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हिंदी कहानियाँ 8 Mins Read

पीठ हमेशा मजबूत रखनी चाहिए क्योंकि शाबाशी और धोखा दोनों पीछे से ही मिलते हैं

Mahesh YadavBy Mahesh Yadav1 Comment8 Mins Read
Hindi Kahani on Trust
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Hindi Moral kahani, Story in Hindi, पीठ हमेशा मजबूत रखनी चाहिए क्योंकि शाबाशी और धोखा दोनों पीछे से ही मिलते हैं।

अक्सर यह हर किसी को पता होता है कि शाबाशी मात्र एक अच्छे काम के लिए ही मिलती है। वह अच्छा काम कुछ भी हो सकता है, अतः यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार अच्छे कर्म कर शाबासी का पात्र बन सकता है।

और यह भी एक साधारण ही बात है कि धोखा हमेशा पीछे से ही मिलता है। परंतु यह भी निश्चित है कि धोखा हर किसी को नहीं मिल पाता, धोखा सिर्फ तब ही मिलता है जब लोग खुद से ज्यादा दूसरों पर यकीन कर बैठते हैं।

आपको हमारी इस कहानी में कुछ ऐसी ही बातें पढ़ने को मिलेंगी जो यह साबित कर देंगी की धोखा और शाबाशी हमेशा पीठ में पीछे से ही मिलते हैं। हमारी इस कहानी के दो मुख्य किरदार हिरन के दो छोटे बच्चे हैं।

Lion and deer story, हिरण और शेर की कहानी

एक बहुत बड़े जंगल में हिरन और उसके साथ उसके दो बच्चे रहा करते थे। हिरण अपने बच्चों को बहुत प्यार करता था और उसके बच्चे भी अपनी मां से बहुत ज्यादा प्यार करते थे। हिरण के दोनों बच्चे बहुत सुंदर और तंदुरुस्त थे। वे दोनों बच्चे कभी-कभी अपनी माँ को छोड़कर जंगल में दूर-दूर तक चरने के लिए चले जाते थे और उनकी माँ उन्हें ढूंढते ढूंढते परेशान हो जाती थी।

हिरण के दोनों बच्चे धीरे-धीरे बढ़ रहे थे और अब वे घास चरना भी पूरी तरीके से सीख गए थे। वे दोनों बच्चे जितने बड़े होते जा रहे थे, उतनी ही दूर अपनी माँ को छोड़कर चरने के लिए चले जाते उनकी माँ उन्हें समझाती और रोकती कि वे दोनों बच्चे अपनी माँ के साथ ही जंगलों में चलने के लिए निकलें।

हिरण भी अपने बच्चों के साथ पीछे-पीछे बड़े जंगल में चरने के लिए निकल जाता उसके बच्चे उसकी एक भी बात नहीं सुनते और हिरन को पीछे छोड़ आगे निकल जाते।

1 दिन हिरण ने अपने बच्चों को डराने के लिए जंगल के राजा शेर के बारे में बताया। हिरण दोनों बच्चों को डराने के लिए बोला जंगल का राजा शेर हमारा बहुत बड़ा दुश्मन है वह हर वक्त हमारी जान के पीछे पड़ा रहता है। वह हमें मार कर अपना पेट भरना चाहता है हिरण का एक बच्चा समझदार था उसे यह बात समझ में आ गई परंतु दूसरे बच्चे ने अपनी मां द्वारा कही गई बातों पर ध्यान ही नहीं दिया।

फिर जब दूसरे दिन हिरण और उसके बच्चे घास चरने के लिए निकले तो वह समझदार बच्चा अपनी माँ के साथ साथ आगे बढ़ता परंतु दूसरा बच्चा जिसने अपनी माँ की बातों को नजरंदाज दिया ,वह अपनी माँ से बहुत आगे-आगे चला जाता उसकी माँ उसे कितना रोकती पर वह उसकी एक भी बात नहीं सुनता और एक ही दिशा में मस्ती से बढ़ते रहता।

