• Business Ideas
  • Success Stories
  • व्यक्तित्व विकास
  • सफलता के रहस्य
  • Book Summary
  • Health Tips
Facebook Twitter Instagram LinkedIn Reddit RSS
Most Liked Posts
  • तेरे मेरे इर्द गिर्द : पुस्तक समीक्षा
  • Share Market में नुकसान होने के बावजूद भी लोग पैसा क्यों लगाते हैं?
  • Share market से पैसे कैसे कमाए? Profit बुक करें, मुश्किल नहीं हैं
  • Probo Earning App से पैसे कैसे कमाएं
  • Gyan Kamao का इस्तेमाल करके Gyankamao से पैसे कैसे कमाएं?
  • Freelancing से पैसे कमाने के आसान तरीकें
  • Facebook Ads (FB Advertisements) से कैसे करें कमाई?
  • मोटरसाइकिल (Bike) से पैसे कैसे कमाएं जा सकते हैं ?
Facebook Twitter Instagram Pinterest LinkedIn Reddit RSS
AchhiBaatein.Com
  • Business Ideas
  • Success Stories
  • व्यक्तित्व विकास
  • सफलता के रहस्य
  • Book Summary
  • Health Tips
AchhiBaatein.Com
धार्मिक परंपरा व आस्था 8 Mins Read

इंसानियत को मारकर धर्म को ऊपर उठाने का प्रयास कभी सार्थक नहीं हो सकता

Junaid ArslanBy Junaid ArslanNo Comments8 Mins Read
साझा करें
Twitter LinkedIn Pinterest Tumblr Reddit WhatsApp

ईश्वर का अपनी अनोखी और सर्वोत्तम रचना “इंसान” को इस दुनिया में भेजने का परम उद्देश्य मात्र यही तो था कि वह धरती पर कदम रखने के पश्चात उसके प्राकृतिक संविधान और न्याय व्यवस्था को बरकरार रखेगा।

जिन्दगी भर उसके बताए हुए परोपकारी मार्ग पर अडिगता के साथ चलता रहेगा जिसमें मानवों का कल्याण और उनकी असल कामयाबी का राज़ छिपा हुआ है।

याद रहे कि ईश्वरीय संविधान में एकेश्वरवाद के बाद सबसे बड़ा दर्जा मानवता (इन्सानियत) को दिया गया है। अनेक युगों में ईश्वर के द्वारा अपने संदेष्टाओं या पैगंबरों (Prophets) को एक आसमानी किताब भी दी जाती रही जिसे धार्मिक ग्रंथ के रूप में जाना जाता है।

इन ग्रंथों में ईश्वर के वास्तविक उद्देश्य और उसके संविधान पर विस्तार से चर्चा की गई है। उसी ने अपने संदेष्टाओं के द्वारा मानव से मानव को भाईचारे व बंधुत्व में बंध कर रहने और एक दूसरे की सहायता एवं परोपकार करने के आदेश निर्देश जारी किए हैं। लेकिन जिस ईश्वर ने मानवता के संदेश को अपने धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से आम किया, उसे ही ताखे पर रखकर कुछ लोग किसी इन्सान से मात्र उसके धर्म, जाति, संप्रदाय, निर्धनता या स्थान के आधार पर हीन भावना से देख कर उनका उत्पीड़न करने लगते हैं।

हर इंसान से प्रेम करें

चाहे आप दुनिया के किसी भी धर्म के पासदार या अनुयायी हों, हर इंसान को मानवता के आधार प्यार और सम्मान दें और किसी एक के साथ भी कभी बेरुखी से पेश ना आएं क्योंकि विश्व का कोई भी धर्म ऐसा नहीं है जो मानवता, सहिष्णुता या परोपकार के खिलाफ एक कदम भी आगे बढ़ाने की वकालत करता हो।

love someone of a different faith and be dedicated to your religion

तो अब जो शख्स भी अपनी मन मर्जी से किसी इंसान को मानसिक, आर्थिक या सामाजिक क्षति पहुंचाएगा, वह स्वयं अपने ही धर्म की अवहेलना या खिलाफवर्जी करेगा। क्योंकि धर्म कभी किसी इंसान को तकलीफ या दुख देने की बात कभी नहीं करता।

सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि धर्म तो अपने अनुयायियों से पशुओं और वनस्पतियों तक से प्रेम करने की अपील करता रहा है। जब इंसान किसी इंसान से उसके गलत आचरण और व्यवहार पर नफरत करता है तो इसका मतलब यह हुआ कि वह स्वयं अपने धार्मिक ग्रंथों की अवहेलना कर रहा है क्योंकि दुनिया का कोई भी धार्मिक ग्रंथ लोगों से नफरत की इजाजत नहीं देता चाहे वह कितने ही गुनाहगार क्यों ना हों!

