूल नीति में कहा गया है।
इसी तरह जिस व्यक्ति के कोई संबंधी या परिजन नहीं होते, वह अपने सुख-दुःख को बांटने वाला कोई नहीं पाता।
मूर्ख व्यक्ति का हृदय दया, करुणा और ममता जैसे भावों से शून्य बताया गया है। वहीं निर्धन व्यक्ति के लिए भी संसार को सूना बताया गया है, क्योंकि लोग उससे किनारा करने लगते हैं।
The house of a childless person is a void, all directions are void to one who has no relatives, the heart of a fool is also void, but to a poverty-stricken man all is void.
आज के संदर्भ में: संतान का होना जीवन की पूर्णता का एकमात्र आधार नहीं है। इसी प्रकार व्यक्ति की आर्थिक स्थिति उसके मानवीय मूल्य को तय नहीं करती। मूल कथन को उसके प्राचीन सामाजिक संदर्भ में पढ़ना चाहिए।
15. परिस्थिति के अनुसार व्यवहार करना चाहिए
विवेचना का अभ्यास न होने पर शास्त्र की चर्चा नहीं करनी चाहिए। अजीर्ण या अपच होने पर भोजन नहीं करना चाहिए। दरिद्र व्यक्ति को सभा-पार्टियों में सम्मिलित नहीं होना चाहिए और बूढ़े लोगों को युवा स्त्रियों का संग नहीं करना चाहिए, ऐसा चाणक्य नीति में कहा गया है।
Scriptural lessons not put into practice are poison; a meal is poison to him who suffers from indigestion; a social gathering is poison to a poverty-stricken person; and a young wife is poison to an aged man.
इस नीति का व्यापक संदेश परिस्थिति के अनुसार अपने व्यवहार और निर्णय को बदलना है।
16. बिना स्नेह और ज्ञान वाले संबंधों से सावधान रहें
स्नेह और दया रहित धर्म, विद्या-विहीन गुरु, क्रोधी स्वभाव की पत्नी और स्नेहरहित संबंधियों को छोड़ देने की बात चाणक्य नीति में कही गई है। ऐसे संबंधों से लाभ के स्थान पर हानि होने की संभावना बताई गई है।
That man who is without religion and mercy should be rejected. A guru without spiritual knowledge should be rejected. The wife with an offensive face should be given up, and so should relatives who are without affection.
आज के समय में इसे ऐसे संबंधों से दूरी रखने की सीख के रूप में समझा जा सकता है जो लगातार अपमान, हिंसा या मानसिक परेशानी का कारण बनते हों।
17. निरंतरता भी हर चीज के लिए अच्छी नहीं होती
चाणक्य नीति में कहा गया है कि निरंतर पैदल यात्रा मनुष्य के लिए, लगातार घोड़े का खूंटे से बंधे रहना, पत्नी के साथ दांपत्य संबंध का अभाव और कड़ी धूप में कपड़ों का पड़े रहना हानिकारक है।
Constant travel brings old age upon a man; a horse becomes old by being constantly tied up; lack of sexual contact with her husband brings old age upon a woman; and garments become old through being left in the sun.
नोट: इस नीति में दिए गए कुछ दावे आधुनिक चिकित्सा या विज्ञान के मानक तथ्य नहीं हैं। इन्हें प्राचीन ग्रंथ के पारंपरिक कथन के रूप में समझें।
18. जीवन में बार-बार आत्ममंथन करना चाहिए
बुद्धिमान व्यक्ति को बार-बार यह सोचते रहना चाहिए कि हमारे मित्र कितने हैं, हमारा समय कैसा है, अच्छा है या बुरा और यदि बुरा है तो उसे अच्छा कैसे बनाया जाए।
इसके साथ ही अपने निवास स्थान, आय और व्यय, अपनी पहचान और अपनी शक्ति के बारे में भी विचार करना चाहिए।
मूल नीति में यह भी प्रश्न करने को कहा गया है कि मैं कौन हूं, आत्मा हूं या शरीर, स्वाधीन हूं या पराधीन और मेरी शक्ति कितनी है।
Consider again and again the following: the right time, the right friends, the right place, the right means of income, the right ways of spending, and from whom you derive your power.
