Mahatma Gandhi Quotes पढ़ने वालों के लिए इस लेख में महात्मा गांधी के 162 प्रेरक विचार और अनमोल वचन दिए गए हैं। इन विचारों में सत्य, अहिंसा, प्रेम, आत्मविश्वास, शिक्षा, स्वतंत्रता, चरित्र, मेहनत और मानवता जैसे विषय शामिल हैं।
महात्मा गांधी का जीवन केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं था। उनके विचार आज भी व्यक्तिगत जीवन, समाज, शिक्षा और नेतृत्व के संदर्भ में पढ़े जाते हैं। इसलिए गांधीजी के इन विचारों को केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी सीख को समझना भी महत्वपूर्ण है।
महात्मा गांधी का संक्षिप्त जीवन परिचय
बचपन और शिक्षा
महात्मा गांधी के नाम से प्रसिद्ध मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे। गांधीजी का विवाह कम उम्र में कस्तूरबा गांधी से हुआ था।
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में पूरी की। इसके बाद 1888 में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। 1891 में वे बैरिस्टर बने।
South Africa का अनुभव
1893 में गांधीजी कानूनी काम के सिलसिले में South Africa पहुंचे। वहीं उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। Pietermaritzburg में first-class ticket होने के बावजूद उन्हें train के first-class carriage से बाहर निकाल दिया गया। यह घटना उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ बनी।
इसके बाद उन्होंने South Africa में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। आगे चलकर सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध उनके सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण साधन बने। इसी दौर के अनुभवों ने उनके विचारों को मजबूत किया।
भारत की स्वतंत्रता और गांधीजी के विचार
भारत लौटने के बाद गांधीजी स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वदेशी, सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख विचार रहे। संयुक्त राष्ट्र भी गांधीजी को non-violence की philosophy और strategy के प्रमुख नेताओं में मानता है।
भारत में गांधीजी को व्यापक रूप से महात्मा कहा गया। Rabindranath Tagore द्वारा इस संबोधन के प्रयोग का evidence मिलता है, लेकिन यह निश्चित रूप से कहना उचित नहीं है कि सबसे पहले केवल Tagore ने ही उन्हें यह नाम दिया था।
इसी तरह गांधीजी को लोकप्रिय रूप से राष्ट्रपिता कहा जाता है, लेकिन भारत सरकार के अनुसार इस title को confer करने की कोई official notification उपलब्ध नहीं है।
2 अक्टूबर, गांधीजी के जन्मदिन पर, संयुक्त राष्ट्र द्वारा International Day of Non-Violence मनाया जाता है। इसे 2007 में General Assembly resolution के माध्यम से स्थापित किया गया था।
162 Mahatma Gandhi Quotes in Hindi
सत्य, आत्मचिंतन और चरित्र पर विचार
1. अँधा वह नहीं जो देख सकता है, बल्कि अँधा तो वह है जो देखकर भी अपनी गलतियों पर पर्दा डालने की कोशिश करता है।
2. अक्लमंद काम करने से पहले सोचता है और मूर्ख काम करने के बाद।
3. अधभूखे राष्ट्र के पास न तो कोई धर्म हो सकता है, न कोई कला और न ही कोई संगठन।
4. अधिक योग्य बने बिना दूसरों से बराबरी का दावा कभी मत करो।
5. अपनी गलती को स्वीकारना झाड़ू लगाने के समान है, जो धरातल को साफ और चमकदार कर देती है।
6. अपनी बुद्धिमत्ता को लेकर बेहद निश्चित होना बुद्धिमानी नहीं है। यह याद रखना चाहिए कि ताकतवर भी कमजोर हो सकता है और बुद्धिमान व्यक्ति भी गलती कर सकता है।
7. अपने दोष हम देखना नहीं चाहते, दूसरों के देखने में हमें मजा आता है। बहुत सारे दुःख इसी आदत से पैदा होते हैं।