उसे अपनी जान की परवाह नहीं थी, क्योंकि अपनी ही धुन में सवार इस हिरन के बच्चे को शेर के आतंक का कोई खौफ न था।

समय बीतता गया, दोनों बच्चे अब बड़े हो चुके थे। दोनों बच्चे शाम को घूमते- घूमते फिर अपनी माँ के पास वापस आ जाते थे। उनकी माँ उन्हें हर रोज यही समझा थी कि इतने बड़े जंगल में खुलेआम घूमना ठीक नहीं है परंतु हिरण के बच्चों को यह बात समझ में नहीं आती।

हिरणों को अब इस जंगल में लगभग 1 साल होने को जा रहा था। इतने लंबे समय में उन्होंने इस जंगल में अपने सिवा किसी जानवर को देखा ही नहीं, वे लगभग आधे जंगल का सफर अब तक तय कर चुके थे। इस कारण उनके मन में यह अवधारणा बन गई कि इस जंगल में उनके सिवा अन्य कोई भी जानवर है ही नहीं।

हिरण को हमेशा अपनी और अपने बच्चों की जान का भय रहता था हिरन अक्सर यही सोचता था, कि वे इतने बड़े जंगल में हम अकेले नहीं रह सकते यहां अन्य जानवर रहते होंगे परंतु हिरन के बच्चों ने इस जंगल में खरगोश, मैढक, छिपकली तथा पक्षियों के अलावा बड़े जानवर न के बराबर देखें थे। इसलिए वह बेखौफ रहते थे क्योंकि पक्षी इन बच्चों को देखकर स्वयं भाग जाते थे।

इस कारण हिरण के बच्चे स्वयं को जंगल में सबसे बड़ा समझने लग गए और अपनी मर्जी से सारे जंगल में घूमने लगे परंतु दोनों में से एक बच्चा बहुत समझदार था जो बहुत समझदारी से ही जंगल में घूमता था और उसके मन में हर वक्त शेर का ख्याल रहता था वह कभी-कभी खरगोश के बच्चों से भी डर जाता था।

Vishwash aur dhokhe ki kahani

एक दिन जब हिरण तथा उसके बच्चे चरने के लिए जंगल की तरफ निकले तो हिरन और उसके बच्चे चरते- चरते, अलग-अलग दिशाओं में चले गए इस कारण हिरन तथा उसके बच्चे उस घने जंगल में खो गए। उन सब ने एक दूसरे को बहुत ढूंढा परंतु दूर दूर तक उन्हें कोई भी दिखाई न दिया। हिरन का जो बच्चा समझदार था वह समझदारी से जंगल में अपने भाई तथा मां को ढूंढ रहा था।

बड़ी मुश्किलों के पश्चात हिरण के दोनों बच्चे आपस में मिल पाए, लेकिन माँ अपने बच्चों को ढूंढने निकल चुकी थी और अपने स्थान से गायब थी। फिर दोनों बच्चे शीघ्र अपनी मां को ढूंढने के लिए बड़े जंगल में निकल पड़े कुछ दूर आगे गए ही थे कि उनमें एक शेर की नजर पड़ गई।

शेर को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत दिनों से भूखा हो और वह बच्चे छोटे थे जिससे शेर के पेट को जरा भी फर्क न पड़ता शेर ने सोचा इन को मारने से अच्छा क्यों नहीं मैं इनसे इनकी मां के बारे में पूछो, इनकी मां को मारने से मेरा पेट भी भर जाएगा। यह सोचते हुए शेर ने अपना दिमाग लगाया और हिरण के दोनों बच्चों को पकड़ लिया।

हिरण के समझदार बच्चे को अहसास होने लगा कि यह वही है जिसकी बात माँ किया करती थी। वह बच्चा शेर के जाल से बाहर निकलने की हर एक संभव कोशिश करने लगा।

परंतु दूसरा बच्चा शेर की हर बात में विश्वास करने लगा था। शेर ने उन दोनों बच्चों को उनकी मां के बारे में पूछा तो समझदार बच्चा बोला कि उनकी माँ उनसे बहुत पहले ही बिछड़ चुकी थी और अब उसका कोई भी अता पता नहीं है।

