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Health Tips 9 Mins Read

हमेशा दुखी रहना आपको बीमार बना सकता हैं

Mahesh YadavBy Mahesh YadavNo Comments9 Mins Read
हमेशा दुखी रहने से हो सकती है बीमारी
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कई दार्शनिक अपने विचारो के जरिए जीवन को समझाने का प्रयास करते रहते हैं और वैज्ञानिक भी अपने रिसर्च के जरिए जीवन और उसकी गुत्थियों को समझने और समझाने का प्रयास करते हैं।

लेकिन फिर भी जीवन को और उसकी बारीकियों को अब तक समझा नहीं जा पाया हैं। क्योंकि जीवन जो हैं, वो जीने के लिए मिला हैं। इसके बारे में सोचने से कुछ ना मिलेगा।

जीवन क्या हैं? इस पर ध्यान से बढ़िया हैं कि जीवन को हम बेहतर तरीके से कैसे जीएं? और जीवन में आने वाली परेशानियों को कैसे हैंडल करें?

जीवन को हम एक सुख दुख की नदी की तरह देखे तो इसमें सुख भी आता हैं, दुख भी आता हैं। लेकिन जो दुख होता हैं, वो कभी कभी ऐसे आता हैं कि सब कुछ तहस नहस कर सकता हैं।

लेकिन दुख आए ही नहीं ऐसा भी संभव नहीं हैं। दुख भी हमारे जीवन का एक भाग हैं।

दुख भी एक मानवीय भावनाओं में से एक हैं। यह तक की जानवरों को भी दुख होता हैं। वह भी अपने दुख को एक्सप्रेस करते हैं। कुछ अध्ययन में पौधे में भी दुख को पाया गया हैं।

इस लिए कभी भी ऐसा नहीं कहा जा सकता हैं कि जीवन में कभी दुख नहीं आये ही न।

बस हम जीवन में आने वाले दुख को कम कर सकते हैं। दुख से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।

सबसे पहले हम जानने का प्रयास आखिर दुख और कष्ट का क्या कारण होता हैं?

दुख का कारण

1) अपने प्रियजन को खोना

जन्म से किसी भी व्यक्ति के साथ रहने से उसके साथ हम काफी गहराई से जुड़ जाते हैं और उसके साथ एक इमोशनल बोंड बन जाता हैं और उसे जीवन से जोड़ कर देखने लगते हैं और अपने ऐसे प्रियजन से मृत्यु हो जाती हैं तब दुख होता हैं। यह भी दुख के कारणों में एक हैं।

2) इच्छा

भगवान बुद्ध ने इच्छा को भी दुख का एक कारण बताया था। जब किसी से काफी उम्मीदें पाल लेते हैं और उससे वो सारी उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं।

तब हम दुख होता हैं। लेकिन यह भी बात सही हैं कि बिना इच्छा का जीवन जीना भी संभव नहीं हैं। इच्छा के बिना जीवन जीवन नहीं रह पाएगा। लेकिन हम इच्छा को एक Fuel की तरह देख सकते हैं जो जीवन में हमें अपने सपनों तक पहुंचाने में मदद कर सकता हैं।

3) असफलता

किसी कार्य में मिली असफलता भी दुख का एक होता हैं। जब हम कोई भी कार्य करते हैं तो उस कार्य से हमें कुछ ना कुछ उम्मीदें होती हैं और एक कार्य में एक अंतराल तक करने के कारण हम उस काम से एक तरह का जुड़ाव महसूस करते हैं।

कोई भी व्यक्ति में हर काम में सफल होना चाहता हैं मगर किसी भी अन्य कारण की वजह से हम उस काम में सफल नहीं हो पाते हैं और वह असफलता भी हमें दुखी कर देती हैं।

दुख के दार्शनिक और सांसारिक और भी कई तरह के कारण होते हैं। जिससे मन को पीड़ा की अनुभूति होती हैं।

दुख आने पर कई तरह के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं।

आइए अब दुख से होने वाले नुकसान को समझने का प्रयास करते हैं।

दुख से होने वाले 5 नुकसान

1) बीमार पड़ने की संभावना

ज्यादा दुखी रहने या किसी भी विषय में ज्यादा सोच विचार करने की वजह से हमारे शारीरिक और मानसिक सेहत पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं।

