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प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानियाँ 12 Mins Read

महाभारत : यक्ष प्रश्न और युधिष्ठिर के उत्तर | Mahabharata Yaksha Prashna in Hindi

Mahesh YadavBy Mahesh YadavUpdated:Aug 26, 20266 Comments12 Mins Read
महाभारत यक्ष प्रश्न और युधिष्ठिर के उत्तर
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महाभारत में यक्ष प्रश्न का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है। इस प्रसंग में युधिष्ठिर के सामने यक्ष ने धर्म, जीवन, सत्य, सुख, मनुष्य के आचरण और संसार से जुड़े कई प्रश्न रखे। युधिष्ठिर ने शांत मन से उन प्रश्नों के उत्तर दिए।

इस लेख में
  • महाभारत में यक्ष प्रश्न का प्रसंग क्या है?
  • यक्ष ने युधिष्ठिर से कौन-कौन से प्रश्न पूछे?
    • जीवन और आत्मज्ञान से जुड़े यक्ष प्रश्न
    • संसार में दुख और सुख से जुड़े प्रश्न
    • भाग्य और सुख-शांति के बारे में प्रश्न
    • प्रेम और आसक्ति से जुड़े प्रश्न
    • बुद्धि और मनुष्य के आचरण से जुड़े प्रश्न
    • धर्म और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न
    • माया और परम सत्य से जुड़े प्रश्न
    • मां, पिता और ज्ञान के बारे में यक्ष प्रश्न
    • दान, सुख और धैर्य से जुड़े प्रश्न
    • अहंकार, क्रोध और लोभ पर यक्ष प्रश्न
    • जीवन को सुखी बनाने वाले प्रश्न
    • महाभारत का सबसे प्रसिद्ध यक्ष प्रश्न: संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
  • युधिष्ठिर ने नकुल को ही जीवित करने के लिए क्यों चुना?
  • यक्ष ने युधिष्ठिर को क्या वरदान दिया?
  • यक्ष प्रश्न से हमें क्या सीख मिलती है?
  • आज के समय में “यक्ष प्रश्न” का अर्थ क्या है?
  • महाभारत के यक्ष प्रश्न से जुड़ी अन्य उपयोगी पोस्ट
  • निष्कर्ष

यह प्रसंग केवल प्रश्न और उत्तर तक सीमित नहीं है। इसमें युधिष्ठिर की धर्म के प्रति निष्ठा, धैर्य और निष्पक्ष सोच भी दिखाई देती है। अंत में जब उन्हें अपने चार भाइयों में से केवल एक को जीवित करने का अवसर मिलता है, तब वे नकुल को चुनते हैं। उनका यह निर्णय इस पूरे प्रसंग को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

महाभारत में यक्ष प्रश्न का प्रसंग क्या है?

महाभारत के वन पर्व में पांडवों के सामने एक ऐसी परिस्थिति आती है, जिसमें नकुल, सहदेव, अर्जुन और भीम एक जलाशय के पास पहुंचते हैं। वे प्यास से व्याकुल थे। तभी उन्हें एक अदृश्य वाणी ने चेतावनी दी कि पहले उसके प्रश्नों का उत्तर दें और उसके बाद ही जल ग्रहण करें।

चारों भाइयों ने उस चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया और जल पीने के बाद अचेत होकर गिर पड़े। कुछ समय बाद युधिष्ठिर वहां पहुंचे। उन्होंने अपने चारों भाइयों को जलाशय के किनारे पड़ा देखा।

जब युधिष्ठिर भी जल पीने के लिए आगे बढ़े, तब वही वाणी फिर सुनाई दी। वाणी ने उन्हें बताया कि उनके भाइयों ने उसकी बात नहीं मानी थी। इसलिए उन्हें भी पहले प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। युधिष्ठिर ने बिना जल्दबाजी किए प्रश्नों का उत्तर देने के लिए सहमति दी।

इसके बाद यक्ष और युधिष्ठिर के बीच प्रश्न और उत्तर का प्रसिद्ध संवाद शुरू हुआ।

यक्ष ने युधिष्ठिर से कौन-कौन से प्रश्न पूछे?

