चाणक्य नीति Chapter 10 में आचार्य चाणक्य ने विद्या, धन, भाग्य, कर्म, परिवार, मित्रता, सत्य, धर्म और जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार बताए हैं। इस अध्याय में व्यक्ति को ज्ञान का महत्व समझने, अपने कर्मों पर ध्यान देने और जीवन की परिस्थितियों को समझदारी से देखने की सीख मिलती है।
आचार्य चाणक्य को भारतीय राजनीतिक और सामाजिक विचारों के प्रमुख विद्वानों में माना जाता है। उनकी चाणक्य नीति में व्यक्ति के लिए क्या उचित है और क्या हानिकारक हो सकता है, इस तरह के अनेक विचार सूत्रों के रूप में मिलते हैं।
इन नीतियों में कई बातें आज भी सोचने योग्य हैं। वहीं कुछ विचार प्राचीन धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें उनके ऐतिहासिक संदर्भ के साथ समझना उचित है।
इससे पहले आप चाणक्य नीति Chapter 9 भी पढ़ सकते हैं। अब आइए जानते हैं चाणक्य नीति दशम अध्याय के महत्वपूर्ण विचार।
चाणक्य नीति Chapter 10
1. सच्चा धन विद्या और हुनर है
धन से रहित होने के कारण किसी व्यक्ति को निर्धन नहीं कहा जा सकता। चाणक्य नीति में वास्तव में सच्चा धन रुपया-पैसा न होकर विद्या को बताया गया है। व्यक्ति धन का उपार्जन अपनी विद्या या हुनर से ही कर सकता है। इसलिए व्यक्ति को विद्या प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए अथवा कोई उपयोगी हुनर सीखना चाहिए, जिससे उसे धन की प्राप्ति हो सके।
A poor person is not mean or worthless in true sense. A rich person is not poor because of his unshakable determination. But one who is not educated is the poorest of all.
सीख: धन कमाने के लिए ज्ञान और कौशल महत्वपूर्ण साधन हैं। इसलिए केवल धन जमा करने के बजाय अपनी क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
विद्या के महत्व पर आप भारत के सबसे बुद्धिमान और पढ़े-लिखे व्यक्ति Shrikant Jichkar के बारे में भी पढ़ सकते हैं।
2. किसी भी काम से पहले सोच-विचार करना चाहिए
पांव उठाने से पहले यह देख लेना चाहिए कि पांव कहां पड़ेगा। आंखों से मार्ग की अच्छी तरह परीक्षा करके ही उस पर चलना प्रारंभ करना चाहिए। वस्त्र से छानकर ही जल पीना चाहिए। शास्त्र द्वारा संशोधित सत्य, शुद्ध और मधुर वाणी बोलनी चाहिए। साथ ही, पवित्र मन से ही दूसरों के साथ व्यवहार और आचरण करना चाहिए।
Look before you tread, drink water after filtering it, speak the correct language and act only after giving it due thought.
सीख: किसी काम को करने से पहले उसके परिणाम और परिस्थिति पर विचार करना समझदारी है।
3. ज्ञान पाने के समय मेहनत जरूरी है
विद्या-प्राप्ति के समय व्यक्ति को साधना करनी पड़ती है। अतः इस अवधि में उसे सुख-भोग की इच्छा का परित्याग कर देना चाहिए। इस तप और साधना के बाद व्यक्ति को सुख मिलने की बात कही गई है। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को जीवन-भर के सुख-भोग के लिए अल्पकाल के दुःख सहन करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
He who desires sense gratification must give up all thoughts of acquiring knowledge; and he who seeks knowledge must not hope for sense gratification.
इसका मुख्य संदेश यह है कि किसी बड़े लक्ष्य को पाने के लिए कुछ समय तक मेहनत और अनुशासन अपनाना पड़ सकता है।
4. कवि, स्त्री, शराबी और कौए के बारे में प्राचीन कथन
कवि का दर्जा बहुत ऊंचा होता है। वह ऐसी उपमा दे सकता है, जिसके बारे में लोग सोच भी नहीं सकते। उसकी सूझ वहां तक पहुंचती है जहां सामान्य व्यक्ति नहीं पहुंच पाता।
मूल चाणक्य नीति में इसके बाद स्त्रियों, शराबी व्यक्ति और कौए के बारे में सामान्यीकृत बातें कही गई हैं।
What is it that escapes the observation of poets? What is that act women are incapable of doing? What will drunken people not prate? What will not a crow eat?
