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प्रेरक प्रसंग 18 Mins Read

एक लड़की को भागकर शादी करना कहाँ तक सही है? एक मर्मस्पर्शी कहानी

Mahesh YadavBy Mahesh YadavUpdated:Aug 26, 20265 Comments18 Mins Read
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भागकर शादी करना कहाँ तक सही है? अगर प्रेमी जोड़े बालिग हैं, तो क्या उन्हें अपनी पसंद से शादी करने का फैसला ले लेना चाहिए? या फिर शादी जैसे बड़े फैसले में परिवार की सहमति और भविष्य की जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना चाहिए?

इस लेख में
  • ट्रेन में लड़की से हुई मुलाकात
  • लड़की घर से क्यों भागी थी?
  • लड़की को अपने प्यार पर पूरा भरोसा था
  • बेटी के लिए मैंने अच्छी नौकरी छोड़ दी
  • मैंने भी लव मैरिज की थी, लेकिन भागकर शादी नहीं की
  • फिर मेरी शादी कैसे हुई?
  • क्या माता-पिता का फैसला हमेशा सही होता है?
  • इश्क का सही अर्थ क्या है?
  • लड़की को अपने माता-पिता की याद आई
  • लड़की ने आखिर क्या फैसला लिया?
  • क्या भागकर शादी करना हमेशा गलत है?
  • पाठकों की राय भी इस कहानी को एक नया नजरिया देती है
  • इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
  • निष्कर्ष: फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए
  • आपका क्या विचार है?
  • ऐसी ही अन्य प्रेरणादायक कहानियां पढ़ें

घर से भागकर शादी करने जा रही एक लड़की से हुआ यह संवाद इन्हीं सवालों को सामने रखता है। दोस्तों, एक मित्र ने यह प्रसंग मुझे WhatsApp पर भेजा था। यह एक बहुत ही मार्मिक और गहरा संवाद है, जिसमें प्यार, परिवार, जिम्मेदारी और समझदारी के कई पहलू सामने आते हैं।

यह कहानी एक प्रसंग के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। इसका उद्देश्य किसी एक पक्ष को हर परिस्थिति में सही या गलत बताना नहीं, बल्कि पाठक को सोचने का अवसर देना है।

ट्रेन में लड़की से हुई मुलाकात

Train के ए.सी. कोच में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा, “हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की पिन है?”

उसने अपने बैग से एक फोन निकाला था और नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है, जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और सीट के नीचे से अपना बैग निकालकर उसके टूल बॉक्स से पिन ढूंढकर लड़की को दे दी।

लड़की ने Thanks कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापस कर दी।

थोड़ी देर बाद वह फिर से इधर-उधर ताकने लगी। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने पूछ लिया, “कोई परेशानी?”

वो बोली, “सिम Start नहीं हो रही है।”

मैंने मोबाइल मांगा। उसने मोबाइल मुझे दे दिया। मैंने मोबाइल देखकर उससे कहा, “सिम अभी Activate नहीं हुई है। थोड़ी देर में हो जाएगी। Active होने के बाद ID Verification होगा। उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी।”

लड़की ने पूछा, “ID Verification क्यों?”

मैंने कहा, “आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है। जिस नाम से ये सिम खरीदी गई है, उसका ब्यौरा पूछा जाएगा। बता देना।”

लड़की बुदबुदाई, “ओह्ह।”

मैंने दिलासा देते हुए कहा, “इसमें कोई परेशानी की कोई बात नहीं।”

वो अपने एक हाथ से दूसरा हाथ दबाती रही। मानो किसी परेशानी में हो। मैंने फिर विनम्रता से कहा, “आपको कहीं कॉल करना हो तो मेरा मोबाइल इस्तेमाल कर लीजिए।”

लड़की ने कहा, “जी फिलहाल नहीं, थैंक्स। लेकिन ये सिम किस नाम से खरीदी गई है, मुझे नहीं पता।”

मैंने कहा, “एक बार एक्टिव होने दीजिए। जिसने आपको सिम दी है, उसी के नाम की होगी।”

उसने कहा, “ओके, कोशिश करते हैं।”

लड़की घर से क्यों भागी थी?

मैंने पूछा, “आपका स्टेशन कहाँ है?”