नीचे यक्ष और युधिष्ठिर के संवाद में प्रस्तुत प्रमुख प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं। इन प्रश्नों में जीवन, आत्मज्ञान, सुख, दुख, धर्म, सत्य और मनुष्य के व्यवहार से जुड़े विचार दिखाई देते हैं।

जीवन और आत्मज्ञान से जुड़े यक्ष प्रश्न

यक्ष – कौन हूं मैं?

युधिष्ठिर – तुम न यह शरीर हो, न इन्द्रियां, न मन, न बुद्धि। तुम शुद्ध चेतना हो, वह चेतना जो सर्वसाक्षी है और कालातीत है।

यक्ष – जीवन का उद्देश्य क्या है?

युधिष्ठिर – जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है जो जन्म-मरण से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है।

यक्ष – जन्म का कारण क्या है?

युधिष्ठिर – अतृप्त वासनाएं, कामनाएं और कर्मफल जन्म का कारण माने गए हैं।

यक्ष – जन्म और मरण के बंधन से मुक्त कौन है?

युधिष्ठिर – जिसने स्वयं को और उस आत्मा को जान लिया, वह जन्म और मरण के बंधन से मुक्त है।

यक्ष – वासना और जन्म का संबंध क्या है?

युधिष्ठिर – यदि वासनाएं पशु जैसी हों तो पशु योनि में जन्म होगा और यदि वासनाएं मनुष्य जैसी हों तो मनुष्य योनि में जन्म होगा।

संसार में दुख और सुख से जुड़े प्रश्न

यक्ष – संसार में दुख क्यों है?

युधिष्ठिर – संसार के दुख का कारण लालच, स्वार्थ और भय हैं।

यक्ष – तो फिर ईश्वर ने दुख की रचना क्यों की?

युधिष्ठिर – ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचारों और कर्मों से दुख और सुख की रचना की।

यक्ष – क्या ईश्वर है? कौन है वह? वह स्त्री है या पुरुष?

युधिष्ठिर – यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वह भी है। उस महान कारण को ही आध्यात्म में ईश्वर कहा गया है। वह न तो स्त्री है और न ही पुरुष।

यक्ष – उसका स्वरूप क्या है?

युधिष्ठिर – वह सत्-चित्-आनंद है। वह निराकार होकर सभी रूपों में स्वयं को व्यक्त करता है।

यक्ष – वह निराकार स्वयं करता क्या है?

युधिष्ठिर – वह ईश्वर संसार की रचना, पालन और संहार करता है।

यक्ष – यदि ईश्वर ने संसार की रचना की तो फिर ईश्वर की रचना किसने की?

युधिष्ठिर – वह अजन्मा, अमृत और अकारण है।

भाग्य और सुख-शांति के बारे में प्रश्न

यक्ष – भाग्य क्या है?

युधिष्ठिर – हर क्रिया और हर कार्य का एक परिणाम होता है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य बन सकता है।

यक्ष – सुख और शांति का रहस्य क्या है?

युधिष्ठिर – सत्य, सदाचार, प्रेम और क्षमा सुख का कारण हैं। असत्य, अनाचार, घृणा और क्रोध का त्याग शांति का मार्ग है।

यक्ष – चित्त पर नियंत्रण कैसे संभव है?

युधिष्ठिर – इच्छाएं और कामनाएं चित्त में उद्वेग उत्पन्न करती हैं। इच्छाओं पर विजय चित्त पर विजय है।

प्रेम और आसक्ति से जुड़े प्रश्न

यक्ष – सच्चा प्रेम क्या है?

युधिष्ठिर – स्वयं को सर्वव्याप्त देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सभी के साथ एक देखना सच्चा प्रेम है।

यक्ष – तो फिर मनुष्य सभी से प्रेम क्यों नहीं करता?

युधिष्ठिर – जो स्वयं को सभी में नहीं देख सकता, वह सभी से प्रेम नहीं कर सकता।

यक्ष – आसक्ति क्या है?

युधिष्ठिर – प्रेम में मांग, अपेक्षा और अधिकार का भाव आसक्ति है।

यक्ष – नशा क्या है?

युधिष्ठिर – आसक्ति।

यक्ष – मुक्ति क्या है?

युधिष्ठिर – अनासक्ति ही मुक्ति है।

बुद्धि और मनुष्य के आचरण से जुड़े प्रश्न

यक्ष – बुद्धिमान कौन है?

युधिष्ठिर – जिसके पास विवेक है।

यक्ष – चोर कौन है?

