चाणक्य नीति Chapter 6 में आचार्य चाणक्य ने धर्म, ज्ञान, समय, धन, मित्रता, व्यवहार और जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इस अध्याय में व्यक्ति को अपने कर्म, संगति और परिस्थितियों को समझने की सीख मिलती है।
आचार्य चाणक्य ने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया था। मौर्य साम्राज्य के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्र के विद्वान के रूप में प्रसिद्ध हुए।
इतनी सदियां गुजरने के बाद भी चाणक्य की नीतियों पर चर्चा होती है। इसका एक कारण यह है कि उनकी नीतियों में जीवन, समाज और व्यवहार से जुड़े अनेक विचार मिलते हैं। हालांकि, कुछ कथन प्राचीन सामाजिक और धार्मिक संदर्भ में दिए गए हैं। इसलिए उन्हें उसी संदर्भ के साथ समझना उचित है।
इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 5 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति षष्ठ अध्याय के महत्वपूर्ण विचार।
चाणक्य नीति Chapter 6
1. धर्म और ज्ञान का महत्व
मनुष्य को धर्म के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान शास्त्रों और नीतिपूर्ण बातों को सुनने से भी हो सकता है। धर्माचरण और शास्त्रों के ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होने की बात चाणक्य नीति में कही गई है।
Man reads scriptures to know religion, he sheds ignorance to make way for learning and he attains Moksha (Nirvana) through knowledge of religion.
यह विचार प्राचीन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसका मुख्य संदेश ज्ञान और सही आचरण के महत्व से जुड़ा है।
2. दूसरों की निंदा करने से बचना चाहिए
चाणक्य नीति में पक्षियों में कौए, पशुओं में कुत्ते और साधुओं में नियमों को तोड़कर पापकर्म में प्रवृत्त व्यक्ति के बारे में कठोर बातें कही गई हैं। सबसे अधिक नीच दूसरों की निंदा करने वाले व्यक्ति को बताया गया है।
Among birds crow, among beasts dog, among saints ill tempered one and among humans a backbiter is the lowest of all.
सीख: किसी व्यक्ति की पीठ पीछे लगातार बुराई करना उसके चरित्र के बारे में नकारात्मक संकेत देता है। इसलिए दूसरों की निंदा करने की आदत से बचना चाहिए।
3. शुद्धता के बारे में प्राचीन विचार
कांसे के पात्र को राख से साफ करने पर वह चमकने लगता है। इसी तरह तांबे के बर्तन को शुद्ध करने के लिए खटाई की आवश्यकता होती है। स्त्री की शुद्धता के लिए मूल नीति में रजोधर्म का उल्लेख किया गया है। नदी की शुद्धता उसके तेज बहाव से जोड़ी गई है।
Ash cleans bronze, acid cleans copper, menstruation cleans a woman and rapid flow cleans water of a river.
नोट: यह प्राचीन ग्रंथ का कथन है। इसे आज के समय में वैज्ञानिक नियम या महिलाओं की शारीरिक शुद्धता के बारे में प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं समझना चाहिए।
4. राजा और साधु के भ्रमण का महत्व
राजा का कर्तव्य बताया गया है कि वह अपने राज्य के विभिन्न प्रदेशों में घूम-घूमकर अपनी प्रजा के संबंध में जानकारी प्राप्त करे। इसी प्रकार जो साधु या योगी विभिन्न स्थानों पर घूमते हैं, उनका सम्मान किए जाने की बात कही गई है।
मूल नीति में इसके विपरीत घर से बाहर निकलने वाली स्त्री के बारे में बहुत कठोर और सामान्यीकृत कथन किया गया है। उसे प्राचीन सामाजिक संदर्भ में समझना चाहिए।
A king who tours his kingdom is the protector of the subjects. A Yogi or learned person who goes from place to place is respected. But a woman who walks out of her home gets destroyed.
