चाणक्य नीति Chapter 5 में आचार्य चाणक्य ने जीवन, विद्या, धन, सत्य, संगति, परिवार और व्यवहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इस अध्याय में कुछ नीतियां व्यक्ति को संकट का सामना करने, अपनी विद्या का उपयोग करने और सही लोगों के साथ रहने की सीख देती हैं।
चाणक्य तक्षशिला के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य माने जाते हैं। उन्हें कूटनीति और समाजनीति के महान विद्वानों में भी गिना जाता है। मौर्यवंश की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
चाणक्य की नीतियों में जीवन के व्यवहारिक पक्ष के साथ धर्म, विद्या, धन और सामाजिक जीवन से जुड़े विचार भी मिलते हैं। हालांकि, इस अध्याय के कुछ कथन प्राचीन सामाजिक और धार्मिक संदर्भ से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें आज के समय में उसी संदर्भ के साथ समझना उचित है।
इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 4 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति पंचम अध्याय के महत्वपूर्ण विचार।
चाणक्य नीति Chapter 5
1. किसकी पूजा और सम्मान करना चाहिए?
चाणक्य नीति में कहा गया है कि ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए। दूसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए। पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आए, उसका सभी को सम्मान करना चाहिए।
Agni is the worshipable person for the twice-born, the brahmana for the other castes, the husband for the wife, and the guest who comes for food at the midday meal for all.
यह कथन प्राचीन धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। आज के संदर्भ में इसके अतिथि-सत्कार और सम्मान वाले विचार को अधिक व्यापक रूप में समझा जा सकता है।
2. मनुष्य की पहचान कैसे होती है?
सोने की जांच चार प्रकार से की जाती है। उसे कसौटी पर घिसा जाता है, काटकर देखा जाता है, तपाया जाता है और कूटा-पीटा जाता है।
इसी प्रकार मनुष्य की श्रेष्ठता की जांच भी चार बातों से होती है। इनमें त्याग, शील, गुण और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य शामिल हैं।
As gold is tested in four ways by rubbing, cutting, heating, and beating the same as a man should be tested by these four things: his renunciation, his conduct, his qualities, and his actions.
सीख: किसी व्यक्ति को केवल उसके शब्दों या बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, गुण और कर्मों से समझना चाहिए।
3. भय आने से पहले सावधानी और संकट आने पर साहस
बुद्धिमान व्यक्ति को तब तक ही भय से डरना या घबराना चाहिए, जब तक भय उसके सामने नहीं आया है। जब एक बार भय अथवा कष्ट सामने आ जाए, तो उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए।
भय के सामने आ जाने पर लगातार शंकित होना या घबराते रहना समझदारी नहीं है।
A thing may be dreaded as long as it has not overtaken you, but once it has come upon you, try to get rid of it without hesitation.
सीख: आने वाली समस्या के लिए तैयारी करें। लेकिन समस्या सामने आ जाए तो डरने के बजाय समाधान पर ध्यान दें।
4. एक ही परिवार में जन्मे लोगों का स्वभाव अलग हो सकता है
एक ही समय और एक ही नक्षत्र में तथा एक ही मां के गर्भ से उत्पन्न जुड़वां बच्चे भी हमेशा समान स्वभाव के नहीं होते। उदाहरण के लिए बेर के वृक्ष में फल भी लगते हैं और कांटे भी होते हैं। दोनों की प्रकृति अलग होती है।
फल लोगों को स्वाद और तृप्ति देते हैं, जबकि कांटे चुभन और कष्ट का कारण बनते हैं।
Though persons are born from the same womb and under the same stars, they do not become alike in disposition as the thousand fruits of the badari tree.
इसका अर्थ है कि केवल परिवार, जन्म या परिस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वभाव का पूरा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
5. व्यक्ति के गुण उसके व्यवहार से दिखाई देते हैं
जिस व्यक्ति के हाथ स्वच्छ हैं, वह कार्यालय में काम नहीं करना चाहता अर्थात उसे किसी पद की चाहत नहीं है। जिसने अपनी कामनाओं को खत्म कर दिया है, वह शारीरिक श्रृंगार नहीं करता।
मूर्ख पुरुष प्रिय और मधुर वचन नहीं बोल पाता। वहीं स्पष्ट बोलने वाला व्यक्ति कभी धोखेबाज, धूर्त और मक्कार नहीं होता, ऐसा चाणक्य नीति में कहा गया है।
He whose hands are clean does not like to hold an office, he who desires nothing cares not for bodily decorations, he who is only partially educated cannot speak agreeably, and he who speaks out plainly cannot be a deceiver.