नोट: इस हिस्से का कुछ भाग प्राचीन और सामान्यीकृत सामाजिक धारणा को दर्शाता है। इसे आज सभी महिलाओं या किसी व्यक्ति के बारे में सार्वभौमिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
5. भाग्य की शक्ति के बारे में चाणक्य का विचार
भाग्य की महिमा अपरंपार है तथा उसकी शक्ति पर किसी का भी कोई वश नहीं चलता। कल क्या होने वाला है, कोई नहीं जानता।
Fate makes a beggar a king and a king a beggar. He makes a rich man poor and a poor man rich.
यह भाग्य से जुड़ा हुआ प्राचीन दार्शनिक विचार है। इसे आज के समय में जीवन की अनिश्चितता के संदर्भ में समझा जा सकता है।
6. कुछ लोगों के लिए कौन शत्रु जैसा होता है?
लोभी व्यक्तियों के लिए चंदा या दान मांगने वाले व्यक्ति शत्रु के समान होते हैं। मूर्खों को समझाने-बुझाने वाला व्यक्ति भी उन्हें अपना शत्रु लग सकता है। मूल नीति में दुराचारिणी स्त्री के लिए पति और चोर के लिए चंद्रमा को शत्रु के रूप में बताया गया है।
इसीलिए मूर्ख को सीख देने और लोभी व्यक्ति से कुछ मांगने में सावधानी रखने की बात कही गई है।
The beggar is a miser’s enemy; the wise counselor is the fool’s enemy; her husband is an adulterous wife’s enemy, and the moon is the enemy of the thief.
इस नीति का मुख्य संदेश यह है कि सत्य या उचित बात कभी-कभी उस व्यक्ति को पसंद नहीं आती जो उसे स्वीकार करना नहीं चाहता।
7. ज्ञान, तप और अच्छे गुणों के बिना जीवन
जिन लोगों के पास विद्या, तप, ज्ञान, अच्छा स्वभाव, गुण और दया-भाव नहीं है, उन्हें मूल चाणक्य नीति में धरती पर मनुष्य के रूप में घूमने वाले पशु और धरती पर भार कहा गया है।
Those who are destitute of learning, penance, knowledge, good disposition, virtue and benevolence are brutes wandering the earth in the form of men. They are burdensome to the earth.
सीख: इस कथन का उपयोगी संदेश यह है कि ज्ञान, अच्छे स्वभाव, गुण और दया व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाते हैं।
8. जिसकी अपनी समझ नहीं, वह अच्छी सलाह का लाभ नहीं उठा पाता
प्रभाव तो उन लोगों पर पड़ता है जिनमें कुछ सोचने-समझने अथवा ग्रहण करने की शक्ति होती है। जिस व्यक्ति के पास स्वयं सोचने-समझने की बुद्धि नहीं है, वह अन्य किसी के गुणों को क्या ग्रहण करेगा?
Those that are empty-minded cannot be benefited from instruction. Bamboo does not acquire the quality of sandalwood by being associated with the Malaya Mountain.
अर्थात केवल अच्छे लोगों की संगति पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति में स्वयं सीखने और समझने की इच्छा भी होनी चाहिए।
9. ज्ञान तभी लाभ देता है जब बुद्धि उसका उपयोग कर सके
जो व्यक्ति जन्म से अंधा है, वह दर्पण में अपना मुख किस प्रकार देख सकता है? जिस प्रकार दर्पण अंधे व्यक्ति का कोई लाभ नहीं कर सकता और इसमें दर्पण को कोई दोष नहीं दिया जा सकता, इसी प्रकार शास्त्र भी बुद्धिहीन व्यक्ति का किसी भी प्रकार उद्धार नहीं कर सकता।
What good can the scriptures do to a man who has no sense of his own? Of what use is a mirror to a blind man?
सीख: केवल जानकारी प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। उसे समझने और उपयोग करने की क्षमता भी जरूरी है।
10. दुष्ट व्यक्ति को सुधारना कठिन हो सकता है
मल का त्याग करने वाली इन्द्रिय को कितनी ही बार स्वच्छ किया जाए, साबुन और पानी से सैकड़ों बार धोने पर भी वह स्पर्श करने योग्य नहीं बन पाती। इसी प्रकार इस संसार में दुर्जनों को सुधारने का प्रयास निरर्थक बताया गया है।
Nothing can reform a bad man, just as the posteriors cannot become a superior part of the body though washed one hundred times.