आज के समय में किसी महिला का घर से बाहर निकलना अपने आप में गलत या हानिकारक नहीं माना जा सकता। इसलिए इस कथन को केवल उसके ऐतिहासिक संदर्भ में पढ़ना उचित है।
5. धन के कारण मिलने वाला सम्मान
जिस व्यक्ति के पास पैसा होता है, लोग स्वतः ही उसके मित्र बन सकते हैं। बन्धु-बान्धव भी उसके आसपास आने लगते हैं। चाणक्य नीति में यह भी कहा गया है कि धनवान व्यक्ति को ही विद्वान और सम्मानित व्यक्ति समझा जाने लगता है।
One who has riches, he has friends, he has relatives, and he is called a man a wise one.
यह नीति धन के कारण समाज में बदलते व्यवहार की ओर संकेत करती है। केवल धन के आधार पर किसी व्यक्ति की बुद्धि या योग्यता तय करना जरूरी नहीं है।
6. भाग्य और व्यक्ति के जीवन का संबंध
मनुष्य जैसा भाग्य लेकर आता है, उसकी बुद्धि भी उसी के समान बन जाती है। उसके कार्य-व्यापार भी उसी के अनुरूप मिलने की बात कही गई है। उसके सहयोगी और साथी भी उसके भाग्य के अनुसार होने की बात चाणक्य नीति में कही गई है।
The destiny shapes one’s mind, brain, one’s profession and one gets associates according to the same.
यह भाग्य से जुड़ा पारंपरिक विचार है। इसे दार्शनिक दृष्टि से पढ़ना अधिक उचित है।
7. समय सबसे शक्तिशाली है
इस संसार में सबसे अधिक बलवान काल अथवा समय को बताया गया है। काल का चक्र सृष्टि के आदि से अंत तक चलता रहता है और कभी नहीं रुकता। जो व्यक्ति समय की उपेक्षा करता है, समय उसे पीछे छोड़कर आगे निकल जाता है।
Time consumes the five elements- the earth, the water, the air, the fire, and the sky. The time brings death. Even after doomsday the time remains in latent form. No one can go beyond time.
सीख: समय की कद्र करना जरूरी है। बीता हुआ समय वापस नहीं आता, इसलिए उपलब्ध समय का सही उपयोग करना चाहिए।
8. काम, अहंकार और स्वार्थ मनुष्य की सोच को प्रभावित करते हैं
जो व्यक्ति जन्म से अंधा होता है, उसे कुछ दिखाई नहीं देता। लेकिन जो व्यक्ति काम के आवेग में अंधा हो जाता है, उसे भी परिणाम दिखाई नहीं देते। वह भरी सभा में निंदनीय हरकत कर सकता है।
नशे में धुत व्यक्ति भी अच्छाई और बुराई को नहीं देख पाता। इसीलिए उसे भी एक तरह से अंधा बताया गया है।
A born blind knows no vision, a man driven by lust is blind to consequences, an arrogant person is thoughtless and selfish person achieves his aims without caring for the fairness of the means.
यहां मुख्य सीख अपने आवेगों और कमजोरियों पर नियंत्रण रखने की है।
9. अपने कर्मों का परिणाम स्वयं भुगतना पड़ता है
व्यक्ति स्वयं अच्छे और बुरे काम करता है। इसलिए उसे उनके अच्छे और बुरे परिणाम भी स्वयं भुगतने पड़ते हैं। वह संसार के मोह-माया के जाल में स्वयं ही फंसता है और उससे मुक्त भी स्वयं ही होता है।
A person indulges in various acts and faces the consequences. He himself joins the rat race and finally leaves it on his own.
सीख: अपने निर्णय और कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं लेना जीवन की महत्वपूर्ण सीख है।
10. राजा और जिम्मेदारी
राजा का यह कर्तव्य बताया गया है कि वह अपने राज्य में पापकर्म न होने दे। उसका यह भी कर्तव्य है कि वह अपराधियों और दुष्टों को दंड दे तथा प्रजा को पापकर्म से अलग रखे।
यदि वह ऐसा नहीं करता, तो प्रजा द्वारा किए गए पापकर्मों के लिए उसे दोषी ठहराए जाने और उनका फल भुगतने की बात मूल नीति में कही गई है।
A king pays for the sins of his subjects, so does for the priest for the sins of his king, so does a husband for the sins of his wife, and a guru pays for the sins of his disciple.