यहां भी मूल नीति को उसके प्राचीन संदर्भ में समझना चाहिए। हर व्यक्ति का व्यवहार उसकी परिस्थिति और व्यक्तित्व के अनुसार अलग हो सकता है।
6. ईर्ष्या किससे पैदा होती है?
यह संसार की एक रीति बताई गई है कि पंडितों से मूर्ख ईर्ष्या करते हैं। निर्धन बड़े धनिकों से अकारण द्वेष कर सकते हैं। इसी प्रकार मूल नीति में व्यभिचारिणी स्त्रियों और पतिव्रता स्त्रियों तथा सौभाग्यवती स्त्रियों और विधवाओं के बीच भी ईर्ष्या का उल्लेख किया गया है।
The learned are envied by the foolish, rich men by the poor, chaste women by adulteresses; and beautiful ladies by ugly ones.
नोट: यह प्राचीन ग्रंथ में दिया गया सामान्यीकृत सामाजिक कथन है। इसे आज के समय में सभी गरीब, विधवा, स्त्री या अन्य किसी समूह पर लागू होने वाले तथ्य के रूप में नहीं लेना चाहिए। मूल सीख ईर्ष्या की प्रवृत्ति को समझने से जुड़ी है।
7. अभ्यास के बिना विद्या और प्रयास के बिना सफलता
आलस्य और अभ्यास के अभाव में प्राप्त विद्या भी नष्ट हो जाती है। दूसरे के हाथ में गया हुआ धन काम नहीं आता और न लौटकर वापस ही आता है। थोड़ा बीज डालने से खेत फलता-फूलता नहीं है। इसी प्रकार सेनापति रहित सेना विजयी नहीं होती।
Indolent application ruins study, money is lost when entrusted to others, a farmer who sows his seed sparsely is ruined, and an army is lost for want of a commander.
इस नीति का सीधा संदेश है कि केवल ज्ञान या साधन होना पर्याप्त नहीं है। उनका सही उपयोग और लगातार प्रयास भी जरूरी है।
मेहनत और सफलता से जुड़े दूसरे विचारों के लिए आप सफलता के क्या मायने हैं, पैसा या प्रसिद्धि? भी पढ़ सकते हैं।
8. विद्या, कुल और गुण की रक्षा कैसे होती है?
निरंतर अभ्यास से विद्या की रक्षा होती है। सदाचार के संरक्षण से कुल का नाम उज्जवल होता है। गुणों को धारण करने से श्रेष्ठता का परिचय मिलता है। वहीं किसी व्यक्ति की आंखों से उसके क्रोध का पता चल सकता है।
Learning is retained through putting into practice, family prestige is maintained through good behavior, a respectable person is recognized by his excellent qualities, and anger is seen in the eyes.
सीख: ज्ञान को बनाए रखने के लिए अभ्यास जरूरी है। इसी प्रकार अच्छे व्यवहार के बिना केवल नाम या प्रतिष्ठा पर्याप्त नहीं है।
9. धर्म, विद्या, राजनीति और गृहस्थ जीवन की रक्षा
चाणक्य नीति में कहा गया है कि धर्म की रक्षा धन के द्वारा, विद्या की रक्षा निरंतर अभ्यास के द्वारा, राजनीति की रक्षा कोमल और दयापूर्ण व्यवहार के द्वारा तथा घर-गृहस्थी की रक्षा कुलीन स्त्री के द्वारा होती है।
Religion is preserved by wealth, knowledge by diligent practice, a king by conciliatory words, and a home by a dutiful housewife.