8. अपने प्रयोजन में दृढ़ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है।
9. अपने से हो सके वह काम, दूसरों से नहीं करवाना चाहिए।
10. अहिंसा ही धर्म है और वही जिंदगी का एक रास्ता है।
11. अहिंसात्मक युद्ध में अगर थोड़े भी मर मिटने वाले लड़ाके मिलेंगे तो वे करोड़ों की लाज रखेंगे और उनमें प्राण फूंकेंगे। अगर यह मेरा स्वप्न है, तो भी यह मेरे लिए मधुर है।
12. आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी।
13. आचरण रहित विचार, कितने भी अच्छे क्यों न हों, उन्हें खोटे मोती की तरह समझना चाहिए।
14. आदमी अक्सर वह बन जाता है जो वह होने में यकीन करता है। अगर मैं खुद से कहता रहूँ कि मैं फलाँ चीज नहीं कर सकता, तो संभव है कि मैं सचमुच उसे करने में असमर्थ हो जाऊँ। इसके विपरीत, अगर मैं विश्वास करूँ कि मैं यह कर सकता हूँ तो मैं उसे करने की क्षमता पा सकता हूँ, भले ही शुरू में मेरे पास वह क्षमता न रही हो।
15. आधुनिक सभ्यता ने हमें रात को दिन में और सुनहरी खामोशी को पीतल के कोलाहल और शोरगुल में परिवर्तित करना सिखाया है।
16. आप आज जो करते हैं, उस पर भविष्य निर्भर करता है।
17. आप तब तक यह नहीं समझ पाते कि आपके लिए कौन महत्वपूर्ण है, जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
18. आप नम्र तरीके से दुनिया को हिला सकते हैं।
19. आप मानवता में विश्वास मत खोइए। मानवता सागर की तरह है। अगर सागर की कुछ बूंदें गंदी हैं, तो सागर गंदा नहीं हो जाता।
20. आप मुझे जंजीरों में जकड़ सकते हैं, यातना दे सकते हैं, यहाँ तक कि इस शरीर को नष्ट कर सकते हैं, लेकिन आप कभी मेरे विचारों को कैद नहीं कर सकते।
21. आपकी मान्यताएं आपके विचार बन जाते हैं, आपके विचार आपके शब्द बन जाते हैं, आपके शब्द आपके कार्य बन जाते हैं, आपके कार्य आपकी आदत बन जाते हैं, आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते हैं और आपके मूल्य आपकी नियति बन जाते हैं।
22. आपकी समस्त विद्वत्ता, आपका Shakespeare और Wordsworth का संपूर्ण अध्ययन निरर्थक है यदि आप अपने चरित्र का निर्माण और विचारों व क्रियाओं में सामंजस्य स्थापित नहीं करते हैं।
23. आपके विचार ही आपके जीवन का निर्माण करते हैं।
24. ईमानदार मतभेद आम तौर पर प्रगति के स्वस्थ संकेत हैं।
25. ईश्वर न तो काबा में है और न ही काशी में है, वह तो हर घर में व्याप्त है, हर दिल में मौजूद है।
गांधीजी के धर्म और आत्मचिंतन से जुड़े विचारों को समझने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के सार और जीवन के रहस्य पर हमारा लेख भी उपयोगी रहेगा।
मेहनत, जीवन और सफलता पर विचार
26. उफनते तूफान को मात देना है तो अधिक जोखिम उठाते हुए हमें पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ना होगा।
27. एक कार्य द्वारा किसी एक दिल को खुशी देना, प्रार्थना में झुके हजार सिरों से बेहतर है।
28. एक देश की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से आँका जा सकता है कि वहाँ जानवरों से कैसा व्यवहार किया जाता है।
29. एकमात्र वस्तु जो हमें पशु से भिन्न करती है, वह है सही और गलत के मध्य भेद करने की क्षमता, जो हम सभी में समान रूप से विद्यमान है।
30. ऐसे जियो जैसे कि तुम कल मरने वाले हो। ऐसे सीखो कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो।
31. कम बोलने वाला सबसे बेहतर इंसान है।
32. कमजोर कभी माफ नहीं कर सकते। माफ करना तो ताकतवर की विशेषता है।
33. काम की अधिकता नहीं, बल्कि अनियमितता आदमी को मार डालती है।