यह कथन प्राचीन शासन, धर्म और सामाजिक जिम्मेदारी की अवधारणा को दर्शाता है।
11. कर्ज और परिवार के बारे में कठोर नीति
जो पिता अपनी संतान पर कर्ज का बोझ छोड़ जाता है, उसे चाणक्य नीति में संतान का शत्रु कहा गया है। इसी प्रकार दुष्ट अथवा पापकर्म में प्रवृत्त माता को भी संतान की शत्रु माना गया है।
मूल नीति में अधिक सुंदर स्त्री को भी पति का शत्रु और मूर्ख पुत्र को शत्रु के समान बताया गया है।
An indebted father is an enemy. So are a lustful mother, foolish son, and a beautiful wife.
नोट: ये प्राचीन नीति के सामान्यीकृत कथन हैं। विशेषकर स्त्री की सुंदरता को शत्रु मानने वाली बात को आज के समय में शाब्दिक सत्य या सामान्य नियम के रूप में नहीं लेना चाहिए।
12. अलग-अलग स्वभाव वाले लोगों से व्यवहार कैसे करें?
लोभी व्यक्ति को धन का लालच देकर अपने वश में किया जा सकता है। हठी पुरुष को हाथ जोड़कर या विनम्रता से उसके सामने झुककर अपने अनुकूल बनाया जा सकता है।
मूर्ख व्यक्ति को उसकी इच्छा पूरी करके प्रभावित किया जा सकता है। वहीं विद्वान पुरुष को सही स्थिति और तथ्य बताकर ही अपने अनुकूल बनाया जा सकता है।
One can conquer a greedy by money, an arrogant by politeness, a fool by fooling and learned by truth.
सीख: हर व्यक्ति से एक ही तरीके से बात करना प्रभावी नहीं होता। परिस्थिति और व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार संवाद करना पड़ सकता है।
13. गलत लोगों से बेहतर है अकेले रहना
किसी प्रदेश में न रहना अच्छा हो सकता है, लेकिन दुष्ट राजा के राज्य में रहना अच्छा नहीं है। दुष्ट मित्रों की अपेक्षा कोई मित्र न होना बेहतर बताया गया है।
दुष्ट शिष्यों की अपेक्षा कोई शिष्य न होना और बुरी स्त्री के बजाय बिना स्त्री के रहना भी मूल नीति में बेहतर बताया गया है।
It is better to be stateless than to live in a state ruled by wicked king. It is better to be without friend than have a deceitful friend. It is better to be without a disciple than to have lowly foolish disciple. It is better to remain unmarried than have a wife of bad character.
इसका मुख्य संदेश खराब संगति और गलत संबंधों से बचने का है।
14. दुष्ट व्यक्ति से सुख की उम्मीद नहीं करनी चाहिए
दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा सुख की आशा नहीं कर सकती। दुष्ट और नीच व्यक्ति से मित्रता करने पर भी कल्याण नहीं हो सकता।
दुराचारिणी स्त्री को पत्नी बनाने से गृहस्थ का आनंद और सुख प्राप्त नहीं हो सकता। इसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति को शिष्य बनाया जाए, तो उससे गुरु के यश में वृद्धि नहीं होगी, ऐसा मूल नीति में कहा गया है।
There is no happiness in a state ruled by wicked king. There is no peace from deceitful friend. There is no joy in a home of woman of bad character. There is no credit in teaching a foolish and bad disciple.
सीख: व्यक्ति, मित्र और सहयोगी चुनते समय उनके चरित्र और व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।
15. जानवरों से क्या सीखना चाहिए?
चाणक्य नीति में कहा गया है कि मनुष्य को शेर और बगुले से एक-एक, गधे से तीन, मुर्गे से चार, कौए से पांच और कुत्ते से छह गुण सीखने चाहिए।
A man must learn lessons from the following animals, one from lion, two from a crane, three from a donkey, and four from a cock, five from a crow and six from a dog.