लड़की ने कहा, “दिल्ली।”

“और आप?” लड़की ने मुझसे पूछा।

मैंने कहा, “दिल्ली ही जा रहा हूँ। एक दिन का काम है। आप दिल्ली में रहती हैं या…?”

लड़की बोली, “नहीं नहीं, दिल्ली में कोई काम नहीं। ना मेरा घर है वहाँ।”

“तो?” मैंने उत्सुकतावश पूछा।

वो बोली, “दरअसल ये दूसरी ट्रेन है, जिसमें आज मैं हूँ। और दिल्ली से तीसरी गाड़ी पकड़नी है। फिर हमेशा के लिए आज़ाद।”

आज़ाद? लेकिन किस तरह की कैद से?

मुझे फिर जिज्ञासा हुई। आखिर किस कैद में थी ये कमसिन, अल्हड़ सी लड़की?

लड़की बोली, “उसी कैद में थी जिसमें हर लड़की होती है। जहाँ घरवाले कहें शादी कर लो, जब जैसा कहें वैसा करो। मैं घर से भाग चुकी हूँ।”

मुझे ताज्जुब हुआ। मगर अपने ताज्जुब को छुपाते हुए मैंने ऐसे ही हंसते हुए पूछा, “अकेली भाग रही हैं आप? आपके साथ कोई नजर नहीं आ रहा?”

वो बोली, “अकेली नहीं, साथ में है कोई।”

“कौन?” मेरे प्रश्न खत्म नहीं हो रहे थे।

“दिल्ली से एक और ट्रेन पकड़ूँगी। फिर अगले स्टेशन पर वो मिलेगा और उसके बाद हम किसी को नहीं मिलेंगे।”

ओह्ह, तो ये प्यार का मामला है।

उसने कहा, “जी।”

लड़की को अपने प्यार पर पूरा भरोसा था

मैंने उसे बताया कि, “मैंने भी लव मैरिज की है।”

ये बात सुनकर वो खुश हुई। बोली, “Wow, कैसे? कब?”

लव मैरिज की बात सुनकर वो मुझसे बात करने में रुचि लेने लगी।

मैंने कहा, “कहाँ, कब, कैसे? वो मैं बाद में बताऊंगा। पहले आप यह बताओ, आपके घर में कौन-कौन है?”

उसने होशियारी बरतते हुए कहा, “वो मैं आपको क्यों बताऊं? मेरे घर में कोई भी हो सकता है। मेरे पापा, माँ, भाई, बहन। या हो सकता है भाई ना हो, सिर्फ बहनें हों। या ये भी हो सकता है कि बहनें ना हों और 2-4 मुस्तंडे भाई हों।”

“मतलब मैं आपका नाम भी नहीं पूछ सकता?” मैंने काउंटर मारा।

वो बोली, “कुछ भी नाम हो सकता है मेरा। टीना, मीना, शबीना, अंजली, कुछ भी।”

बहुत बातूनी लड़की थी वो। थोड़ी इधर-उधर की बातें करने के बाद उसने मुझे टॉफी दी, जैसे छोटे बच्चे देते हैं क्लास में। बोली, “आज मेरा बर्थडे है।”

मैंने उसकी हथेली से टॉफी उठाते हुए बधाई दी और पूछा, “कितने साल की हुई हो?”

वो बोली, “18।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “मतलब आप विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। हालांकि शादी के लिए दोनों पक्षों की कानूनी शर्तें पूरी होना जरूरी है।”

वो हंसी।

कुछ ही देर में काफी Frank हो चुके थे हम दोनों। जैसे बहुत पहले से एक-दूसरे को जानते हों।

मैंने उसे बताया कि, “मेरी उम्र 28 साल है। यानी 10 साल बड़ा हूँ।”

उसने चुटकी लेते हुए कहा, “लग भी रहे हो।”

मैं मुस्कुरा दिया।

मैंने उसे पूछा, “तुम घर से भागकर आई हो। तुम्हारे चेहरे पर चिंता के निशान जरा भी नहीं हैं। इतनी बेफिक्री मैंने पहली बार देखी।”

खुद की तारीफ सुनकर वो खुश हुई। बोली, “मुझे उसने, यानी प्रेमी ने, पहले से ही समझा दिया था कि जब घर से निकलो तो बिल्कुल बिंदास रहना। घरवालों के बारे में बिल्कुल मत सोचना। बिल्कुल अपना Mood खराब मत करना। सिर्फ मेरे और हम दोनों के बारे में सोचना। और मैं वही कर रही हूँ।”

मैंने फिर चुटकी ली। कहा, “उसने तुम्हें मुझ जैसे अनजान मुसाफिरों से दूर रहने की सलाह नहीं दी?”