34. कायरता से कहीं ज्यादा अच्छा है, लड़ते-लड़ते मर जाना।
35. किसी का दिल दुखाने वाली बात मत कहो।
36. किसी चीज में यकीन करना और उसे न जीना बेईमानी है।
37. किसी भी देश की संस्कृति उसके लोगों के हृदय और आत्मा में बसती है।
38. किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए सोने की बेड़ियां, लोहे की बेड़ियों से कम कठोर नहीं होंगी। चुभन धातु में नहीं, बल्कि बेड़ियों में होती है।
39. किसी राष्ट्र की संस्कृति उसके लोगों के दिलों और आत्माओं में बसती है।
40. कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं, जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
मेहनत और सफलता के विषय पर अलग दृष्टिकोण जानने के लिए Jack Ma के अनमोल विचार और Steve Jobs के विचार भी पढ़ सकते हैं।
41. कुरीति के अधीन होना कायरता है, उसका विरोध करना पुरुषार्थ है।
42. केवल प्रसन्नता ही एकमात्र इत्र है, जिसे आप दूसरों पर छिड़कें तो उसकी कुछ बूंदें अवश्य ही आप पर भी पड़ जाती हैं।
43. कोई त्रुटि तर्क-वितर्क करने से सत्य नहीं बन सकती और न ही कोई सत्य इसलिए त्रुटि नहीं बन सकता क्योंकि कोई उसे देख नहीं रहा।
44. क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है।
45. क्रोध एक प्रचंड अग्नि है। जो मनुष्य इस अग्नि को वश में कर सकता है, वह उसे बुझा देगा। जो इसे वश में नहीं कर सकता, वह स्वयं उसी अग्नि में जल जाएगा।
46. क्रोध और असहिष्णुता सही समझ के दुश्मन हैं।
47. क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है।
48. क्षणभर भी काम के बिना रहना, चोरी समझो। मैं दूसरा कोई रास्ता भीतरी या बाहरी आनंद का नहीं जानता।
49. खुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, ये तीनों ही सामंजस्य में हों।
50. खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।
गरीबी, चरित्र और आत्मविश्वास
51. गरीबी अभिशाप नहीं, बल्कि मानव-निर्मित षड्यंत्र है।
52. गर्व लक्ष्य को पाने के लिए किए गए प्रयत्न में निहित है, न कि उसे पाने में।
53. गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती। वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है।
54. चरित्र की शुद्धि ही ज्ञान का लक्ष्य होनी चाहिए।
55. चलिए सुबह का पहला काम यह करें कि इस दिन के लिए संकल्प करें—मैं दुनिया में किसी से डरूंगा नहीं। मैं केवल भगवान से डरूं। मैं किसी के प्रति बुरा भाव न रखूं। मैं किसी के अन्याय के समक्ष न झुकूं। मैं असत्य को सत्य से जीतूँ और असत्य का विरोध करते हुए सभी कष्टों को सह सकूँ।
55. चिंता से अधिक कुछ और शरीर को इतना बर्बाद नहीं करता और वह जिसे ईश्वर में थोड़ा भी यकीन है, उसे किसी भी चीज के बारे में चिंता करने पर शर्मिंदा होना चाहिए।
56. जब कोई युवक विवाह के लिए दहेज की शर्त रखता है, तब वह न केवल अपनी शिक्षा और अपने देश को बदनाम करता है, बल्कि स्त्री जाति का भी अपमान करता है।
57. जब तक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है।
58. जब भी आपका सामना किसी विरोधी से हो, उसे प्रेम से जीतें।
59. जब भी मैं सूर्यास्त की अद्भुत लालिमा और चंद्रमा के सौंदर्य को निहारता हूँ, तो मेरा हृदय सृजनकर्ता के प्रति श्रद्धा से भर उठता है।
60. जब मैं निराश होता हूँ, मैं याद कर लेता हूँ कि समस्त इतिहास के दौरान सत्य और प्रेम के मार्ग की ही हमेशा विजय होती है। कितने ही तानाशाह और हत्यारे हुए हैं और कुछ समय के लिए वे अजेय लग सकते हैं, लेकिन अंत में उनका पतन होता है।
61. जब शरीर खत्म होने वाला है और आत्मा अमर है, तो फिर डर किसका, किस लिए?