नोट: यह प्राचीन नीति का कठोर कथन है। व्यवहारिक रूप से यह समझना बेहतर है कि लगातार हानिकारक व्यवहार करने वाले व्यक्ति को बदलना हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होता। ऐसे मामलों में उचित दूरी और सीमाएं रखना जरूरी हो सकता है।
11. शत्रुता से होने वाले नुकसान के बारे में नीति
शत्रुओं से द्वेष बनाए रखने से प्राणों के साथ धन का भी नाश हो सकता है। राजा तथा राजपरिवार से शत्रुता करने से सर्वस्व अर्थात धन, सम्मान और प्राण का नाश होने की बात कही गई है। ब्राह्मणों से द्वेष करने पर प्राण, धन और सम्मान के साथ पूरे वंश के नाश की बात मूल नीति में कही गई है।
By offending a kinsman, life is lost; by offending others, wealth is lost; by offending the king, everything is lost; and by offending a Brahman one’s whole family is ruined.
यह कथन प्राचीन सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ा है। इसका सामान्य संदेश अनावश्यक शत्रुता से बचने और संबंधों में सावधानी रखने का है।
12. गरीबी में अपमान की भावना के बारे में पुराना दृष्टिकोण
मनुष्य हिंसक जीवों से घिरे वन में रह ले, वृक्ष पर घर बनाकर फल-पत्ते खाकर और पानी पीकर निर्वाह कर ले। धरती पर घास-फूस बिछाकर सो ले। लेकिन धनहीन होने पर भी अपने संबंधियों के साथ कभी न रहे, क्योंकि उससे अपमान और उपेक्षा का जो कड़वा घूंट पीना पड़ता है, वह सर्वथा असह्य होता है, ऐसा चाणक्य नीति में कहा गया है।
It is better to live under a tree in a jungle inhabited by tigers and elephants, to maintain oneself in such a place with ripe fruits and spring water, to lie down on grass and to wear the ragged barks of trees than to live amongst your relations when reduced to poverty.
सीख: यह नीति गरीबी के समय मिलने वाली सामाजिक उपेक्षा की ओर संकेत करती है। आधुनिक जीवन में आर्थिक कठिनाई से जूझ रहे व्यक्ति को अपमानित करने के बजाय सहयोग देना अधिक मानवीय दृष्टिकोण है।
13. धर्म और ज्ञान को वृक्ष के रूप में समझाने वाला उदाहरण
ब्राह्मण को तत्वज्ञान रूपी वृक्ष बताया गया है। संध्या-प्रातः और दोपहर अथवा सन्धि-बेला में की जाने वाली पूजा-उपासना उस वृक्ष की जड़ें हैं। वेद उस वृक्ष की शाखाएं हैं तथा धर्म-कर्म उसके पत्ते हैं।
प्रयत्नपूर्वक मूल की रक्षा करने से ही वृक्ष अच्छी तरह फलता-फूलता है। यदि जड़ ही कट जाए, तो न शाखा का महत्व रहता है और न पत्ते हरे-भरे रह पाते हैं।
A Brahmana tree, worship is its roots, learning of religious books is its branches, faith and deeds are its leaves, so a Brahman must protect its roots.
यह एक धार्मिक रूपक है, जिसमें मूल विश्वास और अभ्यास को महत्वपूर्ण बताया गया है।
14. भक्तों के लिए पूरा संसार अपना घर है
प्रभु के भक्तों के लिए तीनों लोक उनके घर के समान बताए गए हैं। श्रद्धालु भक्तों के लिए लक्ष्मी माता और श्रीविष्णु नारायण पिता हैं। भगवान के भक्त ही भक्तों के बन्धु-बांधव हैं और तीनों लोक ही उनका अपना देश अथवा निवास-स्थान बताए गए हैं।
My mother is Kamala Devi (Lakshmi), my father is Lord Janardana (Vishnu), my kinsmen are the Vishnu-bhaktas (Vaishnavas), and my homeland is all the three worlds.