उसने हंसकर जवाब दिया, “नहीं, शायद वो भूल गया होगा ये बताना।”

मैंने उसके प्रेमी की तारीफ करते हुए कहा, “वैसे तुम्हारा Boyfriend काफी टैलेंटेड है। उसने किस तरह से तुम्हें अकेले घर से रवाना किया, नई सिम और मोबाइल दिया, तीन ट्रेन बदलवाईं ताकि कोई Track ना कर सके। Very Talented Person।”

लड़की ने भी हामी भरी। बोली, “हाँ, बहुत टैलेंटेड है वो। उसके जैसा कोई नहीं।”

बेटी के लिए मैंने अच्छी नौकरी छोड़ दी

मैंने उसे बताया कि, “मेरी शादी को 5 साल हुए हैं। एक बेटी है, 2 साल की। ये देखो उसकी तस्वीर।”

मेरे फोन पर बच्ची की तस्वीर देखकर उसके मुंह से निकल गया, “So Cute।”

मैंने उसे बताया कि, “ये जब पैदा हुई, तब मैं कुवैत में था। एक पेट्रो कम्पनी में बहुत अच्छी Job थी मेरी। बहुत अच्छी Salary थी। फिर कुछ महीनों बाद मैंने वो Job छोड़ दी और अपने ही कस्बे में काम करने लगा।”

लड़की ने पूछा, “Job क्यों छोड़ी?”


भागकर शादी करने जा रही लड़की की कहानी

मैंने कहा, “बच्ची को पहली बार गोद में उठाया तो ऐसा लगा जैसे जन्नत मेरे हाथों में है। 30 दिन की छुट्टी पर घर आया था। वापस जाना था, लेकिन जा ना सका। इधर बच्ची का बचपन खर्च होता रहे, उधर मैं पूरी दुनिया कमा लूं, तब भी घाटे का सौदा है। मेरी दो टके की नौकरी, बचपन उसका लाखों का।”

उसने पूछा, “क्या बीवी बच्चों को साथ नहीं ले जा सकते थे वहाँ?”

मैंने कहा, “काफी Technical मामलों से गुजरकर एक लंबी अवधि के बाद रख सकते हैं। उस वक्त ये मुमकिन नहीं था। मुझे दोनों में से एक को चुनना था। आलीशान रहन-सहन के साथ नौकरी या परिवार। मैंने परिवार चुना, अपनी बेटी को बड़ा होते देखने के लिए। मैं कुवैत वापस गया था, लेकिन अपना इस्तीफा देकर लौट आया।”

लड़की ने कहा, “Very Impressive।”

मैं मुस्कुराकर खिड़की की तरफ देखने लगा।

मैंने भी लव मैरिज की थी, लेकिन भागकर शादी नहीं की

लड़की ने पूछा, “अच्छा, आपने तो लव मैरिज की थी न? फिर आप भागकर कहाँ गए? कैसे रहे और कैसे गुजरा वो वक्त?”

उसके हर सवाल और हर बात में मुझे महसूस हो रहा था कि ये लड़कपन के शिखर पर है। बिल्कुल नासमझ और मासूम।

मैंने उसे बताया कि, “हमने भागकर शादी नहीं की। और ये भी है कि उसके पापा ने मुझे पहली नजर में सख्ती से रिजेक्ट कर दिया था।”

“उन्होंने आपको रिजेक्ट क्यों किया?” लड़की ने पूछा।

मैंने कहा, “रिजेक्ट करने की कुछ भी वजह हो सकती है। मेरी जाति, मेरा धर्म, मेरा कुल, कबीला, घर-परिवार, नस्ल या नक्षत्र। इन्हीं में से कोई काट होती है, जिसके इस्तेमाल से जुड़ते हुए रिश्तों की डोर को काटा जा सकता है।”

“बिल्कुल सही,” लड़की ने सहमति दर्ज कराई और आगे पूछा, “फिर आपने क्या किया?”

