• Business Ideas
  • Success Stories
  • व्यक्तित्व विकास
  • सफलता के रहस्य
  • Book Summary
  • Health Tips
Facebook Twitter Instagram LinkedIn Reddit RSS
Most Liked Posts
  • तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक समीक्षा: मनोज कुमार की किताब कैसी है?
  • शेयर मार्केट में नुकसान क्यों होता है? 8 बड़ी गलतियां और बचने के तरीके
  • शेयर मार्केट क्या है और इससे पैसे कैसे कमाएं? पूरी जानकारी
  • Probo App क्या है? Probo अभी बंद है या चालू? पूरी जानकारी
  • GyanKamao से पैसे कैसे कमाएं? GyanKamao क्या है और कैसे काम करता है?
  • Freelancing से पैसे कैसे कमाएं? Freelancer बनने की पूरी जानकारी
  • Facebook Ads से पैसे कैसे कमाएं? पूरी जानकारी
  • Bike Se Paise Kaise Kamaye? बाइक से पैसे कमाने के 12 तरीके
Facebook Twitter Instagram Pinterest LinkedIn Reddit RSS
AchhiBaatein.Com
  • Business Ideas
  • Success Stories
  • व्यक्तित्व विकास
  • सफलता के रहस्य
  • Book Summary
  • Health Tips
AchhiBaatein.Com
हिंदी कहानियाँ 9 Mins Read

तो तू फिर समझदार हो गया हैं?

Mahesh YadavBy Mahesh YadavUpdated:Jan 1, 20201 Comment9 Mins Read
साझा करें
Twitter LinkedIn Pinterest Tumblr Reddit WhatsApp

Hindi Story, Moral Story, God only know our future, Luck is uncertain, Yamraj ki kahani

नियति को भला कौन जान सकता हैं? क्या पता जो हमें बुरा लग रहा हो, गलत होता प्रतीत हो रहा हो, उसमें ही सभी का भला छिपा हो, परमात्मा की लीला को कौन जान सकता हैं और उसकी करनी पर शक भला कौन कर सकता हैं, लेकिन हम अल्पज्ञान वाले या कह लीजियें अज्ञानी इसे दुर्भाग्य कह देते हैं, आइये एक बहुत ही अच्छी कहानी पढ़ते हैं

एक बार मृत्यु के देवता यमराज ने अपने एक दूत को पृथ्वी पर भेजा एक स्त्री मर गयी थी, उसकी आत्मा को लाना था। देवदूत आया, लेकिन चिंता में पड़ गया क्योंकि तीन छोटी-छोटी लड़कियाँ, जुड़वाँ, जिसमें एक अभी भी उस मृत स्त्री के स्तन से दूध पीने के प्रयास में लगी है। एक चीख रही है, पुकार रही है। एक रोते-रोते सो गयी है, उसके आँसू उसकी आँखों के पास सूख गए हैं – तीन छोटी जुड़वाँ बच्चियाँ और स्त्री मर गयी है और कोई देखने वाला नहीं है। पति पहले ही मर चुका है। परिवार में और कोई भी नहीं है इन तीन छोटी बच्चियों का क्या होगा?

उस देवदूत को यह खयाल आ गया और वह असमंजस में पड़ गया करें तो क्या करें और इसी कशमकश में वह खाली हाथ वापस लौट गया। उसने जाकर अपने प्रधान यमराज जी को कहा –

मैं न ला सका, मुझे क्षमा करें, लेकिन शायद आपको स्थिति का पता ही नहीं है। तीन जुड़वाँ बच्चियाँ हैं – छोटी-छोटी, दूध पीती। एक अभी भी मृत मां से लगी है, एक रोते-रोते सो गयी है, दूसरी अभी चीख-पुकार रही है। यह सब देख मेरा हृदय ला नहीं सका। क्या यह नहीं हो सकता कि इस स्त्री को कुछ दिन और जीवन के दे दिए जाएं? कम से कम लड़कियां थोड़ी बड़ी हो जाएं और कोई देखने वाला भी नहीं है।

मृत्यु के देवता ने कहा – तो तू फिर समझदार हो गया, उससे भी ज्यादा, जिसकी इच्छा से मृत्यु होती है, जिसकी इच्छा से जीवन होता है। तो तूने पहला पाप कर दिया और इसकी तुझे सज़ा मिलेगी। सज़ा यह है कि तुझे पृथ्वी पर चले जाना पड़ेगा और जब तक तू तीन बार न हँस लेगा अपनी मूर्खता पर, तब तक वापस न आ सकेगा।

इसे थोड़ा समझना। तीन बार न हँस लेगा अपनी मूर्खता पर – क्योंकि दूसरे की मूर्खता पर तो अहंकार हँसता है। जब हम अपनी मूर्खता पर हँसते हैं तब अहंकार टूटता है।

देवदूत को अपना किया गलत नहीं लगा। वह राज़ी हो गया, दंड भोगने को लेकिन फिर भी उसे लगा कि सही तो मैं ही हूँ और हँसने का मौका कैसे आएगा?