यह भक्ति और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित विचार है।
15. परिवार में मिलना और बिछड़ना जीवन का हिस्सा है
रात होने पर अनेक जातियों के पक्षी, जैसे कौवा, तोता और कबूतर, एक ही वृक्ष पर आ बैठते हैं और रात वहीं बिताते हैं। प्रभात होने पर वे दाना चुगने के लिए अलग-अलग दिशाओं में उड़ जाते हैं।
चाणक्य इसी उदाहरण से परिवार के सदस्यों की स्थिति समझाते हैं। कुछ लोग एक परिवार रूपी वृक्ष पर आकर बैठते हैं और समय आने पर अपने-अपने रास्ते चले जाते हैं। इसमें दुखी होने की कोई बात नहीं है। आवागमन और संयोग-वियोग जीवों का स्वाभाविक नियम बताया गया है।
Birds of various colors, shapes, and breeds converge on a tree at evening time. And they fly away in different directions in the morning. So are kith and kin that come together in a family and then disperse. Why grieve the separation from each other?
सीख: जीवन में मिलना और बिछड़ना स्वाभाविक है। इसलिए रिश्तों की कद्र करते हुए अनिश्चितता को भी समझना चाहिए।
16. बुद्धि कई बार शारीरिक बल से अधिक महत्वपूर्ण होती है
जिसके पास बुद्धि है, बल भी उसी के पास है। बुद्धिहीन का बल भी निरर्थक है, क्योंकि वह उसका सही प्रयोग नहीं कर पाता। बुद्धि के बल पर ही एक बुद्धिमान खरगोश ने अहंकारी सिंह को वन में कुएं में गिराकर मार डाला था।
One who is wise, he is powerful. Fools may be physically strong but they lack the winning power of cleverness. Just like the mighty lion that got killed by a clever rabbit.
सीख: केवल शारीरिक शक्ति ही पर्याप्त नहीं है। बुद्धि, रणनीति और सही निर्णय भी महत्वपूर्ण हैं।
17. भगवान पर विश्वास और जीवन की चिंता
भगवान श्री विष्णुनारायण को सारे संसार का भरण-पोषण करने वाला बताया गया है। इसलिए भक्त इस बात पर विश्वास करते हुए जीवन की चिंता छोड़कर प्रभु की सेवा में समय लगाने की बात करता है।
विचार यह है कि यदि श्रीनारायण न होते, तो गर्भस्थ शिशु के लिए मां के स्तनों में दूध कहां से आता? लक्ष्मीपति के विश्व-पोषक होने पर विश्वास करके भक्त अपना सारा समय उनके कमलों की सेवा में बिताने की बात करता है।
Why should I be concerned for my maintenance while absorbed in praising the glories of Lord Vishwambhara (Vishnu), the supporter of all? Without the grace of Lord Hari, how could milk flow from a mother’s breast for a child’s nourishment?
यह पूर्ण रूप से आस्था और भक्ति पर आधारित विचार है।
18. दूसरी भाषाओं को सीखने की इच्छा
जिस प्रकार अमृत के सुलभ होने पर भी देवतागण अप्सराओं के अधर-रस को पीने के लिए लालायित रहते हैं, उसी प्रकार संस्कृत भाषा में गहरी पैठ रखने वाला व्यक्ति भी अन्य भाषाओं को जानने के लिए उत्सुक हो सकता है।
My learning in holy language Sanskrit. Still, I learn for the knowledge of other tongues. God drank nectar yet they thirst to drink the sweetness of love from the lips of heavenly beauties (apsaras).
सीख: किसी एक भाषा में अच्छा ज्ञान होने के बाद भी नई भाषाएं सीखते रहना ज्ञान को और व्यापक बना सकता है।
19. भोजन की शक्ति के बारे में प्राचीन कथन
अन्न की अपेक्षा उसके चूर्ण अर्थात पिसे हुए आटे में दस गुना अधिक शक्ति होने की बात कही गई है। दूध में आटे से भी दस गुना ज्यादा शक्ति, मांस में दूध से आठ गुना ज्यादा शक्ति और घी में मांस से दस गुना ज्यादा बल होने का उल्लेख मिलता है।
Compared to grains flour has ten times more energy, milk has ten times more than milk and Ghee has ten times more energy than meat.
महत्वपूर्ण: ये पोषण संबंधी अनुपात प्राचीन कथन हैं। इन्हें आधुनिक nutrition science का प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। आज किसी भोजन की ऊर्जा और पोषण उसके प्रकार, मात्रा और तैयारी पर निर्भर करते हैं।
20. साग-सब्जी, दूध, घी और मांस के बारे में प्राचीन दावा
साग-सब्जी खाते रहने से रोग बढ़ जाते हैं, दूध का सेवन करने से शरीर बढ़ता है, घी खाने से बल-वीर्य की वृद्धि होती है और मांस खाने से मांस की वृद्धि होती है, ऐसा मूल चाणक्य नीति में कहा गया है।
Saag increases ills, milk invigorates the body, ghee builds up semen and meat adds to the flesh.