मैंने कहा, “मैंने कुछ नहीं किया। उसके पिता ने रिजेक्ट कर दिया। वहीं से मैंने अपने बारे में अलग से सोचना शुरू कर दिया था। खुशबू ने मुझे कहा कि भाग चलते हैं। मेरी Wife का नाम खुशबू है। मैंने दो टूक मना कर दिया।”

वो दो दिन तक लगातार जोर देती रही कि भाग चलते हैं। मैं मना करता रहा। मैंने उसे समझाया कि, “भागने वाले जोड़े में लड़के की इज्जत और शान पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, जबकि लड़की का पूरा कुल धुल जाता है। फिल्मों में नायक ही होता है जो अपनी प्रेमिका को भगा ले जाए और वास्तविक जीवन में भी प्रेमिका को भगाकर शादी करने वाला नायक ही माना जाता है।

लड़की भगाने वाले लड़के के दोस्तों में उस लड़के का दर्जा बुलंद हो जाता है। भगाने वाला लड़का हीरो माना जाता है। लेकिन इसके विपरीत जो लड़की प्रेमी संग भाग रही है, वो कुल्टा कहलाती है। मुहल्ले के लड़के उसे चालू किस्म की कहते हैं। बुराइयों के तमाम शब्दकोष लड़की के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

भागने वाली लड़की आगे चलकर 60 साल की वृद्धा भी हो जाएगी, तब भी जवानी में किए उस कांड का कलंक उसके माथे पर से नहीं मिटता। मैं मानता हूँ कि लड़का-लड़की को तौलने का ये दोहरा मापदंड गलत है, लेकिन समाज में है तो सही। ये नजरिया गलत है, मगर अस्तित्व में है। लोगों के अवचेतन मन में भागने वाली लड़की की भद्दी तस्वीर होती है।

मैं तुम्हारी पीठ को छलनी करके सुखी नहीं रह सकता। तुम्हारे माँ-बाप को दुखी करके अपनी ख्वाहिशें पूरी नहीं कर सकता।”

वो अपने नीचे का होंठ दांतों तले पीसने लगी। उसने पानी की बोतल का ढक्कन खोलकर एक घूंट अंदर सरकाया।

मैंने कहा, “अगर मैं उस दिन उसे भगा ले जाता तो उसकी माँ तो शायद कई दिनों तक पानी भी ना पीती। इसलिए मेरी हिम्मत ना हुई कि ऐसा काम करूँ। मैं जिससे प्रेम करूँ, उसके माँ-बाप मेरे माँ-बाप के समान ही हैं। चाहे शादी ना हो, तो ना हो।”

फिर मेरी शादी कैसे हुई?

कुछ पल के लिए वो सोच में पड़ गई। लेकिन मेरे बारे में और अधिक जानना चाहती थी। उसने पूछा, “फिर आपकी शादी कैसे हुई?”

मैंने बताया कि, “खुशबू की सगाई कहीं और कर दी गई थी। धीरे-धीरे सबकुछ नॉर्मल होने लगा था। खुशबू और उसके मंगेतर की बातें भी होने लगी थीं फोन पर। लेकिन जैसे-जैसे शादी नजदीक आने लगी, उन लोगों की Demand बढ़ने लगी।”

“Demand मतलब?” लड़की ने पूछा।

Demand का एक ही मतलब होता है, दहेज की Demand। परिवार में सबको सोने से बने तोहफे दो। दूल्हे को Luxury Car चाहिए। सास और ननद को Necklace दो, वगैरह-वगैरह। बोले, हमारे यहाँ रीत है।

लड़का भी इस रीत की अदायगी का पक्षधर था। वो सगाई मैंने येन-केन-प्रकारेण तुड़वा डाली। फिर किसी तरह घरवालों को समझा-बुझाकर मैं Front पर आ गया और हमारी शादी हो गई। ये सब किस्मत की बात थी।

लड़की बोली, “चलो अच्छा हुआ आप मिल गए, वरना वो गलत लोगों में फंस जाती।”

मैंने कहा, “जरूरी नहीं कि माँ-पापा का फैसला हमेशा सही हो और ये भी जरूरी नहीं कि प्रेमी जोड़े की पसंद सही हो। दोनों में से कोई भी गलत या सही हो सकता है। मतलब की बात यहाँ ये है कि कौन ज्यादा समझदार और वफादार है।”

क्या माता-पिता का फैसला हमेशा सही होता है?