हमें ईश्वर ने इस बात की नसीहत की है की हमें हर इंसान से मानवता के आधार पर प्रेम, सदाचार और नर्मी से पेश आना चाहिए। अगर इसके बावजूद भी कोई शख्स दुनिया के किसी भी इंसान से अगर धार्मिक बुनियाद पर द्वेष या नफरत रखता है इसका अर्थ यह है कि उसे खुद अपने ही धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान नहीं है क्योंकि दुनिया के हर धार्मिक ग्रंथ तो इंसानों में आपसी भाईचारे, प्रेम मोहब्बत, सौहार्द और सहिष्णुता को बरकरार रखने की ही दावत देते रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हम किसी धर्म के अनुयायी की गलती और गुनाह को देखकर उसके धर्म को गलत करार नहीं दे सकते क्योंकि यह संभव है कि उस शख्स को अपने धर्म का संपूर्ण ज्ञान ना हो और इसी ज्ञान के अभाव में वह गलतियां कर रहा हो जबकि उसके धर्म ने उसे सकारात्मक और मानवीय मूल्यों की रक्षा करने का संदेश दिया था।

तो यहां यह बात जाहिर हो गई कि दुनिया में जो कोई भी कोई गलत काम करता है, अज्ञानता और बहकावे के कारण ही करता है और धर्म का उसकी गलती से कोई लेनादेना नहीं है।

दूसरी ओर, प्रेम की परिभाषा को लफ्जों में परिभाषित कर पाना बेहद मुश्किल और दुश्वार है। वास्तव में, यह एक अलग किस्म का अजीबोगरीब और सुकून देने वाला कुछ ऐसा अनोखा एहसास है जो लोगों को एक दूसरे से एकता व अखंडता के सूत्र में बांधकर रखने के साथ ही सुरक्षा और संप्रभुता के साथ जिंदगी गुजारने की अपील करता है।

प्रेम के सिलसिले में बुद्धिजीवियों का विचार यह है कि इस पूरे ब्रह्माण्ड में सिर्फ इस पृथ्वी पर ही हरियाली और मानवता पनपती है जिस पर हम इंसानों को गौरवान्वित और सौभाग्यशाली महसूस करना चाहिए।

एक दिन आएगा कि मृत्यू हम सभी मनुष्यों का नाश कर देगी इसलिए हमें समय की नज़ाकत को महसूस करते हुए खुद अपने जीवन और सम्मान के साथ दूसरे लोगों के जीवन और अधिकारों से भी समान रूप से प्रेम करना चाहिए। प्रेम वह एहसास है जो इन्सानों को जीवन जीने की प्रेरणा देता और सख्त से सख़्त हालात में भी अनोखे अंदाज़ से उन्हें लड़ते रहने की क्षमता प्रदान करता है।

प्रेम हृदय को नफरत और हिंसा से पाक कर हमें एक दूसरे से जोड़े रखने का मूल आधार है। इसके बिना सफलता के मार्ग पर ज्यादा देर तक किसी का टिके रहना मुमकिन नहीं है क्योंकि इतिहास गवाह है कि इसकी गैरमौजूदगी में हमेशा दुनिया में हिंसा और विध्वंस ने जन्म लेकर समूची मानवता का बेड़ा गर्क किया है।

अगर दो लोगों में मानवता के आधार पर प्रेम हो जाए तो इससे समूचा समाज उनके प्रेममयी आचरण, कुशल व्यवहार और किरदार से प्रभावित होता है जिससे पूरे समाज में बेहतर सोच और मानसिकता के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मानवतावाद के सबक को रखें याद

मानवता इंसान की सबसे खुबसूरत और आकर्षक खूबी मानी जाती है जो अगर किसी शख्स के भीतर मौजूद हो तो उसकी शख्सियत में चार चांद लगाकर उसे लोगों में लोकप्रिय बना देती है और लोग चाह कर भी उससे दूर रहना पसंद नहीं करते।

most important religion is humanity

अगर आप किसी व्यक्ति से केवल मानवीय मूल्यों के आधार पर मोहब्बत रखते हैं तो इसका मतलब ये हुआ कि आप धर्म के उपदेशों पर चल रहे हैं क्योंकि दुनिया के लगभग सभी धर्मों का एकेश्वरवाद (Monotheism) के बाद सबसे बड़ा सबक यही मानवतावाद ही तो है

जिसके कारण इंसान का दिल निर्मल और मेहरबान हो जाता है और वह दूसरों के कष्ट एवं पीड़ाओं को स्वयं अपना दुखदर्द समझ कर उसे दूर करने की कोशिश करने लगता है।