इन पशु-पक्षियों के उदाहरणों के माध्यम से चाणक्य ने व्यवहार, मेहनत, सावधानी और लक्ष्य पर ध्यान जैसे गुणों को समझाने की कोशिश की है।
16. शेर से लक्ष्य के प्रति दृढ़ता सीखें
शेर से यह अच्छी बात सीखनी चाहिए कि कार्य छोटा हो या बड़ा, उसे पूरा करने के लिए पूरा सामर्थ्य लगा देना चाहिए। किसी कार्य को महत्वहीन समझकर उसकी उपेक्षा करना अच्छी बात नहीं है।
Whatever task one undertakes, be big or small, one should not leave until the task is done. A lion does not let go the prey it has grabbed until it is devoured and only carcass remains.
सीख: काम छोटा हो या बड़ा, उसे पूरी गंभीरता और मेहनत से पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
17. बगुले से एकाग्रता सीखें
बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को बगुले की तरह वश में रखते हुए अपने लक्ष्य को पूरा करना चाहिए। उसे जगह, समय और अपनी योग्यता का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
A wise man must pay his undivided attention to achieving his goal. See how a crane freezes his entire body to concentrate upon the task of catching fish he has targeted.
सीख: लक्ष्य पाने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही समय और सही रणनीति भी जरूरी है।
18. गधे से मेहनत और संतोष सीखें
गधे से तीन बातें सीखने के लिए कही गई हैं:
- अपने लक्ष्य की प्राप्ति और सिद्धि के लिए प्रयत्न करते रहना चाहिए।
- फल की चिंता किए बिना अपना काम करते रहना चाहिए।
- सदा संतुष्ट रहने का प्रयास करना चाहिए।
Learn from donkey the spirit of hard work, stoicism and never complaining.
इसका मुख्य संदेश मेहनत, धैर्य और संतोष से जुड़ा है।
19. मुर्गे से चार बातें सीखें
चाणक्य नीति के अनुसार मुर्गे से चार बातें सीखनी चाहिए:
- सही समय पर उठना।
- निडर बनकर लड़ना।
- अपनी संपत्ति का रिश्तेदारों के साथ उचित बंटवारा करना।
- अपने प्रयास से अपना रोजगार प्राप्त करना।
The cock teaches four lessons. Rising early, fighting to the end, the spirit of sharing food with others like it does with hen and the brood and attacking to defend its territory and rights.
इन बातों को आज के जीवन में अनुशासन, साहस, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता से जोड़कर समझा जा सकता है।
20. कौए से पांच बातें सीखें
कौए से पांच बातें सीखने के लिए कही गई हैं:
- अपनी पत्नी के साथ एकांत में प्रणय करना।
- निडरता।
- उपयोगी वस्तुओं का संचय करना।
- सभी ओर दृष्टि बनाए रखना।
- दूसरों पर आसानी से विश्वास न करना।
Make love discreetly, walk quietly, store the desirable, be vigilant, and do not put trust easily in others. These five things we must learn from crow.
सीख: सावधानी, निजता और परिस्थितियों पर नजर रखना जीवन में उपयोगी हो सकता है।
21. कुत्ते से छह बातें सीखें
कुत्ते से छह बातें सीखने के लिए कही गई हैं:
- भूख अधिक हो, फिर भी उपलब्ध भोजन के अनुसार संतोष करना।
- अपनी क्षमता के अनुसार खाना।
- गहरी नींद लेना।
- थोड़ी-सी आहट पर भी जाग जाना।
- अपने स्वामी के प्रति ईमानदार रहना।
- निडर होना।
Learn following six things from a dog. Have good appetite, eat less than capacity to consume, sleep well, wake up at the slightest disturbance, love your master and be brave.
इन गुणों में संतोष, सतर्कता, वफादारी और साहस जैसे व्यवहारिक गुणों पर जोर दिया गया है।
इन पशु-पक्षियों से मिलने वाली 20 जीवन सीख
शेर, बगुला, गधा, मुर्गा, कौआ और कुत्ते के उदाहरणों के माध्यम से चाणक्य नीति में कुल मिलाकर कई व्यवहारिक गुणों की ओर संकेत किया गया है। इनका उद्देश्य मनुष्य को अपने जीवन में अनुशासन, मेहनत, सावधानी और लक्ष्य पर ध्यान रखने के लिए प्रेरित करना है।
Learn the twenty lessons from the animals and adopt them. The one who does that will achieve success and victory in all fields.