लड़की ने फिर से पानी का घूंट लिया और मैंने भी। लड़की ने तर्क दिया कि, “हमारा फैसला गलत हो जाए तो कोई बात नहीं। उन्हें ग्लानि नहीं होनी चाहिए।”

मैंने कहा, “फैसला ऐसा हो जो दोनों का हो। औलाद और माता-पिता दोनों की सहमति, वो सबसे सही है। बुरा मत मानना, मैं कहना चाहूंगा कि तुम्हारा फैसला तुम दोनों का है, जिसमें तुम्हारे Parents शामिल नहीं हैं। ना ही तुम्हें इश्क का असली मतलब पता है अभी।”

यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है। हर परिवार की परिस्थिति एक जैसी नहीं होती। माता-पिता का अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन हर माता-पिता का फैसला हमेशा सही हो, यह भी जरूरी नहीं है। इसी तरह प्रेमी जोड़े की पसंद भी हर बार सही हो, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए शादी जैसे फैसले में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि परिवार क्या चाहता है या प्रेमी जोड़ा क्या चाहता है। दोनों पक्षों की सोच, समझ, जिम्मेदारी, भरोसा और भविष्य की योजना भी देखना जरूरी है।

इश्क का सही अर्थ क्या है?

उसने पूछा, “क्या है इश्क का सही अर्थ?”

मैंने कहा, “तुम इश्क में हो। तुम अपना सबकुछ छोड़कर चली आई, ये इश्क है। तुमने अकल का दखल नहीं दिया, ये इश्क है। नफा-नुकसान नहीं सोचा, ये इश्क है।

तुम्हारा दिमाग दुनियादारी के फितूर से बिल्कुल खाली था। उस खाली Space में इश्क Install कर दिया गया। जिसने इश्क को Install किया, वो इश्क में नहीं है। यानी तुम जिसके साथ जा रही हो, वो इश्क में नहीं, बल्कि होशियारी और हीरोगिरी में है।

जो इश्क में होता है, वो इतनी Planning नहीं कर पाता है। तीन ट्रेनें नहीं बदलवा पाता है। उसका दिमाग इतना काम ही नहीं कर पाता।

कोई कहे मैं आशिक हूँ और वो शातिर भी हो, ये नामुमकिन है। मजनू इश्क में पागल हो गया था। लोग पत्थर मारते थे उसे। इश्क में उसकी पहचान तक मिट गई। उसे दुनिया मजनू के नाम से जानती है, जबकि उसका असली नाम कैस था, जो नहीं इस्तेमाल किया जाता। वो शातिर होता तो कैस से मजनू ना बन पाता।

फरहाद ने शीरीं के लिए पहाड़ों को खोदकर नहर निकाल डाली थी और उसी नहर में उसका लहू बहा था। वो इश्क था।

इश्क में कोई फकीर हो गया, कोई जोगी हो गया। किसी मांझी ने पहाड़ तोड़कर रास्ता निकाल लिया। किसी ने अतिरिक्त दिमाग नहीं लगाया।

लालच, वासना और हासिल करने का नाम इश्क नहीं है। इश्क समर्पण करने को कहते हैं, जिसमें इंसान सबसे पहले खुद का समर्पण करता है। जैसे तुमने किया। लेकिन तुम्हारा समर्पण हासिल करने के लिए था। यानी तुम्हारे इश्क में तृष्णा की मिलावट हो गई।”

डॉ. इकबाल का एक शेर है:

“अक्ल अय्यार है सौ भेष बदल लेती है
इश्क बेचारा ना मुल्ला है, ना जाहिद और ना हकीम।”

लड़की को अपने माता-पिता की याद आई

लड़की अचानक से खो सी गई। उसकी खिलखिलाहट और लड़कपन एकदम से खामोशी में बदल गया। मुझे लगा मैं कुछ ज्यादा बोल गया। फिर भी मैंने जारी रखा।

मैंने कहा, “प्यार तुम्हारे पापा तुमसे करते हैं।”

“कुछ दिनों बाद उनका वजन आधा हो जाएगा। तुम्हारी माँ कई दिनों तक खाना नहीं खाएगी, ना पानी पिएगी। जबकि आपको अपने प्रेमी को आजमा कर देख लेना था। ना तो उसकी सेहत पर फर्क पड़ता, ना दिमाग पर। वो अक्लमंद है, अपने लिए अच्छा सोच लेता।”