62. जहाँ प्रेम है, वहाँ जीवन है।
63. जिज्ञासा के बिना ज्ञान नहीं होता, दुःख के बिना सुख नहीं होता।
64. जिनमें नम्रता नहीं आती, वे विद्या का पूरा सदुपयोग नहीं कर सकते। नम्रता का अर्थ है अहंभाव का आत्यंतिक क्षय।
65. जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जाएगी, दुनिया में अमन आ जाएगा।
66. जिस मनुष्य को अपने मनुष्यत्व का भान है, उसे ईश्वर के सिवाय और किसी से भय नहीं लगता।
ज्ञान, धर्म और मानवता पर विचार
67. जीवन की गति बढ़ाने के अलावा भी इसमें बहुत कुछ है।
68. जो चीज विकार को मिटा सके, राग-द्वेष को कम कर सके, जिस चीज के उपयोग से मन सूली पर चढ़ते समय भी सत्य पर डटा रहे, वही धर्म की शिक्षा है।
69. जो भी चाहे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन सकता है। वह सबके भीतर विद्यमान है।
70. जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वे यह व्यक्त करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है।
71. जो समय की बचत करते हैं, वे धन की बचत करते हैं और बचाया हुआ धन, कमाए हुए धन के बराबर है।
72. ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र-निर्माण होना चाहिए।
73. डर शरीर का रोग नहीं है, यह आत्मा को मारता है।
74. तुम जो भी करोगे, वह नगण्य होगा, लेकिन यह जरूरी है कि तुम वह करो।
75. थोड़ा सा अभ्यास ढेर सारे उपदेशों से बेहतर है।
76. दुनिया में ऐसे भी कई लोग हैं जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें रोटी के अलावा और किसी रूप में नहीं दिख सकता।
77. दुश्मनी करना मेरे लिए मौत के बराबर है। मैं इससे नफरत करता हूँ और तमाम इंसानों से प्रेम का अभिलाषी हूँ।
78. नारी को अबला कहना अपमानजनक है। यह पुरुषों का नारी के प्रति अन्याय है।
79. निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी।
80. निरंतर विकास जीवन का नियम है और जो व्यक्ति खुद को सही दिखाने के लिए हमेशा अपनी रूढ़िवादिता को बनाए रखने की कोशिश करता है, वह खुद को गलत स्थिति में पहुंचा देता है।
81. निर्मल चरित्र एवं आत्मिक पवित्रता वाला व्यक्तित्व सहजता से लोगों का विश्वास अर्जित करता है और स्वतः अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध कर देता है।
82. परमेश्वर ही सत्य है; यह कहने के बजाय ‘सत्य ही परमेश्वर है’ कहना अधिक उपयुक्त है।
83. पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आपसे लड़ेंगे और तब आप जीत जाएंगे।
84. पाप करने का अर्थ यह नहीं कि जब वह आचरण में आ जाए, तभी उसकी गिनती पाप में हुई। पाप तो जब हमारी दृष्टि में आ गया, विचार में आ गया, तो वह हमसे हो गया।
85. पाप से घृणा करो, पापी से प्रेम करो।
86. पुस्तकें मन के लिए साबुन का कार्य करती हैं।
87. पुस्तकों का मूल्य रत्नों से भी अधिक है, क्योंकि पुस्तकें अंतःकरण को उज्ज्वल करती हैं।
88. पूंजी अपने-आप में बुरी नहीं है। उसके गलत उपयोग में ही बुराई है। किसी न किसी रूप में पूंजी की आवश्यकता हमेशा रहेगी।
89. पूर्ण धारणा के साथ बोला गया “नहीं” सिर्फ दूसरों को खुश करने या समस्या से छुटकारा पाने के लिए बोले गए “हाँ” से बेहतर है।
90. पृथ्वी ने सभी मनुष्यों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान किया है।
91. प्रार्थना माँगना नहीं है। यह आत्मा की लालसा है। यह हर रोज अपनी कमजोरियों की स्वीकारोक्ति है।
92. प्रार्थना या भजन जीभ से नहीं, हृदय से होता है। इसी से गूंगे, तोतले और मूढ़ भी प्रार्थना कर सकते हैं।