उसे जमीन पर फेंक दिया गया। सर्दियों के दिन करीब आ रहे थे। एक मोची बच्चों के लिए कोट और कंबल खरीदने शहर गया था। जब वह शहर जा रहा था तो उसने राह के किनारे एक नंगे आदमी को पड़े हुए, ठिठुरते हुए देखा। यह नंगा आदमी वही देवदूत है जो पृथ्वी पर फेंक दिया गया था। उसको दया आ गयी और बजाय अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदने के, उसने इस आदमी के लिए कंबल और कपड़े खरीद लिए। इस आदमी को कुछ खाने-पीने को भी न था, घर भी न था, छप्पर भी न था जहाँ रुक सके।

मोची ने यह सब देख कर कहा – अब तुम मेरे साथ ही आ जाओ, लेकिन हाँ अगर मेरी पत्नी नाराज हो – जो कि वह निश्चित होगी, क्योंकि बच्चों के लिए कपड़े खरीदने लाया था, वह पैसे तो खर्च हो गए, वह अगर नाराज हो, चिल्लाए, तो तुम परेशान मत होना। थोड़े दिन में सब ठीक हो जाएगा।

उस देवदूत को लेकर मोची घर लौटा। न तो मोची को पता है कि देवदूत घर में आ रहा है, न पत्नी को पता है। जैसे ही देवदूत को लेकर मोची घर में पहुँचा, पत्नी एकदम पागल हो गयी। बहुत नाराज हुई, बहुत चीखी-चिल्लायी।

और देवदूत पहली दफा हँसा। मोची ने उससे कहा – हँसते हो, बात क्या है?

उसने कहा – मैं जब तीन बार हँस लूँगा, तब बता दूँगा।

देवदूत हँसा पहली बार, क्योंकि उसने देखा कि इस पत्नी को पता ही नहीं है कि मोची देवदूत को घर में ले आया है, जिसके आते ही घर में हज़ारों खुशियाँ आ जाएंगी लेकिन आदमी देख ही कितनी दूर तक सकता है पत्नी तो इतना ही देख पा रही है कि एक कंबल और बच्चों के कपड़े नहीं बचे। जो खो गया है वह देख पा रही है, जो मिला है उसका उसे अंदाज़ा ही नहीं है – मुफ्त!! घर में देवदूत आ गया है। जिसके आते ही हज़ारों खुशियों के द्वार खुल जाएंगे। तो देवदूत हँसा अपनी मूर्खता पर – क्योंकि उसे लगा यह पत्नी भी नहीं देख पा रही है कि क्या घट रहा है।

जल्द ही, क्योंकि वह देवदूत था, सात दिन में ही उसने मोची का सब काम सीख लिया और उसके जूते इतने प्रसिद्ध हो गए कि मोची कुछ ही महीनों के भीतर धनी होने लगा। आधा साल होते-होते तो उसकी ख्याति सारे लोक में पहुँच गयी कि उस जैसा जूते बनाने वाला कोई भी नहीं था और होता भी कैसे क्योंकि वह जूते स्वयं देवदूत बनाता था। सम्राटों के जूते वहाँ बनने लगे। धन अपरंपार बरसने लगा।

एक दिन सम्राट का आदमी आया और उसने कहा – यह चमड़ा बहुत कीमती है, आसानी से मिलता नहीं, कोई भूल-चूक नहीं करना। जूते ठीक इस तरह के बनने हैं और ध्यान रखना जूते बनाने हैं, स्लीपर नहीं !!

क्योंकि रूस में जब कोई आदमी मर जाता है तब उसको स्लीपर पहनाकर मरघट तक ले जाते हैं।

मोची ने भी देवदूत को कहा – स्लीपर मत बना देना। जूते बनाने हैं, स्पष्ट आज्ञा है और चमड़ा इतना ही है और अगर कोई गड़बड़ हो गयी तो हम मुसीबत में फँसेंगे।

लेकिन फिर भी देवदूत ने स्लीपर ही बना दिए जब मोची ने देखे कि स्लीपर बने हैं तो वह क्रोध से आगबबूला हो गया। वह लकड़ी उठाकर उसको मारने को तैयार हो गया – तू तो हमें फाँसी लगवा देगा, तुझे बार-बार कहा था कि स्लीपर बनाने ही नहीं हैं फिर स्लीपर किसलिए बना दिएं?