“आजकल गली-मोहल्ले के हर तीसरे लौंडे-लपाड़े को जो इश्क हो जाता है, वो इश्क नहीं है। वो सिनेमा जैसा कुछ है। एक तरह की स्टंटबाजी, डेरिंग, अलग कुछ करने का फितूर और कुछ नहीं।”

लड़की के चेहरे का रंग बदल गया। ऐसा लग रहा था, वो अब यहाँ नहीं है। उसका दिमाग किसी अतीत में टहलने निकल गया है। मैं अपने फोन को Scroll करने लगा, लेकिन मन की नजर उसकी तरफ ही थी।

लड़की ने आखिर क्या फैसला लिया?

थोड़ी ही देर में उसका और मेरा स्टेशन आ गया। बात कहाँ से निकली थी और कहाँ पहुँच गई।

उसके मोबाइल पर Message Tone बजी। देखा, सिम एक्टिवेट हो चुकी थी। उसने चुपचाप बैग में से आगे का टिकट निकाला और फाड़ दिया।

उसने कहा, “एक Call करना है।”

मैंने मोबाइल दिया। उसने नम्बर Dial करके कहा, “Sorry पापा।”

और सिसक-सिसक कर रोने लगी। सामने से पापा फोन पर बेटी को संभालने की कोशिश करने लगे। उसने कहा, “पापा, आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। मैं घर आ रही हूँ।”

दोनों तरफ से भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा।

हम ट्रेन से उतरे। उसने फिर से पिन मांगी। मैंने पिन दी। उसने मोबाइल से सिम निकालकर तोड़ दी और पिन मुझे वापस कर दी।

क्या भागकर शादी करना हमेशा गलत है?

इस कहानी के अंत में लड़की अपने घर वापस जाने का फैसला करती है। कहानी का मूल संदेश यही है कि शादी जैसे बड़े फैसले को केवल भावनाओं के आधार पर नहीं लेना चाहिए। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हर परिस्थिति में भागकर शादी करना गलत है?

जरूरी नहीं। इस सवाल का जवाब परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है। अगर दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से शादी करना चाहते हैं, तो उनकी पसंद और स्वतंत्रता का भी सम्मान होना चाहिए। साथ ही शादी की कानूनी शर्तें, सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है।

मिसाल के तौर पर, लड़की का 18 साल का होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। भारत में विवाह की न्यूनतम उम्र महिला के लिए 18 वर्ष और पुरुष के लिए 21 वर्ष है। इसलिए दोनों पक्षों की कानूनी स्थिति और विवाह की दूसरी शर्तें भी देखना जरूरी है।

इसके अलावा परिवार शादी के खिलाफ क्यों है, यह भी समझना चाहिए। अगर परिवार की आपत्ति केवल जाति, धर्म या सामाजिक सोच के कारण है, तो उस पर बातचीत की जरूरत हो सकती है। दूसरी ओर, अगर परिवार किसी गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिला रहा है, तो उस बात को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पाठकों की राय भी इस कहानी को एक नया नजरिया देती है

इस कहानी पर एक पाठक ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं कि भागकर शादी करना हर परिस्थिति में गलत है। उनके अनुसार लड़के-लड़की की उम्र, उनका Background, परिवार की स्थिति और परिवार शादी के खिलाफ क्यों है, इन सभी बातों को देखना चाहिए।

यह बात महत्वपूर्ण है। क्योंकि हर परिवार और हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता। किसी एक कहानी के आधार पर सभी प्रेमी जोड़ों या सभी माता-पिता के बारे में एक जैसा फैसला नहीं किया जा सकता।

यही इस कहानी को और दिलचस्प बनाता है। कहानी हमें केवल एक फैसला नहीं देती, बल्कि सोचने के लिए कई सवाल छोड़ती है।

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

शादी केवल दो लोगों के बीच का रिश्ता नहीं है। यह जीवन की बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसलिए प्यार के साथ समझदारी और जिम्मेदारी भी जरूरी है।

माता-पिता का अनुभव महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनका हर फैसला हमेशा सही ही होगा। उसी तरह प्रेमी या प्रेमिका का फैसला भी हर बार सही हो, यह जरूरी नहीं है।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचा जाए। अगर संभव हो तो परिवार से बातचीत की जाए। अपनी बात समझाई जाए और दूसरे पक्ष की बात भी सुनी जाए।