प्रेम, शांति और अहिंसा पर विचार
93. प्रेम की शक्ति, हिंसा की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।
94. प्रेम के बिना जीवन अधूरा है, चाहे वह कैसा भी प्रेम हो।
95. प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है और फिर भी हम जिसकी भी कल्पना कर सकते हैं, उसमें सबसे नम्र है।
96. बुद्ध ने अपने समस्त भौतिक सुखों का त्याग किया क्योंकि वे संपूर्ण विश्व के साथ वह खुशी बाँटना चाहते थे जो सत्य की खोज में कष्ट भोगने और बलिदान देने वालों को ही प्राप्त होती है।
97. बुद्धि के बिना इंसान अपंग के समान है।
98. बुराई से असहयोग करना, मानव का पवित्र कर्तव्य है।
99. भगवान का कोई धर्म नहीं है।
100. भगवान ने मनुष्य को अपने ही समान बनाया, पर दुर्भाग्य से इंसान ने भगवान को अपने जैसा बना डाला।
101. भूल करने में पाप तो है ही, परंतु उसे छुपाने में उससे भी बड़ा पाप है।
102. मनुष्य को अपनी ओर खींचने वाला यदि जगत में कोई असली चुंबक है, तो वह केवल प्रेम है।
103. मृत, अनाथ और बेघर को इससे क्या फर्क पड़ता है कि यह तबाही सर्वाधिकार या फिर स्वतंत्रता या लोकतंत्र के पवित्र नाम पर लाई जाती है?
104. मेरा जीवन ही मेरा संदेश है।
105. मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन है।
106. मेरी अनुमति के बिना कोई भी मुझे ठेस नहीं पहुंचा सकता।
107. मेरे विचारानुसार गीता का उद्देश्य आत्म-ज्ञान की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग बताना है।
108. मैं हिंदी के जरिये प्रांतीय भाषाओं को दबाना नहीं चाहता, किन्तु उनके साथ हिंदी को भी मिला देना चाहता हूँ।
109. मैं किसी को भी गंदे पाँव के साथ अपने मन से नहीं गुजरने दूंगा।
110. मैं तुम्हें शांति का प्रस्ताव देता हूँ। मैं तुम्हें प्रेम का प्रस्ताव देता हूँ। मैं तुम्हारी सुंदरता देखता हूँ। मैं तुम्हारी आवश्यकता सुनता हूँ। मैं तुम्हारी भावना महसूस करता हूँ।
111. मैं यह अनुभव करता हूं कि गीता हमें यह सिखाती है कि हम जिसका पालन अपने दैनिक जीवन में नहीं करते हैं, उसे धर्म नहीं कहा जा सकता।
112. मैं हिंसा का विरोध करता हूँ क्योंकि जब ऐसा लगता है कि वह अच्छा कर रही है, तब वह अच्छाई अस्थायी होती है और जो बुराई वह करती है, वह स्थायी होती है।
अहिंसा और शांति गांधीजी के विचारों का केंद्र थीं। संयुक्त राष्ट्र भी गांधीजी के non-violence विचारों को उनकी वैश्विक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
113. मौन रहना सर्वोत्तम भाषण है। अगर बोलना ही है तो कम से कम बोलो। एक शब्द से काम चल जाए तो दो शब्द बोलने की आवश्यकता नहीं है।
114. यदि आपको अपने उद्देश्य और साधन तथा ईश्वर में आस्था है, तो सूर्य की तपिश भी शीतलता प्रदान करेगी।
115. यदि इंसान सीखना चाहे तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।
116. यद्यपि आप अल्पमत में हों, लेकिन सच तो सच ही है।
स्वतंत्रता, समाज और लोकतंत्र पर विचार
117. ये मेरा देश है, ये तेरा देश है—यह केवल संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों की सोच है। उदार आत्माओं के लिए तो पूरी दुनिया ही एक परिवार है।
118. राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।
119. रोम का पतन उसका विनाश होने से बहुत पहले ही हो चुका था।
120. लंबे-लंबे भाषणों से कहीं अधिक मूल्यवान है इंच भर कदम बढ़ाना।
121. वही राष्ट्र सच्चा लोकतांत्रिक है, जो अपने कार्यों को बिना हस्तक्षेप के सुचारू और सक्रिय रूप से चलाता है।