युधिष्ठिर – इन्द्रियों के आकर्षण, जो इन्द्रियों को हर लेते हैं, चोर हैं।

यक्ष – नरक क्या है?

युधिष्ठिर – इन्द्रियों की दासता ही नरक है।

यक्ष – जागते हुए भी कौन सोया हुआ है?

युधिष्ठिर – जो आत्मा को नहीं जानता, वह जागते हुए भी सोया है।

यक्ष – कमल के पत्ते पर पड़े जल की तरह अस्थायी क्या है?

युधिष्ठिर – यौवन, धन और जीवन।

यक्ष – दुर्भाग्य का कारण क्या है?

युधिष्ठिर – मद और अहंकार।

यक्ष – सौभाग्य का कारण क्या है?

युधिष्ठिर – सत्संग और सबके प्रति मैत्री भाव।

यक्ष – सारे दुखों का नाश कौन कर सकता है?

युधिष्ठिर – जो सब छोड़ने को तैयार हो।

धर्म और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

यक्ष – मृत्यु पर्यंत यातना कौन देता है?

युधिष्ठिर – गुप्त रूप से किया गया अपराध।

यक्ष – दिन-रात किस बात का विचार करना चाहिए?

युधिष्ठिर – सांसारिक सुखों की क्षणभंगुरता का।

यक्ष – संसार को कौन जीतता है?

युधिष्ठिर – जिसमें सत्य और श्रद्धा है।

यक्ष – भय से मुक्ति कैसे संभव है?

युधिष्ठिर – वैराग्य से।

यक्ष – मुक्त कौन है?

युधिष्ठिर – जो अज्ञान से परे है।

यक्ष – अज्ञान क्या है?

युधिष्ठिर – आत्मज्ञान का अभाव अज्ञान है।

यक्ष – दुखों से मुक्त कौन है?

युधिष्ठिर – जो कभी क्रोध नहीं करता।

माया और परम सत्य से जुड़े प्रश्न

यक्ष – वह क्या है जो अस्तित्व में है और नहीं भी?

युधिष्ठिर – माया।

यक्ष – माया क्या है?

युधिष्ठिर – नाम और रूपधारी नाशवान जगत।

यक्ष – परम सत्य क्या है?

युधिष्ठिर – ब्रह्म।

यक्ष – सूर्य किसकी आज्ञा से उदय होता है?

युधिष्ठिर – परमात्मा यानी ब्रह्म की आज्ञा से।

मां, पिता और ज्ञान के बारे में यक्ष प्रश्न

यक्ष – कौन सा शास्त्र या विद्या है, जिसका अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बनता है?

युधिष्ठिर – कोई एक ऐसा शास्त्र नहीं है। महान लोगों की संगति से भी मनुष्य बुद्धिमान बनता है।

यक्ष – भूमि से भारी चीज क्या है?

युधिष्ठिर – संतान को कोख में धारण करने वाली मां भूमि से भी भारी मानी गई है।

यक्ष – आकाश से भी ऊंचा कौन है?

युधिष्ठिर – पिता।

यक्ष – घास से भी तुच्छ चीज क्या है?

युधिष्ठिर – चिंता।

मूल यक्ष-प्रश्न परंपरा में भी मां को पृथ्वी से भारी, पिता को आकाश से ऊंचा और मन को हवा से तेज बताया गया है। इसलिए ये प्रश्न केवल सामान्य पहेलियां नहीं हैं, बल्कि धर्म और जीवन के विचारों से जुड़े प्रश्न हैं।

दान, सुख और धैर्य से जुड़े प्रश्न

यक्ष – मरणासन्न वृद्ध का मित्र कौन होता है?

युधिष्ठिर – दान, क्योंकि वही मृत्यु के बाद अकेले चलने वाले जीव के साथ-साथ चलता है।

यक्ष – बर्तनों में सबसे बड़ा कौन-सा है?

युधिष्ठिर – भूमि ही सबसे बड़ा बर्तन है, जिसमें सब कुछ समा सकता है।

यक्ष – सुख क्या है?

युधिष्ठिर – सुख वह है जो शील और सच्चरित्रता पर आधारित है।

यक्ष – मनुष्य का कौन साथ देता है?