इसमें दिए गए घरेलू और सामाजिक आदर्श प्राचीन समय की व्यवस्था को दर्शाते हैं। आज के परिवार में घर की जिम्मेदारियां दोनों जीवनसाथियों की साझी जिम्मेदारी मानी जा सकती हैं।
10. वेद, शास्त्र और संतों की निंदा के बारे में प्राचीन विचार
वेदों के तत्वज्ञान, शास्त्रों के विधान और सदाचार तथा संतों के उत्तम चरित्र को मिथ्या कहकर कलंकित करने वाले लोगों के बारे में चाणक्य नीति में कठोर विचार व्यक्त किया गया है। इसमें कहा गया है कि ऐसे लोग लोक-परलोक में कष्ट उठाते हैं।
Those who blaspheme Vedic wisdom, who ridicule the lifestyle recommended in the sastras, and who deride men of peaceful temperament, come to grief unnecessarily.
यह एक धार्मिक और प्राचीन संदर्भ वाला कथन है, इसलिए इसे उसी संदर्भ में पढ़ना उचित है।
11. दान, सदाचार और बुद्धि का महत्व
दान से दरिद्रता का, सदाचार से दुर्गति का, उत्तम बुद्धि से अज्ञान का तथा सद्भावना से भय का नाश होता है।
Charity puts an end to poverty, righteous conduct to misery, discretion to ignorance; and scrutiny to fear.
सीख: व्यक्ति के पास मौजूद संसाधनों का उपयोग दूसरों की सहायता में करना, अच्छा व्यवहार रखना और सही सोच विकसित करना जीवन को बेहतर बना सकता है।
12. काम, मोह और क्रोध से सावधान रहने की सीख
इस संसार में कामवासना के समान कोई भयंकर रोग नहीं है। काम एक ऐसा रोग बताया गया है जो मनुष्य के शरीर को खोखला करके उसे अशक्त बना देता है। मोह जैसा कोई अजेय शत्रु नहीं है। क्रोध जैसी कोई दूसरी आग नहीं है। और ज्ञान से बढ़कर कोई सुख नहीं है।
There is no disease (so destructive) as lust, no enemy like infatuation, no fire like wrath, and no happiness like spiritual knowledge.
इस नीति का मुख्य संदेश अपनी इच्छाओं, मोह और क्रोध पर नियंत्रण रखने से जुड़ा है।
13. मनुष्य अपने कर्मों का फल स्वयं भोगता है
व्यक्ति संसार में अकेला जन्म लेता है और अकेला ही मरता है। उसके द्वारा कमाई गई धन-संपत्ति और भाई-बन्धु सभी यहीं रह जाते हैं। इस संसार में न कोई किसी के साथ आता है और न ही किसी के साथ जाता है।
व्यक्ति अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल स्वयं भोगता है।
A man is born alone and dies alone and he experiences the good and bad consequences of his karma alone and he goes alone to hell or the Supreme abode.
यह विचार व्यक्ति को अपने कर्म और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने की सीख देता है।
14. ज्ञान और अनासक्ति से जुड़ी चाणक्य नीति
जिस व्यक्ति को ब्रह्म-ज्ञान है, उसके लिए स्वर्ग भी तुच्छ माना गया है। शूरवीर व्यक्ति के लिए जीवन का मोह कम हो जाता है। इसी प्रकार इन्द्रियों को वश में रखने वाले व्यक्ति के लिए आकर्षण का महत्व कम हो जाता है।
वहीं निःस्पृह अर्थात आसक्तिरहित व्यक्ति के लिए संसार के सुंदर खजाने और अन्य वस्तुएं तिनके के समान तुच्छ बताई गई हैं।
Heaven is but a straw to him who knows spiritual life, so is life to a valiant man, a woman to him who has subdued his senses, and the universe to him who is without attachment for the world.
यह नीति मुख्य रूप से ज्ञान, आत्मसंयम और अनासक्ति की ओर संकेत करती है।
15. अलग-अलग परिस्थितियों में सच्चा मित्र कौन है?
विदेश में रहने वाले व्यक्ति का सच्चा मित्र उसकी विद्या होती है। अपने घर में रहने वाले के लिए उसकी पत्नी को सच्चा मित्र बताया गया है। रोगी व्यक्ति के लिए औषधि मित्र है। मृत्यु-शैया पर पड़े व्यक्ति का मित्र उसका धर्म और जीवन में किए गए सत्कर्म बताए गए हैं।
Learning is a friend on the journey, a wife in the house, medicine in sickness, and religious merit is the only friend after death.