122. वास्तविक सुंदरता हृदय की पवित्रता में है।
123. विवेक के मामलों में बहुमत के नियम का कोई स्थान नहीं है।
124. विश्व इतिहास में आजादी के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष हमसे ज्यादा वास्तविक किसी का नहीं रहा है। मैंने जिस लोकतंत्र की कल्पना की है, उसकी स्थापना अहिंसा से होगी। उसमें सभी को समान स्वतंत्रता मिलेगी—हर व्यक्ति खुद का मालिक होगा।
125. विश्व के सभी धर्म, भले ही और चीजों में अंतर रखते हों, लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि दुनिया में कुछ नहीं, बस सत्य जीवित रहता है।
126. विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता की जननी है।
127. विश्वास को हमेशा तर्क से तौलना चाहिए। जब विश्वास अंधा हो जाता है, तो मर जाता है।
128. वीरता मरने में नहीं है, मारने में है।
129. व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं की जाती, अपितु उसके चरित्र से की जाती है।
130. शक्ति दो प्रकार की होती है। एक दंड के डर से पैदा होती है और दूसरी प्रेम भरे कार्यों से। प्रेम पर आधारित शक्ति, सजा के डर से उत्पन्न शक्ति से एक हजार गुना अधिक प्रभावी और स्थायी होती है।
131. शांति का कोई रास्ता नहीं है, केवल शांति है।
132. शारीरिक उपवास के साथ-साथ मन का उपवास न हो तो वह दंभपूर्ण और हानिकारक हो सकता है।
133. श्रद्धा का अर्थ है आत्मविश्वास और आत्मविश्वास का अर्थ है ईश्वर में विश्वास।
134. संपूर्ण विश्व का इतिहास उन व्यक्तियों के उदाहरणों से भरा पड़ा है जो अपने आत्मविश्वास, साहस तथा दृढ़ता की शक्ति से नेतृत्व के शिखर पर पहुंचे हैं।
सत्य, शिक्षा और आत्मअनुशासन
135. सच्चे कवि तो वे माने जाते हैं, जो मृत्यु में जीवन और जीवन में मृत्यु देख सकें।
136. सच्ची अहिंसा मृत्यु शय्या पर भी मुस्कराती रहेगी। अहिंसा ही वह एकमात्र शक्ति है जिससे हम शत्रु को अपना मित्र बना सकते हैं और उसके प्रेमपात्र बन सकते हैं।
137. सत्य एक विशाल वृक्ष है। उसकी ज्यों-ज्यों सेवा की जाती है, त्यों-त्यों उसमें अनेक फल आते हुए नजर आते हैं। उनका अंत ही नहीं होता।
138. सत्य एक है, मार्ग कई।
139. सत्य कभी भी ऐसे कारण को क्षति नहीं पहुंचाता जो उचित हो।
140. सत्य, बिना जन समर्थन के भी खड़ा रहता है क्योंकि सत्य आत्मनिर्भर है।
141. सदाचार और निर्मल जीवन सच्ची शिक्षा के आधार हैं।
142. सभी छुपे दोषों का उपाय ढूंढना कठिन होता है।
143. समाज में से धर्म को निकाल फेंकने का प्रयत्न बांझ के पुत्र करने जितना ही निष्फल है और अगर कहीं सफल हो जाए तो समाज का उसमें नाश होता है।
144. सही और गलत के मध्य भेद करने की क्षमता ही है जो हम सभी को पशु से भिन्न करती है। यह एकमात्र वस्तु हम सभी में समान रूप से विद्यमान है।
145. सात घनघोर पाप—काम के बिना धन; अंतरात्मा के बिना सुख; मानवता के बिना विज्ञान; चरित्र के बिना जीवन।
146. साफ दिल से निकली हुई दुआ व्यर्थ नहीं जाती।
147. सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं।
148. सुखद जीवन का भेद त्याग पर आधारित है। त्याग ही जीवन है।
149. स्वच्छता, पवित्रता और आत्म-सम्मान से जीने के लिए धन की आवश्यकता नहीं होती।
स्वतंत्रता, सेवा और अंतिम जीवन-संदेश
150. स्वतंत्रता एक जन्म की भांति है। जब तक हम पूर्णतः स्वतंत्र नहीं हो जाते, तब तक हम परतंत्र ही रहेंगे।
151. स्वयं को जानने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है स्वयं को औरों की सेवा में डुबो देना।