नोट: यह प्राचीन पोषण-संबंधी धारणा है। आज इसे आधुनिक चिकित्सा या nutrition science का सार्वभौमिक तथ्य नहीं माना जा सकता। अलग-अलग खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्य प्रभाव व्यक्ति, मात्रा और समग्र diet पर निर्भर करते हैं।
चाणक्य नीति Chapter 10 की प्रमुख सीख
चाणक्य नीति Chapter 10 के इन विचारों से कई व्यवहारिक बातें सीखने को मिलती हैं। हालांकि, कुछ नीतियां प्राचीन धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हैं। इसलिए उन्हें संदर्भ के साथ समझना जरूरी है।
- विद्या और हुनर को जीवन की महत्वपूर्ण संपत्ति समझें।
- किसी भी काम से पहले सोच-विचार करें।
- बड़े लक्ष्य के लिए मेहनत और अनुशासन अपनाएं।
- अपनी सोच और समझ को विकसित करें।
- ज्ञान को व्यवहार में लागू करें।
- अनावश्यक शत्रुता से बचें।
- अच्छी संगति और सही सलाह का महत्व समझें।
- अपनी बुद्धि और निर्णय क्षमता पर भरोसा रखें।
- नई भाषाएं और नई चीजें सीखते रहें।
- प्राचीन नीतियों को आज के संदर्भ में सोच-समझकर अपनाएं।
चाणक्य नीति Chapter 10 से आज क्या सीखें?
इस अध्याय का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि व्यक्ति की असली ताकत केवल धन में नहीं होती। विद्या, हुनर, बुद्धि और सही निर्णय भी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा, किसी काम से पहले विचार करना, ज्ञान को व्यवहार में लागू करना और गलत संगति से सावधान रहना आज भी उपयोगी बातें हैं।
वहीं भोजन, धर्म, सामाजिक संबंधों और स्त्री-पुरुष भूमिकाओं से जुड़े कुछ कथन प्राचीन समय की सोच को दर्शाते हैं। उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक या सामाजिक तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इसलिए चाणक्य नीति को पढ़ते समय उसके मूल विचार को समझें और फिर देखें कि वर्तमान जीवन में कौन-सी सीख व्यावहारिक और उचित है।
चाणक्य नीति के अन्य अध्याय पढ़ें
अगर आपको चाणक्य नीति Chapter 10 के ये विचार पसंद आए हैं, तो आप इसके दूसरे अध्याय भी पढ़ सकते हैं:
- चाणक्य नीति Chapter 1 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 2 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 3 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 4 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 5 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 6 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 7 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 8 In Hindi
- चाणक्य नीति Chapter 9 In Hindi
आप सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
चाणक्य नीति Chapter 10 में विद्या, धन, भाग्य, बुद्धि, परिवार, मित्रता, सत्य, धर्म और जीवन के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े विचार मिलते हैं। इस अध्याय में कुछ ऐसी बातें भी हैं जो आज के जीवन में व्यवहारिक सीख देती हैं।
विद्या और हुनर को महत्व देना, सोच-समझकर काम करना, ज्ञान का उपयोग करना और अपनी बुद्धि पर भरोसा रखना आज भी महत्वपूर्ण है। इसी तरह गलत संगति और अनावश्यक शत्रुता से बचना भी व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकता है।
साथ ही, भोजन, धर्म और सामाजिक भूमिकाओं से जुड़े कुछ विचार प्राचीन संदर्भ के हैं। इसलिए उन्हें वर्तमान जीवन में शब्दशः लागू करने के बजाय उनके मूल संदेश को समझना बेहतर है।
अंततः चाणक्य नीति का अध्ययन तभी अधिक उपयोगी बनता है जब हम उसके विचारों को समझकर वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार विवेकपूर्ण निर्णय लें।
Note: सावधानी बरतने के बावजूद यदि ऊपर दिए गए किसी भी Quote (Hindi or English) में आपको कोई त्रुटि मिले तो कृपया comments के माध्यम से अवगत कराएं।
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