युधिष्ठिर – धैर्य ही मनुष्य का साथ देता है।

यक्ष – यश लाभ का एकमात्र उपाय क्या है?

युधिष्ठिर – दान।

यक्ष – हवा से भी तेज चलने वाला कौन है?

युधिष्ठिर – मन।

यक्ष – विदेश जाने वाले का कौन साथी होता है?

युधिष्ठिर – विद्या।

अहंकार, क्रोध और लोभ पर यक्ष प्रश्न

यक्ष – किसे त्याग कर मनुष्य प्रिय हो जाता है?

युधिष्ठिर – अहंभाव से उत्पन्न गर्व के छूट जाने पर।

यक्ष – किस चीज के छूट जाने पर दुख नहीं होता?

युधिष्ठिर – क्रोध।

यक्ष – किस चीज को गंवाकर मनुष्य धनी बनता है?

युधिष्ठिर – लोभ।

यक्ष – ब्राह्मण होना किस बात पर निर्भर है? जन्म पर, विद्या पर या शील-स्वभाव पर?

युधिष्ठिर – शील-स्वभाव पर।

यक्ष प्रश्नों की परंपरा में भी इसी तरह यह विचार मिलता है कि मनुष्य की श्रेष्ठता केवल जन्म से नहीं, बल्कि उसके आचरण और गुणों से जुड़ी है।

जीवन को सुखी बनाने वाले प्रश्न

यक्ष – कौन-सा ऐसा एकमात्र उपाय है, जिससे जीवन सुखी हो सकता है?

युधिष्ठिर – अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है।

यक्ष – सर्वोत्तम लाभ क्या है?

युधिष्ठिर – आरोग्य।

यक्ष – धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है?

युधिष्ठिर – उदारता।

यक्ष – कैसे व्यक्ति के साथ की गई मित्रता कभी पुरानी नहीं पड़ती?

युधिष्ठिर – सज्जनों के साथ की गई मित्रता।

महाभारत का सबसे प्रसिद्ध यक्ष प्रश्न: संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?

यक्ष – इस जगत में आश्चर्य क्या है?

युधिष्ठिर – रोज हजारों लोग मर रहे हैं। फिर भी लोग चाहते हैं कि वे अनंतकाल तक जिएं। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?

यह प्रश्न आज भी उतना ही विचार करने योग्य है। मनुष्य अपने आसपास मृत्यु को देखता है, फिर भी अपने लिए मृत्यु को बहुत दूर की बात समझता है। यही युधिष्ठिर के उत्तर का सबसे गहरा संदेश माना जाता है। मूल महाभारत के यक्ष-प्रश्न प्रसंग में भी यही प्रसिद्ध उत्तर मिलता है।

युधिष्ठिर ने नकुल को ही जीवित करने के लिए क्यों चुना?

यक्ष ने युधिष्ठिर के सभी उत्तरों से संतुष्ट होकर उनसे कहा कि वे अपने मृत भाइयों में से किसी एक को जीवित कर सकते हैं। युधिष्ठिर ने बिना किसी लालच के नकुल को जीवित करने की इच्छा व्यक्त की।

युधिष्ठिर ने कहा, “नकुल जी उठे।”

यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा कि उन्होंने भीम या अर्जुन को छोड़कर नकुल को ही क्यों चुना। भीम अत्यंत शक्तिशाली थे और अर्जुन अपनी युद्ध-कुशलता के कारण पांडवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे। फिर भी युधिष्ठिर ने नकुल को चुना।

युधिष्ठिर ने कहा कि उनके पिता पांडु की दो पत्नियां थीं, कुंती और माद्री। कुंती का एक पुत्र, अर्थात स्वयं युधिष्ठिर, जीवित था। इसलिए वे चाहते थे कि माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहे।

उनका निर्णय किसी व्यक्तिगत पसंद पर आधारित नहीं था। वे दोनों माताओं के प्रति समान न्याय करना चाहते थे। यही कारण था कि उन्होंने नकुल को चुनना उचित समझा। मूल महाभारत के वर्णन में भी युधिष्ठिर अपने निर्णय को धर्म और दोनों माताओं के प्रति समानता से जोड़ते हैं।

यक्ष ने युधिष्ठिर को क्या वरदान दिया?