जो व्यक्ति इन गुणों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करता है, वह कठिन परिस्थितियों का सामना अधिक समझदारी से कर सकता है।
चाणक्य नीति Chapter 6 की प्रमुख सीख
चाणक्य नीति Chapter 6 के विचारों से कई महत्वपूर्ण बातें सीखी जा सकती हैं। हालांकि कुछ कथन प्राचीन सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था पर आधारित हैं, फिर भी कुछ सामान्य जीवन-सीख आज भी उपयोगी लगती हैं।
- समय की कद्र करनी चाहिए।
- ज्ञान को अभ्यास और सही आचरण से मजबूत करना चाहिए।
- दूसरों की निंदा और खराब संगति से बचना चाहिए।
- कठिन समय आने पर घबराने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
- अपने कर्मों और निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए।
- महत्वपूर्ण लक्ष्य पर एकाग्र होकर काम करना चाहिए।
- छोटे और बड़े दोनों कामों को पूरी मेहनत से करना चाहिए।
- संतोष के साथ आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए।
- सही लोगों को मित्र और सहयोगी चुनना चाहिए।
- प्राचीन नीतियों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ के साथ समझना चाहिए।
चाणक्य नीति Chapter 6 से आज क्या सीखें?
इस अध्याय का सबसे उपयोगी हिस्सा वह है जिसमें मेहनत, एकाग्रता, सतर्कता, समय और ज्ञान पर जोर दिया गया है। शेर से दृढ़ता, बगुले से एकाग्रता और गधे से मेहनत की सीख आज भी आसानी से समझी जा सकती है।
इसके अलावा, अपने कर्मों का परिणाम स्वयं भुगतने वाला विचार व्यक्ति को जिम्मेदारी लेने की प्रेरणा देता है। वहीं मित्रता और संगति से जुड़े विचार यह याद दिलाते हैं कि गलत लोगों का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, स्त्री, परिवार और सामाजिक वर्गों से जुड़े कुछ कथन स्पष्ट रूप से अपने समय की मान्यताओं को दिखाते हैं। उन्हें आज के समाज के लिए सार्वभौमिक नियम मानने के बजाय ऐतिहासिक संदर्भ में पढ़ना अधिक उचित है।
चाणक्य नीति के अन्य अध्याय पढ़ें
अगर आपको चाणक्य नीति Chapter 6 के ये विचार पसंद आए हैं, तो आप इसके दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:
- चाणक्य नीति Chapter 1 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 2 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 3 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 4 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 5 In Hindi
आप सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
चाणक्य नीति Chapter 6 में धर्म, ज्ञान, समय, धन, मित्रता, कर्म और व्यवहार से जुड़े कई विचार मिलते हैं। इस अध्याय में पशु-पक्षियों के उदाहरणों के माध्यम से भी जीवन के कई गुण समझाए गए हैं।
इनमें शेर से लक्ष्य के प्रति दृढ़ता, बगुले से एकाग्रता, गधे से मेहनत और संतोष, मुर्गे से अनुशासन, कौए से सतर्कता और कुत्ते से निष्ठा जैसी बातें विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं।
साथ ही, यह याद रखना भी जरूरी है कि चाणक्य नीति के सभी कथन आज के सामाजिक जीवन के लिए समान रूप से लागू नहीं होते। कुछ विचार प्राचीन व्यवस्था और उस समय की मान्यताओं को दर्शाते हैं। इसलिए हमें उपयोगी सीख को समझकर उसे वर्तमान जीवन की परिस्थितियों के अनुसार अपनाना चाहिए।
Note: सावधानी बरतने के बावजूद यदि ऊपर दिए गए किसी भी Quote (Hindi or English) में आपको कोई त्रुटि मिले तो कृपया comments के माध्यम से अवगत कराएं।
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2 Comments
bahut hi achcha collection hai.
loved it