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Healthy life tips in Hindi स्वास्थ्य की देखभाल

जीवन में सबसे मुश्किल काम है सरल, संतुलित बने रहना, और हाँ यह नामुमकिन नहीं है, स्वास्थ्य की देखभाल हेतु एवं शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम रखने के लिए चंद छोटी छोटी बातों को दिनचर्या में शामिल किया जाए तो यह संभव हैं।
daily-routine-dincharya-in-hindiBalanced daily routine for healthy life (Dinacharya in Hindi)

व्यक्ति को हमेशा सूर्य निकलने से पहले ही उठना चाहिए और उठकर भूमि को हाथ से छूकर प्रणाम करना चाहिए। साथ ही अपने इष्टदेव को याद करते हुए शयन कक्ष से बाहर निकलना चाहिए, यदि गगन मण्डल में तारे दिखाई दे तो उसे अवश्य देखना चाहिए क्योंकि तारों को देखना, नक्षत्र को देखना अच्छा माना गया हैं।

स्वच्छ जल से हाथ,  मुहं एवं आँखे आदि को धोकर रात्रि में तांबे के पात्र (लौटा) आदि में रखा हुआ जल, जिसमें चार ग्राम एक-दो चम्चम त्रिफला चूर्ण एवं दो-चार तुलसी की पत्तियों वाले जल को शौचालय जाने से पहले नियमित रूप से अवश्य पीना चाहिए। इसके नियमित सेवन से पेट के अनेकों रोग, आँखों के रोग आदि दूर करने में मदद मिलती हैं।

शौचालय के उपरान्त हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।

तत्पश्चात स्नानादि से निवृत होकर घर से बाहर पार्क आदि में जाकर थोड़ा सा शारीरिक व्यायाम अवश्य करते रहना चाहिए। व्यायाम करते समय यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि व्यायाम शारीरिक क्षमता अनुसार ही करें।

दांतों को दातुन/मंजन/पेस्ट/कुल्ला आदि से साफ करना चाहिए जिव्हा को (जिव्या कुरेदनी) आदि से भली-भांति साफ करना चाहिए।

घर से बाहर जूते पहनकर निकलना चाहिए।

ऋतु के अनुसार कपड़े पहनकर बाहर निकलना चाहिए।

यदि देर रात घर से बाहर निकलना पड़े तो हाथ में टॉर्च व एक डंडा साथ लेकर निकलें।

नाखूनों को सप्ताह में एक बार अवश्य काटना चाहिए बार-बार नाक, कान, आँख आदि में ऊंगली नहीं डालनी चाहिए।

हमेशा जेब में एक साफ़ रूमाल रखें।

घर में टीवी देखते समय कभी भी टीवी के पास बैठकर या टीवी के पास आँख गढ़ाकर ना देखें, क्योकि इससे आँखें जल्दी ख़राब हो जाती हैं व लेटकर कभी भी टीवी न देखें कभी भी पढ़ाई लेट कर न करें यदि पढ़ना हो तो भली-भाति कुर्सी-मेज पर बैठकर पढाई करें, पढ़ाई करते समय प्रकाश का विशेष ध्यान रखें।

खाना खाते समय व खाना खाने के बाद तुरन्त बाद पढ़ाई न करें।

खाना खाते ही तुरन्त न भागें यदि हो सके तो लेट भी जाएँ भोजन के बाद लेटते समय बाएं करवट लेटें व कुछ मिनट बाद सीधा लेट सकते हैं।

भोजन के बीच में हमेशा थोड़ा स्वच्छ जल जरूर पीना चाहिए इसके पीने से पाचक अग्नि अथार्थ हाजमा दुरस्त होता हैं जिससे भोजन शीघ्र ही पच जाता हैं भोजन समाप्त करने के पश्चात थोडा पानी भी अवश्य पीना चाहिए जिससे भोजन नलिका स्वच्छ हो जाती हैं।