आज के संदर्भ में इसे इस रूप में समझा जा सकता है कि अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह का सहारा महत्वपूर्ण हो सकता है।
16. जहां आवश्यकता नहीं, वहां संसाधन व्यर्थ हो जाते हैं
समुद्र में बादलों का बरसना व्यर्थ बताया गया है। जिसका पेट भरा हुआ हो, ऐसे व्यक्ति को भोजन कराना बेकार है। धनी व्यक्ति को दान देना और सूर्य के प्रकाश में दिन में दीपक जलाना भी व्यर्थ बताया गया है।
The rain which falls upon the sea is useless, so is food for one who is satiated, in vain is a gift for one who is wealthy, and a burning lamp during the daytime is useless.
सीख: संसाधनों का उपयोग वहां करना चाहिए जहां उनकी वास्तव में आवश्यकता हो।
17. शक्ति, प्रकाश और अन्न का महत्व
बादलों से बरसते हुए जल के समान कोई दूसरा स्वच्छ पानी नहीं होता। आत्मबल के समान कोई दूसरा बल नहीं है। आंखों की ज्योति के समान कोई दूसरा उत्कृष्ट प्रकाश नहीं है तथा अन्न के समान कोई दूसरा भोज्य पदार्थ रुचिकर नहीं हो सकता।
There is no water like rainwater, no strength like one’s own, no light like that of the eyes, and no wealth dearer than food grain.
इस विचार में प्राकृतिक संसाधनों, आत्मबल और भोजन के महत्व को रेखांकित किया गया है।
18. मनुष्य की इच्छाएं अलग-अलग क्यों होती हैं?
निर्धन व्यक्ति धन की कामना करते हैं और पशु बोलने की शक्ति चाहते हैं। मनुष्य स्वर्ग की इच्छा रखता है और स्वर्ग में रहने वाला देवता मोक्ष की इच्छा करता है।
The poor wish for wealth, animals for the faculty of speech, men wish for heaven, and godly persons for liberation.
इस नीति का संदेश यह है कि व्यक्ति की इच्छाएं उसकी परिस्थिति और उसकी समझ के अनुसार बदलती रहती हैं।
19. सत्य को सबसे महत्वपूर्ण क्यों माना गया?
पृथ्वी सत्य के बल पर स्थिर है, सत्य की शक्ति से ही सूर्य में ताप और तेज है और सत्य की शक्ति से ही दिन-रात और वायु का संचालन होता है। इस प्रकार सारी सृष्टि के सत्य पर टिके होने की बात कही गई है।
The earth is supported by the power of truth, it is the power of truth that makes the sunshine and the winds blow, indeed all things rest upon truth.
सीख: यह नीति सत्य को जीवन और समाज की एक महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में प्रस्तुत करती है।
20. संसार की अनित्यता और धर्म
इस संसार में लक्ष्मी अस्थिर हैं। प्राण अनित्य हैं। जीवन भी सदा रहने वाला नहीं है। घर और परिवार भी नष्ट हो जाने वाले हैं। सभी पदार्थ अनित्य और नश्वर बताए गए हैं।
इसके विपरीत चाणक्य नीति में धर्म को नित्य और शाश्वत बताया गया है।
The Goddess of wealth is unsteady, and so is the life-breath. The duration of life is uncertain, and the place of habitation is uncertain, but in all this inconsistent world religious merit alone is immovable.
यह प्राचीन धार्मिक दृष्टिकोण है, जिसमें सांसारिक वस्तुओं की अस्थिरता और धर्म की स्थिरता पर जोर दिया गया है।
21. धूर्तता के बारे में प्राचीन चाणक्य नीति
चाणक्य नीति में मनुष्यों में नाई, पक्षियों में कौआ, पशुओं में गीदड़ और स्त्रियों में मालिन को धूर्त बताया गया है। मूल कथन में कहा गया है कि ये अकारण दूसरों का काम बिगाड़ते हैं, एक-दूसरे को लड़ाते हैं और परेशानी में डालते हैं।
Among men, the barber is cunning, among birds the crow, among beasts the jackal and among women, the malin (flower girl).