उसकी यही कोशिश उसे समाज के अन्य कठोर प्रवृत्ति के लोगों से भिन्न बनाती है और वह अपने किरदार के चलते चारों ओर प्रेम की बूंदें छींट कर धरती पर प्रेम की फसल की पैदावार को और अधिक बढ़ा देता है।

एक धर्म विशेष के मानने वाले शख्स में एक अकेले ईश्वर की परम उपासना के गुण मौजूद रहते हैं जिसके चलते ईश्वर की ब्रह्मांडीय सत्ता एवं शासन में उसे मुकम्मल यकीन होता है और उसे इस बात का डर सताता रहता है कि मरणोपरांत (मरने के बाद) उसे खुदा की अदालत में अपने कर कमलों की जवाबदेही करनी है।

वह जानता है कि मानवतावाद ईश्वर के आदेशों में से एक महत्त्वपूर्ण आदेश है जिसकी अवहेलना करने की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसी आधार पर वह खुदा की मखलूक (Creatures) के साथ विनम्रता और नरमी का बरताव करता है।

ईश्वर में गहरी आस्था रखने वाला यह भी जानता है कि उसकी इजाजत के बिना एक पत्ता भी अपनी जगह से टस से मस नहीं हो सकता।

वह जिसे चाहता है सत्ता एवं शासन के आसन पर बिठाकर सम्मान और प्रतिष्ठा से नवाज़ देता है और जिसे चाहता है सत्ता एवं शासन या संपत्ति के सुख से महरूम कर देता है।

इन्सान के गुनाह उसके जीवन में आने वाली आपत्तियों और रुकावटों का सबब बनते हैं। मानव का मानव से भेदभाव सबसे बडे़ गुनाहों में से एक शुमार किया जाता है क्योंकि नफरत या हिंसा सीधे तौर पर ईश्वरीय संविधान में लिखे हुए आदेशों की अवहेलना (Disobedience) है।

धर्म बड़ी या इंसानियत?

बहुत से लोग ये सवाल करते हैं कि धर्म बड़ा है या इन्सानियत? तो इसका स्पष्ट उत्तर भी एक सवाल ही है। वह सवाल ये है कि इंसान का इंसान से रिश्ता पहले है या इंसान के बनाने वाले (ईश्वर) से रिश्ता पहले है?

humanity is greater than religion

जाहिर है कि इंसान के बनाने वाले से रिश्ता गाढ़ा ही होगा। इसे एक मिसाल से समझिए! मान लीजिए कि किसी कारणवश आपके पिता और भाई के रिश्तों के बीच खार पैदा हो गई तो स्वाभाविक तौर पर आपका खिंचाव आपके पिता की ओर ही अधिक होगा क्योंकि पिता ही आपको आसमान से जमीन पर लाने वाली शख्सियत है।

अब जिस ईश्वर ने सभी इंसानों को पैदा किया, उससे बढ़कर कोई इंसान किसी और चीज़ को महत्त्व देकर उसके आदेशों की अवहेलना करे तो यह सरासर उसकी गलती है।

जबकि ईश्वर ने इंसानों को पैदा करने के बाद अपने संदेष्टाओं के द्वारा उस तक अपना यह परोपकारी संदेश पहुंचा दिया था कि वह सदैव धरती पर न्याय की स्थापना के लिए जद्दोजहद और संघर्ष करता रहे और किसी भी हाल में मानवीय मूल्यों को कुचल कर महज अपने स्वार्थ को सिद्ध न करे बल्कि इन्सानियत की बुनियाद पर एक दूसरे से प्रेम, व्यवहार और सदाचार का प्रमाण पेश करने की कोशिश करता रहे।

धर्म का जुड़ाव उसी परमेश्वर से है इसलिए ये सवाल ही बेतुका और बेमानी लगता है जिसमें धर्म और इन्सानियत को अलग अलग दर्शाया जा रहा है क्योंकि धर्म के उपदेश को हाथों में लिए बगैर इंसान का अपनी इंसानियत का सबूत पेश कर पाना बेहद कठिन और दुश्वार है। सार ये कि जिसके भीतर इंसानियत नहीं है, उसके भीतर धर्म नहीं है।

इसलिए कहा जाता है कि इंसानियत को नीचे रखकर धर्म को ऊपर उठाने वाले लोगों का प्रयास कभी सार्थक और सफल नहीं हो पाता क्योंकि धर्म और इंसानियत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जो एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

अगर इंसानियत को छोड़कर केवल धर्म को देखा जाने लगे तो यह व्यक्ति की त्रुटि और कमी है, किसी धर्म की नहीं क्योंकि धर्म तो इंसानों को इंसानियत और आपसी प्रेम एवं सद्भाव का सबक सिखाता चला आ रहा है।

Previous Articleमृत्यु के बाद साथ कौन देता है?
Next Article स्त्री, भोजन और धन – इन तीनों में संतोष रखो
Junaid Arslan
  • Website
  • Facebook
  • LinkedIn

लेखक, वरिष्ठ संवाददाता व पत्रकार @ "कुशल व्यवहार" (निष्पक्ष हिन्दी साप्ताहिक), उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़े

8 Mins Read

मृत्यु के बाद साथ कौन देता है?