भोजन में नमक मिर्च,  मसालें व खटाई आदि की मात्रा बहुत ही कम रखें क्योंकि नमक ज्यादा प्रयोग करने से उच्च रक्तचाप की बीमारी का खतरा हो जाता हैं व पेट में जख्म होने का भी खतरा हो जाता हैं।

हमेशा मौसमी फल,  सब्जियों का प्रयोग अधिक से अधिक करना चाहिए जैसे गर्मी में खीरे,  खरबूजे,  आम आदि का प्रयोग करना चाहिए। अच्छे किस्मों के आम खाने से हृदय के लिए अति लाभदायक हैं इसके अतिरिक्र्त लस्सी व नींबू की शिकंजी व दही का प्रयोग करें। सर्दियों में हरी सब्जियों का अधिक से अधिक प्रयोग करें जैसे: मैथी, सरसों,  पालक,  बथुआ आदि का प्रयोग करें तथा गाजर,  मुली,  चुकन्दर,  जमींकंद,  सकरकंदी,  पत्तागोभी मशरूम शिमला मिर्च, शलजम को सलाद व सब्जियों आदि में हमेशा प्रयोग करना चाहिए।

जो भी भोजन देखने एवं स्वाद में अच्छा न लगे उसे न खाये कभी भी बासी खाना नहीं खाएं व पीतल के पात्र में रखा हुआ दही व खटाई युक्त पदार्थ नहीं खायें।

जितनी भूख हो उतना ही खाएं।

सभ्य जनों की सभा में कभी भी शरीर के अंगो को जैसे हाथ,  पाँव की अंगुलियों की हड्डियों को नहीं चटकाना चाहिए व अपशब्दों को भी नहीं बोले।

हमेशा सोच-समझकर न नापतोल कर समय के अनुरूप ही बोलना चाहिए।

हमेशा अपने गुरुजनों व अपने से अधिक ज्ञान रखने वाले व्यक्ति का आदर व सम्मान करना चाहिए।

समाज में कभी भी झूठी अफवाह न फैलाएं औरं यदि कोई ऐसा कार्य करता हो तो उसे भी समझाएं व मना करें हमेशा अपने आप से भली प्रकार सुनकर व देखकर किसी बात पर विश्वास करें।

हमेशा महिलाओं का सम्मान करें, दुसरे की कन्या को अपनी ही बेटी के समान देखें व बूढी महिलाओं को अपनी ही माँ के बराबर ही मानें।

ब्रह्मचर्य के पालन से सहनशीलता आती हैं। ब्रह्मचर्य के कारण शरीर स्वच्छ रहता हैं व दीर्घायु भी रहती हैं अच्छे-अच्छे मन में विचार आते हैं व पुरुष हमेशा मंगलकामना करता रहता हैं इससे देश की व समाज की उन्नति होती हैं ब्रह्मचर्य, मनसा, वाचा अव्यं कर्मणा द्वारा संपूर्ण होना चाहिए।
अथार्त मन, वाणी, कर्म से किसी प्राणी को किसी प्रकार से कष्ट न देना, वध न करना,  किसी को क्लेश न देना आदि अहिंसा कहलाता हैं।

हमेशा भोजन समय पर करें भोजन के समय शांतचित्त होकर व एकांत में ही भोजन करें और भोजन के समय किसी से बात न करें। दोपहर का भोजन 12 से 1:30 बजे तक करें व सायंकाल का भोजन 7 से 8:00 बजें तक के बीच में ही करने का प्रयास करें।

हमेशा काम, क्रोध, मद, लोभ व मोह के वेग को दबाकर रखें।

किसी के यहाँ देहान्त हो जाएँ तो वहां पर कभी भी ख़ुशी न मनाएं या किसी के यहाँ ख़ुशी का मौहाल हो वहां पर गम का माहौल न पैदा करें।

शरीर के अन्दर कुछ ऐसे वेग हैं जैसे की मल का वेग, मूत्र का वेग, छीक का वेग, उदगार अथार्त डकार का वेग को न रोकना ही लाभप्रद हैं।