अगर कोई रिश्ता सही है, तो उसमें केवल प्रेम ही नहीं, बल्कि सम्मान, भरोसा, जिम्मेदारी और मुश्किल समय में साथ देने की क्षमता भी होनी चाहिए।

और अगर किसी रिश्ते में दहेज जैसी गलत मांग सामने आती है, तो उसका विरोध करना भी उतना ही जरूरी है। किसी गलत सामाजिक परंपरा को केवल इसलिए स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उसे “हमारे यहाँ की रीत” कहा जाता है।

निष्कर्ष: फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए

भागकर शादी करना सही है या गलत? इसका एक ही जवाब हर परिस्थिति पर लागू नहीं हो सकता। यह लड़के और लड़की की उम्र, सहमति, परिस्थितियों, परिवार की आपत्ति और सबसे बढ़कर दोनों की समझदारी पर निर्भर कर सकता है।

इस कहानी में लड़की ने अंत में घर लौटने का फैसला किया। यह उसका व्यक्तिगत फैसला था। लेकिन हर व्यक्ति की परिस्थिति अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को केवल भावनाओं में बहकर या किसी दूसरे के दबाव में आकर शादी जैसा बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए।

प्यार में केवल किसी को हासिल करना ही जरूरी नहीं है। कभी-कभी प्यार का मतलब दूसरे व्यक्ति के भविष्य, सम्मान और परिवार की भावनाओं के बारे में भी सोचना होता है।

इसलिए शादी से पहले खुद से कुछ सवाल जरूर पूछें। क्या मैं इस रिश्ते की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हूँ? क्या मेरा साथी मुश्किल समय में मेरा साथ देगा? क्या हम आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारियों को समझते हैं? क्या हमने अपने भविष्य के बारे में खुलकर बात की है?

इन सवालों के जवाब जितने स्पष्ट होंगे, फैसला उतना ही समझदारी से लिया जा सकेगा।

आपका क्या विचार है?

दोस्तों, आपको कैसी लगी यह कहानी? क्या आपको लगता है कि भागकर शादी करना गलत कदम है? या फिर कुछ परिस्थितियों में यह सही फैसला भी हो सकता है?

आपके अनुसार शादी के मामले में माता-पिता की सहमति कितनी जरूरी है? अपने विचार नीचे Comment के माध्यम से जरूर बताएं।

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Mahesh Yadav is a software developer and the founder and author of AchhiBaatein.com , He holds a BE degree and an MBA in Operations Research and has extensive experience in software programming and web development. He writes about motivation, inspirational content, Hindi quotes, career, education and other useful topics for Hindi readers.

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5 Comments

  1. Yogendra Singh on Jul 21, 2019 7:46 am

    Ye prasang ek seekh dene wala hai.

    Reply
    • Mahesh Yadav on Jul 22, 2019 11:08 pm

      हाँ योगेन्द्र जी, भागकर शादी करना, एक बहुत बड़ा और गलत कदम हैं, जो अक्सर लडकिया बिना सोचे समझे उठा लेती हैं

      Reply
  2. Saga on Jul 4, 2021 6:18 pm

    Me aap ke vicharo ka aadar karta hu lekin me iss bat se purnataha Sahamat nahi hu ki bhag kar hmshadi karna ek galat bat hai. Q ki sab ki paristiti alag ho sakti hai. Isme sab dekha jata hai. Ladake ladaki ki age, bag ground , konsi family shadi ke khilaf hai , or sabse badi bat q.

    Reply
    • Mahesh Yadav on Jul 4, 2021 9:32 pm

      ठीक हैं, लेकिन बस एक बात याद रखें, जिन्होंने बचपन से अब तक, हर एक पल, हर घडी में आपका ध्यान रखा हो, वो आपका बुरा चाहेंगे? उन्होंने आपसे ज्यादा जिंदगी जियी हैं उन्हें लोगो को पढना आपसे ज्यादा आता हैं, हो सकता हैं कि आप सही हो, लेकिन यह सब उनके सामने रखना भी आपको आना चाहिए

      Reply
  3. saujanya Dubey on Aug 27, 2023 6:04 pm

    great story telling

    Reply

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