152. हंसी मन की गांठें बड़ी आसानी से खोल देती है।
153. हम जिसकी पूजा करते हैं, उसी के समान हो जाते हैं।
154. हम जो दुनिया के जंगलों के साथ कर रहे हैं, वह कुछ और नहीं, बस उस चीज का प्रतिबिंब है जो हम अपने साथ और एक-दूसरे के साथ कर रहे हैं।
155. हम दबाव से अनुशासन नहीं सीख सकते।
156. हमारा जीवन सत्य का एक लंबा अनुसंधान है और इसकी पूर्णता के लिए आत्मा की शांति आवश्यक है।
157. हमें सदा यह ध्यान रखना चाहिए कि शक्तिशाली से शक्तिशाली मनुष्य भी एक दिन कमजोर होता है।
158. हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें। हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जाएगा।
159. हर एक काम ईमानदारी व लगन से करो।
160. हर रात, जब मैं सोने जाता हूँ, मैं मर जाता हूँ और अगली सुबह, जब मैं उठता हूँ, मेरा पुनर्जन्म होता है।
161. हो सकता है आप कभी न जान सकें कि आपके काम का क्या परिणाम हुआ, लेकिन यदि आप कुछ करेंगे नहीं, तो कोई परिणाम नहीं होगा।
162. हृदय की कोई भाषा नहीं होती है। हृदय, हृदय से बातचीत करता है।
गांधीजी के विचारों की खास बात यही है कि वे केवल बोलने पर जोर नहीं देते, बल्कि विचार, शब्द और कर्म के बीच सामंजस्य की बात करते हैं। इसी कारण उनके कई विचार आज भी personal growth और social responsibility के संदर्भ में पढ़े जाते हैं।
गांधीजी के विचारों से मिलने वाली 7 बड़ी सीख
1. बदलाव की शुरुआत खुद से करें
दूसरों से बदलाव की उम्मीद करने के बजाय पहले अपने व्यवहार और कर्म में बदलाव लाना जरूरी है। यही विचार “खुद वो बदलाव बनिए…” जैसी पंक्ति में दिखाई देता है।
2. सत्य को सुविधा से ऊपर रखें
गांधीजी के विचारों में सत्य केवल बोलने की चीज नहीं है। उसे जीवन में अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
3. अहिंसा कमजोरी नहीं है
अहिंसा का अर्थ निष्क्रिय रहना नहीं है। गांधीजी के लिए यह अन्याय के खिलाफ एक अलग प्रकार की शक्ति थी। संयुक्त राष्ट्र भी उनके non-violent resistance के विचार को उनकी वैश्विक विरासत का हिस्सा मानता है।
4. गलतियों से सीखिए
अपनी गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं है। इसके विपरीत, गलती पहचानकर सुधारना आत्म-विकास का हिस्सा है।
5. सेवा से स्वयं को समझें
दूसरों की सेवा गांधीजी की सोच में महत्वपूर्ण स्थान रखती थी। अपने स्वार्थ से बाहर निकलकर समाज के लिए काम करना व्यक्ति को नई दृष्टि देता है।
इसी विषय को अलग आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने के लिए गौतम बुद्ध के प्रेरणादायक विचार भी पढ़े जा सकते हैं।
6. ज्ञान का लक्ष्य चरित्र होना चाहिए
सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है। गांधीजी के विचारों के अनुसार शिक्षा व्यक्ति के चरित्र और आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए।
शिक्षा के इस दृष्टिकोण से जुड़ी सोच के लिए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी उपयोगी संदर्भ है।
7. विचारों को कर्म में बदलिए
लंबी बातें करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति एक छोटा-सा सही कदम उठाए। इसी कारण Gandhi quotes में action, self-discipline और consistency की भावना बार-बार दिखाई देती है।
महात्मा गांधी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
2 अक्टूबर को International Day of Non-Violence
संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को International Day of Non-Violence के रूप में स्थापित किया है। यह गांधीजी की अहिंसा की विचारधारा की वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाता है।
South Africa की train घटना
1893 में Pietermaritzburg में Gandhi को first-class railway carriage से बाहर निकाला गया था। Gandhi Heritage Portal इसे उनकी South Africa chronology में दर्ज करता है।
“Mahatma” संबोधन
Gandhi को “Mahatma” के नाम से व्यापक रूप से जाना गया। Government of India की Gandhi Smriti FAQ के अनुसार Rabindranath Tagore द्वारा यह संबोधन 1915 में प्रयोग किए जाने की जानकारी मिलती है, लेकिन सबसे पहले किसने कहा, इसका निर्णायक official record उपलब्ध नहीं है।
“राष्ट्रपिता” के बारे में जरूरी तथ्य
भारत में गांधीजी को आम तौर पर “राष्ट्रपिता” कहा जाता है। हालांकि Gandhi Smriti की official FAQ के अनुसार भारत सरकार द्वारा इस title को confer करने का कोई official record या notification उपलब्ध नहीं है। इसलिए article में इसे लोकप्रिय संबोधन के रूप में लिखना अधिक सटीक है।
राजघाट
30 जनवरी 1948 को गांधीजी की हत्या के बाद दिल्ली में राजघाट उनका प्रमुख memorial बना। इस स्थान का संबंध आज भी उनके सार्वजनिक जीवन और स्मृति से जुड़ा हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महात्मा गांधी कौन थे?
महात्मा गांधी, यानी मोहनदास करमचंद गांधी, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। सत्याग्रह और अहिंसा उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख विचारधाराएं थीं।
महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ था?
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।
महात्मा गांधी का सबसे प्रसिद्ध विचार कौन सा है?
गांधीजी से जुड़े कई प्रसिद्ध विचार हैं। इनमें “मेरा जीवन ही मेरा संदेश है”, “खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं” और “आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी” जैसे कथन बहुत लोकप्रिय हैं। कुछ प्रसिद्ध quotations की institutional sources में भी पुष्टि मिलती है।
गांधीजी सत्य और अहिंसा को इतना महत्व क्यों देते थे?
गांधीजी के लिए सत्य जीवन का आधार था और अहिंसा अन्याय के खिलाफ संघर्ष का एक साधन। इसी विचार के कारण उनकी philosophy ने भारत से बाहर भी कई non-violent movements को प्रभावित किया।
2 अक्टूबर को Gandhi Jayanti के साथ क्या मनाया जाता है?
भारत में 2 अक्टूबर को Gandhi Jayanti मनाई जाती है। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र का International Day of Non-Violence भी मनाया जाता है।
निष्कर्ष
162 Mahatma Gandhi Quotes in Hindi का यह संग्रह केवल motivational lines का collection नहीं है। इसमें सत्य, अहिंसा, प्रेम, आत्मविश्वास, शिक्षा, स्वतंत्रता, सेवा और चरित्र जैसे कई विषय दिखाई देते हैं।
गांधीजी के विचारों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे व्यक्ति को अपने भीतर देखने के लिए प्रेरित करते हैं। इसलिए इन विचारों को पढ़ते समय केवल quote याद करना जरूरी नहीं है। उसके पीछे छिपे व्यवहार और जीवन-मूल्य को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
उनकी सोच का एक बड़ा संदेश यही है कि बदलाव की शुरुआत बाहर से नहीं, बल्कि व्यक्ति के अपने विचारों और कर्मों से होती है।

2 Comments
Nice Post …
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