युधिष्ठिर के निष्पक्ष निर्णय से यक्ष प्रसन्न हुए। इसके बाद उन्होंने युधिष्ठिर के चारों भाइयों को जीवित कर दिया। इस प्रसंग में युधिष्ठिर की धर्म के प्रति निष्ठा और निष्पक्षता को विशेष महत्व दिया गया है।

मूल कथा के अनुसार यक्ष वास्तव में धर्मदेव थे और उन्होंने युधिष्ठिर की परीक्षा ली थी। युधिष्ठिर के उत्तरों और उनके निर्णय से प्रसन्न होकर उन्होंने उनके भाइयों को जीवन प्रदान किया।

यक्ष प्रश्न से हमें क्या सीख मिलती है?

महाभारत का यह प्रसंग आज भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जीवन से जुड़े कई गहरे विचार मिलते हैं। युधिष्ठिर हर प्रश्न का उत्तर धैर्य और विवेक से देते हैं। वे परिस्थिति कठिन होने पर भी जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेते।

इस प्रसंग से हमें कुछ महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:

  • कठिन परिस्थिति में भी धैर्य रखना चाहिए।
  • निर्णय लेते समय व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठना चाहिए।
  • सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
  • अहंकार और क्रोध से बचना चाहिए।
  • अच्छा आचरण मनुष्य के व्यक्तित्व को बेहतर बनाता है।
  • जीवन की अस्थिरता को समझना चाहिए।
  • किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले उसके परिणाम पर विचार करना चाहिए।

आज के समय में “यक्ष प्रश्न” का अर्थ क्या है?

“यक्ष प्रश्न” हिंदी में एक प्रचलित मुहावरे के रूप में भी इस्तेमाल होता है। जब किसी कठिन समस्या का समाधान आसानी से दिखाई नहीं देता, तब उसे “यक्ष प्रश्न” कहा जाता है।

महाभारत का यह प्रसंग इस मुहावरे का आधार समझने में मदद करता है। यक्ष के प्रश्न केवल कठिन नहीं थे। उनके उत्तरों में जीवन, धर्म और मनुष्य के आचरण से जुड़े विचार भी छिपे हुए थे।

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निष्कर्ष

महाभारत का यक्ष प्रश्न प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं है। इसमें मनुष्य के जीवन, धर्म, सत्य, धैर्य, आचरण और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़े कई विचार मिलते हैं।

युधिष्ठिर ने जिस तरह कठिन परिस्थिति में भी धैर्य रखा और नकुल को जीवित करने का निर्णय लिया, उससे यह सीख मिलती है कि सही निर्णय लेने के लिए केवल शक्ति या स्वार्थ पर्याप्त नहीं है। इसके लिए विवेक, न्याय और धर्म की समझ भी जरूरी है।

इसी कारण महाभारत के यक्ष प्रश्न आज भी लोगों को सोचने और अपने जीवन के निर्णयों पर विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।

आपको महाभारत के यक्ष प्रश्नों में से कौन-सा प्रश्न और उत्तर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

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6 Comments

  1. Kailash Patel on Oct 21, 2016 8:54 pm

    Answer to question no.#4 is wrong… Pls do the needful. Thanks!

    Reply
    • Mahesh Yadav on Oct 23, 2016 6:59 am

      Kailash Ji,

      Are you referring the below question and answer?
      यक्ष – विदेश जाने वाले का साथी कौन होता है?
      युधिष्ठिर – विद्या।

      I have checked on some other website and in some books and found that it is correct. Share your views, what is wrong, so that I’ll correct ASAP.

      Reply
  2. rajiv on Jul 31, 2017 3:50 pm

    Dear Mahesh
    As I wanted to see all questions but got little disappointed please don’t make it in a short way.what you r doing is nobel so god bless.
    . Rajiv
    .

    Reply
    • Mahesh Yadav on Aug 1, 2017 8:59 am

      Rajeev ji, will try my best to make you no more disappointed, Will take care your point in future, Thanks a lot for your kind review.

      Reply
      • HARISH JADLI on Jan 11, 2019 8:42 pm

        COULD YOU QUOTE ORIGINAL SANSKRIT SHLOK AND ITS TRANSLATION IN HINDI OR ENGLISH

        Reply
        • Mahesh Yadav on Jan 13, 2019 10:23 pm

          Which “SANSKRIT SHLOK” you want TRANSLATION??

          Reply

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