जब दूसरे बच्चे से पूछा तो वह बोला उनकी माँ सुबह तक उन्हीं के साथ थी और अब वह बिछड़ गई है।

फिर दोनों बच्चों की अलग-अलग बातें सुनकर शेर चकमा खा गया और शेर को भी दोनों बच्चों की बातों में यकीन नहीं हो पाया।

फिर शेर ने सच और झूठ का पता लगाने के लिए एक तरीका अपनाया उसने यह सोचा कि मैं इन दोनों बच्चों को छोडूंगा और इनमें से जो भागेगा वह झूठ बोल रहा होगा और जो नहीं भागेगा उसकी बातों पर मैं यकीन कर लूंगा।

जब शेर ने दोनों बच्चों को छोड़ा तो समझदार बच्चा उसके चंगुल से बचने के लिए भाग गया और जो दूसरा बच्चा था वह शेर के सामने ही खड़ा रह गया शेर ने भागने वाले बच्चे को फिर से पकड़ लिया और अपने सामने खड़े हुए बच्चे पर यकीन कर लिया।

अब शेर उस बच्चे से ज्यादा बातें करता है जो उसके सामने खड़ा था।

अब हिरण के दोनों बच्चे शेर के साथ रहते थे और उसी के साथ जंगल में घूमते थे। शेर हर वक्त उन बच्चों को उनकी मां की तलाश करने के लिए कहता और सोचता था कि जब इन बच्चों की माँ मिल जाएगी मैं सबसे पहले उसका शिकार करके अपना पेट भर लूंगा और फिर इन बच्चों को भी अपना शिकार बनाउगा ।

शेर छोटे से हिरण के बच्चों को अपनी बातों में बहकाता था। हिरन का जो बच्चा समझदार था वह उसकी सारी बातें अनसुना करता। परंतु जो दूसरा बच्चा था वह शेर की बातों पर यकीन करने लग गया।।

वे बच्चे जब शेर के साथ जंगल में घूम रहे थे, तो तीसरे दिन हिरण का जो बच्चा समझदार था उसे अपनी माँ नजर आ गई ,उसने अपनी माँ को अनदेखा किया और वह शेर के साथ चलता गया क्योंकि उसे पता था अगर वह अपनी मां के बारे में शेर को बता देगा तो शेर उसकी मां को अपना शिकार बना देगा।

इस प्रकार समझदार बच्चा शेर की चुंगल से भागकर एक दिन अपनी माँ के साथ चला गया। तथा दूसरा बच्चा जो शेर पर यकीन करता था वह शेर के पास ही रह गया। अब शेर भी परेशान हो चुका था और उस बच्चे को ही अपना शिकार बनाने की सोच रहा था।

जब शेर उस बच्चे को अपना शिकार बनाने के लिए मुंह में डाल ही रहा था कि हिरण के दूसरे बच्चे ने अपनी मां को शेर की दूसरी तरफ भेजा और भागने को कहा। शेर ने बच्चे की माँ को देखकर बच्चे को छोड़ दिया और हिरण भी शेर से बहुत दूर जा चुका था तब हिरण का समझदार बच्चा अपने भाई को वहां से दूर झाड़ियों में ले गया और बाद में तीनों हिरण एक साथ मिल गए और कहीं दूर चले गए।

इस प्रकार हिरण का समझदार बच्चा अपनी मां से शाबाशी पाता है तथा दूसरा बच्चा शेर से धोखा खाता है।

सीख- हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हमें आंख बंद करके किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि अक्सर विश्वास करने पर हमें धोखा मिलता है और धोखा मिलने पर हम टूट से जाते हैं।

इसलिए हमें खुद पर इतना विश्वास होना चाहिए कि अगर हमें धोखा मिल भी जाए तो हम ना टूट सके ना ही निराश हो सके। अतः अपनी (पीठ) विश्वास हमेशा मजबूत रखना चाहिए।

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Mahesh Yadav
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Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

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1 Comment

  1. Karuna on Mar 17, 2023 2:12 pm

    Nice

    Reply

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