नोट: यह उस समय की सामाजिक धारणाओं से जुड़ा हुआ सामान्यीकृत कथन है। इसे आज किसी पेशे या महिला के बारे में factual judgment के रूप में नहीं लेना चाहिए। इसका उपयोग केवल प्राचीन नीति के संदर्भ को समझने के लिए किया जाना चाहिए।
22. पांच प्रकार के पिता और पांच प्रकार की माता
मानव को जन्म देने वाला, यज्ञोपवीत संस्कार कराने वाला पुरोहित, विद्या देने वाला आचार्य, अन्न देने वाला व्यक्ति तथा भय से मुक्ति दिलाने अथवा रक्षा करने वाला व्यक्ति—इन पांचों को पिता के समान माना गया है।
These five are your fathers, he who gave you birth, girdled you with sacred thread, teaches you, provides you with food, and protects you from fearful situations.
इसी प्रकार राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, पत्नी की माता और अपनी माता को माता के समान मानने की बात कही गई है।
These five should be considered as mothers, the king’s wife, the preceptor’s wife, the friend’s wife, your wife’s mother, and your own mother.
यह विचार प्राचीन सामाजिक और धार्मिक परंपराओं में सम्मान के अलग-अलग संबंधों को दर्शाता है।
चाणक्य नीति Chapter 5 की प्रमुख सीख
चाणक्य नीति Chapter 5 के इन विचारों से कई बातें आज भी सोचने योग्य हैं। साथ ही कुछ कथन स्पष्ट रूप से अपने समय की सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक सोच से जुड़े हुए हैं।
- व्यक्ति की पहचान उसके गुण, व्यवहार और कर्मों से होती है।
- संकट आने पर घबराने के बजाय उसका सामना करना चाहिए।
- विद्या को बनाए रखने के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है।
- संसाधनों का उपयोग जरूरत के अनुसार करना चाहिए।
- दान और सदाचार को जीवन में महत्व देना चाहिए।
- क्रोध, मोह और अनियंत्रित इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।
- अपने कर्मों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
- सत्य और आत्मबल को महत्व देना चाहिए।
- प्राचीन नीतियों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ में समझना चाहिए।
चाणक्य नीति Chapter 5 से आज क्या सीख सकते हैं?
प्राचीन नीति ग्रंथों को पढ़ते समय हर बात को आज के जीवन पर शब्दशः लागू करना जरूरी नहीं है। कुछ विचार उस समय के समाज, परिवार, धर्म और राजनीति की व्यवस्था के अनुसार लिखे गए थे।
फिर भी अभ्यास, ज्ञान, आत्मबल, सत्य, संकट में धैर्य, अच्छे व्यवहार और सही उपयोग जैसे विषय आज भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए चाणक्य नीति को पढ़ते समय उसके मूल संदेश को समझना अधिक उपयोगी है।
चाणक्य नीति के अन्य अध्याय पढ़ें
अगर आपको चाणक्य नीति Chapter 5 के ये विचार पसंद आए हैं, तो आप चाणक्य नीति के दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:
- चाणक्य नीति Chapter 1 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 2 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 3 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 4 In Hindi
आप सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
चाणक्य नीति Chapter 5 में जीवन, विद्या, धन, सत्य, संगति, परिवार और आत्मसंयम से जुड़े अनेक विचार मिलते हैं। इनमें कुछ नीतियां आज भी व्यवहारिक जीवन में उपयोगी लगती हैं, जबकि कुछ बातें प्राचीन सामाजिक और धार्मिक संदर्भ से जुड़ी हैं।
इसलिए चाणक्य नीति पढ़ते समय केवल शब्दों को याद करना पर्याप्त नहीं है। उसके पीछे छिपी सीख को समझना अधिक जरूरी है। अभ्यास से विद्या मजबूत होती है, अच्छे कर्म व्यक्ति की पहचान बनाते हैं और कठिन समय में साहस काम आता है।
इसी तरह जीवन की अनित्यता, सत्य और आत्मसंयम से जुड़े विचार व्यक्ति को अपने जीवन और व्यवहार पर विचार करने का अवसर देते हैं।
Note: सावधानी बरतने के बावजूद यदि ऊपर दिए गए किसी भी Quote (Hindi or English) में आपको कोई त्रुटि मिले तो कृपया comments के माध्यम से अवगत कराएं।
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1 Comment
wow, strong quotes! Thanks For Sharing With Us!