सीख: समय-समय पर अपने जीवन, मित्रता, खर्च, आय और लक्ष्यों की समीक्षा करना उपयोगी हो सकता है।
19. ईश्वर के बारे में चाणक्य नीति का विचार
चाणक्य नीति में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को द्विजाति कहा गया है और उनके दूसरे जन्म को गुरु द्वारा शिष्य बनाए जाने से जोड़ा गया है। आगे अग्नि, हृदय में स्थित ईश्वर और मूर्ति-पूजा से जुड़े आध्यात्मिक विचार दिए गए हैं।
मूल नीति में कहा गया है कि अल्प बुद्धि वाले व्यक्ति ईश्वर को केवल मूर्ति में देखते हैं, जबकि तत्वज्ञानी व्यक्ति उन्हें सर्वव्यापक मानता है और कण-कण में ईश्वर की सत्ता देखता है।
For the twice born the fire (Agni) is a representative of God. The Supreme Lord resides in the heart of His devotees. Those of average intelligence see God only in His sri-murti, but those of broad vision see the Supreme Lord everywhere.
यह हिस्सा मुख्य रूप से उस समय की धार्मिक और आध्यात्मिक सोच को दर्शाता है। इसे उसी संदर्भ में समझना बेहतर है।
चाणक्य नीति Chapter 4 की प्रमुख सीख
चाणक्य नीति Chapter 4 के इन विचारों से कई व्यावहारिक बातें समझी जा सकती हैं। हालांकि, इनमें से कुछ कथन प्राचीन सामाजिक व्यवस्था से जुड़े हैं। इसलिए हर नीति को आज के समय के संदर्भ में समझना जरूरी है।
- स्वस्थ शरीर रहते जीवन के महत्वपूर्ण कार्य पूरे करने चाहिए।
- विद्या को जीवन का महत्वपूर्ण धन समझना चाहिए।
- बच्चों की शिक्षा और चरित्र निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।
- अच्छी संगति और अच्छे लोगों के संपर्क का महत्व समझना चाहिए।
- आय और खर्च का समय-समय पर मूल्यांकन करना चाहिए।
- कठिन परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा और भविष्य का ध्यान रखना चाहिए।
- महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अपने समय, स्थान और साधनों को समझना चाहिए।
- प्राचीन नीतियों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ के साथ पढ़ना चाहिए।
चाणक्य नीति Chapter 4 से आज क्या सीख सकते हैं?
चाणक्य नीति के इस अध्याय में कुछ विचार आज भी सीधे उपयोगी लगते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा को छिपे हुए धन के रूप में देखना, संकट से पहले तैयारी करना और समय-समय पर अपने जीवन का मूल्यांकन करना आज भी अच्छी आदतें मानी जा सकती हैं।
वहीं कुछ बातें उस समय की सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हैं। इसलिए उन्हें आज के जीवन में शब्दशः लागू करना जरूरी नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि हम प्रत्येक विचार के पीछे छिपे मूल संदेश को समझें और उसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार देखें।
चाणक्य नीति के अन्य अध्याय पढ़ें
अगर आपको चाणक्य नीति Chapter 4 के ये विचार उपयोगी लगे हैं, तो आप दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:
- चाणक्य नीति Chapter 1 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 2 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 3 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 5 In Hindi
आप सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
चाणक्य नीति Chapter 4 में जीवन, विद्या, परिवार, संतान, संगति, धन और आत्मचिंतन से जुड़े अनेक विचार मिलते हैं। इसमें कुछ बातें आधुनिक जीवन में भी उपयोगी दिखाई देती हैं, जबकि कुछ विचार अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
इसलिए चाणक्य नीति को पढ़ते समय केवल शब्दों को याद करने के बजाय उनके पीछे की सीख को समझना अधिक उपयोगी है। विद्या को महत्व देना, अच्छे लोगों की संगति रखना, संकट से पहले तैयारी करना और समय-समय पर अपने जीवन का मूल्यांकन करना आज भी सार्थक बातें हैं।
अंततः किसी भी नीति को अपने जीवन में अपनाने से पहले यह देखना चाहिए कि वह वर्तमान परिस्थिति में उचित और व्यावहारिक है या नहीं। यही तरीका प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जीवन के लिए उपयोगी बनाता है।
Note: सावधानी बरतने के बावजूद यदि ऊपर दिए गए किसी भी Quote (Hindi or English) में आपको कोई त्रुटि मिले तो कृपया comments के माध्यम से अवगत कराएं।
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1 Comment
Hi Mahesh Yadav.Nice Post.thanks for sharing with us.