देवदूत फिर खिलखिला कर हँसा तभी आदमी सम्राट के घर से भागा हुआ आया। उसने कहा – जूते मत बनाना, स्लीपर बनाना क्योंकि सम्राट की मृत्यु हो गयी है।

भविष्य अज्ञात है सिवाय उसके और किसी को ज्ञात नहीं और आदमी तो अतीत के आधार पर निर्णय लेता है। सम्राट जिंदा था तो जूते चाहिए थे, मर गया तो स्लीपर चाहिए। तब वह मोची उसके पैर पकड़कर माफी माँगने लगा – मुझे माफ कर दे, मैंने तुझे मारा।

पर उसने कहा – कोई हर्ज नहीं। मैं अपना दंड भोग रहा हूं।

लेकिन वह हँसा आज दुबारा। मोची ने फिर पूछा – हँसी का कारण?

उसने कहा – जब मैं तीन बार हँस लूँगा, तब बता दूँगा।

दोबारा हँसा इसलिए कि भविष्य हमें ज्ञात नहीं है। इसलिए हम आकांक्षाएं करते हैं जो कि व्यर्थ हैं। हम अभीप्साएं करते हैं जो कि कभी पूरी न होंगी। हम माँगते हैं जो कभी नहीं घटेगा क्योंकि कुछ और ही घटना तय है। हमसे बिना पूछे हमारी नियति घूम रही हैऔर हम व्यर्थ ही बीच में शोरगुल मचाते हैं। चाहिए स्लीपर और हम जूते बनवाते हैं। मरने का वक्त करीब आ रहा है और जिंदगी का हम आयोजन करते हैं।

तो देवदूत को लगा कि वे बच्चियाँ! मुझे क्या पता था कि भविष्य उनका क्या होने वाला है? मैं नाहक बीच में आया।

और तीसरी घटना घटी कि एक दिन तीन लड़कियाँ आयीं, जवान। उन तीनों की शादी हो रही थी और उन तीनों ने जूतों के आर्डर दिए कि उनके लिए जूते बनाए जाएं। एक बूढ़ी महिला उनके साथ आयी थी जो बड़ी धनी थी। देवदूत पहचान गया, ये वे ही तीन लड़कियाँ हैं, जिनको वह मृत माँ के पास छोड़ गया था और जिनकी वजह से वह दंड भोग रहा है। वे सब स्वस्थ हैं, सुंदर हैं।

उसने पूछा – क्या हुआ? यह बूढ़ी औरत कौन है?

वह बूढ़ी औरत पास आई और कहा – ये मेरी पड़ोसिन की लड़कियाँ हैं। गरीब औरत थी, उसके शरीर में दूध भी न था। उसके पास पैसे-लत्ते भी नहीं थे और तीन बच्चे जुड़वाँ, वह इन्हीं को दूध पिलाते-पिलाते मर गयी। लेकिन मुझे दया आ गयी, मेरे कोई बच्चे नहीं हैं और मैंने इन तीनों बच्चियों को पाल लिया।

अगर माँ ज़िदा रहती तो ये तीनों बच्चियाँ गरीबी, भूख और दीनता और दरिद्रता में बड़ी होतीं। माँ मर गयी, इसलिए ये बच्चियाँ तीनों बहुत बड़े धन-वैभव में, संपदा में पलीं और अब उस बूढ़ी की सारी संपदा की ये ही तीन मालिक हैं और इनका सम्राट के परिवार में विवाह हो रहा है।

देवदूत तीसरी बार हँसा और मोची को उसने बुलाकर कहा – ये तीन कारण हैं। भूल मेरी थी। नियति बड़ी है और हम उतना ही देख पाते हैं, जितना देख पाते हैं। जो नहीं देख पाते, बहुत विस्तार है उसका और हम जो देख पाते हैं उससे हम कोई अंदाज़ नहीं लगा सकते, जो होने वाला है, जो होगा। मैं अपनी मूर्खता पर तीन बार हँस लिया हूँ। अब मेरा दंड पूरा हो गया और अब मैं जाता हूँ।

—
दोस्तों, कैसी लगी यह हैं कहानी, इस बारे में हमे अपने विचार नीचे comments के माध्यम से अवश्य दे। हमारी पोस्ट को E-mail से पाने के लिए आप हमारा फ्री ई-मेल Subscription प्राप्त कर सकते है।

यदि आपके पास Hindi में कोई Inspirational or motivational story, best quotes of famous personalities, Amazing Facts या कोई अच्छी जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया [email protected] हमे E-mail करें पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ AchhiBaatein.com पर PUBLISH करेंगे।