दुखी रहना नकारात्मक विचारों को जन्म देता हैं और नकारात्मक विचारों का असर हमारे सोचने समझने की क्षमता पर पड़ता हैं, जिसकी वजह से हम सही ढंग से ना तो सोच पाते हैं और ना ही सही तरीके से कोई भी फैसला ले पाते हैं।

कई Study में यह बात खुल कर सामने आई हैं कि Negative thoughts इंसान के दिल पर असर करते हैं, जिसके वजह से ज्यादा सोचने वाले व्यक्ति को Heart attack आने की संभावना बढ़ जाती हैं।

और ज्यादा सोच विचार करने वाला व्यक्ति के दिमाग में Dopamine और सेरोटोनिन का स्तर कम हो जाता हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति ज्यादा परेशान हो जाता हैं।

2) अवसर खो देना

दुखी रहने से कोई भी काम का हल नहीं हो सकता हैं, कोई भी समस्या का ना तो समधान मिल सकता हैं और ना ही कोई भी परेशानी से छुटकारा पाया जा सकता हैं।

जीवन में जब भी आपदा का आगमन होता हैं, तो उसके साथ साथ कई सारे मौके भी जन्म लेते हैं, कई सारे अवसर भी उसके साथ आते हैं लेकिन दुखी इंसान एक तरह से अपने जीवन में रुकी हुयी नदी तरह की दिमाग को सेट कर लेता हैं।

और एक अफसोस में अपना जीवन बिताता हैं। वह अपने साथ साथ अपने आस पास के माहौल को भी दोष देता हैं। उसके दिमाग में हर दम यही बात चलती रहती हैं कि ऐसा क्यों हुआ? और वह बार कहता हैं कि उसी के साथ यह सब क्यों हुआ?

खुद से लगातार नकारात्मक वार्तालाप करने की वजह से वह वह दुख के जाल में और भी फंसता और भी धंसता चला जाता हैं।
और अपने जीवन में जो नई अवसर के रास्ते खुले हैं, उसके देख नहीं पाता हैं।

जैसे बरसात के दिनों में जब नदियों का जल स्तर औसत से ज्यादा हो जाता हैं, और उसका पानी overflow होकर बहने शुरू होता हैं। तो नदी के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आती हैं। बाढ़ के चलते कई में जो नुकसान होता हैं।

लेकिन बाढ़ के पानी के साथ नई मिट्टी भी तो आती हैं, जिसके वजह से उपजाऊ शक्ति बढ़ जाती हैं। यह भी एक तरह का फायदा ही हैं।
इसी दुखी होने का सबसे बड़ा नुकसान यही होता हैं कि अपने जीवन में आने वाले अवसरों को खो देते हैं।

3) खुशी की कमी

एक अच्छे खासे गणित के नजरिए से देखे तो ज़िन्दगी में हमारे पास जीने के लिए काफी कम समय बचा हुआ हैं। कई बार हम अब फालतू के कामों में या किसी इमोशनल उलझन में फंस जाते हैं, और अपने जीवन को बर्बाद करने लगते हैं।

यह फैक्ट्स हैं कि हर कोई हर समय खुश नहीं रह सकता हैं, मगर ऐसे उदास और दुखी रहने से भी तो कुछ नहीं होने वाला हैं।
माना कि आपका Breakup हुआ हैं, और आप इस चीज से Move on नहीं कर पा रहे हैं। आप दुखी हुए बैठे हैं, तो ऐसा करने से क्या हो गया?

आपका प्रॉबलम खतम हो जाएगा?

नहीं, उल्टे में आप अपनी ज़िंदगी के कीमती समय दुखी रहने में बीता रहे हैं और खुशी काम होती चली जाएगी।

दुखी रहने का एक नुकसान यह भी होता हैं कि आप कम खुशी रहते हैं। और इसका प्रभाव आपके आस पास के लोगों पर भी पड़ता हैं।

4) काम में मन नहीं लगना

यह जाहिर सी बात हैं हमेशा उदास बैठे रहने से हमारी ऊर्जा सकारात्मक कामों में लगने के बजाय नकारातमकता में लगता हैं।