कारखानों आदि में कार्य करने वाले पुरुष को चाहिए की हमेशा मुख पर व नाक पर कपड़ा आदि(मास्क) का प्रयोग करें जहाँ पर डस्ट उड़ती हो इससे बचाव हो सकता हैं तथा सोते समय थोडा सा गुड़ का सेवन लाभकारी माना गया हैं।

अधिक धुल, धूप, धुएं का हमेशा बचाव करें अथार्थ सेवन न करें यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

सर्दियों में यदि धूप में बैठना हो तो सूर्य की ओर पीठ करके बैठें।

हिंसा विचारों का हमेशा परित्याग करें दयावान बनें व क्षमावान बनें अपने अधीनस्थ कर्मचारी पर बार-बार क्रोध न करें उन्हें धीरजपूर्वक समझाने का प्रयत्न करें।

दुष्ट बुद्धि वाले व नीच पुरुष के साथ कभी भी दोस्ती न करें।

काम, क्रोध व मोह के कभी भी वशीभूत न हों।

हिंसक जन्तुओ के पास कभी भी न जाएँ।

अपवित्र पात्र व गन्दे बर्तनों में भोजन न करें।

किसी पर अधिक विश्वास व किसी पर कभी अधिक शंका न करें।

शरीर को टेढ़ा करके न छींके और न भोजन करें।

कभी स्नान करने के उपरान्त बालों को जोर-जोर से न झटके।

दिव्यस्वपन (दिन में सोना एव रात्रि में जागना) सदैव हानिकारक होता हैं, अति-स्त्री संसर्ग भी वर्जित हैं।

रज-स्वला, अथार्थ जिस स्त्री को मासिक धर्म चल रहा हो, उस समय उसके साथ मैथुन कदापि न करें क्योंकि ऐसा करने से मनुष्य मृत्यु के करीब चला जाएगा अथार्त जल्दी मर जायेगा (अथार्त भयंकर रोगग्रस्त हो जायेगा जिसमे एड्स जैसी घातक बीमारी शामिल हैं) ऐसी अवस्था को टालने के लिए निरोध का प्रयोग हमेशा करें।

हमेशा शारीरिक धातुओं को जिनमें रस, मांस, मैदा, अस्थि, मज्जा, शुक्र व ओज को कभी भी नष्ट न होने दें, इनमें विशेषता: शुक्र धातु व ओज धातु प्रमुख हैं इनको तो कभी भी नष्ट न होने दें क्योकिं इनमे कमी आने से भयंकर रोग उत्पन्न हो जाते हैं जैसे कि कैंसर व एड्स।

जल ही जीवन हैं इसको व्यर्थ न बहने दें स्वच्छ जल का सेवन करें जहाँ हैंडपंप/दरिया/कुएं आदि का जल पीना पड़ें तो उसे उबाल कर ही पीना चाहिए। क्योंकि बिना उबाले पीने से भयंकर रोग जैसे पीलिया रोग एवं पेट में कीड़े होने की संभावना बनी रहती हैं।

उपयुक्त सुझावों पर अमल करने से विभिन्न प्रकार के भयंकर रोगों पर नियंत्रण पाया जा सकता हैं क्योंकि कहा गया हैं कि उपचार से परहेज बेहतर हैं ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिलेंगी एवं ओषधियो पर होने वाले अनावश्क व्यय में कमी आएगी, इससे देश की अर्थव्यवस्था भी सुद्रढ़ होगी।

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Friends, आशा करता हूँ कि आप लोग इन Heath Tips  को अपनाएंगे और स्वस्थ रहेंगे, क्यों कि हम सभी जानते हैं कि एक स्वस्थ शरीर ही अच्छा दिमाक(मस्तिष्क) रखता हैं और सफलता के लिए अच्छे मस्तिष्क की आवश्कता होती हैं।

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