अन्य प्रेरणादायी विचारो वाली (Inspirational Hindi Post) POST भी पढ़े।

  • Helen Keller Quotes in Hindi हेलेन केलर के प्रेरक अनमोल विचार
  • Inspirational Quotes of Mahatma Gandhi in Hindi महात्मा गाँधी के विचार
  • मार्क ज़ुकेरबर्ग के प्रेरक अनमोल विचार Mark Zuckerberg Quotes in Hindi
  • Marie Curie Quotes in Hindi मैरी क्यूरी के अनमोल वचन
  • Mother Teresa Quotes in Hindi – मदर टेरेसा के अनमोल विचार
  • पेले Pele के प्रेरक अनमोल विचार Quotes in Hindi
Hindi Kahani Moral story Story
Previous Articleसब पीछे छूटता जा रहा है, हम आगे बढ़ते जा रहे है Best Hindi Poems Desh Prem
Next Article एक लड़का मर गया ज्यादा शराब पीने से Best Hindi Poem on Drinking
Mahesh Yadav
  • Website
  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn

Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

यह भी पढ़े

9 Mins Read

नई बहू का मन ~ Hindi Kahani

पूरा पढ़े
10 Mins Read

बहू की सूनी गोद, कैसे गूंजेगी किलकारी ?

पूरा पढ़े
8 Mins Read

आखिर तलाक क्यों?

पूरा पढ़े

1 Comment

  1. Pkumar on Dec 24, 2018 3:14 pm

    आपकी पोस्ट बहुत अच्छी लगी है, ऐसे ही लिखते रहे,

    Reply

Leave A Reply Cancel Reply

Popular Posts
16 Mins ReadAug 11, 2026

Financial Planning Tips in Hindi: Business के लिए जरूरी Financial Planning

13 Mins ReadAug 10, 2026

भारत के 28 राज्य और राजधानी, मुख्यमंत्री, भाषा व ISO Code

17 Mins ReadAug 11, 2026

195 देशों की राजधानी और मुद्रा

10 Mins ReadAug 26, 2026

Blog और Blogging क्या हैं? क्या मुझे ब्लॉगिंग करनी चाहिए?

16 Mins ReadAug 20, 2026

Copyright, Patent और Trademark में अंतर क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में

Latest Posts
8 Mins ReadAug 8, 2026
तेरे मेरे इर्द गिर्द पुस्तक समीक्षा: मनोज कुमार की किताब कैसी है?
11 Mins ReadAug 8, 2026
शेयर मार्केट में नुकसान क्यों होता है? 8 बड़ी गलतियां और बचने के तरीके
10 Mins ReadAug 8, 2026
शेयर मार्केट क्या है और इससे पैसे कैसे कमाएं? पूरी जानकारी
8 Mins ReadAug 9, 2026
Probo App क्या है? Probo अभी बंद है या चालू? पूरी जानकारी
1 2 3 … 184 Next
Categories
  • Blogging Tips (8)
  • Book Summary (35)
  • Business Ideas & Earn Money (30)
  • General (13)
  • General Knowledge (55)
  • Health Tips (53)
  • Hindi Essay (2)
  • Hindi Quotes (59)
  • Hindi Thoughts (39)
  • Let's Laugh (8)
  • Motivational Hindi Songs (47)
  • Motivational Hindi Stories (25)
  • Personality Development (50)
  • Success Stories (17)
  • अमर कहानियाँ (7)
  • चाणक्य नीति (19)
  • चुटकुले (9)
  • जीवनी (63)
  • धार्मिक परंपरा व आस्था (12)
  • प्रेरक प्रसंग (10)
  • महत्वपूर्ण जानकारियां (9)
  • रोचक घटनाये (3)
  • रोचक तथ्य (8)
  • लोक व्यवहार (33)
  • श्रीमदभागवत गीता अंश (9)
  • सफलता के मंत्र (73)
  • सफलता के रहस्य (54)
  • हिंदी कहानियाँ (93)
  • हिंदी दोहे और उक्तिया (1)
  • हिंदी शेर और शायरी (6)
  • हिन्दी कविताएं (40)
About Us

अच्छी बातें डॉट कॉम

AchhiBaatein is a famous Hindi blog for Famous Quotes and Thoughts, Motivational & Inspirational Hindi Stories and Personality Development Tips

DMCA.com Protection Status

Recent Comment
  • Vijay Pal on आखिर जीवन का लक्ष्य क्या हैं?
  • Mahesh Yadav on Gratitude क्या है और इसके फायदे?
  • kumar on Gratitude क्या है और इसके फायदे?
  • puja on Top 10 successful profitable startups in India
Subscribe to Updates
सभी नए Posts अपने E-Mail पर तुरंत पाने के लिए यहाँ अपनी E-mail ID लिखकर Subscribe करें।

कृपया यहाँ Subscribe करने के बाद अपनी E-mail ID खोलें तथा भेजे गये Verification लिंक पर Click करके Verify करें

Powered by ® Google Feedburner

Copyright © achhibaatein.com 2013 - 2026 . All Rights Reserved
  • About Us
  • Contact Us
  • Advertise
  • Guest Column
  • Privacy Policy
  • Sitemap

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.