और Work के Time पर अगर आप मन मार कर बैठे हुए हैं, तब आप चाह कर भी उस काम में अपना 100% नहीं दे पाएंगे। जिसकी असर आपके Working life पर पड़ सकता हैं।

इसलिए सबसे पहले जरूरी हैं कि अगर आप अंदर से उदास महसूस कर रहे हो, तो आप अपने Work से कुछ समय के लिए Rest लीजिए…।

और खुद को Nature से कनेक्ट रखिए। जिससे होगा कि आपको जो भी दुख हो, वो आगे तक नहीं बढ़ पाएगा और तनाव जैसी स्तिथि नहीं आएगी।

5) Mentally weakness

जब कोई भी उदास हो, और उसके उदास होने की वजह बड़ी हो, तब उस स्थिति में उसको Depression भी हो सकता हैं। जिसकी वजह से मानसिक रूप से वह व्यक्ति कमजोर होने लगता हैं। तब उसे एक्सपर्ट्स की जरूरत पड़ती हैं।

उतना सब होने के लिए कोई इंतेज़ार क्यों करना?

दुख क्षणिक होता हैं, कुछ समय के लिए होता हैं, उसके बाद खतम हो जाता हैं। दुख तो छांव की तरह होता हैं। आता हैं, जाता हैं। बुरे वक़्त में खुद को मजबूती से थामे रखना जरूरी होता हैं। क्युकी बुरा वक्त ज्यादा दिन लास्ट नहीं करता हैं।

इसलिए अपना बुरा वक़्त देख कर दुखी होने से कोई फायदा नहीं हैं। जरूरी होता हैं। Strong बनने की।

और दुख हो , सुख हो, सब में एक समान रहना चाहिए।
कोई प्रॉबलम नहीं हैं। दुख तो समुंदर में उठने वाली लहरों की तरह जो बनता हैं, फिर बिखर जाता हैं।
तो ज्यादा स्ट्रेस लेने की कोई जरूरत नहीं हैं

“दुख” से क्या सीखने को मिलता हैं?

“दोस्ती” movie का एक गीत हैं। जिसे रफी साहब ने गया हैं।

“राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती हैं
दुख तो अपना साथी हैं )

सुख हैं एक छाँव ढलती आती हैं जाती हैं
दुख तो अपना साथी हैं

राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती हैं
दुख तो अपना साथी हैं”

जिस गीत में ज़िन्दगी के मूलभूत पहलुओं के बारे में बात की गई हैं। दुख से निपटने की इसमें सीख दी गई हैं।
इस गीत में कवि का जो भी विचार हैं, वह काफी स्पष्ट हैं।

इस कवि कह रहा हैं कि जब इंसान के जीवन में दुख आता हैं, तब इंसान घबरा जाता हैं, कुछ कर नहीं पाता हैं। लेकिन दुख से इतना घबराना क्यूं? दुख एक इंसान का साथी हैं, और हर इंसान के जीवन में दुख के पल आते जाते हैं।

सुख पीछे कब तक भागना, सुख भी तो क्षणिक होता हैं। सुख भी तो आता जाता रहती हैं। कौन सा ऐसा हैं कि सुख मिल गया तो वह हमेशा रहेगा। सुख भी छांव के जैसा हैं, आता जाता रहता हैं।
तो इंसान को हमको या आपको अपने दुख को गले लगाना सीखना चाहिए।

जीवन में मुसीबतों का आना निश्चित हैं, और हर किसी के जीवन में कभी ना कभी आता जरूर हैं।

Final word

दुख और सुख जीवन के दो पहलू हैं। जैसे सिक्के के एक पहलू हैं। कई सारे दार्शनिकों ने तो मानव जीवन को दुख ही बताया हैं।

दुख ही जीवन हैं, जीवन ही दुख हैं। दुख से छुटकारा संभव नहीं हैं। मनुष्य के कभी भी दुख से छुटकारा नहीं मिल सकता, मुक्ति नहीं मिल सकता।

दुख तो लिटमस पत्र की तरह होता हैं। जो इंसान को परखने आता हैं। इंसान को जांच करने आता हैं। जैसे आंधियों के आने से पेड़ की जमीन में पकड़ मजबूत होती हैं, उसी तरह ही इंसान के जीवन में आने वाला दुख इंसान को Strong बनाता हैं।

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Mahesh Yadav
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Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

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