पूरा पढ़े
8 Mins Read

आध्यात्मिकता का वास्तविक अर्थ ~ निःस्वार्थ प्रेम

पूरा पढ़े
8 Mins Read

मानव मन और ब्रह्माण्ड की सीमा

पूरा पढ़े

Leave A Reply Cancel Reply

Popular Posts
5 Mins ReadJul 25, 2020

छोटे Business Man के लिए Financial Planning के कुछ Tips

9 Mins ReadMar 9, 2025

भारत के राज्य, राजधानी और मुख्यमंत्री

7 Mins ReadAug 16, 2020

विश्व के प्रमुख देश उनकी राजधानी एवं मुद्राएँ | Country, Capital & Currency

6 Mins ReadDec 31, 2022

Blog, Blogging क्या हैं? क्या मुझे ब्लॉगिंग करनी चाहिए?

8 Mins ReadAug 15, 2020

जानिए पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के बारें में About Trademark, Copyright & Patent

Latest Posts
5 Mins ReadOct 13, 2024
तेरे मेरे इर्द गिर्द : पुस्तक समीक्षा
9 Mins ReadAug 6, 2023
Share Market में नुकसान होने के बावजूद भी लोग पैसा क्यों लगाते हैं?
9 Mins ReadAug 6, 2023
Share market से पैसे कैसे कमाए? Profit बुक करें, मुश्किल नहीं हैं
15 Mins ReadJul 17, 2023
Probo Earning App से पैसे कैसे कमाएं
1 2 3 … 184 Next
Categories
  • Blogging Tips (8)
  • Book Summary (35)
  • Business Ideas & Earn Money (31)
  • General (13)
  • General Knowledge (55)
  • Health Tips (53)
  • Hindi Essay (2)
  • Hindi Quotes (59)
  • Hindi Thoughts (39)
  • Let's Laugh (8)
  • Motivational Hindi Songs (47)
  • Motivational Hindi Stories (25)
  • Personality Development (50)
  • Success Stories (17)
  • अमर कहानियाँ (7)
  • चाणक्य नीति (19)
  • चुटकुले (9)
  • जीवनी (63)
  • धार्मिक परंपरा व आस्था (12)
  • प्रेरक प्रसंग (10)
  • महत्वपूर्ण जानकारियां (9)
  • रोचक घटनाये (3)
  • रोचक तथ्य (8)
  • लोक व्यवहार (33)
  • श्रीमदभागवत गीता अंश (9)
  • सफलता के मंत्र (73)
  • सफलता के रहस्य (54)
  • हिंदी कहानियाँ (93)
  • हिंदी दोहे और उक्तिया (1)
  • हिंदी शेर और शायरी (6)
  • हिन्दी कविताएं (40)
About Us

अच्छी बातें डॉट कॉम

AchhiBaatein is a famous Hindi blog for Famous Quotes and Thoughts, Motivational & Inspirational Hindi Stories and Personality Development Tips

DMCA.com Protection Status

Recent Comment
  • Sahil Solanki on आसान तरीकों से रोज 200 रूपए कैसे कमाए?
  • Rohini on खुद को सोने के सिक्के जैसा बनाइए अगर नाली में भी गिर जाए तो भी कीमत कम नहीं होती
  • Manisha mer on भीड़ हौंसला तो देती है, लेकिन पहचान छीन लेती है | Never follow the crowd
  • Umang pasaya on Free Fire Game खेलकर पैसे कैसे कमाएं?
Subscribe to Updates
सभी नए Posts अपने E-Mail पर तुरंत पाने के लिए यहाँ अपनी E-mail ID लिखकर Subscribe करें।

कृपया यहाँ Subscribe करने के बाद अपनी E-mail ID खोलें तथा भेजे गये Verification लिंक पर Click करके Verify करें

Powered by ® Google Feedburner

Copyright © achhibaatein.com 2013 - 2026 . All Rights Reserved
  • About Us
  • Contact Us
  • Advertise
  • Guest Column
  • Privacy Policy
  • Sitemap

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.